छ्पी-अनछपी: होटल टेंडर में लालू-तेजस्वी पर चार्ज फ्रेम, क्या जेडीयू का नाम जनता दल नीतीश होगा?

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। आईआरसीटीसी होटल टेंडर घोटाला मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपितों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय किए गए हैं। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पार्टी का नाम बदलकर जनता दल नीतीश करने का सुझाव दिया है।

और, सोलहवें वित्त आयोग में बिहार को 900 करोड़ रुपये का झटका लगा है।।

पहली ख़बर:

जागरण के अनुसार दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने आइआरसीटीसी होटल टेंडर घोटालें से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपितों के खिलाफ मनी लांड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए हैं। विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने गुरुवार. को आदेश पारित करते हुए कहा कि “इस स्तर पर आपराधिक मंशा को साबित करने के लिए कठोर मानक लागू नहीं होता। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान सामने आए गवाहों और दस्तावेजों के आधार पर ऐसा मजबूत संदेह मौजूद है। मामले में अगली सुनवाई तीन अक्टूबर को होगी। इससे जुड़े सीबीआइ मामले में अदालत पहले ही लालू के खिलाफ भ्रष्टाचार आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी समेत आरोप तय कर चुकी है। राबड़ी और तेजस्वी पर भी आरोप तय किए गए थे।

क्या हैं आरोप

प्रभात खबर के अनुसार सीबीआइ की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि यूपीए-1 सरकार में रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद ने 2004 में आइआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव का काम एक कंपनी को सौंप दिया था. इसके बदले उन्हें पटना में एक बेशकीमती जमीन रिश्वत के तौर पर मिली थी. यह प्रेम चंद गुप्ता (पूर्व केंद्रीय मंत्री) की पत्नी सरला गुप्ता की एक बेनामी कंपनी के जरिए प्राप्त की गयी थी. सीबीआइ की इसी प्राथमिकी के आधार पर इडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था.

संजय झा की मांग- जनता दल यूनाइटेड का नाम जनता दल नेता नीतीश हो

हिन्दुस्तान के अनुसार जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पार्टी का नाम बदलकर जनता दल नीतीश करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि इस पार्टी की आत्मा नीतीश कुमार हैं। उन्होंने जिस प्रकार से इस पार्टी को सींचा है, इसका विस्तार किया है और ताकत दी है, वह अकल्पनीय है। ऐसे में इस पार्टी का नाम उनके नाम पर करना चाहिए। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा से आग्रह किया कि जनता दल यूनाइटेड का नाम अब जनता दल नीतीश किया जाना चाहिए। संजय झा ने खगड़िया तथा बेगूसराय में ‘नीतीश संवाद’ के दौरान यह बात कही। फिर गुरुवार को पटना में भी इसे दुहराया। कहा कि नीतीश ही हमलोगों के सर्वमान्य नेता हैं। वह पार्टी की पूंजी हैं और उन्हीं की विचारधारा पर यह पार्टी चलती है।

सोलहवें वित्त आयोग में बिहार को 900 करोड़ रुपये का झटका

प्रभात ख़बर के अनुसार 16वें वित्त आयोग के तहत अनुदान पाने के लिए निकायों को अब कई नए पैरामीटर से गुजरना होगा, नियमों में बदलाव करते हुए स्वः स्रोत राजस्व व्यवस्था भी लागू की गयी है, जिसके तहत निकाय अपने स्तर से कितना टैक्स वसूल रहा है और उसमें कितनी वृद्धि हुई है, इस आधार पर भी समीक्षा की जायेगी. ऐसे में नयी व्यवस्था के चलते बिहार की हिस्सेदारी करीब 900 करोड़ रुपये घटी है. 15वें वित्त में जहां राज्य के निकायों के लिए 10 हजार करोड़ से ज्यादा का’ अनुदान मिला था, वहीं 16वें वित्त में यह धनराशि 9169 करोड़ रुपये पर सिमट गयी है. अब बजट पाने के लिए निकायों को पहले से कहीं ज्यादा कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा.

कुछ और सुर्खियां:

  • इनकम टैक्स के पटना ऑफिस में तैनात असिस्टेंट कमिश्नर सुनंदा को सीबीआई ने ₹15000 घूस लेते गिरफ्तार किया
  • वैशाली के लालगंज में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे एनएच 139 फोरलेन पर निर्माणाधीन पुल का लॉन्चर गिरा, 12 मजदूर घायल
  • बिहार के युवा वकीलों को सितंबर से मिलेगा हर महीने ₹5000 का स्टाइपेंड
  • आज बंद रहेंगे पूरे भारत के बैंक, मांगें न मानी गईं तो 28 से 30 सितंबर तक भी काम ठप रहेगा
  • चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने 7 साल बाद भारत आएंगे

अनछपी: जहानाबाद के सदर अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे दो किशोरों को पैर पर प्लास्टर चढ़ाने के बदले गत्ता लपेट कर रेफर कर देने का मामला कोई नया नहीं है। इससे पहले भी हमने प्लास्टर के बदले कार्टन से पैर बांधकर रेफर कर देने की खबरें सुनी हैं। इसके अलावा भी अजीबोगरीब ढंग से रेफर करने के मामले सामने आते रहते हैं। जब हम रेफर करने का मामला कहते हैं तो दरअसल यह डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और अपना पिंड छुड़ाने की तकनीक होती है। लेकिन इस बात पर भी सोच विचार होना चाहिए कि क्या यह सिर्फ लापरवाही का मामला होता है या अस्पतालों में सुविधाओं की कमी रहती है और जो दावे सरकार की ओर से किए जाते हैं वह सही नहीं होते हैं। वैसे भी, बिहार में जिन विभागों के बारे में सबसे ज्यादा शिकायत मिलती है उनमें स्वास्थ्य विभाग शामिल है हालांकि सरकार नए-नए अस्पताल बनवाने और नई-नई सुविधा देने का ऐलान भी करती रहती है। पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग में सफाई के लिए ली गई डस्टबिन वगैरह के दाम घोटाले की काफी चर्चा रही है जिसके लिए भारतीय जनता पार्टी से जुड़े पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे का नाम भी लिया जाता रहा है। घपले-घोटाले की बात अगर फिलहाल छोड़ भी दी जाए तो अस्पतालों से रेफर करने के बारे में भी अजीबोगरीब किस्से सामने आते रहे हैं जबकि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से गैर जरूरी तौर पर रेफर करने पर सख्ती करने की बात भी की जाती रही है। इन दावों के बावजूद अगर बिहार में इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं तो इससे यही पता चलता है कि सरकार चला रहे मंत्री और नेता यह समझते हैं कि उनके चुनावी परिणाम पर इन लापरवाहियों का कोई असर पड़ने वाला नहीं है।

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