छ्पी-अनछपी: हैदराबाद में 17 लोग जिंदा जले, प्रोफेसर अली को हरियाणा पुलिस ने गिफ्तार किया

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। आग लगने से हैदराबाद में 17 और महाराष्ट्र में आठ लोगों की मौत हो गई। अशोका यूनिवर्सिटी के राजनीति विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को उनके फेसबुक पोस्ट पर हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश के 300 मजदूर सऊदी अरब में फंस गए हैं। समस्तीपुर में व्यापारी भाइयों पर गोली चलाने वाले दो लुटेरों को भीड़ में पीट-पीट कर मार डाला।

और, जानिएगा कि जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर को प्रशासन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गांव जाने से क्यों रोका।

पहली ख़बर

प्रभात खबर के अनुसार तेलंगाना के हैदराबाद और महाराष्ट्र के सोलापुर में आग लगने से रविवार को कुल 25 लोगों की मौत हो गई। हैदराबाद में ऐतिहासिक चारमीनार के पास स्थित गुलजार हाउस की एक इमारत में रविवार सुबह आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई। इनमें आठ बच्चे शामिल हैं। जान गंवाने वाले सभी लोग सगे संबंधी हैं। आग संभवतः शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। वहीं महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में फैक्ट्री में आग लगने से तीन महिलाओं और एक बच्चे समेत 8 लोगों की मौत हो गई। दोनों घटनाओं पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। हैदराबाद के एक फायर ब्रिगेड अधिकारी ने बताया कि गुलजार हाउस से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता एक संकरी सीढ़ी थी जिससे लोग उस रास्ते से तेजी से बाहर नहीं निकल सके। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर जेवर की दुकान थी और ऊपर एक फ्लैट में लोग रह रहे थे। धुआं फैलने से लोगों का दम घुटने लगा जिससे उनकी मौत हो गई।

प्रोफ़ेसर अली गिरफ्तार

आशोका विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में किए गए सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। महमूदाबाद पर देश की संप्रभुता और अखंडता को खतरे में डालने सहित अन्य आरोपों में दो प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। अली तत्कालीन रियासत महमूदाबाद के दिवंगत राजा के पुत्र हैं। वहीं, विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा, हम जांच में पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग करेंगे।

बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश के 300 मजदूर सऊदी अरब में फंसे

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर के अनुसार सऊदी अरब की एक निजी कंपनी में काम कर रहे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के करीब 300 मजदूर बीते आठ माह से फंसे हुए हैं। गोपालगंज, सीवान, छपरा समेत यूपी और पश्चिम बंगाल के इन मज़दूरों में कुछ ने अपने-अपने परिजनों को वीडियो संदेश भेजकर अपनी तकलीफ बताई है। कहा है कि उन्हें न उचित वेतन मिल रहा है,न ही भोजन। कंपनी ने उन्हें घर लौटने की भी अनुमति नहीं दी है। मजदूरों ने वीडियो जारी कर केंद्र और बिहार सरकार से भी मदद की गुहार लगाई है।

समस्तीपुर में भीड़ के हाथों दो लुटेरे मारे गए

भास्कर के अनुसार समस्तीपुर के दलसिंहसराय थाना क्षेत्र के सरदारगंज-केवटा रोड पर स्थित एक किराना स्टोर पर रविवार शाम अपराधियों ने धावा बोल दिया। बाइक सवार तीन अपराधियों ने दुकान में घुसकर दो व्यवसायी भाइयों को गोली मार दी। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। गोली की आवाज सुनकर स्थानीय लोग जुट गए। भाग रहे अपराधियों को भीड़ ने पकड़ लिया और मौके पर ही दोनों अपराधियों को पीट-पीटकर मार डाला। एक अपराधी बाइक लेकर फरार हो गया। घायल भाइयों का इलाज चल रहा है। एक को सीने में और दूसरे को जांघ में गोली लगी है। समस्तीपुर एसएसपी अशोक मिश्रा ने बताया कि घटना की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। एक दूसरे अखबार के मुताबिक भागने वाला अपराधी सात लाख रुपया लेकर भागा है।

मुख्यमंत्री के गांव जाने से रोके गए प्रशांत किशोर

हिन्दुस्तान के दिल्ली संस्करण में छ्पी खबर के अनुसार जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को प्रशासन ने रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक गांव कल्याण बिगहा में प्रवेश नहीं करने दिया। प्रशांत किशोर अपनी टीम के साथ वहां दलित परिवारों की स्थिति का जायजा लेने जा रहे थे। लेकिन, प्रशासन ने उन्हें रोक दिया। गांव में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती थी। हालांकि गांव में प्रवेश करने को लेकर काफी देर प्रशांत किशोर और प्रशासन के बीच बहस भी हुई। वहीं, प्रशांत ने कहा कि निषेधाज्ञा नहीं लगी है, न ही किसी संवेदनशील माहौल की स्थिति है। फिर भी प्रशासन हमें गांव में पैदल प्रवेश करने से भी रोक रहा है। प्रशासन ने इस पर स्पष्ट किया कि जन सुराज को बिहारशरीफ के श्रम कल्याण केंद्र मैदान में सभा की अनुमति दी गई थी, न कि कल्याण बिगहा में। अनुमंडल पदाधिकारी काजले वैभव ने बताया कि कल्याण बिगहा में किसी प्रकार की भीड़ जुटाने की अनुमति नहीं दी गई थी।

कुछ और सुर्खियां

  • जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने जन सुराज पार्टी का दामन थामा
  • बिहार में 22000 नए आपदा मित्र बनाए जाएंगे, इन्हें मिलता है भत्ता
  • सेना ने स्पष्ट किया, पाकिस्तान के साथ सीजफायर अनिश्चितकाल के लिए है
  • आईएमएफ ने पाकिस्तान को कर्ज देने के साथ 11 कड़ी शर्तें लगाईं
  • भारत में कई हमलों का साजिशकर्ता बताया गया सैफुल्लाह पाकिस्तान में मारा गया

अनछपी: अशोका यूनिवर्सिटी के राजनीतिक विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद की गिरफ्तारी भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले राज्य हरियाणा में हुई है और हालांकि इसे पूरी तरह गैर कानूनी बताया जा रहा है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार के लिए यह अब ‘न्यू नॉर्मल’ है। गिरफ्तारी के साथ यह बात बताना भी जरूरी है कि भारतीय जनता पार्टी के राज वाले दूसरे राज्य मध्य प्रदेश में दो दो मंत्रियों ने निहायत घटिया बयान दिया लेकिन आज तक उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई है। मध्य प्रदेश में सरकार ने तो एक मंत्री को सुप्रीम कोर्ट तक जाने का मौका दिया लेकिन हरियाणा की सरकार ने अदालत का दरवाजा खटखटाने का मौक़ा देने से पहले ही प्रोफेसर अली को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि सोशल मीडिया पर इस गिरफ्तारी का भारी विरोध हुआ और इंडियन एक्सप्रेस में इसके खिलाफ संपादकीय भी लिखा गया लेकिन हिंदी अखबारों ने इसके विरोध में संपादकीय लिखना तो बहुत दूर की बात सही से खबर भी नहीं कवर की। एक अखबार ने आधे अधूरे मन से गिरफ्तारी की खबर तो दी लेकिन इसके विरोध में कितने लोगों ने बयान जारी किया, इसमें इसका कोई जिक्र नहीं है। एक तरफ सरकार एकता की बात करती है और दूसरी तरफ एक मुस्लिम प्रोफेसर को उसके बिल्कुल तार्किक बयान के लिए गिरफ्तार करती है जबकि बदजुबान मंत्रियों को छुट्टा छोड़ दिया जाता है। प्रोफ़ेसर अली खान की एक पहचान यह भी है कि वह समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रह चुके हैं। बहरहाल हरियाणा की सरकार ने उन्हें इसलिए निशाने पर लिया क्योंकि अशोका यूनिवर्सिटी हरियाणा के सोनीपत में है और उसके पास सरकारी एजेंसियां हैं जिससे वह उन्हें टारगेट कर सके। प्रोफेसर अली खान ने लिखा था कि सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताने के लिए जिन दो महिला सैन्य अधिकारियों को चुना था अगर उसका संदेश हकीकत में नहीं बदलता तो इसे पाखंड माना जाएगा। उनका कहना था कि इतने सारे दक्षिणपंथी टिप्पणीकार कर्नल सोफिया कुरैशी की तारीफ कर रहे हैं, “यह देखकर मैं खुश हूं। लेकिन यह लोग शायद इसी तरह से उनके लिए भी आवाज उठा सकते हैं जो लोग मॉब लिंचिंग के शिकार हैं, जिनके घर मनमाने ढंग से बुलडोजर से ढाह दिए गए और जो भारतीय जनता पार्टी के नफरत फैलाने के शिकार हुए हैं।” अच्छी बात यह है कि प्रोफेसर खान के लिए बहुत सारे लोग आवाज उठा रहे हैं और उम्मीद है कि उन्हें अदालत से जल्द ही इंसाफ मिलेगा।

 

 833 total views

Share Now