छ्पी-अनछपी: बराबर पहाड़ी पर सोमवारी की भीड़ में भगदड़ से 8 की मौत, वक़्फ़ की ज़मीन का सर्वे होगा
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जहानाबाद की बराबर पहाड़ी पर सोमवारी की भीड़ में भगदड़ मचने से आठ लोगों की मौत हो गई। बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमां खान ने कहा है कि वक़्फ़ की संपत्ति का सर्वे कराकर जांच की जाएगी। उच्च शिक्षण संस्थानों की ताजा यूनिवर्सिटी रैंकिंग में आईआईएससी बेंगलुरु को पहला, जेएनयू को दूसरा और जामिया मिल्लिया इस्लामिया को तीसरा स्थान मिला है। बिहार के 173 कॉलेजों में प्रिंसिपल की नियुक्ति अगले माह होगी।
हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर के अनुसार जहानाबाद जिले के ऐतिहासिक बराबर पहाड़ी पर स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ धाम मंदिर के पास सीढ़ियों पर रविवार की देर रात भगदड़ मचने से आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई। मृतकों में सात महिलाएं हैं। 30 श्रद्धालु घायल हुए हैं, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। घटना की जांच के लिए जिला प्रशासन ने चार सदस्यीय टीम गठित की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चौथी सोमवारी को लेकर मंदिर के पास काफी भीड़ थी। इसी दौरान कुछ युवा श्रद्धालु और स्थानीय दुकानदारों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई और फिर मारपीट होने लगी। इससे वहां भगदड़ मच गयी। लोग बचने के लिए भागने लगे। इस बीच महिलाएं और पुरुष सीढ़ियों पर गिर गए। गिरे हुए लोगों को कुछ लोग रौंदते हुए ऊपर-नीचे की ओर भागने लगे। बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य द्वार तक आने-जाने के लिए एक ही मुख्य रास्ता है।
वक़्फ़ बोर्ड की ज़मीन का सर्वे होगा
जागरण के अनुसार बिहार में वक़्फ़ बोर्ड की जमीन का सर्वे करा कर जांच भी कराई जाएगी। अगर किसी जिले में वक़्फ़ बोर्ड की जमीन अवैध तरीके से दलालों या माफिया द्वारा बेची गई है तो उसकी जांच कर कर सख्त कार्रवाई होगी। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमां खान ने पत्रकारों के सवाल पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य में वक्फ संपत्तियों की अवैध खरीद-बिक्री की जांच होगी। विभाग ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू की है। वक्फ बोर्ड की जमीन पर कब्जा करने व वहां गलत तरीके से व्यवसाय करने वालों को चिह्नित किया जायेगा और कार्रवाई होगी। वक्फ ट्रिब्यूनल में इसकी अपील की जा सकती है। शिया एवं सुन्नी वक्फ बोर्ड दोनों की संपत्तियों के दुरुपयोग की जांच होगी। इस अवसर पर बिहार राज्य सुननी वक़्फ़ बोर्ड के सीईओ खुर्शीद अहमद सिद्दीकी ने पत्रकारों के सवाल पर बताया कि वक़्फ़ बोर्ड की जमीन पर कब्जे की शिकायतें मिली हैं। जमीन को कब्जा मुक्त करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
आईआईएससी टॉप यूनिवर्सिटी
भास्कर के अनुसार देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में बेहतर प्रदर्शन करते हुए आईआईटी मद्रास ने लगातार छठे साल ओवरऑल कैटेगरी में पहला स्थान प्राप्त किया। भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु ने इस कैटेगरी में दूसरा स्थान हासिल किया जबकि यूनिवर्सिटी कैटेगरी में वह पहले स्थान पर है। यूनिवर्सिटी कैटेगरी में जेएनयू दूसरे स्थान पर और जामिया मिलिया इस्लामिया तीसरे स्थान पर है जबकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को आठवां स्थान और जादवपुर यूनिवर्सिटी को नवां स्थान मिला है। मैनेजमेंट कैटेगरी में आईआईएम, अहमदाबाद पहले नंबर पर है और कॉलेज कैटेगरी में हिंदू कॉलेज (दिल्ली यूनिवर्सिटी) पहले स्थान पर है। लॉ कैटेगरी में नेशनल लॉ स्कूल आफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु पहले स्थान पर है। आईआईटी पटना 34 वें स्थान पर और एनआईटी पटना 55वें स्थान पर है।
प्रिंसिपल की नियुक्ति
भास्कर के अनुसार बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के अंगीभूत कॉलेजों में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति अगले माह होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने आवेदनों की स्क्रूटिनी शुरू कर दी है। 15 अगस्त के बाद इंटरव्यू शुरू होगा। सितंबर में 173 कॉलेजों में नियमित प्राचार्य की नियुक्ति हो जाएगी। आयोग ने नियुक्ति के लिए 15 जुलाई तक आवेदन लिया था
बांग्लादेश सरकार ने हिंदुओं से माफी मांगी
जागरण की दूसरी सबसे बड़ी खबर है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमले और मंदिरों में तोड़फोड़ के लिए सरकार ने माफी मांगी है। गृह मंत्रालय के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल रिटायर्ड मोहम्मद सखावत हुसैन ने कहा कि पिछले हफ्ते हुई हिंसा में बहुत से स्थान पर हिंदुओं पर हमले हुए उसके लिए सरकार को खेद है। इस हिंसा में जिन लोगों को नुकसान हुआ और जो मंदिर तोड़े गए या जलाए गए हैं उनकी क्षतिपूर्ति और निर्माण के लिए सरकार आर्थिक सहायता देगी। उन्होंने भास्कर से एक इंटरव्यू में कहा कि भारत हमारा पड़ोसी देश है, वह हमारी मदद करे और हमारे मामलों में दखल ना दे। इस बीच अंतरिम प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस मंगलवार को हिंसा से पीड़ित समुदायों के प्रमुख लोगों से मिलेंगे।
इमारत शरिया फाइलेरिया की दवा खिलाने के अभियान में साथ देगी
बिहार के 13 जिलों में 10 अगस्त से शुरू हुए फाइलेरिया रोधी दवा अभियान को इमारत-ए-शरिया का भी साथ मिला है। इमारत-ए-शरिया के मौलाना सज्जाद मेमोरियल हॉस्पीटल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस निसार अहमद ने पत्र जारी कर अभियान में शामिल जिलों में मस्जिद के इमाम और मदरसों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है। डॉ .अहमद ने कहा कि फाइलेरिया लाइलाज बीमारी है। सामान्य भाषा में इसे हाथीपांव भी कहते हैं। सर्वजन दवा सेवन अभियान को इंसानियत का हिमायती बताते हुए उन्होंने कहा कि मस्जिद में आने वाले नमाजियों, मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों, शुक्रवार को होने वाली नमाज में और माइकिंग से अभियान के बारे में बताएं।
कुछ और सुर्खियां
- बिहार के 13 जिलों में अगले दो दिनों में भारी बारिश का अलर्ट
- मध्य प्रदेश के इटारसी स्टेशन पर सहरसा स्पेशल ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतरे
- कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा, रिटायरमेंट के बाद नहीं बदल सकते जन्म तिथि
- अनुसूचित जाति की सूची से तांती-तंतवा बाहर, अब ईबीसी में रहेगी
- बिहार में 770 डेंटिस्ट की नियुक्ति होगी
- दरभंगा एम्स के लिए 150 एकड़ जमीन केंद्र को सौंपी गई
- कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर की हत्या के विरोध में देश भर में हड़ताल पर रहे डॉक्टर
अनछपी: बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़कर भागने की खबर के बाद वहां हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमले की खबर भी आती रही। इन खबरों में कई झूठी खबरों में शामिल थीं लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सारी खबरें झूठी थीं। ध्यान देने की बात यह है कि जहां एक ओर बांग्लादेश की हिंदू समुदाय पर हमले की खबर आ रही थी वहीं यह खबर भी आ रही थी की बहुत से लोगों ने उन्हें और उनके धर्मस्थलों को बचाने के लिए रक्षा कवच का रूप धारण कर लिया। अब यह खबर भी आई है कि बांग्लादेश का गृह मंत्रालय संभाल रहे सखावत हुसैन ने इन हमलों के लिए माफी मांगी है और यह बात स्वीकार की है कि बहुतसंख्यक समाज कई जगहों पर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की सुरक्षा करने में फेल रहा। यह एक ऐसी बात है जो बांग्लादेश को भारत से एक अलग रुतबा देता है। बांग्लादेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस बात को लेकर चिंता और ग्लानि है कि वहां के अल्पसंख्यकों पर हमले हुए। सखावत हुसैन का यह मानना कि बहुसंख्यक समाज की जिम्मेदारी थी कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करते, एक बेहतरीन सामाजिक संदेश देता है। यानी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पुलिस की नहीं बल्कि बहुसंख्यक समाज के आम लोगों की भी है। अल्पसंख्यकों के बारे में हर देश में इसी तरह की सोच होनी चाहिए लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि भारत में ऐसा नहीं देखा जाता और जो लोग अल्पसंख्यकों को हमले का शिकार बनाते हैं उन्हें माले पहनाने की खबर सामने आती है। बिलकिस बानो का मामला कौन भूल सकता है जिनके रेप के दोषियों को सरकार के निर्णय पर जेल से छूटने पर माले पहनाए गए थे। भारत में मुसलमानों की मॉब लिंचिंग की इतनी सारी खबरें आई हैं लेकिन शायद ही कभी प्रधानमंत्री या किसी अन्य मंत्री या भाजपा के सांसद ने इस पर अफसोस जताया हो, माफी मांगना तो दूर की बात है। बरहाल, बांग्लादेश के बहुसंख्यक समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और देश की सरकार भी उन्हें आर्थिक सहायता करे जिनका नुकसान हुआ है।
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