छपी-अनछपी: बिहार के नक्सलमुक्त होने का दावा, क्या मंत्री अशोक की डिग्री नक़ली है?

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पुलिस मुख्यालय ने बिहार के पूरी तरह नक्सल मुक्त होने का दावा किया है। विधान परिषद में मंत्री अशोक चौधरी और राजद के सुनील कुमार सिंह ज्ञान और डिग्री को लेकर आपस में भिड़ गये। अमेरिका ने 50 से अधिक लड़ाकू विमान खाड़ी क्षेत्र में भेजे हैं जिसे ईरान से तनाव के साथ जोड़कर देखा जा रहा।

और, जानिएगा कि चुनाव के वक़्त शुरू पटना मेट्रो पर हर दिन लाखों का खर्च लेकिन आमदनी केवल कुछ हजार।

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार तीन लाख के इनामी नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम के बुधवार को मुंगेर में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय ने बिहार के पूरी तरह नक्सल मुक्त होने का दावा किया है। पुलिस मुख्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी घोषणा की है। सुरेश कोड़ा मुंगेर इलाके में सक्रिय अंतिम हथियारबंद नक्सल दस्ते का नेतृत्व कर रहा था। अब कोई भी हथियारबंद नक्सल दस्ता बिहार में शेष नहीं बचा है। 2012 में राज्य के 22 जिले नक्सल प्रभावित हुआ करते थे। आत्मसमर्पण करने वाला नक्सली सुरेश कोड़ा स्पेशल एरिया कमेटी का सक्रिय सदस्य है और पिछले 25 वर्षों से फरार था।

क्या मंत्री अशोक चौधरी की डिग्री नकली है?

प्रभात खबर के अनुसार विधान परिषद में बुधवार को मंत्री अशोक चौधरी और राजद के सुनील कुमार सिंह ज्ञान और डिग्री को लेकर आपस में भिड़ गये. मामला महेश्वर सिंह के तारांकित प्रश्न के दौरान धान खरीद से जुड़े सवाल पर जब सुनील सिंह ने एक पूरक पूछा, तो मंत्री अशोक चौधरी ने सुनील सिंह के ज्ञान पर टिप्पणी कर दी, तो सुनील सिंह ने कहा कि नकली डिग्री कैसे मिली है, हमको पता है. बस इतना कहते ही मंत्री अशोक चौधरी भड़क गये और कहा कि हम चैलेंज करते हैं कि डिग्री को नकली साबित करें, नहीं तो सदस्य अभी इस्तीफा दें. सुनील सिंह ने कहा कि कि पहले मंत्री ये साबित करें कि पूरक पूछने वाले को ज्ञान की कमी है. उन्होंने कहा कि उनके पास पूरा चिट्ठा है कि अशोक कुमार कौन है. इस पर मंत्री ने कहा कि आप सदन को बताइए ना. हम चैलेंज करते है. सभापति ने निर्देश दिया कि इन टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाये.

ईरान पर नज़र: ट्रंप ने 50 फाइटर खाड़ी भेजे

भास्कर के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच जिनेवा में चल रही परमाणु वार्ता के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मध्य पूर्व में सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों में अमेरिका ने 50 से अधिक एफ-35, एफ-22 और एफ-16 लड़ाकू विमान क्षेत्र में भेजे हैं। इससे पहले ट्रम्प यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड सहित दूसरा विमानवाहक पोत समूह भी भेज चुके हैं। ओमान की मध्यस्थता में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुई वार्ता के बाद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसे ‘गंभीर और रचनात्मक’ बताया और कहा कि दोनों पक्ष संभावित समझौते के ‘मार्गदर्शक सिद्धांतों’ पर व्यापक सहमति तक पहुंचे हैं तथा अब मसौदा तैयार होगा। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने अब तक ट्रम्प की सभी ‘रेड लाइन्स’, खासकर परमाणु हथियार न बनाने की शर्त, स्वीकार नहीं की है।

महाराष्ट्र में मुस्लिम रिज़र्वेशन रद्द

महाराष्ट्र सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में मुस्लिम समुदाय के लोगों को दिए जाने वाले पांच प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया है। इस संबंध में मंगलवार को शासकीय आदेश (जीआर) जारी किया गया। इस निर्णय के बाद विपक्ष ने भाजपा नीत महायुति सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सरकार को अल्पसंख्यक विरोध करार दिया है।

झूठे दावे के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी एआई समिट से निकाली गई

हिन्दुस्तान के अनुसार चीनी रोबोट विवाद के बाद बुधवार को ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी से भारत मंडपम का पवेलियन खाली करा लिया गया। वहीं विश्वविद्यालय ने विवाद पर माफी मांगते हुए कहा कि स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधि को गलत जानकारी थी। समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक रोबोडॉग पेश किया था। आरोप है कि रोबोट चीनी कंपनी यूनिट्री का है, जिसे यूनिवर्सिटी ने खरीदकर समिट में अपना बताकर पेश किया। इसको लेकर सोशल मीडिया पर मंगलवार सुबह से काफी विवाद हुआ। यहां तक की चीन के प्रसिद्ध सोशल मीडिया हैंडलर ने भी पोस्ट कर मजाक उड़ाया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई समिट को लेकर सवाल उठ रहे थे। ऐसी स्थिति में बुधवार सुबह ही यूनिवर्सिटी को पवेलियन खाली करने का निर्देश दिया गया।

पटना मेट्रो: खर्च लाखों में, आमदनी फिसड्डी

भास्कर के अनुसार पटना में अभी मेट्रो का परिचालन पाटलिपुत्र बस टर्मिनल से भूतनाथ तक 3.45 किमी में हो रहा है। 6 अक्टूबर 2025 को परिचालन की शुरुआत हुई थी। अभी तीन बोगी वाली ट्रेन चल रही है। बुधवार को दोपहर 1 बजे दैनिक भास्कर की टीम मेट्रो के भूतनाथ स्टेशन पर पहुंची। यहां से महज 13 यात्रियों ने सफर किया। 10 मिनट में आईएसबीटी स्टेशन पहुंची। वहीं, आईएसबीटी से 16 यात्री भूतनाथ आए। एक बोगी में ही सभी यात्री बैठे। दो बोगियां खाली रहीं। प्रति यात्री किराया 15 रुपए है। इस हिसाब से भूतनाथ से जाने के दौरान 13 यात्रियों से 195 रुपए, जबकि आईएसबीटी से लौटने के दौरान 16 यात्रियों से 240 रुपए किराया मिला। मेट्रो प्रशासन के मुताबिक, शुरुआत में रोज 8-9 हजार यात्री सफर करते थे। अभी रोज औसतन 900 यात्री सफर कर रहे हैं। मेट्रो ट्रेन के परिचालन और रखरखाव पर रोज का खर्च 18.66 लाख है, जबकि औसतन 900 यात्रियों के हिसाब से आमदनी महज 13,500 रुपए की हो रही है। मार्च 2028 तक दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को परिचालन का जिम्मा दिया गया है। वह 32 माह के परिचालन और रखरखाव पर खर्च 179.37 करोड़ पटना मेट्रो से लेगी। मेट्रो का परिचालन सुबह 8 से रात 8 बजे तक होता है। प्रतिदिन 24 फेरा (अप और डाउन) चलती है।

कुछ और सुर्खियां:

  • पटना जिले के बिक्रम में अनियंत्रित कार सोन नहर में गिरी, पति-पत्नी की डूबने से गई जान
  • 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 2 साल पर होने वाले चुनाव के लिए 16 मार्च को वोटिंग होगी
  • केस डायरी में मदद के नाम पर 15 हज़ार रुपये घूस लेते मुज़फ्फरपुर सदर थाना के दारोगा भास्कर मिश्रा गिरफ्तार
  • सारण जिले के दरियापुर में गैस कटर से एटीएम काटकर 24.65 लख रुपए ले गए चोर

अनछपी: गलगोटिया विश्वविद्यालय ने जिस तरह एआई समिट में चीन के रोबोडॉग को अपना रिसर्च बताकर पेश किया और जिस तरह पूरी दुनिया में भारत की किरकिरी हुई उससे सबक लेने की बहुत कम लोगों को उम्मीद है। इसकी वजह यह है कि जिस देश में प्रधानमंत्री की डिग्री का मामला विवाद का विषय हो और कोर्ट के हस्तक्षेप की वजह से विश्वविद्यालय इसके बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा हो, वहां इस तरह की घटना से कोई क्या सबक ले सकता है? बिहार के मंत्री अशोक चौधरी की पीएच-डी की डिग्री और उनके असिस्टेंट प्रोफेसर बनने को लेकर जो विवाद है, वह भी इसी सिलसिले की एक कड़ी है। दरअसल पिछले कई वर्षों से भारत का गलगोटियाकरण हो रहा है और तेजी से हो रहा है। लोग कह रहे हैं कि सरकारी विश्वविद्यालय में ऐसा नहीं हुआ है और यह प्राइवेट यूनिवर्सिटी का मामला है लेकिन वह दिन दूर नहीं जब भारत के नामी सरकारी विश्वविद्यालयों के बारे में भी ऐसी शिकायतें मिलने शुरू हो जाएंगी। दरअसल सरकारी विश्वविद्यालयों में जो नियुक्तियां हो रही हैं, वह पूरी तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पसंद को और सिफारिश को देखकर किया जा रहा है। जो योग्य शिक्षक हैं और मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ है उनको पूरी तरह साइडलाइन किया जा रहा है। जब इस तरह नियुक्तियों में योग्यता का ध्यान ना रखा जाएगा और केवल सरकार चला रही पार्टी के समर्थकों से भर दिया जाएगा तो विश्वविद्यालय का वही हाल होना है जिसके लिए अभी गलगोटिया चर्चा में है। यह बात भी ध्यान देने की है कि गलगोटिया ही इस देश की पसंद है और उसे ही तरक्की की निशानी माना जा रहा है।

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