छ्पी-अनछपी: कई पाकिस्तानी चैनल बैन-बीबीसी को चेतावनी, 1024 असिस्टेंट इंजीनियरों की वैकेंसी

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पाकिस्तान के 16 यूट्यूब चैनल पर पाबंदी लगाई गई है और बीबीसी को चेतावनी जारी की गई है। बिहार में 1024 असिस्टेंट इंजीनियरों की वैकेंसी निकली है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की शरिया कोर्ट की कानूनी मान्यता नहीं है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा है कि बिहार एनडीए में सीट बंटवारे पर जून-जुलाई में फैसला होगा। जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष बने नीतीश कुमार जबकि जनरल सेक्रेटरी का पद मुंतेहा को मिला।

और, जानिएगा कि भारत सेना पर पाकिस्तान से कितना गुना ज्यादा खर्च करता है।

पहली खबर

हिन्दुस्तान के अनुसार पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर एक और कड़ा प्रहार किया है। भारत विरोधी अभियान चला रहे 16 पाक यू-ट्यूब चैनलों को बंद कर दिया गया है। वहीं, हमले में शामिल आतंकियों को ‘चरमपंथी’ लिखने पर भारत सरकार ने बीबीसी से कड़ी आपत्ति जताई है। गृह मंत्रालय के सिफारिश के आधार पर सोमवार को लिए गए फैसले के अनुसार, ये यू-ट्यूब चैनल भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों के खिलाफ भड़काऊ और संवेदनशील सामग्री, झूठे-भ्रामक बयान और गलत सूचना प्रसारित कर रहे थे।

इन चैनलों पर प्रतिबंध : जिन पाकिस्तानी यू-ट्यूब चैनलों को बंद किया गया उनमें द डॉन, जियो न्यूज, समा टीवी, एआरवाई न्यूज, बोल न्यूज, रफ्तार, द पाकिस्तान रिफरेंस, समा स्पोर्ट्स, जीएनएन, उजेर क्रिकेट्र, उमर चीमा एक्सक्लूसिव, आसमा शिराजी, मुनीब फारुक, सुनो न्यूज, इरशाद भाटी और राजी नामा शामिल है। इन चैनलों में से अधिकतर पाकिस्तान के समाचार चैनल हैं। इन चैनलों के 6.3 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर थे।

असिस्टेंट इंजीनियरों की 1024 वैकेंसी

प्रभात खबर के अनुसार बीपीएससी ने राज्य के विभिन्न विभागों में सहायक अभियंता (सिविल, यांत्रिक और विद्युत) के कुल 1024 पदों पर भारती की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे संबंधित विज्ञापन आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया है। योग्य अभ्यर्थी जल्द ही ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। यह वैकेंसी बिहार में इंजीनियरिंग ग्रैजुएट्स के लिए सरकारी नौकरी पाने का बेहतरीन अवसर लेकर आई है। इनमें 984 पद सिविल इंजीनियर 36 पद मैकेनिकल इंजीनियर और चार पद इलेक्ट्रिक इंजीनियर के हैं। आवेदन की प्रक्रिया 30 अप्रैल से शुरू होगी और इसकी अंतिम तिथि 28 मई है।

शरिया कोर्ट की कानूनी मान्यता नहीं: सुप्रीम कोर्ट

हिन्दुस्तान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि शरिया अदालत, काजी अदालत या काजियात अदालत यानी दारुल कजा आदि भले ही किसी भी नाम से बुलाया जाए, कानून की नजर में उनकी कोई मान्यता नहीं है। जस्टिस सुधांशु धूलिया और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने यह फैसला देते हुए कहा कि ऐसी अदालतों द्वारा जारी कोई भी निर्देश किसी पर बाध्यकारी नहीं हो सकता। पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक मुस्लिम महिला की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया। पीठ ने शीर्ष अदालत द्वारा 2014 में विश्व लोचन मदन बनाम भारत सरकार के मामले में पारित अपने फैसले का हवाला देते हए कहा कि शरिया अदालत आदि को किसी भी नाम से पुकारा जाए, कानूनी तौर पर इसकी कोई मान्यता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे निकायों द्वारा पारित फैसला या निर्देश कानून की नजर में तभी टिकेगा जब प्रभावित पक्ष मर्जी से उसे स्वीकार करे और उक्त निर्देश अन्य कानून के साथ संघर्ष न करे।

बिहार एनडीए में सीट बंटवारा पर बात जून-जुलाई में

जागरण ने लिखा है कि हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के संरक्षक व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सोमवार को नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। हालांकि उन्होंने मुलाकात को औपचारिक बताया मगर बिहार चुनाव को देखते हुए इस अहम माना जा रहा है। बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मांझी ने कहा कि इस बैठक में सीट बंटवारे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। इसको लेकर 5 से 6 दिन पहले ही सांसद संजय जयसवाल से हमारी बातचीत हो चुकी है। इसमें बताया गया है कि जून के आखिरी सप्ताह या जुलाई में एनडीए में सीट बंटवारे पर चर्चा होगी जिसमें सभी घटक दल बैठकर विचार विमर्श करेंगे।

जेएनयू स्टूडेंट यूनियन: नीतीश अध्यक्ष, मुन्तेहा जनरल सेक्रेटरी

जवाहरलाल नेहरू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष पद पर आइसा के उम्मीदवार अररिया के रहने वाले नीतीश कुमार चुने गए हैं। यह लगातार दूसरी बार है कि बिहार के किसी छात्र ने जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है। वहीं जनरल सेक्रेटरी के पद पर विजयी डीएसएफ़ की उम्मीदवार मुन्तेहा फातिमा पटना के सब्जी बाग की निवासी हैं। वह इस समय स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज के सेंटर फॉर वेस्ट एशियन स्टडीज में पीएचडी कर रही हैं। नीतीश कुमार जेएनयू के स्कूल आफ सोशल साइंसेज के सेंटर फॉर पॉलीटिकल स्टडीज में पीएचडी कर रहे हैं।

भारत का रक्षा खर्च पाकिस्तान से नौ गुना

जागरण के अनुसार पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच स्वीडन के प्रमुख थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा सोमवार को एक रिपोर्ट जारी की गई। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत का सैन्य खर्च पाकिस्तान के खर्चे से करीब 9 गुना अधिक था। रिपोर्ट के अनुसार विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति भारत का सैन्य खर्च 1.6% बढ़कर 86.5 अरब डॉलर हो गया जबकि पाकिस्तान ने 10.2 अरब डॉलर खर्च किए। रिपोर्ट में कहा गया है की सर्वाधिक सैन्य खर्च वाले शीर्ष पांच देशों अमेरिका चीन रूस जर्मनी और भारत का खर्च कुल वैश्विक सैन्य खर्च का 60% है।

कुछ और सुर्खियां:

  • चर्चित आईएएस अधिकारी केके पाठक केंद्रीय कैबिनेट के विशेष सचिव बनाए गए
  • पटना में आज बादल छाए रहेंगे, 15 जिलों में बिजली गिरने और आंधी की चेतावनी
  • भारत में फ्रांस से नौसेना के लिए 26 राफेल एम विमान खरीदने का समझौता किया
  • पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा, कभी भी हमला कर सकता है भारत
  • आईपीएल में बिहार के वैभव सूर्यवंशी ने दूसरा सबसे तेज शतक जड़ा
  • बिहार के सरकारी स्कूलों में 2 में तक बाटेंगे किताबें
  • बक्सर से मोकामा तक जेपी गंगा पथ का विस्तार होगा

अनछपी: बात 27 जनवरी 2005 की है जब उस समय पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने मुजफ्फरपुर में भावुक होकर पूछा था, कहां है मेरा किसलय? किसलय का अपहरण हुआ था और भारतीय जनता पार्टी और नीतीश कुमार ने इसका राजनीतिक लाभ लेने की पूरी कोशिश की थी। किसलय और वाजपेयी की याद इसलिए आई कि आज एक अखबार में अंदर के पन्ने पर एक खबर छपी है जिसका शीर्षक है: अगवा पांच वर्षीय अमन की हत्या, हत्यारे ने शव पर केमिकल डाला। पांच साल के अमन कुमार की लाश सड़ी गली हालत में मुजफ्फरपुर के औराई थाना क्षेत्र के सरहंचिया गांव में मिली। अमन के पिता शंभू सहनी के अनुसार उनके बेटे का अपहरण 23 अप्रैल की शाम में कर लिया गया था। इस खबर की चर्चा का मकसद यह बताना है कि बिहार में अपहरण जैसे जघन्य अपराध अब भी होते हैं लेकिन इसकी चर्चा नहीं होती और विपक्ष ऐसे मामले को जनता के बीच ले जाने में नाकाम रहता है। अखबारों और मीडिया के दूसरे प्लेटफार्म पर भी ऐसी खबरें दब जाती हैं। इसी खबर को लें, तो मुजफ्फरपुर के अखबारों ने तो इसे जगह दी है लेकिन पटना के अक्सर अखबारों ने इसे नजरअंदाज कर दिया है। इससे एक बार फिर यह बात समझने में आसानी होती है कि 2005 से पहले और 2005 के बाद अपराध की कवरेज में मीडिया ने अलग-अलग नीति अपनाई है। यह आरोप यूं ही नहीं लगता कि 2005 के बाद मीडिया सरकार के भारी दबाव में है और अक्सर अपराध की खबरों को छिपाकर छापा जाता है। पहले राज्य भर के अपराध की खबर पटना में भी प्रमुखता से छापी जाती थी लेकिन अब संबंधित जिलों में छाप कर पटना में इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है। हो सकता है कि सरकार चलाने वाली पार्टी अपहरण और हत्या की इस जघन्य ने वारदात के लिए भी कोई तर्क ढूंढ ले, लेकिन लोगों को समझना होगा कि यह समस्या तो है। हो सकता है सरकार की पार्टी यह कह दे कि यह फिरौती के लिए अपहरण नहीं है लेकिन कारण चाहे जो हो अपहरण और हत्या को अपराध ही माना जाएगा और सरकार को इसे रोकने में नाकाम माना जाएगा।

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