छ्पी-अनछपी: नायडू की पार्टी ने वोटर वेरीफिकेशन पर सवाल उठाए, टेस्ला कार ₹60 लाख से शुरू

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी ने बिहार में चल रहे विशेष मतदाता पुनरीक्षण एसआईआर के बीच इसपर सवाल उठाए हैं मगर अक्सर अखबारों ने इसे नजरअंदाज किया है। इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली अमेरिकी कंपनी टेस्ला ने मुंबई में अपनी कार उतारी है जिसकी शुरुआती कीमत ₹60 लाख है। चुनाव आयोग ने कहा है कि वोटर लिस्ट से किसी का नाम काटने से पहले उन्हें नोटिस भेजा जाएगा।

और, जानिएगा कि ओवैसी की पार्टी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका क्यों खारिज हुई।

पहली खबर

जागरण के अनुसार केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए में भाजपा के बाद सबसे बड़े दल तेलुगु देशम पार्टी ने निर्वाचन आयोग से आंध्र प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए पर्याप्त समय देने का आग्रह किया है। टीडीपी का कहना है कि इसे किसी बड़े चुनाव के 6 महीने के भीतर नहीं कराया जाना चाहिए और नवीनतम मतदाता सूची में पहले से शामिल मतदाताओं को अपनी पहचान पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। टीडीपी द्वारा निर्वाचन आयोग को दिए सुझाव  बिहार में चल रहे एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच आए हैं। हिन्दुस्तान के अनुसार टीडीपी ने तर्क दिया कि एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं होने से आम लोगों में भय और अनिश्चितता का माहौल बन रहा है। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां लोग पहले से ही एनआरसी और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) जैसे मुद्दों को लेकर संवेदनशील हैं। टीडीपी ने सवाल उठाया है कि एसआईआर की प्रक्रिया का दायरा स्पष्ट क्यों नहीं है और इसे नागरिकता से क्यों जोड़ा जा रहा है। हालांकि, टीडीपी ने यह दांव स्थानीय राजनीति और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चला है, लेकिन इसका सीधा असर केंद्र की राजनीति पर पड़ सकता है। संसद सत्र से पहले प्रमुख सहयोगी दल की इस राय से भाजपा पर दबाव बढ़ सकता है।

वोटर लिस्ट से नाम कटने से पहले मिलेगा नोटिस

भास्कर के अनुसार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने कहा कि मतदाता सूची से नाम काटने से पहले नोटिस दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 1 अगस्त को प्रारूप प्रकाशित होगा। इसमें सभी गणना प्रपत्र भरने वाले मतदाताओं का नाम शामिल रहेगा। इसके साथ ही एक अलग से सूची प्रकाशित की जाएगी। इसमें पहचान किए जाने वाले स्थानांतरित दोहरे वोटर और मृत वोटरों का नाम शामिल होगा। इन दोनों सूचियों पर दावा व आपत्ति की प्रक्रिया 1 अगस्त से 1 सितंबर तक चलेगी। इसके बाद 30 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में वोटरों की कुल संख्या 7 करोड़ 89 लाख 69844 है। इनमें अब तक स्थाई रूप से अन्यत्र स्थानांतरित होने वाले 12 लाख वोटर की पहचान हुई है। इसी तरह से दो जगह नाम वाले चार लाख 20170 वोटो की पहचान की गई है। वहीं राज्य में अब तक 9 लाख 992 मृतक वोटरों की पहचान की गई है।

फ़ॉर्म जमा हुआ या नहीं, ऐसे जान सकते हैं

जागरण के अनुसार निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर मंगलवार रात से एक नया मॉड्यूल भी लाइव होगा जिससे मतदाता अपने एन्यूमरेशन फॉर्म के जमा होने की स्थिति की जांच कर सकेंगे।

टेस्ला की सबसे सस्ती कार ₹60 लाख की

हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी टेस्ला ने भारत में अपने वाहनों की औपचारिक बिक्री शुरू कर दी है। कंपनी ने मंगलवार को मुंबई में अपने पहले शोरूम की शुरुआत की। इसका उद्घाटन महाराष्ट्र के सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने किया। टेस्ला ने यहां पहली इलेक्ट्रिक एसयूवी उतारी है। इसके दो मॉडल पेश किए गए हैं। इनकी एक्स-शोरूम कीमत 60 लाख एवं 68 लाख रुपये है। कंपनी का दावा है, यह यूएसवी पूरी तरह चार्ज होने के बाद 622 किमी तक चल सकती है। इनमें 60 और 75 किलोवाट घंटे के बैटरी पैक दिए गए हैं। कंपनी दिल्ली में जल्द दूसरा शोरूम खोलेगी।

500 से अधिक सैनिकों के नाम पर पूर्व सैनिक का फर्जीवाड़ा

प्रभात खबर के अनुसार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मंगलवार को एक बड़े रिफंड घोटाले के बारे में बताया। विभाग ने रांची के बरियातू इलाके में पूर्व सैनिक मुकेश कुमार झा के ठिकाने पर छापा मारा। आरोप है कि मुकेश झा ने 500 से अधिक सैनिकों के नाम पर इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों का टैक्स रिफंड हासिल किया। झा ने पहले रिटर्न में टैक्स का सही विवरण देकर काम जमा कराई लेकिन बाद में टैक्स छूट का गलत फायदा उठाते हुए रिफंड क्लेम किया। बरियातू स्थित उनके ठिकानों पर से बरामद दस्तावेजों में सैकड़ों सैनिकों के रिटर्न से जुड़ी जानकारी और अन्य संदिग्ध रिकॉर्ड मिले हैं।

ओवैसी की पार्टी के खिलाफ डर याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि जातीय आधार पर निर्भर राजनीतिक पार्टियों देश के लिए समान रूप से खतरनाक है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने उस अर्ज़ी पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस इत्तेहाद (एआईएमआईएम) का राजनीतिक पार्टी के रूप में रजिस्ट्रेशन रद्द करने की मांग की गई थी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि एआईएमआईएम के संविधान के अनुसार इसका उद्देश्य अल्पसंख्यक समेत समाज के हर पिछड़े वर्ग के लिए काम करना है, जिसका संविधान में उल्लेख है। पीठ ने याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन से कहा, “पार्टी का कहना है कि वह समाज के हर पिछड़े वर्ग के लिए काम करेगी जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोग और मुस्लिम भी शामिल हैं, जो आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े हैं। हमारा संविधान भी यही कहता है।”

कुछ और सुर्खियां:

  • अंतरिक्ष यात्री सुधांशु शुक्ला आईएसएस पर 18 दिन रहने के बाद मंगलवार को पृथ्वी पर लौट आए
  • यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा को फिलहाल टाला गया
  • बिहार में 5 वर्ष में एक करोड़ नौकरी और रोजगार का लक्ष्य पाने के लिए कमेटी गठित
  • बिहार के 28000 सरकारी मिडिल स्कूल में अगले सेशन से शुरू होगी स्मार्ट क्लास
  • जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम पर होगा बिहार का कौशल विश्वविद्यालय
  • यूपीएससी की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 22 अगस्त से होगी
  • बिहार में सरकारी शिक्षकों को वेतन हर माह की 5 तारीख तक देने के आदेश

अनछपी: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के मुद्दे पर अखबारों का रवैया कितना सरकार परस्त और आयोग समर्थक है, इसका एक सबूत आज भी मिला। कल तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर एसआईआर पर गंभीर सवाल उठाए और यह भी कहा कि इसे नागरिकता से क्यों जोड़ा जा रहा है। केंद्र मैं तीसरी बार बनी मोदी सरकार को जिन दो बैसाखियों का सहारा मिला है उनमें चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी बड़ी बैसाखी है। अगर आम मतदाताओं के हिसाब से देखा जाए तो इसे चंद्रबाबू नायडू के जमीर के जैन के तौर पर लिया जा सकता है। इसकी वजह यह है कि श्री नायडू ने लगभग वही सवाल उठाए हैं जो आम मतदाताओं के मन में उथल-पुथल मचाए हुए हैं। यह कहा जा सकता है कि नायडू ने इस तरह के सवाल राजनीतिक लाभ की वजह से उठाए हैं लेकिन अगर ऐसी राजनीति हो रही है जिसमें जनता की भलाई हो तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। एक तरह से नायडू ने विपक्षी दलों के सवालों को भी आवाज दी है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि मोदी सरकार की दूसरी बैसाखी जो जनता दल यूनाइटेड के रूप में मिली हुई है, उसके मुख्य बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जमीर कब जागेगा और वह कब आम लोगों की परेशानियों को समझ कर उनके लिए आवाज उठाते हुए चुनाव आयोग के इस फरमान का विरोध करेंगे? राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि नायडू ने पहले निजी तौर पर अपनी चिंता से सरकार को आगाह कराया लेकिन जब इस पर चुनाव आयोग का रुख नहीं बदला तब उन्होंने इसे सार्वजनिक तौर पर उठाने का फैसला किया है। फिलहाल याद रखने की बात यह है कि जब बिहार के गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक मतदाता वोटर वेरीफिकेशन की वजह से मारे मारे फिर रहे थे तब नीतीश कुमार की पार्टी और यहां के अखबारों ने जनता की आवाज बनने की बजाय चुनाव आयोग का भोंपू बनना स्वीकार किया।

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