छ्पी-अनछपी: पानी के लिए पाक की गुहार, कोर्ट के आदेश पर बदजुबान मंत्री पर एफआईआर
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पाकिस्तान ने भारत के मंत्रालय को सिंधु जल संधि बहाल करने के लिए पत्र लिखा है। मध्य प्रदेश के बदजुबान मंत्री पर कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज हुई है। जस्टिस बीआर गवई ने चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की शपथ ली। राहुल गांधी आज दरभंगा में न्याय शिक्षा संवाद करेंगे। औरंगाबाद में एक मां ने अपने चार बच्चों के साथ जहर खाया जिससे चार की मौत हो गई।
और, जानिएगा कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 30 जगहों के नाम बदले तो भारत ने इसे मूर्खतापूर्ण बताया।
पहली खबर
जागरण के अनुसार पाकिस्तान ने भारत से सिंधु जल संधि समझौते को स्थगित करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। पहलगाम में 22 अप्रैल को पर्यटकों पर आतंकी हमले के तत्काल बाद अगले ही दिन भारत ने इस संधि को अपनी ओर से स्थगित कर पाकिस्तान को मौजूदा घटनाक्रम में पहला बड़ा और कड़ा संदेश दिया था। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने 23 अप्रैल को जल शक्ति मंत्रालय की ओर से संधि को स्थगित करने के लिए भेजे औपचारिक पत्र का जवाब देते हुए भारत से 65 वर्ष पुरानी इस संधि को जारी रखने के लिए कहा है। अपने जवाब में पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर भारत के रुख से अपने यहां उत्पन्न होने वाले संकट की दुहाई दी है। अखबार ने लिखा है कि इस संधि से भारत के है जाने से पाकिस्तान को लगभग 80% कृषि के लिए पानी नहीं मिल सकेगा और उसकी एक बड़ी आबादी के लिए पेयजल का संकट भी खड़ा हो सकता है। विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में हुई इस संधि के तहत सिंधु सीवर सिस्टम की छह नदियों व्यास, रावी, सतलुज, सिंधु, चेनाब और झेलम के पानी का दोनों देशों के बीच बंटवारा किया गया है।
बदजुबान मंत्री पर एफआईआर
भास्कर के अनुसार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य की भाजपा सरकार के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए शर्मनाक बयान पर कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट के आदेश पर मंत्री के खिलाफ बीएनएस की धारा 152 और अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। बीएनएस की धारा 152 में भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को खतरे में डालने वाली बातों के लिए 7 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा हो सकती है। इससे पहले कोर्ट ने कहा कि मंत्री का यह कहना कि कर्नल कुरेशी पहलगाम हमला करने वाले आतंकियों की बहन है, नफरती और अलगाववादी भावना को बढ़ावा देने वाली बात है। “यह देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के लिए खतरा है।” जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अनुराधा शुक्ला ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा, “यह गटर छाप भाषा खतरनाक है। ऐसा बयान व्यक्तिगत मानहानि ही नहीं बल्कि संस्थाओं और सामाजिक ताने-बाने पर भी चोट है। इसलिए मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो।” महाधिवक्ता ने इसके लिए समय मांगा तो जस्टिस श्रीधरन ने कहा अभी दर्ज करें, अभी ही हो सकता है, मैं कल जीवित रहूं ना रहूं, 4 घंटे दे रहा हूं… या तो आदेश का पालन करें या सुप्रीम कोर्ट से स्टे ले आएं।
भारत के नए चीफ जस्टिस बने गवई
प्रभात खबर के अनुसार न्याय मूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने बुधवार को देश के 52वें प्रधान न्यायाधीश के तौर पर शपथ ली। वह अनुच्छेद 370 समाप्त करने के केंद्र के फैसलों को बरकरार रखने समेत कई अहम फैसले देने वाली पीठों में शामिल रहे हैं। 64 साल के जस्टिस गवई को राष्ट्रपति भवन में गणतंत्र मंडप में एक संक्षिप्त समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली। उन्होंने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की जगह ली है। न्यायमूर्ति गवई को 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में प्रमोट किया गया था। उनका कार्यकाल 6 महीने से अधिक समय का होगा और वह 23 नवंबर तक पद पर रहेंगे।
बौद्ध समुदाय से आने वाले पहले सीजेआई हैं गवई
हिन्दुस्तान के अनुसार मुख्य न्यायाधीश गवई बौद्ध धर्म को मानने वाले पहले और अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से आने वाले दूसरे सीजेआई हैं। उनसे पहले अनुसूचित समुदाय से जस्टिस के.जी. बालकृष्णन 2007 से 2010 के बीच देश के मुख्य न्यायाधीश रहे थे। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई का जन्म 24 नवंबर, 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उन्होंने 16 मार्च, 1985 को वकालत से अपना कॅरियर की शुरू किया और 1987 तक पूर्व महाधिवक्ता और हाईकोर्ट के जज राजा एस. भोंसले के साथ वकालत की। मुख्य न्यायाधीश गवई 14 नवंबर, 2003 को बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त जज बने और 12 नवंबर, 2005 को हाईकोर्ट के स्थायी जज नियुक्त किए गए थे।
राहुल गांधी का दरभंगा में आज न्याय शिक्षा संवाद
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को दरभंगा में शिक्षा न्याय संवाद करेंगे। कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद जिला प्रशासन ने बुधवार को इसकी अनुमति दे दी। राहुल गांधी का शिक्षा न्याय संवाद अब आंबेडकर छात्रावास की बजाय नगर भवन में होगा। दरभंगा के डीएम राजीव रोशन ने इसकी पुष्टि की है। राहुल गांधी सुबह 11 बजे यहां दलित छात्र-छात्राओं से संवाद करेंगे। इससे पहले, जिला कल्याण पदाधिकारी ने आंबेडकर छात्रावास परिसर में संवाद की इजाजत नहीं दी थी।
चार बच्चों के साथ मां ने भी खाया जहर, चार की मौत
रफीगंज रेलवे स्टेशन के डाउन प्लेटफॉर्म पर बुधवार को महिला ने अपने चार बच्चों को जहर खिला कर खुद भी उसका सेवन कर लिया। इस घटना में मां के अलावा तीन बच्चों की मौत हो गई, जबकि एक बेटे की हालत गंभीर बनी हुई है। गोह प्रखंड के बंदेया थाना क्षेत्र के झिकटिया गांव निवासी रवि बिंद की पत्नी सोनिया देवी पति से झगड़ा करने के बाद बुधवार को रफीगंज रेलवे स्टेशन पर पहुंची और अपने बच्चों को जहर खिला कर खुद भी उसका सेवन कर लिया। सभी को छटपटाता देख आरपीएफ जवानों और स्थानीय लोगों ने उन्हें रफीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
चीन ने अरुणाचल की 30 जगहों के नाम बदले, भारत ने कहा- मूर्खतापूर्ण
भास्कर ने लिखा है कि भारतीय सेनाओं के ऑपरेशन सिंदूर से पस्त हुए पाकिस्तान के बचाव में अब चीन की एंट्री हो गई है। चीन ने भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नाम बदल दिए हैं। चीन ने यह गुस्ताखी सरकारी वेबसाइट ग्लोबल टाइम्स पर जारी भी कर दी। अरुणाचल प्रदेश के 30 क्षेत्रों के नाम मंडारिन (चीनी भाषा) में रख दिए हैं। चीन ने अरुणाचल को लेकर अपना प्रोपेगैंडा वार भी छेड़ दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने चीन की हरकत पर बड़ा पलटवार किया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, नाम बदली की यह चीन की हरकत मूर्खतापूर्ण है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने तंज़ किया कि चीन ने नाम बदलने में रचनात्मकता दिखाई है लेकिन अरुणाचल प्रदेश भारत का अखंड हिस्सा है।
कुछ और सुर्खियां:
- सीमा सुरक्षा बल बीएसएफ के जवान पूर्णम कुमार शॉ को 21 दिन बाद पाकिस्तान ने भारत को सौंप दिया
- जमीन के बदले कथित नौकरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई 23 मई को होगी
- भारतीय मूल की अनीता आनंद को कनाडा में विदेश मंत्री बनाया गया
- 30 मई को पटना एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन
अनछपी: आज हमने अखबारों की एक खबर को छपी सेक्शन में नहीं दिया क्योंकि उस पर अलग से चर्चा जरूरी है। एक अखबार की हेडिंग है ‘#बॉयकॉट तुर्किये’। दूसरे अखबार ने लिखा है, तुर्किये और अजरबैजान पर फूटा गुस्सा। दरअसल तुर्किये और अजरबैजान के बायकॉट और उसके विरोध की वजह यह है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारत पर जिन हठियारों से हमला किया उसके लिए ड्रोन उन्हीं दो देशों से आए थे। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी ने तो तुर्किये के एक विश्वविद्यालय के साथ हुए करार को भी रद्द करने की घोषणा की। इसलिए इनके खिलाफ गुस्से को स्वाभाविक माना जा सकता है लेकिन चीन और अमेरिका के रोल पर बायकॉट की अपील न करने से यह सवाल उठता है कि ऐसा क्यों है। जंग और जंग के हालात के वक्त सरकारों की यह जरूरत और इच्छा होती है कि लोगों को सही जानकारी ना मिले। वह कहावत तो बार-बार दोहराई जाती है कि जंग में पहला शिकार सच होता है। तो फिर वही सवाल दोहराया जा सकता है कि आखिर तुर्किये के बायकॉट की कॉल देने वाले लोग चीन और अमेरिका के बायकॉट की कॉल क्यों नहीं देते। यह सवाल इसलिए किया जा रहा है कि चीन ने तो खुलकर पाकिस्तान के पक्ष में खड़े होने का ऐलान किया और तुर्किये की तुलना में पाकिस्तान को चीन से मिले हथियारों की संख्या बहुत ज्यादा है। इसी तरह अमेरिका भी बार-बार ऐसी बातें कह रहा है जो भारत के राष्ट्रीय हित के खिलाफ मानी जाती हैं और इसमें कश्मीर का मुद्दा सबसे ऊपर है। ऐसे में एक संदेश यह जाता है कि हमें मजबूत देशों के विरोध में उठने से रोका जा रहा है। क्या यह नीति देश के लिए सही है? अगर मोदी सरकार को लगता है कि इस समय चीन और अमेरिका का बायकॉट नहीं किया जा सकता तो उसे इसकी वजह भी बतानी चाहिए। जब तक पाकिस्तान के सबसे बड़े सहयोगी चीन और भारत को मुश्किलों में डालने वाले अमेरिका पर सवाल नहीं होगा तब तक तुर्किये और अजरबैजान के नाम पर उन्माद फैलाने से क्या फायदा होगा?
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