बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बड़े घोटाले के मद्देनजर बिहार के 10 लाख से ज्यादा शिक्षकों और पुलिस कर्मियों की सैलरी रोक दी गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के दो महत्वपूर्ण नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है। आईडीबीआई बैंक का 60% शेयर कनाडा की कंपनी ने खरीद लिया है।
और, चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है।
पहली ख़बर
बिहार सरकार के 9 लाख शिक्षाकर्मियों और 1.30 लाख पुलिसकर्मियों के अगले वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। एजी की जांच में दोनों विभागों में बड़ा वेतन घोटाला उजागर हुआ है। इसके बाद वित्त सचिव विनय कुमार ने दोनों विभागों को पत्र भेजकर कागजात की गहन जांच के आदेश दिए हैं। जांच के बाद ही अगला वेतन जारी होगा। कर्मियों से धोखाधड़ी की राशि वसूली जाएगी। फर्जी बिल पास करने वाले अफसरों पर आपराधिक मुकदमा भी किया जाएगा। पटना, भागलपुर और औरंगाबाद समेत कई जिलों में सरकारी खजाने से गलत भुगतान हो रहा था। इसे रोकने के लिए ग्राउंड लेवल से लेकर डीजीपी ऑफिस और सचिवालय तक के वेतन कागजात की जांच होगी। सभी डीएम को इस पर सख्ती से अमल कराने को कहा गया है। भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए नियमित कर्मचारियों को ही सैलरी बिल का मेकर, चेकर और अप्रूवर बनाया जाएगा। भागलपुर, पटना और औरंगाबाद में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेता गिरफ्तार
प्रभात खबर के अनुसार कॉकरोच जनता पार्टी कर नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की शांति बनाए रखने के लिए भरे गये बॉन्ड के कथित उल्लंघन और जंतर-मंतर जाने के लिए निजी परिसर में अनधिकृत प्रवेश के आरोप में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. दोनों को तिहाड़ जेल में रखा गया है. उनके सहयोगी अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार की शर्त पर 5,000 रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया गया.
आईडीबीआई बैंक का 60% शेयर कनाडा की कंपनी ने खरीदा
जागरण के अनुसार आखिरकार आइडीबीआइ बैंक बिक गया। यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये में कनाडा की कंपनी कनाडा इंक के साथ किया गया। सौदे पर बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने अपनी मंजूरी दे दी। 2017 के बाद भारी घाटे में आ चुके इस बैंक में भारत सरकार ने अपनी 30.48 प्रतिशत तो एलआइसी ने 30.24 प्रतिशत की हिस्सेदारी कनाडा इंक को बेची है। इस बिक्री के बाद भी आइडीबीआइ बैंक में भारत सरकार की 15% तो एलआईसी की 19% हिस्सेदारी बची है। यह सौदा अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश है। कनाडा आईएनसी फेयरफ़ैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी है।
नीला ड्रम हत्याकांड में दोषी मुस्कान और साहिल को मौत की सजा
भास्कर के अनुसार नीले ड्रम हत्याकांड में बुधवार को मेरठ की जिला कोर्ट ने पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई। दोनों मर्चेंट नेवी कर्मी सौरभ राजपूत की हत्या और शव छिपाने के दोषी थे। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसला सुनाया। वकील केके चौबे के मुताबिक, जज ने महाभारत का हवाला देकर कहा, ‘दंड भी धर्म है। अपराधी को दंड देना भी धर्म है।’ मुस्कान के माता-पिता ने कोर्ट में लिखकर दिया कि बेटी को फांसी होने पर उन्हें आपत्ति नहीं है। दोनों ने 3 मार्च 2025 को हत्या की। शव के टुकड़े नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से ढक दिए थे।
गवर्नर बनाए गए भाजपा नेता दुष्यंत गौतम पर अंकित हत्या मामले में आरोप
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा बुधवार को अचानक दिल्ली स्थित इंडिया गेट पहुंच गए। यहां उन्होंने अंकिता भंडारी के परिवार से मुलाकात कर अपना समर्थन दिया। दोनों नेता अकिता भंडारी के परिवार के साथ धरने पर बैठ गए। आनन फानन में बड़ी सख्या में पुलिस और सुरक्षाबल वहां पहुंच गए। इस बीच बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता भी इंडिया गेट पर जुटने लगे। राहुल और प्रियंका करीब डेढ़ घंटे वहां रहे। दरअसल, 2022 में अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। मामले में भाजपा के एक नेता की संदिग्ध भूमिका की भी चर्चा होती है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा के नेता जिन दुष्यंत गौतम पर आरोप लगे, केंद्र ने उन्हें इनाम देते हुए सिक्किम का राज्यपाल बना दिया है। देश की बच्चियां और महिलाएं यह देख रही हैं कि कैसे पीएम और उनकी सरकार दुष्यंत गौतम को बचा रही है। अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह ने राष्ट्रपति से मांग की है कि जब तक सीबीआई की जांच पूरी न हो जाए, तब तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल के तौर पर नियुक्त न किया जाए।
चीन के साथ व्यापार घाटा 100 अरब डॉलर के पार
जागरण के अनुसार कैलेंडर वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों के दौरान चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 100 अरब डालर के पार चला गया है। वहीं चीन को होने वाले भारतीय निर्यात में 40.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बुधवार को चीन के ‘जनरल एडमिनिस्ट्रेशन आफ कस्टम्स’ द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 105.93 अरब डालर हो गया जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 20.7 प्रतिशत अधिक है। आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से सितंबर के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापारं 25.4 प्रतिशत बढ़कर 144.45 अरब डालर हो गया। चीन से भारत को होने वाला निर्यात 125.19 अरब डालर तक पहुंच गया और इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 23.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कुछ और सुर्खियां:
- त्योहारी सीजन में ख़ुदरा के बाद थोक महंगाई दर ने भी दिया झटका सितंबर में रिकॉर्ड उछाल के साथ 11.39 फीसद पर पहुंच गई
- बिहार के 32 जिलों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाएगी अपना परीक्षा केंद्र
- हेल्थ सब सेंटर और एडिशनल प्राइमरी हेल्थ सेंटर को अब किराए के लिए ₹500 की जगह ₹1500 मिलेंगे
- इसराइल जाने वाली उड़ानों में पाकिस्तान समेत 31 देश के पायलटों पर एयर फ्रांस ने रोक लगाई
- 11.4 0 लाख रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा 78 दिन का दिवाली बोनस
अनछपी: राजधानी पटना से कुछ ही दूर वैशाली के राघोपुर में 13 बच्चों की बेमौत जान चली गई क्योंकि श्राद्ध का भोज खाने के लिए ले जा रही नाव गंगा की लहरों में संभल नहीं सकी और उनके डूबने के बाद उस पर सवार 20 लोगों में से केवल सात लोग बच सके। इसके बाद सरकार की ओर से 24 घंटे में रिपोर्ट देने का आदेश हुआ और दो अफ़सरों का वेतन रोक दिया गया लेकिन असली बात यह है कि सरकार इस बारे में बिल्कुल लापरवाह रही है और जवाबदेही तो छोटे अधिकारियों से ज्यादा बड़े अधिकारियों की होती है। नाव के सफर के लिए सरकार ने अपनी तरफ से ही जो सावधानी के नियम बताए गए हैं, उनकी पूरी तरह से धज्जियां उड़ती रही हैं और इस मामले में भी वही हुआ है। कहा जाता है कि सरकार रात के अंधेरे में नाव चलाने की इजाजत नहीं देती लेकिन सबको पता है कि ऐसा होता है और अब जब यह हादसा हो गया तो संबंधित सीओ और थानेदार से शो कॉज़ किया गया है। पूछने का असली सवाल यह है कि सरकार के अपने नियमों का पालन नाव चलाने वाले कर रहे हैं या नहीं, इसको जांचने परखने की सरकार ने अपनी ओर से क्या कोशिश की थी? सरकार के अधिकारियों ने पिछली बार कब औचक निरीक्षण कर यह जानने की कोशिश की थी कि नाव वाले उन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, जो सवारी की सुरक्षा के लिए जरूरी है और जिन्हें सरकार ने ही तय किए हैं। यह लगभग वैसा ही है जैसे किसी बड़े ऑटोरिक्शा हादसे के बाद लोगों की मौत होती है तो पुलिस वाले अचानक जांच पड़ताल शुरू करते हैं और फिर 10 दिनों के बाद सारा मामला खत्म हो जाता है। ऑटोरिक्शा ही नहीं बसों में भी सवारियों को ठूंस कर भरा जाता है लेकिन सरकार के जिन अधिकारियों को इन पर नजर रखने की जिम्मेदारी दी गई है उनके बारे में यह शिकायत मिलती है कि उन्हें तो बस उगाही और घूसखोरी में दिलचस्पी रहती है। इसलिए बिहार में लोगों का बेमौत मरना सरकार और समाज के लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। तमाम दावों के बावजूद आशंका इसी बात की है कि इस मामले को भी लोग कुछ दिनों में भूल जाएंगे और फिर सरकार तब जागेगी जब एक और हादसा होगा।
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