छ्पी-अनछपी: जमुई में तनाव-इंटरनेट बंद, ज्ञानेश कुमार नए मुख्य चुनाव आयुक्त बने

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यह दावा करते चल रहे हैं कि उन्होंने हिंदू मुस्लिम का झगड़ा बंद कराया तो दूसरी तरफ जमुई से खबर आई है कि वहां तनाव फैल गया है और इंटरनेट बंद कर दिया गया है। 1988 बैच के केरल कैडर के आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार को भारत का नया मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया है। पटना हाई कोर्ट ने कहा है कि ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट के आधार पर शराब पीने की फिर नहीं हो सकती।

और, जानिएगा कि भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर सबसे ज़्यादा आमदनी वाली पार्टी बनी है मगर उसे कितने हज़ार करोड़ मिले?

हिन्दुस्तान के अनुसार जमुई में तनाव को देखते हुए इंटरनेट सेवा को मंगलवार तक के लिए बंद कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, यह रोक रविवार की देर रात से ही लागू है, जो मंगलवार की रात तक प्रभावी रहेगी। गृह विभाग की विशेष शाखा ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिया है। सोमवार को जारी आदेश के अनुसार, इंटरनेट के दुरुपयोग और अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवा पर रोक लगाई गई है। इस दौरान फेसबुक, एक्स, वाट्सएप, टेलीग्राम जैसे इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म का भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। पुलिस मुख्यालय के निर्देश के बाद जमुई में फ्लैग मार्च भी किया गया है। इधर, दूसरी ओर झाझा के बलियाडीह में रविवार की शाम हिंदू स्वाभिमान मंच के नेताओं के काफिले पर हुए हमले के विरोध में सोमवार को हिंदू स्वाभिमान मंच और चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से बंद का आह्वान किया गया। जिलेभर में बाजार लगभग बंद रहे। इस संबंध में पुलिस ने दो प्राथमिकी दर्ज की है। एक में 41 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। दूसरी प्राथमिकी में आठ नामजद और 50 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार भी किया है।

विवादास्पद खुशबू पांडे के नारों के बाद हुआ झगड़ा

हिंदी के अखबारों में जमुई की घटना के लिए पत्थरबाजी की बात तो लिखी गई है लेकिन यह नहीं बताया गया कि इसके लिए दरअसल विवादास्पद हिंदू संगठन की नेता खुशबू पांडे की नारेबाजी जिम्मेदार है। उर्दू अखबार कौमी तंजीम ने लिखा है कि अपने विवादास्पद बयान के लिए बदनाम खुशबू पांडे भी प्रोग्राम में मौजूद थी। पुलिस सूत्रों ने सोमवार को बताया के इतवार की शाम कुछ लोग बलियाडीह गांव में हनुमान चालीसा प्रोग्राम में हिस्सा लेकर वापस आ रहे थे कि रास्ते में किसी बात पर दोनों ग्रुप में झगड़ा हुआ और उसके बाद दोनों तरफ से पत्थरबाजी हुई। खुशबू पांडे इससे पहले भी अपने विवादास्पद बोल के लिए बदनाम रही है।

ज्ञानेश कुमार नए मुख्य चुनाव आयुक्त

प्रभात खबर के अनुसार निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार देश के नए मुख्य चुनाव आयुक्त या (चीफ इलेक्शन कमिश्नर/सीईसी) होंगे। कानून मंत्रालय की ओर से सोमवार को यह जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने उनके नाम पर मुहर लगाई पूर्ण राम समिति की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए। ज्ञानेश कुमार निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति से संबंधित नए कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले सीईसी होंगे। वह राजीव कुमार की जगह लेंगे। वे पहले सहकारिता मंत्रालय के सचिव थे और 31 जनवरी 2024 को इस पद से रिटायर हुए।

ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट पर नहीं हो सकती शराब पीने की एफआईआर: हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह तय किया है कि शराबबंदी कानून के तहत केवल ब्रेथ एनालाइजर रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई प्राथमिकी अवैध है। कोर्ट ने कहा कि ब्रेथ एनालाइजर मशीन की रिपोर्ट किसी व्यक्ति के मद्यपान करने का कोई ठोस प्रमाण नहीं देता, इसलिए केवल सांस की दुर्गंध जांच कर दर्ज हुई प्राथमिकी शराबबंदी कानून में अमान्य होगी। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की एकलपीठ ने नरेंद्र कुमार राम की अपराधिक वृत याचिका को मंजूर करते हुए उसके खिलाफ किशनगंज उत्पाद थाने में पिछले वर्ष दर्ज हुई प्राथमिकी (कांड संख्या 559/2024) को निरस्त कर दिया। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ब्रेथ एनालाइजर मशीन की रिपोर्ट का समर्थन किसी प्राथमिकी में दर्ज हुई आरोपित के असामान्य व्यवहार जैसे लड़खड़ाती जबान या चढ़ी हुई आंख जैसे हालात से समर्थित होनी चाहिए या उसके खून और पेशाब जांच की रिपोर्ट जो इस बात की पुष्टि करे कि आरोपित के शरीर में अल्कोहल की मात्रा है। तभी वैसी प्राथमिकी शराबबंदी कानून के तहत मान्य होगी।

जनवरी में 25 हजार करोड़ के स्मार्टफोन का निर्यात

जागरण के अनुसार जनवरी में भारत का स्मार्टफोन निर्यात पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 140% बढ़कर 25 हजार करोड़ रुपए यानी तीन अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस तरह चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी की 10 महीने की अवधि के दौरान स्मार्टफोन का कुल निर्यात 1.55 लाख करोड़ रुपए हो गया जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 99 हजार 102 करोड़ रुपए के आंकड़े से 56% अधिक है। एप्पल और सैमसंग ने सबसे ज्यादा स्मार्टफोन निर्यात किए हैं।

सबसे ज़्यादा चंदा भाजपा को

देश की राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टियों में भाजपा की आय सबसे अधिक है। राजनीतिक दलों पर नजर रखने वाली संस्था एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) द्वारा सोमवार को जारी रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2023-24 में भाजपा को कुल 4,340.47 करोड़ रुपये की आय हुई। ये आय देश की छह राष्ट्रीय पार्टियों की कुल आय का करीब 74.57 फीसदी है। कांग्रेस को कुल 1225.12 करोड़ रुपये की आय हुई। एडीआर द्वारा सूचना के अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने ये आंकड़ा साझा किया है।

कुछ और सुर्खियां:

  • मैट्रिक परीक्षा के पहले दिन 1677 केंद्रों पर हुई परीक्षा, पांच परीक्षार्थी निष्कासित, 7 फर्जी पकड़े गए
  • सोमवार को दिल्ली के बाद बिहार में भी भूकंप के झटके, सीवान था केंद्र
  • कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल-थानी भारत के दौरे पर दिल्ली पहुंचे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की अगवानी
  • बिहार के 5.5 किसान सम्मान निधि से वंचित होंगे

अनछपी: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर शहर की मदनी मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी जो नाराजगी जताई है उसे पटना से छपे हिंदी के अखबारों ने दबा दिया। इसे इत्तेफाक मानना मुश्किल है क्योंकि कुशीनगर संस्करण के हिंदी अखबारों में इसकी खबर दी गई है। यह भी पता लगाने की बात है कि दूसरे राज्यों के हिंदी अखबारों ने इस खबर को जगह दी या नहीं। दरअसल ऐसी खबरें ना देने से आम लोग इस बात को नहीं जान पाते कि सरकार है किस तरह सांप्रदायिक गतिविधियों में लगी हुई है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक की अवहेलना कर रही है। इस खबर की कवरेज में हिंदी और उर्दू अखबार में क्या फर्क होता है इसका पता आज के कौमी तंजीम अखबार से लगता है जिसकी पहली और सबसे बड़ी खबर है, “कुशीनगर मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट सख्त नाराज।” बहुत से लोगों को ऐसा लगता है कि हिंदी अखबारों ने दरअसल मस्जिदों और ऐसी जगह पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल नहीं करने की ठान रखी है, चाहे वह सही हो या गलत। बात केवल उत्तर प्रदेश की नहीं बल्कि गुजरात और भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले दूसरे राज्यों में भी यही है। और अखबारों का रवैया भी लगभग वही है। जब भी सुप्रीम कोर्ट ऐसी सांप्रदायिक और नफरत भरी कार्रवाई पर सरकार को लताड़ लगाती है तो अखबार वाले ऐसी खबरों को मार देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आखिर क्या कहा जिसकी खबर हिंदी अखबारों में नहीं होने पर हम यहां चर्चा कर रहे हैं? सोमवार को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के अधिकारियों को हाटा के गांधीनगर में स्थित मदनी मस्जिद के हिस्से को गिराने के आरोप में अवमानना नोटिस जारी किया। नौ फरवरी को की गई यह कार्रवाई अदालत के नवंबर 2024 के फैसले का उल्लंघन है। शीर्ष अदालत ने बिना पूर्व सूचना और सुनवाई का अवसर दिए देशभर में विध्वंस की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि अगले आदेश तक संबंधित ढांचे को ध्वस्त नहीं किया जाएगा। पीठ ने शीर्ष अदालत के पिछले साल 13 नवंबर के निर्देशों का पालन करने में विफल रहने को लेकर कुशीनगर के संबंधित अफसरों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने दलील दी कि तोड़फोड़ सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले साल नवंबर में दिए गए फैसले की घोर अवमानना है। पीठ ने कहा कि नोटिस जारी करें कि प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को अखबारों में जगह नहीं देना मीडिया की सांप्रदायिक सोच के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण हो सकता है।

 

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