छपी-अनछपी: आज फिर मैं, नीतीश कुमार… “कानून लाकर अदालती फैसला नहीं पलटा जा सकता”
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार आज 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में कहा है कि संसद कानून लाकर न्यायिक आदेश को नहीं पलट सकती है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि एसआईआर की वजह से 28 लोग अब तक जान कमा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तलाक ए हसन की कथित खामियों पर सवाल उठाए हैं।
और जानिएगा कि फर्जी रॉ ऑफिसर गिरफ्तार, सारण जिले में तैनात महिला जज से धोखा देकर शादी की।
पहली ख़बर
जदयू के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार रिकॉर्ड 10वीं बार आज मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। ऐतिहासिक गांधी मैदान में उन्हें दोपहर 11:30 बजे राजपाल आरिफ मोहम्मद खान शपथ दिलाएंगे। प्रभात खबर के अनुसार नई एनडीए सरकार में एक बार फिर दो उपमुख्यमंत्री बनाये जायेंगे. शपथ ग्रहण समारोह के बाद गुरुवार की शाम नयी कैबिनेट की पहली बैठक होगी. माना जा रहा है कि उसके बाद भाजपा विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी और उपनेता विजय कुमार सिन्हा को उपमुख्यमंत्री बनाये जाने की घोषणा कर दी जायेगी. फिलहाल छोटे कैबिनेट वाली नयी सरकार में जदयू से सात, भाजपा से नौ, लोजपा आर, हम और रालोमो से एक-एक विधायक शामिल होंगे. शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत सभी केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे. एनडीए विधायक दल की बैठक हुई. भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने एनडीए विधायक दल के नेता के लिए नीतीश कुमार के नाम का प्रस्ताव किया, जिसे सभी दलीय नेताओं ने समर्थन किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- संसद से कानून लाकर न्यायिक आदेश नहीं पलट सकती सरकार
जागरण की खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में ट्रिब्यूनल सुधार अधिनियम, 2021 के तहत सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और सेवा शर्तों से संबंधित प्रविधानों को रद कर दिया है। केंद्र सरकार के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि संसद कानून लाकर न्यायिक आदेश को नहीं पलट सकती। संसद मामूली बदलावों के साथ पुराने प्रविधानों को फिर से लागू करके न्यायिक फैसले को नहीं पलट सकती। शीर्ष अदालत ने कहा कि पहले खारिज किए जा चुके प्रविधानों को मामूली बदलाव के साथ नए कानून में फिर से लागू कर दिया गया है। ये प्रविधान शक्तियों के पृथक्करण, न्यायिक स्वतंत्रता के संवैधानिक सिद्धांतों और सुप्रीम कोर्ट के बाध्यकारी फैसले का उल्लंघन करते हैं, जिसमें ट्रिब्यूनल के सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल व कार्यप्रणाली के मानकों को स्पष्ट किया गया है।
एसआईआर के डर से 28 लोगों की मौत हो चुकी: ममता
जागरण के अनुसार बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। बुधवार सुबह उन्होंने एक्स हेंडल पर लिखा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ममता बनर्जी (फाइल (एसआइआर) फोटो) एएनआइ के डर से अब तक 28 लोगों की मौत हो चुकी है और इसके लिए आयोग का अनियोजित निर्णय जिम्मेदार है। लोगों के बीच असुरक्षा और भय का माहौल बना हुआ है। हजारों सवाल और आशंकाएं लोगों के मन में घर कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री बनर्जी ने चुनाव आयोग से स्थिति को संभालने के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आयोग को चाहिए कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और कार्यकर्ताओं पर पड़ रहे दबाव को कम करे। ममता ने चेतावनी दी कि यदि आयोग ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो राज्य में और भी गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री ने पोस्ट में लिखा कि बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) पर अत्यधिक काम का दबाव डाला जा रहा है, जिसके कारण वे मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या कर रहे हैं।
तलाक ए हसन की कथित खामियों पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ‘तलाक-ए-हसन’ पर सवाल उठाए। अदालत ने पति द्वारा तलाक का नोटिस भेजने पर चिंता जताते हुए कहा कि वह इससे जुड़ी याचिकाओं को पांच जजों की संविधान पीठ को भेजने पर विचार कर सकता है। जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुइयां और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने मुस्लिम महिलाओं की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीठ ने नोटिस भेजने की प्रथा पर कहा कि पति बाद में तलाक देने से इनकार कर देते हैं और पुनर्विवाह करने पर पत्नियों पर बहुपतित्व का आरोप लगा देते हैं। अदालत ने न्यायिक हस्तक्षेप की संभावना पर पक्षकारों से सुझाव मांगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने इस्लामी प्रथाओं के तहत दिए जा सकने वाले तलाक के प्रकारों के संबंध में पक्षकारों से नोट पेश करने कहा। पीठ ने कहा कि हमें मोटे तौर पर वे सवाल बताएं जो उठ सकते हैं।
फर्जी रॉ ऑफिसर गिरफ्तार, सारण जिले में तैनात जज से की धोखा देकर शादी
हिन्दुस्तान के अनुसार ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार बिहार निवासी फर्जी रॉ अफसर सुनीत कुमार ने करीब एक साल पहले छपरा में कार्यरत महिला जज से शादी की थी। उसने महिला जज को बताया था कि वह गृह मंत्रालय में तैनात है। एसटीएफ ने जब महिला जज से बात की तो उन्होंने पति को गृह मंत्रालय में तैनात बताया। अधिकारियों ने जब सच्चाई जज को बताई तो वह भी अचंभित रह गईं। फर्जी अधिकारी ने बीते एक वर्ष में तीन देशों की यात्राएं कीं। उसके 10 बैंक खातों से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ। नोएडा एसटीएफ ने आरोपी के दो बैंक खातों में जमा 81 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं। एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार 37 वर्षीय सुनीत कुमार पिछले एक साल में दुबई, मलेशिया और श्रीलंका की यात्रा पर गया। उसके एक ही बैंक खाते से पिछले एक साल में तीन करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन हुआ। उसकी तीन कंपनियों के बारे में भी पता चला है, जो दिल्ली और नोएडा के पते पर पंजीकृत हैं। इन कंपनियों की भी जांच चल रही।
कुछ और सुर्खियां:
- बिहार के 11 परंपरागत विश्वविद्यालय के शिक्षकों और कर्मियों के वेतन के लिए ₹109 करोड़ जारी
- पटना के जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में सरकारी खर्च पर कैंसर, किडनी, ब्रेन व हार्ट की अब 12 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज
- समाजवादी विचारक और लेखक सच्चिदानंद सिन्हा का 98 साल की उम्र में मुजफ्फरपुर में निधन
- पटना के गांधी मैदान की तरफ आज सुबह 6:00 से दोपहर 3:00 बजे तक आम गाड़ियों के जाने पर पाबंदी
- बिहार में सरकारी अस्तर से धान खरीदने के लिए 36.85 लाख टन का लक्ष्य तय
अनछपी: भारत में जो पत्रकार सरकार की नीतियों के अनुरूप नहीं चलते उनके साथ क्या व्यवहार होता है यह बात तो लगभग सबको पता है। गोदी मीडिया के इस दौर में किसी सरकार के खिलाफ काम करना आसान नहीं है और यह बात केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पत्रकारों और मीडिया हाउस को सरेआम बेइज्जत करने के लिए जाने जाते हैं। मगर भारत से फर्क यह है कि अब भी वहां राष्ट्रपति के सामने उनके लिए बेहद असहज करने वाले सवाल पूछे जा रहे हैं और पूछे जा सकते हैं और यह खतरा नहीं होता है कि उन्हें जेल में डाल दिया जाएगा। तो कहानी यह है कि मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक न्यूज चैनल की पत्रकार मैरी ब्रूस को तीखे सवाल पूछने पर धमकी दी। कहा, मीडिया संस्थान का लाइसेंस रद्द कर दूंगा। ट्रंप ने ब्रूस को बेहद खराब रिपोर्टर बताया। दरअसल एबीसी न्यूज की व्हाइट हाउस के लिए मुख्य संवाददाता ओवल ऑफिस में उन पत्रकारों में शामिल थीं, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से सवाल पूछने की अनुमति थी। ब्रूस ने ट्रंप से पूछा कि क्या राष्ट्रपति पद पर रहते हुए उनके परिवार का सऊदी अरब में व्यापार करना उचित है? ब्रूस ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस से पूछा, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक आपने एक पत्रकार की हत्या की साजिश रची। 9/11 पीड़ितों के परिजन आपके यहां आने से नाराज हैं। अमेरिकी आप पर क्यों भरोसा करें? और यही सवाल आपसे भी, राष्ट्रपति ट्रंप। इन सवालों के बाद ट्रंप ने पत्रकार से उनके संस्थान का नाम पूछा और एबीसी न्यूज़ का जवाब मिलने पर उसे फेक न्यूज़ बताया। उन्होंने खुफिया रिपोर्ट को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि क्राउन प्रिंस का 2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या में हाथ था। यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन पर एक सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने ब्रूस से कहा, आप एक खराब रिपोर्टर हैं। आपके सवाल पूछने का तरीका गलत है। क्या कोई पत्रकार भारत में प्रधानमंत्री से इस तरह का सवाल कर सकता है? हालांकि इस सवाल का मतलब इसलिए नहीं है क्योंकि भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री ने प्रेस को इस तरह से सवाल करने का मौका कभी नहीं दिया। भारत को विश्व गुरु बनाने की बहुत बात चलती है लेकिन ध्यान देने की बात यह है कि ट्रंप जैसे तानाशाह राष्ट्रपति के होते हुए भी लोग अमेरिका में उनसे उन्हें नाखुश करने वाले सवाल पूछ सकते हैं और जेल के बाहर भी रह सकते हैं। ऐसे में वह बात भी याद आती है जिसमें कहा जाता है कि बोलने की आजादी तो है लेकिन बोलने के बाद की आजादी के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता।
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