छ्पी-अनछपी: पटना में घर के पास बड़े कारोबारी का मर्डर, वोटर वेरीफिकेशन के मुद्दे पर 9 को चक्का जाम

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पटना में घर के दरवाजे पर दो अपराधियों ने बड़े कारोबारी गोपाल खेमका का मर्डर कर दिया। वोटर वेरीफिकेशन के मुद्दे पर महागठबंधन ने 9 जुलाई को चक्का जाम का ऐलान किया है। सीवान में तीन भाइयों की तलवार से काटकर हत्या कर दी गई। कैपिटल एक्सप्रेस में 15 यात्रियों से लूटपाट और मारपीट की गई। मथुरा की शाही ईदगाह को विवाद ढांचा कहने से कोर्ट ने इनकार किया।

और जानिएगा कि एआईएमआईएम को महागठबंधन में शामिल करने की बात पर राजद ने क्या कहा?

पहली खबर

हिन्दुस्तान के अनुसार पटना के गांधी मैदान थाना क्षेत्र के राम रामगुलाम चौक के पास शुक्रवार की देर रात अपराधियों ने पटना के बड़े कारोबारी गोपाल खेमका (63 वर्ष) की गोली मारकर हत्या कर दी। 6 साल पहले उनके बेटे के भी हत्या कर दी गयी थी। रात करीब 9:45 बजे गोपाल खेमका अपने घर के पास जैसे ही गाड़ी से उतरे, घात लगाए अपराधियों ने उनके सिर में गोली मार दी। अपराधियों की संख्या दो थी और वह बाइक से आए थे। गोली लगने के बाद खून से लथपथ गोपाल खेमका को कंकड़बाग स्थित मेडीवर्सल अस्पताल ले जाया गया लेकिन उनकी जान नहीं बची। घटना की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में कारोबारी, परिजन और अन्य परिचित लोग अस्पताल पहुंचे। बताया जाता है कि गोपाल खेमका रात 11:00 बजे पटना जू के पास गोल्फ क्लब से खेल कर अपने घर की तरफ निकले थे। गोपाल खेमका मगध अस्पताल के मालिक थे। इसके अलावा हाजीपुर में उनकी दो फैक्ट्री है। पटना में भी कई दवा प्रतिष्ठान हैं।

सीवान में तीन भाइयों का मर्डर

जागरण के अनुसार सीवान के भगवानपुर हाट थाने के मलमलिया चौक पर शुक्रवार की शाम लगभग 5:30 बजे घात लगाए एक पक्ष के बदमाशों ने दूसरे पक्ष के तीन भाइयों की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी जबकि दो अन्य को घायल कर दिया। तीनों पट्टीदारी में भाई और अविवाहित थे। घटना की वजह पंचायत की राजनीति बताई जा रही है। घटना के बाद अफरा तफरी मच गई और बाजार बंद हो गया। आक्रोशित भीड़ ने घटनास्थल पर छूटी हमलावरों की एक बाइक में आग लगा दी। वहीं मलमलिया चौक पर आगजनी कर सीवान-छपरा और सीवान-मशरक मुख्य मार्ग को ठप कर दिया। स्थानीय थाने की पुलिस टीम आई तो लोगों ने खदेड़ कर दिया। इस बीच एसपी ने भगवानपुर थानाध्यक्ष सुजीत कुमार चौधरी को निलंबित कर दिया है।

वोटर वेरीफिकेशन के मुद्दे पर महागठबंधन का 9 को चक्का जाम

प्रभात खबर के अनुसार तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में महागठबंधन 9 जुलाई को चक्का जाम करेगा। इससे पहले तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन के घटक दलों के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार की शाम मुख्य निर्वाचन कार्यालय पहुंचकर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात की। तेजस्वी ने इस दौरान विशेष सघन पुनरीक्षण के मसले पर आयोग के रवैए पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि पुनरीक्षण पूरी तरह अव्यावहारिक है। जागरण की खबर है के महागठबंधन ने एसआईआर में आधार, राशन और मनरेगा कार्ड को भी मान्यता देने की मांग की है।

वोटर वेरीफिकेशन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाएगा विपक्ष

जागरण के अनुसार बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विशेष सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण करने के चुनाव आयोग के फैसले के विरुद्ध विपक्षी दलों की मुहिम को कांग्रेस ने अब अदालत ले जाने की तैयारी तेज कर दी है। इंडिया गठबंधन के घटक दलों की अनुरोध के बावजूद पुनरीक्षण स्थगित करने से चुनाव आयोग के इनकार के बाद कांग्रेस के शीर्ष कानूनी सलाहकार अब शीर्ष अदालत जाने को ही प्रभावी विकल्प मान रहे हैं। वजह यह है कि बिहार चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं है।

कैपिटल एक्सप्रेस में रेल यात्रियों से लूटपाट

जागरण के अनुसार हथियारों से लैस डकैतों ने गुरुवार की देर रात कामाख्या से राजेंद्र नगर आ रही कैपिटल एक्सप्रेस की सामान्य बोगी डी1 में चकिया और राजेंद्र पुल स्टेशनों के बीच भीषण डकैती की घटना को अंजाम दिया। हथियार दिखाकर दर्जन भर यात्रियों से लूटपाट की गई। उनसे मोबाइल और नकदी पैसे छीन लिए गए। विरोध करने पर कई यात्रियों को पिस्तौल की बट से मार कर घायल कर दिया। यात्रियों के अनुसार ट्रेन में एस्कॉर्ट पार्टी थी, फिर भी डकैत आराम से भाग खड़े हुए। कटिहार रेल एसपी हरिशंकर कुमार ने बताया कि कैपिटल एक्सप्रेस में यात्रियों से छिनतई की सूचना मिली है। राजेंद्र नगर रेल थाने में प्राथमिक की कराई गई है।

मथुरा शाही ईदगाह की जगह विवादित ढांचा शब्द का प्रयोग नामंजूर

भास्कर के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में शाही ईदगाह की जगह विवादित ढांचा शब्द के इस्तेमाल के लिए निर्देश जारी करने की मांग करने वाली याचिका खारिज कर दी। दरअसल अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने मूल वाद तथा अन्य मामलों में आगे सुनवाई के दौरान विवादित ढांचा शब्द के इस्तेमाल का आवेदन दिया था। शाही ईदगाह की ओर से पैरवी कर रहे दूसरे पक्ष ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र की पीठ ने 23 में को इस मांग पर सुनवाई पूरी करके आदेश सुरक्षित कर लिया था। शुक्रवार को कोर्ट ने इस पर निर्णय सुनाया।

एमआईएम महागठबंधन में शामिल होना चाहती है लेकिन…

प्रभात खबर के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई है। एमआईएम के बिहार अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को पत्र लिखकर औपचारिक रूप से महागठबंधन में शामिल होने का अनुरोध किया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि इंडिया गठबंधन में एमआईएम को शामिल करने से धर्मनिरपेक्ष मतों का विभाजन रोका जा सकेगा। उन्होंने दावा किया कि ऐसा होने पर यह सुनिश्चित होगा कि राज्य में अगली सरकार महागठबंधन की बने। इस पत्र के जवाब में राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि एमआईएम को बिहार में विधानसभा चुनाव से दूर रहना चाहिए और विपक्षी गठबंधन को सैद्धांतिक समर्थन देना चाहिए।

कुछ और सुर्खियां:

  • जमीन से जुड़े कैथी लिपि के दस्तावेज का देवनागरी में किया जाएगा अनुवाद, सरकार और भाषिणी के बीच करार
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 जुलाई को मोतिहारी आएंगे, वहां के गांधी मैदान में करेंगे सभा
  • ग़ज़ा में शुक्रवार को तड़के इसराइली हवाई हमले में 15 फलस्तीनी मारे गए, 20 और लोग की गोलीबारी में मौत
  • 71वीं बीपीएससी की पीटी 10 की जगह 13 सितंबर को

अनछपी: पटना में दिनदहाड़े बड़े कारोबारी गोपाल खेमका का मर्डर एक बार फिर नीतीश कुमार के सुशासन पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। शुक्रवार की देर रात हुई इस हत्या की खबर की कवरेज एक बार फिर यह साबित करती है कि नीतीश कुमार ने क्राइम तो कंट्रोल नहीं किया है लेकिन क्राइम की खबरों पर वह जरूर कंट्रोल करने में कामयाब हुए हैं। कल ही सीवान में तीन रिश्तेदार भाइयों का भी मर्डर हुआ लेकिन अखबारों को देखने से यह कहीं नहीं लगता के बिहार में क्राइम का ग्राफ बहुत बड़ा हुआ है। दरअसल नीतीश कुमार ने अपने राजकाज के शुरुआती दिनों से ही मीडिया पर इतना दबाव बनाया कि बिहार में यह माहौल बन जाए कि यहां क्राइम काफी कंट्रोल हो चुका है। उनकी तरफ से यह दलील दी जाती थी कि बिहार में ऑर्गनाइज्ड क्राइम बंद हो चुका है। उनके इस दावे को अखबारों ने भी चुपचाप मान लिया और कभी यह जानने- बताने कोशिश नहीं की की बिहार में संगठित अपराध किस तरह जारी है। यह जरूर है कि पहले की तरह अब खुलेआम किडनैपिंग नहीं होती लेकिन क्राइम का केवल तरीका बदला है क्राइम बंद नहीं हुआ है। पटना में जिस तरह बड़े कारोबारी का मर्डर हुआ और 6 साल पहले उनके बेटे का भी मर्डर हुआ था क्या वह किसी संगठित गिरोह के अपराध के बिना किया जा सकता था? ऐसा लगता है कि इस मामले में विपक्ष आम लोगों के बीच अपनी बात सही तरीके से रखने में कामयाब नहीं हुआ है और मीडिया ने तो उसे कभी सहयोग नहीं किया। इस समय अगर विपक्ष में भारतीय जनता पार्टी होती तो बिहार में अपराध के बारे में अलग तरह का माहौल होता, वह यह साबित कर देती कि बिहार में अपराध खतरनाक स्तर तक है लेकिन क्योंकि इस समय वह सरकार में शामिल है इसलिए वैसा माहौल नहीं बन पाया है। बहरहाल बिहार में क्राइम के बारे में नीतीश कुमार सरकार पर सवाल उठाने के साथ-साथ इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मीडिया ने हमेशा यह कोशिश की कि बिहार में क्राइम को उस तरह की कवरेज ना मिले जैसी 2005 से पहले मिला करती थी।

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