छ्पी-अनछपी: ट्रंप ढीले पड़े-ईरान अड़ा, शेयर बाजार एक साल के निचले स्तर पर

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। मेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया है। भारत के शेयर बाजारों में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई और सेंसेक्स एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। सीट बढ़ने के बाद 2029 में लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित हो सकती हैं। 

पहली ख़बर

मध्य-पूर्व में जारी भीषण युद्ध के बीच सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर प्रस्तावित हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने दावा किया है ईरान के साथ सार्थक बातचीत चल रही है और तेहरान समझौते के लिए बेताब है। हालांकि, ईरान ने दावों को खारिज करते हुए वार्ता से इनकार किया है। ट्रंप ने सोमवार को ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि अमेरिकी दूत एक सम्मानित ईरानी नेता के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि उन्होंने नाम नहीं बताया। ईरान के साथ बातचीत पूरे हफ्ते जारी रहेगी। आगे का फैसला चल रही बातचीत की सफलता पर निर्भर करेगा। ट्रंप ने कहा कि मैंने फोन नहीं किया, उन्होंने (ईरान ने) किया। वे समझौता चाहते थे। बातचीत में दोनों पक्षों के बीच प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है। अगर अंतिम समझौता नहीं हुआ तो पूरी ताकत से ईरान पर बमबारी करते रहेंगे। इधर, ईरान ने कहा है कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं चल रही है। ट्रंप यह सुनने के बाद पीछे हट गए कि ईरान पश्चिम एशिया के सभी पावर प्लांट को निशाना बनाएगा। 

चीन ने ईरान पर हमले बंद करने की मांग की

जागरण के अनुसार चीन और रूस ने सभी संबद्ध पक्षों से पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और हमलों को बंद करने का अनुरोध किया है। चीन ने कहा है कि अमेरिका और इसरायल ईरान पर हमले बंद करें अन्यथा इसके दूरगामी दुष्परिणाम होंगे जिन्हें पूरी दुनिया को भुगतना होगा। युद्ध अगर और दिन चला तो उसका वैश्विक प्रगति पर नकारात्मक असर होगा। युद्ध खत्म कराने के लिए चीन ने मध्यस्थता का प्रस्ताव भी रखा है। जाहिर है कि युद्ध को लेकर चीन की चिंता के पीछे उसका स्वहित भी है, क्योंकि युद्ध अगर लंबा खिंचा तो उससे पैदा होने वाली वैश्विक मंदी से चीन का निर्यात भी प्रभावित होगा। चीन के पश्चिम एशिया मामलों के विशेष दूत झाई जून ने कहा, जिसने युद्ध की शुरुआत की, उसी पर उसे खत्म करने की जिम्मेदारी है। अमेरिका और इसरायल हमले बंद करें, ईरान भी हमले रोक देगा।  

इंटरनेशनल कोर्ट पहुंचा ईरान

ईरान ने अमेरिका और इसरायल द्वारा किए गए हमलों को “बिना उकसावे के की गई सैन्य आक्रामकता” करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आइसीसी) और अन्य वैश्विक निकायों का दरवाजा खटखटाया है। ईरानी रेड क्रेसेंट सोसाइटी (आइआरसीएस) के अनुसार, तेहरान ने इस मामले में 16 औपचारिक पत्र सौंप हैं, जिनमें इन हमलों की निंदा करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। ईरान का आरोप है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इन हमलों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और जिनेवा कन्वेंशन का खुलेआम उल्लंघन किया गया है।

शेयर बाज़ार एक साल के निचले स्तर पर 

पश्चिम एशिया में युद्ध समाप्त होने का कोई संकेत नहीं मिलने से स्थानीय शेयर बाजारों में सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,836.57 अंक यानी 2.46 प्रतिशत टूटकर 72,696.39 अंक पर बंद हुआ। बीएसई बेंचमार्क का यह एक साल का निचला स्तर है। इससे पहले सेंसेक्स चार मार्च, 2025 को 72,989 पर बंद हुआ था। कारोबार दौरान, एक समय यह 1,974.52 अंक का गोता लगाकर 72,558.44 पर आ गया था। उधर, पचास शेयरों पर आधारित एनएसई निफ्टी 601.85 अंक यानी 2.60 प्रतिशत लुढ़ककर 22,512.65 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी का यह स्तर 11 महीने में सबसे कम है। 11 अप्रैल, 2025 को निफ्टी 22,828 पर बंद हुआ था। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद (28 फरवरी को) से अब तक निवेशकों को 48.29 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 48.29 लाख करोड़ रुपये (48,29,041.45 करोड़ रुपये) घटकर 415 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

लोकसभा में सीट वृद्धि के बाद महिलाओं के लिए रिज़र्व हो सकती हैं 273 सीटें

हिन्दुस्तान के अनुसार केंद्र ने महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में जल्द से जल्द 33% आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही लोकसभा और विधानसभाओं में 50% सीटें बढ़ने की संभावना है। सीट वृद्धि के बाद लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित हो सकती हैं। सरकार इस कानून को नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन के बजाए 2011 की जनगणना के आधार पर ही लागू करना चाहती है, ताकि 2029 को लोकसभा चुनाव में और उसके पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में ही इसे लागू किया जा सके। इसके लिए लोकसभा व विधानसभाओं में सीटें बढ़ाने और कुल सीटों में 33% को महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, इससे लोकसभा में 816 सीटें (संभावित) होंगी, जिनमें से 273 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

कुछ और सुर्खियां:

  • सीबीआई ने सीनियर आईएएस अधिकारी संजीव हंस के खिलाफ एक करोड़ रिश्वत लेने के आरोप में मामला दर्ज किया
  • नगर विकास एवं आवास विभाग से लिस्टेड आर्किटेक्ट पास कर सकेंगे 16 मीटर तक ऊंचे प्रोजेक्ट का नक्शा
  • पटना के पाटलिपुत्र थाना क्षेत्र में कलेक्शन एजेंट पर पिस्तौल तानकर 20 लाख की लूट
  • कोलंबिया में वायुसेना का विमान क्रैश, कुल 110 सैनिक सवार थे

अनछपी: सरकार की मशीनरी तो वैसे ही क़ानून का ग़लत इस्तेमाल करने के लिए बदनाम है और मामला अगर यूएपीए जैसा विवादित क़ानून का हो तो इसकी आशंका बढ़ जाती है। हाल के वर्षों में इस कानून का बहुत ज़्यादा और बेहद ग़लत इस्तेमाल हुआ है जिसके जरिए सरकार विरोध और प्रतिरोध की आवाज़ को दबाती है और बेक़सूर लोगों को बिना मुकदमा चलाए लंबे समय तक जेल में बंद रखती है। ऐसे में राहत की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के अत्यधिक इस्तेमाल पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन में जस्टिस भुइयां ने इसके अलावा भी कई अहम बातें कहीं हैं। यह बात पहले भी बहुत से लोगों ने कही है और अब जस्टिस उज्जल ने भी असहमति को अपराध बनाकर, यूएपीए के तहत बिना सोचे-समझे गिरफ्तारियां करने की तरफ ध्यान दिलाया है। उन्होंने कहा कि ऐसी गिरफ्तारियों से और गहरी सामाजिक दरारों के जरिये 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने ठीक ही कहा कि एक सच्चे विकसित राष्ट्र को राजनीतिक नारों के बजाय संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए लेकिन क्या देश का बड़े से बड़ा नेता भी इसकी परवाह करता है? जस्टिस उज्जल ने कहा कि आतंकरोधी कानून यूएपीए के तहत कम दोषसिद्धि को दर दिखाती है कि इस कानून का अगर दुरुपयोग नहीं हो रहा, तो अधिक इस्तेमाल तो हो ही रहा है। यूएपीए के तहत गिरफ्तार लोगों के 2019 से 2023 तक के आंकड़े पेश करते हुए उन्होंने कहा कि हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन दोषसिद्धि दर लगभग पांच प्रतिशत ही है। इससे अदालतों पर कितना बोझ पड़ता है। हमें अदालतों पर पड़ने वाले बोझ के पहले उस बोझ को भी समझना चाहिए जो एक आम इंसान पर कानून के गलत इस्तेमाल से पड़ता है। कैसे एक इंसान की जिंदगी और उसका परिवार इसकी वजह से तबाह हो जाता है इस पर भी हमारे जजों को ध्यान देना चाहिए। 

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