बिहार लोक संवाद डाॅट नेट पटना
सिविल सोसायटी के लगातार विरोध प्रदर्शन और दबाव के बाद बिहार सरकार ने खुदाबख़्श लाइब्रेरी के एक हिस्से को तोड़ने संबंधी अपने फ़ैसले को वापस ले लिया है।
दरअसल, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड अशोक राजपथ पर कारगिल चैक से एनआईटी मोड़ तक लगभग सवा दो किलोमीटर लम्बा डबल डेकर रोड का निर्माण करने जा रहा है। बीच में ख़ज़ांची रोड के पास ऐतिहासिक खुदाबख़्श ओरियंटल पब्लिक लाइब्रेरी है। निगम लाइब्रेरी के जाॅर्ज कर्ज़न रीडिंग हाॅल को रोड के निर्माण में बाधा महसूस कर रहा था। इसलिए उसने हाॅल के आगे के हिस्से को तोड़ने का फैसला किया था और लाइब्रेरी प्रशासन से इसके लिए एनओसी मांगा था।
बिहार की सिविल सोसायटी को जब ये बात मामूल हुई तो उसने लगातार विरोध प्रदर्शन करना शुरू किया और राज्यपाल, मुख्यमंत्री और केन्द्र सरकार के सांस्कृतिक मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर हाॅल को न तोड़ने की मांग की।
यह सिविल सोसायटी के लगातार विरोध-प्रदर्शन का ही नतीजा है कि पुल निर्माण निगम के चेयरमैन अमृतलाल मीणा ने स्पष्ट कर दिया है कि खुदाबख़्श लाइब्रेरी के किसी भी हिस्से को नहीं तोड़ा जाएगा। अलबत्ता लाइबे्ररी के पास प्रस्तावित डबल डेकर रोड की चैड़ाई को कम कर दिया जाएगा।
पुस्तक प्रेमी खान बहादुर खुदाबख्श ने 1891 में खुदाबख़्श लाइब्रेरी की बुनियाद रखी थी। 1905 में भारत के तत्कालीन वायसराय जाॅर्ज कर्ज़न ने लाइब्रेरी का दौरा किया
था। केन्द्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय महत्व और यूनेस्को ने हेरिटेज का दर्जा दे रखा है। वर्तमान में यहां बड़ी संख्या में विभिन्न भाषाओं मेें पाण्डुलिपियां मौजूद हैं जो कहीं और उपलब्ध नहीं हैं।
सिविल सोसायटी से जुड़े लोगों ने कर्जन रीडिंग हाॅल को न तोड़ने के बारे में लिए गए निगम के फैसले का स्वागत किया है।
इस पूरे मामले में यह बात स्पष्ट हो जाती है कि सरकार को अपनी गलतियों का एहसास कराने के लिए सिविल सोसायटी की सक्रियता कितनी महत्वपूर्ण होती है।
कैमरापर्सन शीश अहमद के साथ सैयद जावेद हसन, बिहार लोक संवाद डाॅट नेट, पटना
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