छ्पी-अनछपी: वक़्फ़ बिल के खिलाफ आज विशाल धरना, बीजेपी का शगूफा- “सौगात–ए-मोदी’

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। वक़्फ़ संशोधन बिल के खिलाफ आज पटना में बड़े पैमाने पर धरने का आयोजन हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने सौगात-ए-मोदी का शगूफा छोड़ा है। बिहार इंटरमीडिएट के रिजल्ट में बेटियां टॉपर बनी हैं। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि बिहार के विश्वविद्यालयों ने फंड क्राइसिस के बाद भी 4134 करोड़ रुपए सरेंडर किए हैं। कांग्रेस ने कहा है कि वह राजद के साथ गठबंधन जारी रखेगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर गरीबों का मुफ्त इलाज नहीं करे तो अपोलो को एम्स ले लेगा।

और, नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट नीरा से गुड़ तो बना लेकिन ₹20000 प्रति किलो कीमत की वजह से बिका नहीं।

हिन्दुस्तान के अनुसार वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और देशभर के प्रमुख धार्मिक व सामाजिक मुस्लिम संगठन बुधवार को गर्दनीबाग धरना स्थल पर विशाल विरोध प्रदर्शन करेंगे। मंगलवार को एक निजी होटल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान विभिन्न मुस्लिम संगठन के नेताओं ने ये जानकारी दी है। साथ ही भाजपा समेत एनडीए के उन राजनीतिक दलों के खिलाफ भी नाराजगी जतायी, जिन्होंने बिल का समर्थन किया है। नेताओं ने कहा कि यह बिल पारदर्शिता लाने के लिए नहीं बल्कि वक्फ संपत्तियों पर सरकारी और गैर-सरकारी कब्जों को वैध बनाने, नई कानूनी उलझनों को जन्म देने और विशेष रूप से मस्जिदों, ईदगाहों, दरगाहों और खानकाहों को ध्वस्त करने का रास्ता खोलता है। वहीं, मुस्लिम नेताओं ने एक बार फिर जदयू, लोजपा, टीडीपी और आरएलडी जैसी भाजपा की सहयोगी पार्टियों से अपील की है कि वे इस बिल पर पुनर्विचार करें और अपना समर्थन वापस लें। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि इन अपीलों के बावजूद ये दल कानून बनने में मदद करते हैं तो मुस्लिम समुदाय इस अन्याय को कभी नहीं भूलेगा। इस अवसर पर मौलाना फजलुर रहीम मुजद्दिदी, मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी, मौलाना रिज़वान अहमद इस्लाही आदि मौजूद रहे।

बीजेपी का शगूफा: सौगात-ए-मोदी

जागरण के अनुसार सरकारी योजनाओं में सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की नीति का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब संगठन के माध्यम से भी इस संदेश को मजबूत करना चाहती है। समाज के सभी वर्गों में अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीति के तहत ही भाजपा ने ईद से पहले अपने अल्पसंख्यक मोर्चे के सहारे 32 लाख अल्पसंख्यक परिवारों से सीधे जुड़ाव का प्रयास किया है। इसके लिए ईद के अलावा बैसाखी, गुड फ्राइडे और ईस्टर पर गरीब अल्पसंख्यक परिवारों तक सौगात-ए-मोदी के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रेम संदेश व किट भाजपा की ओर से पहुंचाई जा रही है।

सौगात–ए-मोदी किट में क्या है?

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने बताया कि ईद के लिए मुस्लिम परिवारों को किट में सेवइयां चीनी बेसन सूजी सूखे मेवे और परिवार की एक महिला के लिए वस्त्र दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सिख और ईसाई परिवारों के लिए किट अभी तैयार नहीं हुई है क्योंकि उनके पर्वों में अभी कुछ समय शेष है। सूत्रों के अनुसार हर किट की कीमत लगभग ₹500-600 है।

बिहार इंटरमीडिएट रिज़ल्ट: साकिब भी टॉपर

प्रभात खबर की सबसे बड़ी खबर के अनुसार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने मंगलवार को इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित कर दिया। इस बार इंटर परीक्षा में 86.50% विद्यार्थी पास हुए। आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स में कुल 28 टॉपर्स (टॉप 5) हैं जिनमें 18 लड़कियां हैं। साइंस में हरनाटांड़, पश्चिम चंपारण के एक स्कूल की प्रिया जायसवाल 484 अंक (96.8%) के साथ बिहार की टॉपर बनीं। आर्ट्स में वैशाली के स्कूल की अंकिता कुमारी और बक्सर के एक स्कूल के साकिब शाह 473 अंक (94.6%) लाकर पहले स्थान पर रहे। कॉमर्स में हाजीपुर के एक कॉलेज की रोशनी कुमारी ने 475 अंक 95% लाख कर पहला स्थान प्राप्त किया।

विश्वविद्यालयों ने ₹4134 करोड़ सरेंडर किये

भास्कर के अनुसार उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए फंड का रोना रो रहे बिहार के विश्वविद्यालय की हकीकत यह है कि वह काफी राशि खज भी नहीं कर पाते हैं। 2017-22 के दौरान बिहार के विश्वविद्यालयों ने 4134 करोड़ 21 लख रुपए राज्य सरकार को सरेंडर कर दिए। हालांकि इस बीच के 2 साल में शिक्षा विभाग और राजभवन के बीच की खींचतान के कारण ऐसा परिणाम होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। कारण चाहे जो भी हो मंगलवार को विधानमंडल में पेश सीएजी की रिपोर्ट ने बिहार के विश्वविद्यालय में पहली अराजकता को आईना दिखाया है।

राजद के साथ गठबंधन जारी रखेगी कांग्रेस

जागरण के अनुसार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में बिहार कांग्रेस के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में केसी वेणुगोपाल, मीरा कुमार तारिक अनवर, रंजीत रंजन, कृष्णा अल्लावारू, राजेश कुमार के साथ अखिलेश प्रसाद सिंह, शकील अहमद, मदन मोहन झा समेत दूसरे नेता शामिल रहे। बैठक में सहमति बनी कि पार्टी बिहार में राजद व महागठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी और भाजपा-जदयू को पराजित करेगी। पार्टी के बिहार प्रभारी अल्लावारू ने कहा कि पार्टी महागठबंधन के साथ चुनाव तो लड़ेगी लेकिन मुख्यमंत्री का निर्णय चुनाव बाद किया जाएगा।

अगर गरीबों का मुफ्त इलाज नहीं करें तो अपोलो को ले लेगा एम्स: सुप्रीम कोर्ट

जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल दिल्ली गरीबों का मुफ्त इलाज नहीं कर रहा है तो एम्स से इसे अपने अधिकार में लेने के लिए कहा जाएगा। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की पीठ ने यह सख्त टिप्पणी इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल पर लीज एग्रीमेंट के कथित उल्लंघन के आरोप में की। इंद्रप्रस्थ मेडिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा संचालित अपोलो अस्पताल को कारर के अनुसार अपने एक तिहाई गरीब इंडोर मरीज और 40% ओपीडी मरीजों को बिना किसी भेदभाव के मुफ़्त चिकित्सा और अन्य सुविधाएं मुहैया करानी थीं। पीठ ने कहा कि अगर हमें पता चला कि गरीबों लोगों का मुफ्त इलाज नहीं किया जा रहा है तो हम अस्पताल को एम्स के अधिकार में दे देंगे। पीठ ने टिप्पणी की कि अपोलो समूह द्वारा निर्मित अस्पताल को दिल्ली के पॉश इलाके में केवल ₹1 में 15 एकड़ जमीन दी गई थी जिसे बिना नफा या नुकसान के चलना था।

नीरा से बने गुड़ की कीमत ₹20000 प्रति किलो

हिन्दुस्तान के अनुसार उद्योग विभाग की ओर से लगाए गए प्लांट (संयंत्र) में नीरा से महंगा गुड़ बना। उत्पादन लागत के अनुसार इसकी कीमत 1272 रुपये प्रति किलोग्राम से 20,211 रुपये प्रति किलोग्राम तक थी। इस कारण गुड़ बिका नहीं। उद्योग विभाग को इससे घाटा उठाना पड़ा। बाद में उत्पादन बंद करना पड़ा। विधानमंडल में मंगलवार को पेश सीएजी की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उचित योजना और परियोजना की व्यवहार्यता का आकलन किए बिना ही इसे शुरू किया गया। इसके लिए हाजीपुर, बिहारशरीफ, गया और भागलपुर में चार भवन बनाए गए। संयंत्र की स्थापना सिर्फ बिहारशरीफ और हाजीपुर में ही हो पाई।

कुछ और सुर्खियां:

  • आरा में सिरफिरे ने बाप-बेटी को गोली मारने के बाद खुद को भी उड़ाता, तीनों की मौत
  • नगदी मामले से चर्चित दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पहुंची सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक जांच समिति
  • पटना सिटी के मुर्गी फार्म में दो दिनों में 2000 मुर्गियों की मौत, बर्ड फ्लू की आशंका
  • बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा के रिजल्ट में टॉपर में सिमुलतला आवासीय विद्यालय का एक छात्र भी नहीं

अनछपी: बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड हर साल देश में सबसे पहले इंटरमीडिएट मैट्रिक परीक्षा का रिजल्ट जारी करने की वजह से वाहवाही लूटता है और टॉपर के बारे में भी खूब बात होती है लेकिन उन स्कूलों की चर्चा नहीं होती जहां से यह टॉपर आते हैं। एक और दिलचस्प बात यह है कि बिहार सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट वाले स्कूल सिमुलतला आवासीय विद्यालय से टॉपर नहीं आ रहे हैं। यह दोनों बातें बिहार की शिक्षा व्यवस्था में गंभीर समस्या की ओर संकेत करती हैं। जिन स्कूलों से टॉपर निकले हैं, उनके बारे में यह बात अच्छी है कि वह छोटे शहरों या देहात के हैं लेकिन वहां सुविधा और शिक्षकों की कमी इस खुशी पर सवालिया निशान खड़े करती हैं। उदाहरण के लिए आर्ट्स टॉपर साकिब सबा बक्सर के कोरोना सराय के जिस स्कूल के छात्र हैं वहां भूगोल और उर्दू के टीचर नहीं हैं। इस स्कूल में भूगोल के प्रैक्टिकल के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। इसी तरह टॉप फाइव में शामिल संजना कुमारी के स्कूल में हिंदी और भूगोल के शिक्षक नहीं हैं और संजना को दोनों सब्जेक्ट में डिस्टिंक्शन मिला है। बात केवल स्टेट टॉपर की नहीं है बल्कि जिला टॉपरों के ऐसे भी स्कूल हैं जहां प्लस टू में एक भी शिक्षक नहीं है और दो साल में इंटरमीडिएट की पूरी पढ़ाई बिना शिक्षक के पूरी हुई है। ऐसे में कुछ टॉपरों की कामयाबी की कहानी के पीछे लाखों बच्चों की समस्याएं दब जाती हैं। आखिर बिना शिक्षक और बिना लैब वाले स्कूलों से अगर टॉपर निकल रहे हैं तो इसे केवल पढ़ने वालों की मेहनत और कामयाबी माना जाए या इसकी कोई और वजह हो सकती है? बिहार एग्जामिनेशन बोर्ड चूंकि टॉपरों की घोषणा से पहले उनका इंटरव्यू करता है इसलिए उनकी कामयाबी पर शक करना मुमकिन नहीं है लेकिन यह समझना जरूरी है कि आखिर यह कैसे हो पाता है। बहरहाल, असली बात यह है कि स्कूलों की पढ़ाई चंद बच्चों की कामयाबी की चर्चा के साथ खत्म नहीं की जानी चाहिए और वहां जो कमियां हैं उन्हें बराबर उजागर करते रहना चाहिए। बिहार सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बहुत सारे स्कूलों को अपग्रेड कर प्लस टू स्कूल बना तो दिया लेकिन वहां शिक्षकों की बहाली नहीं हुई और बहाली की घोषणाओं के बावजूद अब भी वहां शिक्षकों की और दूसरी सुविधाओं की कमी है जिसपर ध्यान देना जरूरी है।

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