छपी-अनछपी: जज बनकर आईपीएस अफसर की पैरवी, मुजफ्फरपुर के कॉलेज में हिजाब हटाने पर बवाल

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। हमारी व्यवस्था में पैरवी का क्या रोल है, इसका अंदाज़ा आज के अखबारों की एक अहम खबर से होता है जिसमें बताया गया है कि एक जालसाज पटना हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनकर एक आईपीएस अफसर की पैरवी के लिए डीजीपी को व्हाट्सएप्प कॉल कर रहा था। यह और बात है कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसी तरह समाज में गैरजरूरी विवाद खड़ा करने वालों की संख्या भी कम नहीं है। मुजफ्फरपुर में एक परीक्षा के दौरान छात्रा का हिजाब हटाने का मामला भी अखबारों में प्रमुखता से छपा है।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर है: जज बनकर आईपीएस की पैरवी करने में चार गिरफ्तार। इसी खबर की जागरण में सुर्खी है: आईपीएस की पैरवी को चीफ जस्टिस बन डीजीपी को किया फोन।
हिन्दुस्तान के अनुसार: हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पर आईपीएस अफसर आदित्य कुमार के लिए डीजीपी एसके सिंघल पर दबाव बनाने के मामले का पता चला है। ईओयू ने इस मामले में मुख्य अभियुक्त अभिषेक भूपालका उर्फ अभिषेक अग्रवाल समेत साजिश में शामिल चार जालसाजों को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से ढेरों फर्जी सिमकार्ड और 9 मोबाइल बरामद हुए हैं। गया के तत्कालीन एसएसपी और वर्तमान में एआईजी (आई) आदित्य कुमार को भी ईओयू ने नामजद किया है। वह फरार बताए जाते हैं, उनका मोबाइल भी बंद आ रहा है। तत्कालीन एसएसपी आदित्य पर गया के फतेहपुर थाने में शराब के मामले में गलत कार्रवाई करने का केस है। जालसाज अभिषेक, डीजीपी एसके सिंघल को फोन कर इसी केस को रफादफा करने का दवाब बनाता था।
अभिषेक पहले भी दिल्ली से पटना तक ऐसी घटनाओं को अंजाम दे चुका है। गृहमंत्री के नाम पर फोन कर वह आईपीएस अफसरों पर काम करने का दवाब बनाता था। इस मामले में वह लम्बे समय तक तिहाड़ जेल में कैद रहा। उसने बिहार कैडर के आईपीएस अफसर सौरभ साह के पिता से भी जालसाजी की है। इसको लेकर कहलगांव में प्राथमिकी दर्ज है।
भास्कर की सबसे बड़ी खबर की भी यही है लेकिन इसमें मामला कुछ आगे का बताया गया है। इसकी सुर्खी है: IPS ने अपने दोस्त को चीफ जस्टिस बना डीजीपी को लगातार फोन करवा केस खत्म करवाया, खुलासा हुआ तो गायब हो गए। प्रभात खबर की लीड है डीजीपी को किया चीफ जस्टिस के नाम पर फोन, फंस गए आईपीएस।
जागरण की सबसे बड़ी खबर है: एनएमसीएच के अधीक्षक को नहीं थी डेंगू वार्ड की जानकारी, कार्रवाई सही। यह बयान उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तेजस्वी यादव का है। उन्होंने पिछले दिनों एनएमसीएच के निरीक्षण के दौरान वहां के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ बिनोद कुमार सिंह के काम को लापरवाही भरा बताया था और उसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। फिर आईएमए ने आंदोलन की चेतावनी दी थी तो तेजस्वी यादव ने उनके निलंबन का यह कारण बताया। अब आईएमए यह कह रहा है कि वह इस मामले में कोई आंदोलन तो नहीं करेगा लेकिन उसकी मांग है कि यह निलंबन वापस किया जाए क्योंकि डॉक्टर बीएन सिंह ने कोरोना के दौरान बहुत महत्वपूर्ण सेवा दी थी।

भारत में मेडिकल की पढ़ाई हिंदी भाषा में करने की कोशिश भोपाल से शुरू हुई है। जागरण में इस खबर की हेडिंग गृह मंत्री अमित शाह का बयान है: चिकित्सा शिक्षा एमबीबीएस की हिंदी में पढ़ाई का शुभारंभ पुनर्जागरण का क्षण। उन्होंने यह बयान रविवार को एमबीबीएस प्रथम वर्ष की एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमेस्ट्री की हिंदी पुस्तकों के विमोचन के समय दिया।
जागरण की दूसरी सबसे बड़ी खबर की सुर्खी: है 75 जिलों में डिजिटल बैंकिंग यूनिट शुरू। हिन्दुस्तान ने लिखा है: सुविधा: बैंक सेवाएं दिन-रात मिलेंगी, 75 जिलों से हुई शुरुआत।
मुजफ्फरपुर के एमडीडीएम कॉलेज में हिजाब को लेकर हुए बवाल पर जागरण की सुर्खी है: परीक्षा में जांच के दौरान हिजाब हटाने को कहने पर छात्रा का जमकर हंगामा। हिन्दूस्तान ने लिखा है: एमडीडीएम कॉलेज में हिजाब पर बवाल। इन खबरों में बताया गया है कि आरोपित वीक्षक में छात्रा से पाकिस्तान चले जाने को कहा हालांकि प्रिंसिपल डॉ कनुप्रिया ने इन आरोपों को गलत बताया है।

अनछपी: मुज़फ़्फ़रपुर के महंत दर्शन दास महिला कॉलेज में एक इन्विजिलेटर से जब हिजाब लगाई परीक्षार्थी ने कहा  कि वह किसी महिला को बुलाएं तो वह हिजाब हटाकर दिख देगी कि उसके कानों में कोई ब्लूटूथ वगैरा नहीं है लेकिन वह वीक्षक इसके लिए तैयार नहीं हुए तो उस छात्रा ने पुलिस और घरवालों को सूचित किया। उस कॉलेज की प्रिंसिपल कनुप्रिया का कहना है कि हिजाब मुद्दा नहीं था। उनके अनुसार परीक्षा हॉल में वीक्षक के कहने पर 20 से अधिक छात्राओं ने अपना मोबाइल निकाल कर अलग रख दिया था। “एक छात्रा ने मोबाइल नहीं रखा तो उसे वीक्षक ने मोबाइल निकाल कर रख देने के लिए कहा तो इसी बात पर वह छात्रा परीक्षा हॉल से निकलकर हंगामा करने लगी।” हमारे विचार में इस मामले में प्रिंसिपल लीपापोती कर रही हैं। बात इतनी सी थी कि उस लड़की ने किसी महिला से जांच करवाने की बात कही थी, मगर वीक्षक ज़िद पर अड़े थे कि उनके सामने हिजाब हटाये। बेहतर तो यह है कि हिजाब पहनने वाली छात्राओं की जांच के लिए किसी महिला को ही यह जिम्मेदारी दी जाए ताकि ऐसे गैर ज़रूरी विवाद से बचकर शिक्षा पर ध्यान लगाया जाए। आखिर, एक महिला कॉलेज की महिला प्रिंसिपल से यह उम्मीद तो की ही जा सकती है।

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