छ्पी-अनछपी: खड़गे बोले- मोदी-नीतीश की जोड़ी सिर्फ कुर्सी के लिए, अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी केवल कुर्सी के लिए साथ है। अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन हुआ है। बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा सितंबर में हो सकती है। भोजपुर में बारात में हुए झगड़े में पांच लोगों पर गोली चलाई गई जिनमें दो की मौत हो गई।
और, जानिएगा कि बिहार के हज यात्रियों को सबसे ज्यादा किराया क्यों देना पड़ता है।
पहली खबर
जागरण के अनुसार कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी सिर्फ कुर्सी के लिए साथ है, देश की अच्छाई के लिए नहीं। दोनों किसानों और देश को बर्बाद करने के लिए एकजुट हैं। सत्ता के लिए कभी नीतीश हमारे साथ आ जाते हैं कभी बीजेपी के साथ हो जाते हैं। वह रविवार को बक्सर के दल सागर खेल मैदान में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम के लिए कांग्रेस का नारा ‘जय बापू, जय भीम, जय संविधान’ था। श्री खड़गे ने आरएसएस और बीजेपी को जमकर खड़ी खोटी सुनाई और कहा कि देश की आजादी में इन दोनों का कोई हाथ नहीं है। भाजपा और आरएसएस के घर का एक कुत्ता भी नहीं मारा और यह देश के स्वाभिमान की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं ने अपना खून बहाया है तब जाकर देश को आजादी मिली है। खड़गे इतने पर नहीं रुके उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झूठे का सरदार बताया और एक-एक कर उनके पूर्व में किए गए 12 वादे के नया जो पूरे नहीं हुए। उन्होंने कहा कि 2015 में ही बक्सर में आए मोदी ने बिहार को स्पेशल पैकेज देने का वादा किया था पर वह आज तक नहीं दे सके।
पूरे अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन
प्रभात खबर के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर उनके अपने ही देश में लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। 15 दिन के अंदर दूसरी बार हजारों लोग ट्रंप की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन वहां के सभी 50 राज्यों में हुए। द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक व्हाइट हाउस के सामने भी लोगों ने हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन किया। इस आंदोलन को 50501 नाम दिया गया है इसका मतलब है 50 विरोध प्रदर्शन, 50 राज्य एक आंदोलन। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह प्रदर्शन ट्रंप की नीतियों के प्रति नाराजगी जीतने के लिए हुआ जिसमें टैरिफ, धमकियां, संघीय नौकरी में कटौती और आव्रजन कानून शामिल हैं।
बिहार में चुनाव की घोषणा सितंबर में संभव
हिन्दुस्तान के अनुसार चुनाव आयोग सितंबर के प्रथम सप्ताह में बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा कर सकता है। इसको लेकर आयोग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। निर्वाचन विभाग के सूत्रों के अनुसार पिछली बार की तरह इस बार भी तीन फेज में सभी 243 सीटों पर चुनाव संपन्न होने की संभावना है। चुनाव के एलान के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। पिछली बार कोरोना महामारी के असर के कारण 25 सितंबर 2020 को चुनाव की घोषणा की गयी थी। जबकि, 2015 में विधानसभा चुनाव की घोषणा 9 सितंबर को हुई थी। वर्तमान में राज्य में स्थिति सामान्य है। ऐसे में आयोग तय समय पर चुनाव की घोषणा करने की तैयारी में जुटा है। मालूम हो कि 2020 में बिहार विधानसभा का कार्यकाल 29 नवंबर को समाप्त हो रहा था जबकि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक है। इसलिए भी चुनाव की घोषणा पहले की जा सकती है।
बारात में झगड़ा, फायरिंग- 2 की मौत
भोजपुर के गड़हनी थाना क्षेत्र के लहरपा गांव में रविवार की रात एक बारात में मामूली विवाद को लेकर कुछ लोगों की ओर से ताबड़तोड़ फायरिंग की गयी। इसमें गोली लगने से किशोर सहित दो की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर से जख्मी हो गये। घायलों में दो की स्थिति काफी नाजुक बनी है। मृतकों में लहरपा गांव निवासी राहुल कुमार और लवकुश बताये जा रहे हैं। घायलों में उसी गांव का अप्पू कुमार, पंकज कुमार और नारायणपुर थाना क्षेत्र के भलुनी गांव का निवासी अक्षय सिंह है। अप्पू की हालत भी नाजुक बनी है। इनमें कुछ घायलों का इलाज आरा सदर अस्पताल और कुछ का निजी अस्पताल में कराया जा रहा है। हालांकि घटना का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है। लेकिन गांव में थार कार से दूसरी गाड़ी के सटने के विवाद में वारदात को अंजाम देने की चर्चा चल रही है।
बिहार के हज यात्रियों को लगता है सबसे ज़्यादा सफर खर्च
जागरण के अनुसार बिहार के हज यात्रियों को इस बार भी हज यात्रा के लिए अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक किराया देना होगा। बिहार राज्य हज कमेटी ने इसका कारण गया का छोटा हवाई अड्डा बताया है। अधिक किराए के चलते लगभग 2100 हज यात्रियों ने गया की जगह कोलकाता और मुंबई से उड़ान भरना चुना है। यहां किराया कम और सुविधाएं बेहतर है। हज यात्रा 2025 के लिए बिहार के हज यात्रियों को अन्य राज्यों की तुलना में ₹90000 अधिक चुकाने होंगे। देश के 20 हवाई अड्डों में गया का किराया 4 लाख 1850 रुपए सबसे अधिक है जबकि मुंबई से सबसे कम तीन लाख 19 हजार 600 है।
कुछ और सुर्खियां:
- बेतिया पुलिस लाइन में आपसी रंजिश में भोजपुर के सिपाही सर्वजीत कुमार को कैमूर के सोनू कुमार ने गोलियों से भून डाला
- दरभंगा में हर्ष फायरिंग में नर्तकी की गोली लगने से मौत
- जम्मू कश्मीर के रामबन जिले में बादल फटने से तीन लोगों की मौत
- बगहा निवासी कर्नाटक के पूर्व डीजीपी ओम प्रकाश की बेंगलुरु वाले घर में हत्या, परिवार वालों पर शक
- बिहार का स्वास्थ्य विभाग 20016 पदों पर भर्ती करेगा
अनछपी: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत का बयान छपा है कि वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए हिंदुओं की एकजुटता बहुत जरूरी है। उनके बयान की खबर पर सुर्खी लगी है: हिंदुओं की एकजुटता से भारत बनेगा विश्व गुरु। आरएसएस के लोग अक्सर मुसलमानों को देश विरोधी साबित करने के लिए यह सवाल करते हैं कि उनके लिए धर्म पहले है या देश। अब श्री मोहन भागवत के इस बयान पर पूछा जा सकता है कि उनके लिए धर्म पहले है या देश। अगर श्री भागवत यह कहते कि भारतीयों की एकजुटता से भारत बनेगा विश्व गुरु तो शायद किसी को आपत्ति नहीं होती और यह सांप्रदायिक सद्भावना और देश प्रेम की बात मानी जाती। क्या उनके बारे में यह कहा जा सकता है कि उनकी नजर में देश को विश्वगुरु बनाने के लिए देशवासियों की नहीं केवल हिंदुओं की एकजुटता जरूरी है? सच्चाई यह है कि जब देश में सब कुछ आपके धर्म के अनुसार हो रहा हो तो आप दूसरों से यह सवाल कर सकते हैं कि उनके लिए देश पहले है या धर्म। यह सवाल दरअसल देशभक्ति के लिए नहीं की जाती बल्कि इसके पीछे मंशा यह रहती है कि आप अपने धर्म पर ना चलें और जो लोग शासन और सत्ता में हैं, उनके धर्म और उनके बताए हुए रास्ते पर चलें। हम आरएसएस की बार-बार चर्चा इसलिए करते हैं क्योंकि यह हर किसी की समझ में आने वाली बात है कि देश इस समय आरएसएस के विचार और उसकी विचारधारा पर चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गर्व से कहते हैं कि वह आरएसएस के प्रचारक रहे हैं और जाहिर है उनके आरएसएस की नीतियों पर चलने पर किसी को आश्चर्य नहीं होता है। इसीलिए आरएसएस का कोई भी बयान आए तो उसकी समीक्षा जरूरी है। इस समय तो आरएसएस की शाखा भारतीय जनता पार्टी के एक सांसद निशिकांत दुबे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना पर अवमाननाजनक टिप्पणी करने के लिए चर्चा में हैं। लेकिन उनके बयान में गृह युद्ध की बात भी है तो उनसे पूछा जा सकता है कि इस समय कथित तौर पर नरेंद्र मोदी भारत के सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री और अमित शाह सबसे शक्तिशाली गृह मंत्री हैं तो उनके रहते भारत में गृह युद्ध क्यों हो रहे हैं? यही नहीं श्री दुबे ने तो पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी के धर्म पर भी सवाल उठा दिया। यह वही लोग हैं जो सवाल करते हैं कि आपके लिए धर्म पहले है या देश। जब अपनी बारी आती है तो यह धर्म को ऊपर रखते हैं और दूसरों को इसके लिए लांछित करते हैं। इनसे सावधान रहने की जरूरत है।
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