छ्पी-अनछपी: सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर आज फिर सुनवाई, हरिद्वार के मंदिर में भगदड़- 8 की मौत
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। विवादों में घिरे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बारे में आज सुप्रीम कोर्ट में फिर सुनवाई होगी। हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भगदड़ मचने से आठ लोगों की मौत हो गई। चुनाव आयोग ने एक बार फिर कहा है कि नोटिस दिए बगैर मतदाताओं के नाम नहीं काटे जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया है कि अंतरिक्ष क्षेत्र में 200 से ज्यादा स्टार्टअप शुरू हुए हैं।
और, जानिएगा कि पटना की किस जगह से कुत्ते के नाम से कुत्ते की तस्वीर लगा निवास प्रमाण पत्र जारी किया गया।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में सोमवार का दिन हलचल भरा रहने वाला है। शीर्ष कोर्ट आज कई अहम मामलों की सुनवाई करेगा जिसमें सबसे महत्वपूर्ण बिहार में विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) का मामला होगा। इस मामले में सुनवाई से बिहार में एसआईआर का भविष्य तय होगा। बिहार में एसआईआर का मामला सबसे अहम है। पिछली सुनवाई पर कोर्ट ने पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई थी। कोर्ट ने माना था कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण करने का संवैधानिक अधिकार है हालांकि सवाल जरूर उठाया था और कहा था कि यह मामला लोकतंत्र के मूल और मतदान के अधिकार से जुड़ा हुआ है। आयोग ने आधार, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र को मान्य दस्तावेजों में शामिल करने पर कहा कि आधार केवल पहचान का सबूत है। इसके अलावा आवास से नकदी मिलने के आरोपों में घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा को दोषी ठहराने वाली आंतरिक कमेटी की रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर भी कोर्ट सुनवाई करेगा।
नोटिस दिए बिना नहीं कटेगा मतदाताओं का नाम
हिन्दुस्तान के अनुसार चुनाव आयोग ने रविवार को कहा है कि नोटिस दिए बगैर सूची से मतदाताओं के नाम नहीं कटेंगे। प्रारूप मतदाता सूची से नाम हटाने के पहले निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी ( ईआरओ) या सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (एईआरओ) को नोटिस और सूचना देनी होगी। मतदाता ईआरओ के निर्णय के असहमत रहे तो जिला मजिस्ट्रेट और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील कर सकते हैं। ईआरओ के निर्णय के विरुद्ध अपील दायर करने में लोगो की मदद के लिए स्वयंसेवक प्रशिक्षित किए जा रहे हैं। अपील दायर करने के लिए मानक प्रारूप बन रहा है। आयोग के अनुसार, लोगों को आसानी से अपील दायर करने की सुविधा देने के लिए इसे व्यापक रूप से प्रसारित भी किया जाएगा। रविवार को चुनाव आयोग के सहायक निदेशक अपूर्व कुमार सिंह ने इसकी जानकारी दी।
हरिद्वार में भगदड़, 8 की मौत
उत्तराखंड के हरिद्वार में मां मनसा देवी मंदिर में रविवार को भगदड़ मच गई। इसमें आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई जबकि 30 लोग घायल हैं। हादसा सुबह करीब 9:00 बजे हुआ। उस वक्त मंदिर की तीन मीटर चौड़ी सीढ़ियों पर रोज की तुलना में 5 गुना भीड़ थी। एसएसपी परमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि इसी दौरान करंट की अफवाह फैली। इससे लोग घबरा गए और भगदड़ मच गई। 38 घायलों को अस्पताल ले जाया गया जहां आठ ने दम तोड़ दिया। मरने वालों में एक अररिया जिले का युवक भी शामिल है। घायलों में से 13 उत्तर प्रदेश के जबकि छह बिहार के श्रद्धालु और एक-एक हरियाणा और दिल्ली से हैं। एक घायल का पता नहीं लग पाया है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में 200 से ज्यादा स्टार्टअप
प्रभात खबर के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 124वें संस्करण में रविवार को देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “अभी हाल में ही शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष से वापसी की बहुत चर्चा हुई। जैसे ही शुभांशु धरती पर उतरे तो पूरा देश खुशी और गर्व से भर गया। बच्चों में अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा की नई लहर जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में 200 से ज्यादा स्टार्टअप शुरू हो चुके हैं।”
कुत्ते के नाम जारी कर दिया निवास प्रमाण पत्र
हिन्दुस्तान के अनुसार मसौढ़ी अंचल कार्यालय आरटीपीएस की ओर से अजीबोगरीब कारनामा सामने आया है। आरटीपीएस काउंटर ने 24 जुलाई को एक जानवर की तस्वीर लगाकर उसका नाम और पता अंकित कर निवास प्रमाण पत्र निर्गत किया है। विभागीय लापरवाही और गैरस्तरीय कार्य को उजागर करने वाला निर्गत निवास प्रमाण पत्र संख्या बीआरसीसीओ 2025/ 15933581 में राजस्व पदाधिकारी मुरारी चौहान का डिजिटल हस्ताक्षर है। प्रमाण पत्र में डॉग बाबू, पिता कुत्ता बाबू, माता कुटिया देवी काउलीचक वार्ड 15 मसौढ़ी अंकित है। संबंधित प्रमाण पत्र मसौढ़ी में चर्चा का विषय बना तो विभागीय अधिकारियों की नींद खुली। आनन-फानन में रविवार की शाम आरटीपीएस पोर्टल पर लोड जानवर का निवास प्रमाण रद्द कर राजस्व पदाधिकारी का डिजिटल हस्ताक्षर हटाया गया है। हालांकि सर्वर पर एक जानवर का निर्गत निवास प्रमाण पत्र की कैंसिल कॉपी अभी भी लोड है। इस मामले में मसौढ़ी के अंचलाधिकारी प्रभात रंजन ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद प्रमाणपत्र रद्द कर दिया गया है। सोमवार को सरकारी दस्तावेज से छेड़छाड़ और साइबर फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज किया जाएगा।
कुछ और सुर्खियां:
- बिहार में सफाई कर्मचारी आयोग का गठन होगा, अध्यक्ष- उपाध्यक्ष और पांच सदस्य होंगे
- पटना मेट्रो का ट्रायल रन 10 अगस्त को, 15 अगस्त को पहले चरण का होना है उद्घाटन
- एसआईआर का पहला चरण पूरा, 7.24 करोड़ मतदाताओं के गणना फॉर्म जमा, करीब 36 लाख लापता, 22 लाख मृत घोषित
- ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में सरकार रखेगी अपना पक्ष
- बिहार पुलिस में सिपाही बहाली के चौथी चरण की परीक्षा में 80% हाज़िरी, 9 उम्मीदवारों पर कार्रवाई
अनछपी: बिहार में सफाई कर्मचारी आयोग के गठन की घोषणा दरअसल पिछले कुछ दिनों से चल रहे उस सिलसिले की एक कड़ी है जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुरू किया है जिसके तहत या तो पुराने अयोगी में लोगों की बहाली की जा रही है या कोई नया आयोग बनाया जा रहा है। अगर नीतीश कुमार को वाक़ई सफाई कर्मचारियों की चिंता रही होती तो गटर में उतरकर सफाई करने वाले कर्मचारियों को मौत से बचाने के लिए किसी उपाय की घोषणा करते। दुनिया भर में सफाई के लिए मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन बिहार और भारत के बड़े हिस्से में अब तक इंसानों को ही इस काम में लगाया जाता है। नीतीश कुमार सफाई कर्मचारी आयोग के गठन के बहुत से फायदे गिना सकते हैं लेकिन आमतौर पर यह बात मानी जाती है कि अब आयोग और बोर्ड दरअसल उन नेताओं को एक तरह से रोजगार देने का जरिया बन गए हैं जो मंत्री बनने से रह गए हैं और ऐसे लोग भी जो विधायक नहीं बन पाए हैं। जब तक इन आयोगों और बोर्डों से आम आदमी के फायदे की बात होती है तब तक तो इस पर सवाल नहीं खड़ा किया जाता लेकिन नीतीश कुमार को यह बताना चाहिए कि अगर इन आयोगों से आम आदमी की भलाई का काम होता है तो इतने दिनों तक इन्हें खाली क्यों रखा गया और अब जबकि चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं तो इन्हें क्यों भरा जा रहा है। नेताओं को वैसे तो जनता का सेवक बताया जाता है लेकिन हकीकत यह है कि नेता असल में Bजनता को बेवकूफ बनाते हैं और उसके टैक्सों के पैसे से मौज मस्ती करते हैं। सफाई कर्मचारी आयोग बनाने से कुछ नेताओं के वेतन भत्ते की व्यवस्था हो जाएगी और शायद ही कोई यह बात मानता होगा कि इससे सफाई कर्मचारियों का कोई भला होगा। इन नेताओं को वेतन भत्ता जनता की गाढ़ी कमाई से ही मिलेगा। जनता के पैसे से अपनी इच्छा पूरी करना और इस तरह की मनमानी करना जनता की भलाई का काम कैसे हो सकता है? अब जबकि यह फैसला हो ही चुका है तो आने वाले नेताओं को सफाई कर्मचारी आयोग के तहत सबसे पहले काम यह करना चाहिए कि सफाई के खतरे भर काम में मशीन की मदद ली जाए और सफाई कर्मचारियों की जान सुरक्षित बनाई जाए।
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