छ्पी-अनछपी: वोट चोरी के खिलाफ 300 सांसदों का मार्च, सम्राट चौधरी की सुरक्षा पर हर महीने ₹33 लाख
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए 300 सांसदों ने सड़क से संसद तक मार्च किया। बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी की सुरक्षा पर अब हर महीने 33 लख रुपए खर्च होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 21 अगस्त को अल्पसंख्यक समाज के लोगों के बीच रखेंगे अपनी बात।
और, जनिएगा कि मुसलमानों के लिए खास चैटबोट ‘नूरआई’ कहां तैयार हुआ है।
पहली खबर
भास्कर के अनुसार विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने कथित ‘वोट चोरी’ बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरक्षण (एसआईआर) में गड़बड़ियों के खिलाफ सोमवार को संसद से मार्च निकाला। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई में निकले मार्च में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, एनसीपी-एस के शरद पवार और समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव सहित लोकसभा व राज्यसभा के करीब 300 सांसद थे। पुलिस ने संसद मार्ग पर बैरिकेड लगाकर रोका तो सांसद सड़क पर ही बैठ गए। इस पर पुलिस सभी को हिरासत में लेकर संसद मार्ग थाना ले गई और 2 घंटे बाद रिहा किया। राहुल के वोट चोरी के आरोपी के बाद विपक्ष का यह पहला ऐसा शक्ति प्रदर्शन था। पिछले 10 साल में पहली बार विपक्ष ने ऐसा प्रदर्शन किया। शाम को खड़गे की मेजबानी में हुए डिनर में विपक्षी एका दिख। गठबंधन छोड़ चुकी आम आदमी पार्टी के सांसद प्रदर्शन व डिनर दोनों में रहे।
यह एक व्यक्ति, एक वोट की लड़ाई : राहुल
पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि हकीकत यह है कि वह बोल नहीं सकते हैं। सच्चाई देश के सामने है। यह लड़ाई राजनीतिक नहीं है, यह संविधान को बचाने की लड़ाई है। एक व्यक्ति, एक वोट की लड़ाई है। हम एक साफ-सुथरी और सही मतदाता सूची चाहते हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव पुलिस बैरिकेड के ऊपर से कूद गए। इस बीच पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके विरोध में अखिलेश यादव दूसरी तरफ ही धरने पर बैठ गए। उनके अलावा तृणमूल कांग्रेस सुष्मिता देव, महुआ मोइत्रा और कांग्रेस की कई महिला सांसदों ने भी बैरिकेड पर चढ़कर नारेबाजी की।
सम्राट चौधरी की सुरक्षा पर हर महीने खर्च होगा ₹33 लाख
हिन्दुस्तान के अनुसार राज्य सरकार ने बिहार के उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, सांसद पप्पू यादव सहित छह नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी है। आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान संभावित खतरे को देखते हुए सम्राट चौधरी की सुरक्षा जेड श्रेणी से बढ़ा एडवांस सिक्योरिटी लाइजन (एएसएल) के साथ जेड प्लस श्रेणी की कर दी गयी है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बाद उप मुख्यमंत्री सम्राट एएसएल सुरक्षा धारण करने वाले बिहार के तीसरे शख्स होंगे। वहीं, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा वाई प्लस से बढ़ा कर जेड श्रेणी कर दी गयी है। बिहार पुलिस सूत्रों के मुताबिक उप मुख्यमंत्री बनने पर सम्राट चौधरी को जेड श्रेणी की सुरक्षा मिली थी, जिस पर प्रतिमाह 16 लाख रुपये का खर्च था। अब जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिलने पर लगभग 33 लाख रुपये प्रति माह का खर्च आयेगा।
जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा में सीआरपीएफ के दस कमांडो सहित 55 से अधिक पुलिस कर्मी तैनात होते हैं। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, अररिया के भाजपा सांसद प्रदीप कुमार सिंह और बाढ़ के भाजपा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू को वाई प्लस श्रेणी जबकि जदयू विधान पार्षद सह सत्तारूढ़ दल के सचेतक नीरज कुमार को वाई श्रेणी की सुरक्षा देने का निर्णय लिया गया है।
नीतीश कुमार अल्पसंख्यक समाज से मिलेंगे
जागरण के अनुसार लंबी अवधि के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अल्पसंख्यक समाज के लोगों से किसी बड़े आयोजन में रूबरू होंगे। विधानसभा चुनाव को केंद्र में रखकर इस आयोजन की राजनीतिक गलियारा में खूब चर्चा है। आयोजन का नाम अल्पसंख्यक संवाद रखा गया है। यह 21 अगस्त को पटना के बापू सभागार में आयोजित हो रहा। सभागार की क्षमता 5000 लोगों की है। आयोजन वैसे मदरसा बोर्ड के शताब्दी समारोह का है पर जदयू ने इस कार्यक्रम से अपने को जोड़ लिया है। जड़ियों ने हाल ही में जिला स्तर पर अल्पसंख्यक सम्मेलन का आयोजन किया था। ध्यान रहे कि जदयू के दिग्गज नेता ने पिछले दिनों सार्वजनिक रूप से यह बात कही थी कि अल्प सच्चे समाज के लोग जदयू को वोट नहीं करते। इस बयान पर काफी प्रतिक्रिया आई थी।
मुसलमानों के लिए खास चैटबोट ‘नूरआई’
प्रभात खबर के अनुसार मलेशिया की तकनीकी कंपनी जेट्रिक्स एआई बीएचडी ने एआई एक नई दिशा देते हुए मुस्लिम उपयोगकर्ताओं के लिए सांस्कृतिक और धार्मिक मार्गदर्शन वाला चैटबॉट लॉन्च किया है। कंपनी ने चीन की डीपसीक के साथ साझेदारी कर नूर एआई नाम के एक बड़े भाषा मॉडल को विकसित किया है जो खास तौर पर मुस्लिम बहुल बाजारों के लिए तैयार किया गया है। यह चैटबॉट मलय, इंडोनेशियाई, अरबी और अंग्रेजी में संवाद कर सकता है और खाने पीने के चुनाव से लेकर कानूनी मामला तक हर विषय पर शरिया सिद्धांत के अनुरूप सलाह देता है। आने वाले महीनों में जेट्रिक्स इसमें इस्लामी विद्वानों के एआई अवतार जोड़ेगा जो जीवन शैली, स्वास्थ्य और वित्त संबंधी सलाह इस्लामी शिक्षाओं के आधार पर देंगे। नूर एआई न केवल रोजमर्रा के सवालों का जवाब देगा बल्कि दीर्घकाल में मलेशिया की सरिया आधारित अदालत प्रणाली में प्रशासनिक कार्यों के स्वचालन और लंबित मामलों को घटाने में मदद करेगा।
कुछ और सुर्खियां:
- उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में एक बाइक पर छह लोग सवार थे, ट्रैक्टर से टक्कर के बाद 5 की मौत
- दिल्ली से रायपुर पहुंची एयर इंडिया की उड़ान का दरवाजा नहीं खुलने से 120 यात्री 1 घंटे तक फंसे रहे
- पश्चिम चंपारण के गोवर्धना थाना क्षेत्र में बाघ के हमले में किसान की मौत, वनकर्मी जख्मी
- ग़ज़ा में इसराइल के हवाई हमले में क़तर के न्यूज़ चैनल अल जजीरा के संवाददाता अनस अल शरीफ और उनके तीन साथी मारे गए
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में मकबरे को मंदिर बता लहराया भगवा, तोड़फोड़ के बाद तनाव
अनछपी: केंद्रीय रोड और ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर नितिन गडकरी के बहुत सारे बयान आपको अच्छे लगते होंगे लेकिन उनके ही चुनाव क्षेत्र और शहर नागपुर से यह खबर आई है कि एक आदमी की बीवी जब सड़क दुर्घटना में मारी गई तो मदद के लिए उसकी गुहार पर किसी राहगीर ने ध्यान नहीं दिया और इसके नतीजे में उसे अपनी बीवी की लाश को मोटरसाइकिल पर बांधकर गांव ले जाना पड़ा जो 80 किलोमीटर दूर था। खबरों के अनुसार नागपुर से मध्य प्रदेश जाने वाले हाईवे पर यह दुर्घटना हुई और हालांकि लोगों ने उसकी कोई मदद नहीं की लेकिन वीडियो जरूर बनाया जिसके वायरल होने के बाद यह बात सबके सामने आई। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस की इंसानियत कुछ हद तक जगी और नागपुर पुलिस ने उस आदमी का पता लगाकर उसकी बीवी की लाश का पोस्टमार्टम कराया। अब पुलिस उस ट्रक का पता लग रही है जिसके धक्के से यह सड़क दुर्घटना हुई। हम विश्वगुरु होने का दावा करते हैं लेकिन एक बेबस आदमी अपनी बीवी की लाश को मोटरसाइकिल पर बांधकर 80 किलोमीटर का सफर तय करता है और रास्ते में ना तो समाज का कोई आदमी उसकी मदद के लिए सामने आता है और ना ही सरकार का कोई कारिंदा। उम्मीद है कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अपनी हमदर्दी के तहत काम करते हुए न केवल इस व्यक्ति की मदद करेंगे बल्कि कोई ऐसी व्यवस्था करेंगे कि अगर सड़क पर कोई दुर्घटना होती है तो उसे जरूर कोई ना कोई सरकारी मदद मिले। समाज के हर वर्ग को यह सोचना चाहिए कि आखिर हम में से कोई आदमी उसकी मदद के लिए क्यों सामने नहीं आया जो अपनी बीवी की लाश को लेकर बेबस चल रहा था। हम जिस पश्चिमी समाज को बार-बार कोसते हैं क्या कभी आपने उन जगहों से ऐसी दुर्घटनाओं के बाद इस तरह मोटरसाइकिल पर लाश ले जाने की खबर पढ़ी है? विश्वगुरु तो बनना दूर की बात है फिलहाल अगर हम एक सभ्य और हमदर्द समाज की तरह ही बर्ताव करें तो बहुत बड़ी बात होगी।
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