छ्पी-अनछपी: राहुल को गांधी मैदान में रात बिताने की इजाज़त नहीं, सात साल बाद मोदी चीन में
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। वोटर अधिकार यात्रा के समापन से पहले लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को सुरक्षा कारण बता कर पटना के गांधी मैदान में रात बिताने की इजाजत नहीं दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन के दौरे पर पहुंचे हैं। इंश्योरेंस कंपनियों से विवाद में कैशलेस इलाज पर संकट महसूस किया जा रहा है।
और, जनिएगा कि एक अध्ययन में पता चला है कि बिहार में 60 फ़ीसद लोग बिना जरूरत ज्यादा सोचते रहते हैं।
पहली खबर
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 31 अगस्त की रात को गांधी मैदान में राज्यभर से आए कार्यकर्ताओं के साथ खुले गांधी मूर्ति के पास से आसमान के नीचे सोने का प्लान बनाया था। कांग्रेस का यह प्लान फेल हो गया है। प्रशासन ने सुरक्षा चुनौतियों के नाम पर राहुल गांधी को 31 अगस्त की रात गांधी मैदान में सोने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस कारण राहुल गांधी आरा में वोटर अधिकार यात्रा पूरी कर 30 अगस्त की शाम दिल्ली लौट गए। अब वे 1 सितंबर को यात्रा के समापन के लिए पटना लौटेंगे। इससे पहले 1 सितंबर को गांधी मैदान में रैली करने की योजना पर भी पानी फिर गया था। सरकारी कार्यक्रमों के लिए गांधी मैदान के 30 अगस्त तक आवंटित होने की बात कहकर कांग्रेस को मैदान नहीं दिया गया था। इस कारण कांग्रेस को पदयात्रा करने की योजना बनानी पड़ी। 17 अगस्त से शुरू हुई राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा का समापन मार्च 1 सितंबर को गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति से शुरू होकर हाईकोर्ट के पास स्थित आंबेडकर प्रतिमा तक होगा। सुबह 10:50 बजे से मार्च शुरू होगा। इसमें झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत महागठबंधन के घटक दलों के कई प्रमुख नेता मौजूद रहेंगे। राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और दीपंकर भट्टाचार्य के नेतृत्व में महागठबंधन के घटक दलों के समर्थक पदयात्रा करेंगे।
पूरे देश में गरीबों की आवाज़ गूंजेगी: राहुल
हिन्दुस्तान ने लिखा है कि देश के चर्चित दलित नेता बाबू जगजीवन राम की कर्मभूमि रोहतास से 17 अगस्त को शुरू हुई इंडिया गठबंधन की वोटर अधिकार यात्रा 14वें दिन शनिवार को उनकी जन्मभूमि आरा पहुंची। यहां लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि बिहार से पहले भी क्रांति की शुरुआत हुई है। बिहार से शुरू वोटर अधिकार यात्रा अब पूरे देश में फैलने जा रही है। अब पूरे देश में गरीबों और युवाओं की आवाज गूंजेगी। महज तीन मिनट के संबोधन में राहल ने उत्साहित भीड़ को समझाया कि चोरी सिर्फ आपके वोट की नहीं, आपके अधिकार और भविष्य की भी है। इसके पहले शनिवार को वोटर अधिकार यात्रा की शुरुआत छपरा से हुई और बबुरा, कोईलवर होते हुए आरा पहुंची। पूरे रास्ते जगह-जगह लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। आरा के वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में आयोजित जनसभा में राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी सिर्फ अदाणी-अंबानी के लिए सरकार चलाते हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि गरीबों की आवाज इस देश में नहीं सुनी जाए। उसे दबाई जाए। लेकिन, अब पूरे देश में गरीबों और युवाओं की आवाज गूंजेगी। महाराष्ट्र, हरियाणा और लोकसभा चुनाव में वोट चोरी की गई, लेकिन हम बिहार का चुनाव चोरी नहीं होने देंगे। यह आंबेडकर और गांधीजी के संविधान को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि पहले आपको रास्ते दिए जाते थे, पब्लिक सेक्टर था। सेना को अग्निवीर बना दिया गया और सारे रास्ते आपसे छीन लिये गये।
सात साल बाद मोदी चीन में
हिन्दुस्तान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान दौरा खत्म कर शनिवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में भाग लेने चीन पहुंचे। यहां तियानजिन में हवाई अड्डे पर उनका भव्य स्वागत किया गया। मोदी सात साल बाद चीन का दौरा कर रहे हैं। वह रविवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। अमेरिका से टैरिफ विवाद के बीच दोनों नेताओं के बीच होने वाली ये बैठक कई मामलों में अहम मानी जा रही है। जानकारों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी चीन के साथ आर्थिक गतिविधियों को नया आयाम देने के मसले पर विस्तार से बात करेंगे। दोनों देशों के संबंधों में लंबे समय से चली आ रही तल्खी को भी खत्म करने की हर संभव कोशिश हो सकती है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी 2018 में एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन गए थे। इसके बाद 2019 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर आए थे। चीन पहुंचने पर भारतीय समुदाय के लोगों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों के साथ उनका स्वागत किया। वहीं, मोदी से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शनिवार को फोन पर बात की। मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया है कि भारत रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के सभी प्रयासों का पुरजोर समर्थन करता है।
इंश्योरेंस कंपनियों से विवाद में कैशलेस इलाज पर संकट
जागरण के अनुसार सरकार हेल्थ इंश्योरेंस के दायरे को बढ़ाने के लिए निजी कंपनियों को इसके प्रीमियम में कटौती से लेकर इंश्योरेंस से जुड़े छोटे-छोटे प्रोडक्ट लाने के लिए कह रही है। दूसरी तरफ मुनाफा को लेकर इंश्योरेंस कंपनियों और निजी अस्पतालों की आपसी लड़ाई में हेल्थ इंश्योरेंस ग्राहकों के लिए खतरे की घंटी बजने लगी है। संशय गहराने लगा है कि अस्पताल कभी भी कैशलेस (बिना नगदी के) इलाज के लिए मना कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें पहले अपने पैसा लगाकर इलाज करना होगा और फिर इंश्योरेंस कंपनियां उनके बिल का भुगतान करेंगी। अधिकतर उपभोक्ता इंश्योरेंस की खरीदारी यह सोचकर करते हैं की जरूरत पड़ने पर वे अस्पताल में जाकर भर्ती हो जाएंगे और उनके इलाज का खर्चा उनके इंश्योरेंस की सीमा के मुताबिक कंपनी उठेगी। दूसरी तरफ हाल ही में निजी अस्पतालों के संगठन संगठन एसोसिएशन ऑफ हेल्थ प्रोवाइड्स इंडिया (एएचपीआई) ने बजाज आलियांज और केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की कैशलेस सुविधा को सितंबर से खत्म करने का नोटिस दिया था। हालांकि अब इंश्योरेंस कंपनियों की तरफ से कहा जा रहा है कि एचपीएआई से बातचीत हो गई है और ग्राहकों को सूचीबद्ध या पैनल में शामिल अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रहेगी लेकिन जानकारों का कहना है कि पिछले 15 दिनों से अस्पताल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच जो झगड़ा चल रहा है उसे देखते हुए साफ है कि अस्पताल कभी भी कैशलेस इलाज के लिए मना कर सकते हैं।
60 फ़ीसद लोग बिना जरूरत ज्यादा सोचते रहते हैं
हिन्दुस्तान की खास ख़बर के अनुसार 60 फीसदी लोग जरूरत से ज्यादा सोचने पर अपना समय बर्बाद करते हैं। करीब 50 फीसदी लोग तो सोशल मीडिया पर लाइक्स नहीं मिलने के अनेक पहलुओं पर सोचते रहते हैं। 40 फीसदी लोग रेस्टोरेंट में क्या खाना है, यह फैसला लेने में भी 20 से 25 मिनट लगा देते हैं। पठन-पाठन या काम के विषयों पर लोग कम सोचते हैं, बल्कि इधर-उधर की बातों पर सोचने में ज्यादा समय लगाते हैं। ये बातें महिला विकास मंत्रालय के सर्वे में सामने आई हैं। सर्वे की मानें तो ज्यादातर लोग 24 घंटे में चार से पांच घंटे केवल सोचने में निकाल दे रहे हैं। सर्वे में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, नौकरीपेशा, बिजनेस करने वालों को शामिल किया गया था। यह सर्वे 15 जुलाई से 15 अगस्त तक किया गया। इसमें 30 लाख 90 हजार 675 लोग शामिल हुए। इसके लिए मंत्रालय की वेबसाइट पर एक लिंक दिया गया था। इस लिंक को खोलने पर 15 प्रश्नोत्तर थे। जवाब हां और न में देना था। रिपोर्ट की मानें तो राज्य के 40 फीसदी यानी 30 लाख 90 हजार में 15 लाख के लगभग लोग रेस्टोरेंट में खाना चुनने में 20 से 25 मिनट लगा देते हैं। इस काम को ये सबसे कठिन काम मानते हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- 1991 बैच के आईएएस अधिकारी और वर्तमान में शिक्षा अपर मुख्य सचिव डॉक्टर एस सिद्धार्थ को विकास आयुक्त बनाया गया
- सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉक्टर बी राजेंदर को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी
- सीवान में 9 साल पहले पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन लोगों को दोषी करार दिया
- जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में जमीन खिसकने से एक ही परिवार के साथ लोगों की मौत
अनछपी: यह खबर बहुत राहत देने वाली है कि म्यांमार में बंधक बनाकर साइबर फ्रॉड का काम कराने वाले गिरोह के चंगुल से दानापुर के कंप्यूटर साइंस इंजीनियर सचिन कुमार और दूसरे 41 भारतीयों को रेस्क्यू कर कर भारत लाया गया है। लेकिन इसके साथ ही एक गंभीर चिंता भी है कि आखिर किसी इंजीनियर को कैसे साइबर फ्रॉड गिरोह भारत से बाहर ले जाता है और फिर उसके साथ अमानवीय व्यवहार होता है जिसमें इलेक्ट्रिक शॉक देना भी शामिल है। इस तरह की खबरें पहले भी आती रही हैं और वियतनाम, कंबोडिया व थाईलैंड जैसे देशों में भारत से तकनीकी शिक्षा पाए गए लोगों को ले जाकर उनसे जबरदस्ती साइबर फ्रॉड कराया जाता है। सचिन के बारे में यह जानकारी दी गई है कि उन्होंने बेंगलुरु से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उनके एक जानने वाले ने नेपाल के धर्मेंद्र चौधरी और शिवमंगल चौधरी से उनका परिचय करवाया था। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर इंजीनियर के लिए म्यांमार में 12 लाख रुपए के पैकेज पर एक नौकरी है। नेपाल के इन दोनों धोखेबाजों ने सचिन से वर्क वीजा दिलवाने की बात कहीं और उन्हें पटना से हवाई जहाज से पहले कोलकाता और फिर वहां से थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक ले गए। बैंकॉक से लगभग 12 घंटे का रास्ता कर में तय कर सचिन को म्यांमार ले जाया गया। वहां शुरू में सहायक ग्रुप कंपनी में 3 महीने काम करने के बाद उन्हें साइबर स्कैम रैकेट में बंधक बना लिया गया। उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और साइबर क्राइम में शामिल होने से इनकार करने पर उनसे मारपीट शुरू कर दी गई। इस बात की जानकारी बिहार की आर्थिक अपराध इकाई के जरिए म्यांमार में भारतीय दूतावास को दी गई और उसके बाद वहां से 42 भारतीयों को छुड़ाया गया। भारत का विदेश विभाग हमेशा से यह कहता रहा है कि विदेश जाने के लिए उन्हीं कंपनियों को चुनें जिन्हें इसके लिए सर्टिफाई किया जा चुका है। अफसोस की बात यह है कि ऐसी नौकरियां पाने में देरी होने के बाद घबराहट में लोग अनऑथराइज्ड तरीके से विदेश जाने के लिए तैयार हो जाते हैं और फिर इस तरह की परेशानी में पड़ जाते हैं। इससे बचने के लिए सरकार और समाज दोनों को कम करने की जरूरत है।
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