छपी-अनछपीः अमित शाह के लिए नीतीश चुनावी चेहरा-सीएम नहीं, महागठबंधन की ‘वीआईपी’ गुत्थी
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक महत्वपूर्ण संकेत देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चुनावी चेहरा तो बताया लेकिन यह नहीं कहा कि वह मुख्यमंत्री के चेहरा भी होंगे। महागठबंधन में सीट बंटवारे पर ‘वीआईपी’ समस्या अब भी जारी है और आज पहले चरण के नामांकन का आखिरी दिन है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने नए एफिडेविट में डी. लिट. की चर्चा तो की है लेकिन यह नहीं बताया कि उन्होंने मैट्रिक इंटर और ग्रेजुएशन कब और कैसे किया।
और, जनिएगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि गोवंश हत्या के नाम पर झूठे मुकदमों की भरमार हो गई है।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार विधानसभा चुनाव प्रचार के साथ ही एनडीए के चुनावी समीकरण को साधने केंद्रीय मंत्री अमित शाह गुरुवार को तीन दिवसीय बिहार दौरे पर पटना पहुंचे। पटना पहुंचने के उपरांत शाम में एक टीवी चैनल के फोरम में सम्मिलित हुए। शाह ने कार्यक्रम में नीतीश कुमार को चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बनाने को लेकर पूछे गए प्रश्न पर कहा कि मैं कौन होता हूँ, किसी को मुख्यमंत्री बनाने वाला। चुनाव उपरांत एनडीए विधानमंडल दल तय करेगा कि कौन मुख्यमंत्री होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहा है। उन्होंने नीतीश कुमार की प्रशंसा की। कहा कि वे देश के महत्वपूर्ण समाजवादी नेता हैं। प्रभात खबर नहीं लिखा है कि जब उनसे पूछा गया कि अगर भाजपा को अधिक सीटें मिलती हैं तो क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही रहेंगे या महाराष्ट्र जैसा कोई बदलाव देखने को मिलेगा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं आपको हैडलाइन नहीं दूंगा, लेकिन इतना कह सकता हूं कि चुनाव के बाद सभी दलों के विधायक पहले अपना नेता चुनेंगे। उसके बाद घटक दल मिलकर मुख्यमंत्री का चयन करेंगे।”
महागठबंधन की ‘वीआईपी’ उलझन
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन का शुक्रवार को अंतिम दिन है। लेकिन, महागठबंधन में सीट बंटवारे की गांठ पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है। सीटें तय नहीं होने से वीआईपी नाराज हो गई और गुरुवार को उसने प्रेसवार्ता तक बुला ली। वीआईपी की नाराजगी को देखते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने दोपहर में फोन कर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी से बात की। गतिरोध दूर करने के लिए राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद से भी फोन पर विचार-विमर्श किया। हालांकि, राजद, कांग्रेस, वाम दलों में पसंद की सीटों पर खींचतान जारी है। गुरुवार देर रात तक रूठने-मनाने का दौर चलता रहा। महागठबंधन में करीब आधा दर्जन सीटों पर दोस्ताना संघर्ष के आसार बन रहे हैं। बछवाड़ा में तो कांग्रेस और भाकपा ने दोस्ताना संघर्ष का ऐलान भी कर दिया है। महागठबंधन में सीट बंटवारे पर तेजस्वी यादव के आवास पर बुधवार रात तीन बजे तक चली बैठक में सुलह होने की उम्मीद थी। कोई हल नहीं निकलने पर गठबंधन टूटने की खबर उड़ने लगी। वीआईपी के प्रेस वार्ता बुलाने से इसे और हवा मिली हालांकि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस हो नहीं पाई। वैसे प्रभात खबर की सूचना है कि मुकेश सैनी को 15 सीटें दी जा सकती हैं।
सम्राट चौधरी की पढ़ाई का रहस्य
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने गुरुवार को तारापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में नामांकन किया। हलफनामा में उच्चतम शैक्षणिक योग्यता डाक्टर आफ लिट (डी. लिट. मानद) का जिक्र किया है। मैट्रिक, इंटरमीडिएट व स्नातक की डिग्री का उल्लेख नहीं है। 2024- 25 में सम्राट की आय 17 लाख 91 हजार 420 रुपये तो पत्नी की 12 लाख 73 हजार 160 रुपये रही। उनके पास एनपीबोर की रायफल भी है। पटना के कोतवाली व मुंगेर के तारापुर थाने में एक-एक केस दर्ज है। उनके पास नकद 1.35 लाख तो पत्नी के पास 35 हजार रुपये हैं।
किसके पास कितनी दौलत
- नालंदा के जदयू विधायक और मंत्री श्रवण कुमार की आमदनी 5 साल में 1.22 करोड़ बढ़ी, अब 3.60 करोड़ के मालिक
- जदयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री विजय चौधरी के पास 1.09 करोड़ की संपत्ति
- पशुपति कुमार पारस के पुत्र और राष्ट्रीय लोजपा से अलौली से उम्मीदवार यशराज पासवान 3 करोड़ के मालिक
- पटना मेयर सीता साहू के बेटे और पटना साहिब से निर्दलीय से उम्मीदवार शिशिर कुमार के पास 23 करोड़ की संपत्ति
- दानापुर के विधायक और राजद उम्मीदवार रीत लाल यादव के पास 13 करोड़ की दौलत
चुनाव बुलेटिन:
- कांग्रेस ने देर रात 48 उम्मीदवारों की सूची जारी की
- भारतीय जनता पार्टी ने 21 विधायकों का टिकट काटा
- जेडीयू ने 8 विधायकों को बेटिकट किया
- भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव ने पत्नी के साथ राजद की सदस्यता ली
- बहुजन समाज पार्टी सभी 243 सीटों पर लड़ने को तैयार 90 उम्मीदवार उतारे
- बरबीघा के जदयू विधायक सुदर्शन कुमार ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया
- भाजपा के स्टार प्रचारकों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, मध्य प्रदेश और दिल्ली की मुख्यमंत्री भी
- चिराग पासवान की पार्टी के उम्मीदवारों की सूची में भाजपा के कई नेता
- मोकामा में बाहुबली आनंद सिंह के सामने होगी बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी
चुनाव में गुजरात से आ रहा है 90 फ़ीसद प्रचार सामान
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी चरम पर है। चुनावी प्रचार में डिजिटल सामग्री का खूब उपयोग हो रहा है। डिजिटल युग में भी पारंपरिक चुनाव प्रचार सामग्री बैनर, पोस्टर, झंडा-पताका, बैज आदि की बिक्री कम नहीं हुई है। बिहार में चुनाव प्रचार की 90 फीसदी प्रचार सामग्री गुजरात (अहमदाबाद) से आ रही है। लगभग 10 फीसदी प्रचार सामग्री दिल्ली और मेरठ से भी आ रही हैं। शहरी विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण में चुनाव प्रचार सामग्री की अधिक बिक्री हो रही है। झंडा के बाद सबसे अधिक पट्टा और बैज बिक रहे हैं। मांग के अनुसार प्रचार साम्रगी विधानसभा क्षेत्र तक पहुंचा कर दी जा रही है। इसमें सबसे अधिक पार्टियों के चुनाव चिह्न वाले झंडे की बिक्री होती है। आकार के हिसाब से एक झंडे की कीमत 10 से 100 रुपये तक है। नेता के प्रत्येक कटआउट की कीमत 200 से 250 रुपये तक है। प्रचार सामग्री विक्रेता के अनुसार, सबसे अधिक कट आउट राजद नेता तेजस्वी यादव के बिक रहे हैं। इसके बाद जदयू में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा में पीएम नरेंद्र मोदी के कटआउट की अधिक डिमांड है।
गौ हत्या में फर्जी तरीके से फसाने के मामलों की बाढ़
जागरण के अनुसार इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने दोहराया है कि उत्तर प्रदेश में गोवंशी पशुओं का परिवहन अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। न्यायालय के सामने ऐसे मुकदमों की बाढ़ आ रही, जिसमें लोगों को गोहत्या अधिनियम में फर्जी तरीके से फंसाया जा रहा है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद और डीजीपी राजीव कृष्ण से शपथ-पत्र मांगा है कि गोहत्या अधिनियम के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या किया गया है? सात नवंबर तक शपथ-पत्र नहीं आता है तो दोनों अधिकारी कोर्ट में स्वयं प्रस्तुत होकर उत्तर दें। कोर्ट ने उक्त दोनों शीर्ष अधिकारियों से पूछा है कि क्यों नहीं ऐसे मामलों में सरकार पर भारी जुर्माना लगाया जाए।
कुछ और सुर्खियां:
- मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आईएएस अधिकारी संजीव हंस को मिली पटना हाई कोर्ट से सशर्त जमानत, पासपोर्ट जप्त
- गेस्ट लेक्चरर के रिन्यूअल के मामले में पटना यूनिवर्सिटी के वीसी अजय सिंह पर अनियमितता का आरोप, जबरन छुट्टी पर भेजे गए
- बिहार में एक करोड़ से अधिक लोगों को देना होगा जीवन प्रमाण पत्र, नवंबर तक नहीं हुआ जमा तो बंद होगी पेंशन
- सार्वजनिक स्थलों पर आरएसएस की गतिविधियों पर रोक के लिए नियम बनाएगी कर्नाटक सरकार
- गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को छोड़ पूरे मंत्रिमंडल का इस्तीफा
अनछपी: यह बात तो बिहार में लगभग हर आदमी मान रहा है कि अपने अच्छे बुरे प्रदर्शनों के बावजूद नीतीश कुमार 2025 के चुनाव के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। अब इस बात पर भारतीय जनता पार्टी के मुख्य रणनीतिकार माने जा रहे अमित शाह ने भी मुहर लगा दी है। अमित शाह अपनी बात बहुत महीन तरीके से करते हैं और इसे समझना चाहिए। अमित शाह एक बार यह कह चुके थे कि वह नीतीश कुमार के लिए भाजपा के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर चुके हैं लेकिन जब उनसे मिलने की बारी आई तो बहुत महीन तरीके से यह कहा था कि अगर उनकी तरफ से प्रस्ताव आता है तो इस पर विचार किया जाएगा। पता नहीं किसकी तरफ से क्या प्रस्ताव आया लेकिन जल्द ही भारतीय जनता पार्टी ने नीतीश कुमार को अपने पाले में लाकर बिहार में अपनी सत्ता दोबारा हासिल कर ली। तो मोटे तौर पर बात यह है कि चुनाव तक नीतीश कुमार को एनडीए का चुनावी चेहरा तो बताया जाएगा लेकिन मुख्यमंत्री कौन होगा, इस सवाल का जवाब अमित शाह ने कुछ इस तरह दिया है जिससे यह बात समझ में आती है कि अगर नीतीश कुमार की सीटों की संख्या बहुत कम हुई तो भारतीय जनता पार्टी का कोई आदमी मुख्यमंत्री बनेगा। इसलिए जो लोग यह सोचकर जेडीयू और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उम्मीदवारों को वोट देंगे कि एक बार फिर नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बनेंगे दरअसल वह भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री चुनने जा रहे हैं। होना यह है कि नीतीश कुमार की पार्टी के विधायकों की संख्या भारतीय जनता पार्टी के विधायकों से कम रहेगी और ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को यह विकल्प दिया जाएगा कि या तो वह सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री को स्वीकार करें या फिर उनकी पार्टी का वही हश्र किया जाएगा जो दूसरी जगह पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने सहयोगी दलों के साथ किया है। इस स्थिति में बिहार के वोटरों के लिए अपना फैसला करने में आसानी होनी चाहिए।
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