छ्पी-अनछपी: पीके बोले- अमित शाह के दबाव में उनके उम्मीदवार हटे, महागठबंधन में 255 उम्मीदवार

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान पर उम्मीदवारों पर दबाव डालकर उन्हें चुनाव से हटवाने का आरोप लगाया है। महागठबंधन में 12 सीटों पर फ्रेंडली फाइट की बात कही जा रही है क्योंकि 243 सीटों पर इसके 255 उम्मीदवार खड़े हो गए हैं। लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास को विधानसभा सीटों के साथ उम्मीदवार भी भाजपा से मिले हैं। पंजाब के पूर्व डीजीपी और उनकी पत्नी पर अपने बेटे के मर्डर का केस हुआ है।

और, जानिएगा कि लंदन की हिंदी की प्रोफेसर को वीजा नियमों के उल्लंघन में भारत से डिपोर्ट किया गया।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (जसुपा) के तीन प्रत्याशी मैदान से हट चुके हैं। नामांकन की अवधि बीत जाने के कारण पार्टी अब उनकी जगह किसी दूसरे को मैदान में उतार भी नहीं सकती। मंगलवार को प्रशांत किशोर (पीके) ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के दबाव के कारण जसुपा के तीन प्रत्याशियों ने नाम वापस लिया है। उन्होंने प्रत्याशी के साथ प्रधान की तस्वीर भी दिखाई। उन्होंने दावा किया कि समझौते के लिए उनके 14 प्रत्याशियों को डराया गया है। कुम्हरार से प्रत्याशी प्रो. केसी सिन्हा पर भी बहुत दबाव है। वाल्मीकिनगर के प्रत्याशी पर स्थानीय प्रशासन दबाव डाल रहा है कि उनका त्यागपत्र स्वीकार नहीं किया गया है। वे चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। दानापुर, गोपालगंज और ब्रह्मपुर प्रत्याशियों ने शाह और प्रधान के डर से नाम वापस ले लिया। बाकी 240 प्रत्याशी डटे हुए हैं। पीके के अनुसार, दानापुर के प्रत्याशी अखिलेश कुमार उर्फ मुटूर शाह नामांकन करने नहीं पहुंचे। वे शाह और प्रधान के साथ थे। चुनाव आयोग से इसकी शिकायत होगी। उन्होंने प्रधान के साथ ब्रह्मपुर के प्रत्याशी डा. सत्य प्रकाश तिवारी की तस्वीर जारी की। कहा कि पटना में बड़ा अस्पताल चलाने वाले सत्य प्रकाश तीन दिन तक प्रचार किए और सोमवार सुबह अचानक नाम वापस ले लिया। इसी तरह गोपालगंज के डा. शशि शेखर सिन्हा का भी मामला है। स्थानीय भाजपा नेता ने उन्हें काल किया और उन्होंने नाम वापस ले लिया। इसी के साथ पीके ने कहा कि वे किसी से डरने वाले नहीं।

महागठबंधन में 255 उम्मीदवार

प्रभात खबर के अनुसार विधानसभा चुनाव मिल कर लड़ने की घोषणा करने वाले महागठबंधन ने अभी तक सीट साझेदारी की संयुक्त घोषणा नहीं की है. हालात ये बने हैं कि तमाम प्रयास के बाद भी विधानसभा की 243 सीटों पर 255 प्रत्याशी उतार दिये हैं. ऐसे में महागठबंधन के अंदर ही 12 सीटों पर आमने-सामने की ‘फ्रेंडली फाइट’ है. हालांकि दूसरे चरण की नामांकन वापसी अभी बाकी है. इधर, महागठबंधन के दो बड़े दलों राजद और कांग्रेस के बीच संवाद की कड़ी पूरी तरह टूट गयी है. पहले कौन संवाद करे? इसका दोनों पक्ष इंतजार कर रहे हैं. हालांकि राजद ने प्रदेश कांग्रेस सदस्य राजेश राम के खिलाफ प्रत्याशी न उतारकर कांग्रेस को साधने की कोशिश की है. महागठबंधन के सभी घटक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी है. राजद ने 143, कांग्रेस ने 61, वाम दल 33, वीआइपी ने 15 और आइआइपी तीन सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. इस तरह इनके कुल 255 प्रत्याशी मैदान में आ गये. 12 सीटों पर फ्रेंडली फाइट की स्थिति है. हालांकि, कुछ ने नामांकन वापस लिये लिया है।

चिराग पासवान की पार्टी को उम्मीदवार बीजेपी से भी मिले

अधिक सीटों पर लड़ने की जिद पर अड़ी चिराग पासवान की लोजपा (रा) को न केवल मन मुताबिक सीटें मिली, उपहार में उम्मीदवार भी मिल गए। यह उपहार भाजपा की ओर से दिया गया है। ठीक 2020 की तरह, जब विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी) को भाजपा की ओर से सीटों के के साथ उम्मीदवार भी दिए गए थे। हालांकि, वीआईपी का अनुभव काफी बुरा रहा। उसके सिंबल पर का जीते चार विधायक पलक झपकते ही भाजपा में चले गए। बोचहा से लोजपा (रा) की उम्मीदवार बनी बेबी कुमारी 2015 में निर्दलीय थीं। बाद में भाजपा में शामिल हो गईं। उन्हें भाजपा ने 2020 में ने उम्मीदवार नहीं बनाया। वह पार्टी को संगठन का काम देखती रहीं। चेनारी से मुरारी गौतम की जीत कांग्रेस के टिकट पर हुई थी। कांग्रेस विधायक रहते उन्होंने फरवरी, 2024 में सरकार की ओर से पेश विश्वासमत के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के ठीक पहले वे भाजपा में शामिल हो गए। अभी चेनारी से लोजपा (रा) के उम्मीदवार हैं। बख्तियारपुर के भाजपा नेता अरुण कुमार को लोजपा (रा) ने उम्मीदवार बनाया है। नवादा जिला के गोबिंदपुर विधानसभा क्षेत्र से लोजपा (रा) की उम्मीदवार विनिता मेहता भाजपा के नेता की पत्नी हैं। फतुहा में भी लोजपा (रा) उम्मीदवार ख्या कुमारी की अनुशंसा भाजपा ने ही की है।

चुनाव बुलेटिन:

  • वाल्मीकिनगर से जनसुरज और सुगौली से वीआईपी प्रत्याशी समेत 519 का नामांकन रद्द
  • राजद ने सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 31 सिटिंग विधायकों को किया बे टिकट
  • भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह से मिलने के बाद पटना की मेयर सीता साहू के बेटे शिशिर कुमार ने नामांकन वापस लिया
  • भारतीय जनता पार्टी से जुड़े 11 मंत्री विधानसभा चुनाव में आजमा रहे हैं किस्मत
  • भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अमित शाह 24 अक्टूबर को सीवान और बक्सर में करेंगे जनसभा
  • शेरघाटी विधानसभा से समता देवी को सिंबल देने के बाद वापस लेकर उनकी बेटी को दिया
  • नामांकन के बाद राजद के सासाराम प्रत्याशी सतेंद्र साह और एआईएमआईएम के जहानाबाद प्रत्याशी कलामुद्दीन पुराने मामलों में गिरफ्तार

पंजाब के पूर्व डीजीपी और उनकी पत्नी पर अपने बेटे के मर्डर का केस

भास्कर के अनुसार हरियाणा के पंचकूला में पंजाब के पूर्व डोजीपी मोहम्मद मुस्तफ़ा और उनकी पत्नी पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना पर बेटे की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मुस्तफा, रजिया, उनकी बेटी और एक अन्य के खिलाफ बेटे की हत्या और आपराधिक साज़िश के तहत केस दर्ज कर एसआईटी बनाई है। मुस्तफा के बेटे अकील का शव 16 अक्टूबर को पंचकूला स्थित घर में मिला था। बाद में सोशल मीडिया पर 27 अगस्त को जारी वीडियो सामने आए जिसमें अकील ने पिता पर गंभीर आरोप लगाए थे।

हिंदी की स्कॉलर-प्रोफेसर फ्रांसेस्का ऑर्सिनी को दिल्ली एयरपोर्ट से डिपोर्ट किया गया

लंदन के स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज में हिंदी की स्कॉलर-प्रोफेसर फ्रांसेस्का ऑर्सिनी को सोमवार रात भारत में प्रवेश से रोक दिया गया। उन पर वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप है। फ्रांसेस्का ओरसिनी टूरिस्ट वीजा पर थीं, जिसका उन्होंने उल्लंघन किया। इसकी वजह से उन्हें मार्च 2025 से ब्लैक लिस्ट कर दिया गया था। यह एक मानक वैश्विक प्रथा है कि यदि कोई व्यक्ति वीजा नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक फ्रांसेस्का पर पहले के दौरों में टूरिस्ट वीजा पर आकर रिसर्च वर्क करने का आरोप लगा था।

कुछ और सुर्खियां:

  • जस्टिस सुधीर सिंह पटना हाई कोर्ट के कार्यकारी चीफ जस्टिस बने जस्टिस पीबी बजन्थरी रिटायर हुए
  • अररिया के जोकीहाट में बकरा नदी में डूबने से तीन बच्चियों की मौत
  • शोले फिल्म से मशहूर हुए कॉमेडियन असरानी का 24 साल की उम्र में मुंबई के एक अस्पताल में निधन
  • जापान में देश को पहली बार महिला प्रधानमंत्री मिली, संसद के निचले सदन ने रूढ़िवादी नेता साने ताकाइची के नाम पर मुहर लगाई

अनछपी: राजनीति में अपराधियों के दखल और चुनाव में बाहुबली नेताओं के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा लेकिन बिहार के लोगों को पहली बार यह एहसास हो रहा है कि उम्मीदवारों को मैदान से हटाने के लिए लालच और दबाव का आरोप भी भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान पर भी लग सकता है। प्रशांत किशोर ने अपनी जन सुराज पार्टी के तीन उम्मीदवारों के चुनाव मैदान से हटाने के बाद यह गंभीर आरोप लगाया है। इससे पहले हम गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों से यह खबर सुना करते थे कि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के लिए चुनौती बने प्रमुख उम्मीदवार ने चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया और तब भी यह आरोप लगता था कि या तो ऐसे उम्मीदवारों को भाजपा ने डराया धमकाया है या उन्हें लालच दिया है। बिहार की भाषा में कहा जाए तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान व दूसरे नेताओं पर अपने विपक्षी या बागी उम्मीदवारों को हड़काने का आरोप लगा है। यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता लेकिन लोगों का अंदाजा है कि जिन उम्मीदवारों को चुनाव मैदान से हटाने में भाजपा को कामयाबी मिली है उन्हें या तो किसी फर्जी मुकदमे में फंसाने का डर दिखाया गया है या उन्हें किसी बड़ी चीज का लालच दिया गया है। जहां तक लालच में आकर चुनाव मैदान से हटाने का फैसला है तो इसके लिए उम्मीदवार को भी जिम्मेदार माना जाना चाहिए लेकिन अगर किसी को अपनी जान का खतरा लगे या फर्जी मुकदमे में जेल में डाले जाने से डर लगे तो यह लोकतंत्र के लिए भयावह स्थिति है। जब लोकतंत्र में उम्मीदवार डर कर बैठ जाए और खासकर सरकार के मंत्रियों पर जब यह आरोप लगे तो उस जगह लोकतंत्र का कोई मतलब नहीं रह जाता और अगर ऐसे में कोई चुनाव का बायकॉट करे तो किसी को हैरत नहीं होनी चाहिए। प्रशांत किशोर ने ऐसे मामलों की शिकायत चुनाव आयोग से करने की बात कही है लेकिन अफसोस की बात यह है कि चुनाव आयोग का किरदार पहले से भारी शक में घिरा हुआ है और उस पर भारतीय जनता पार्टी के साथ अनैतिक सहयोग का आरोप लगता रहा है। ऐसे में आखिरी उम्मीद तो जनता से ही की जा सकती है जिसे चाहिए कि डराने धमकाने या लालच देने वाले लोगों और राजनीतिक दलों के खिलाफ खुलकर और जमकर वोट करें।

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