छापी-अनछपी: एक्साइज अधिकारी के पास 12 करोड़ की संपत्ति, भूमिहार या भूमिहार ब्राह्मण?
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। औरंगाबाद के एक्साइज अधीक्षक के पास 12 करोड़ से अधिक की संपत्ति मिली है। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने सवर्ण आयोग को पत्र लिखकर पूछा है कि सरकारी दस्तावेजों में भूमिहार लिखा जाए या भूमिहार ब्राह्मण। राजद ने चुनाव के दौरान पार्टी की छवि बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए 32 गायकों को नोटिस भेजा है। बिहार राज्य धार्मिक न्याय बोर्ड सभी 38 जिलों में सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए संयोजक नियुक्त करेगा।
पहली ख़बर
औरंगाबाद के उत्पाद अधीक्षक अनिल कुमार आजाद के पटना, जहानाबाद और औरंगाबाद स्थित चार ठिकानों पर एसवीयू ने रविवार को छापेमारी की। कार्रवाई शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र के पश्चिमी शिवपुरी, मानस मार्ग स्थित उनके घर, औरंगाबाद कार्यालय-आवास और जहानाबाद के सुमैरा स्थित पैतृक आवास पर हुई। एसवीयू के अनुसार कुल 12.43 करोड़ की चल-अचल संपत्ति का पता चला है। टीम को तीन बैंक लॉकर, गहने और कई दस्तावेज मिले। पटना स्थित आवास से जमीन के 10 कागजात मिले। इनमें से 6 कागजात उनकी पत्नी माधुरी देवी के नाम हैं। यह जमीन मानस मार्ग में है और कीमत लगभग 6 करोड़ है। जहानाबाद में पत्नी और परिजनों के नाम से चार जमीन के कागजात मिले। इनकी कीमत 1 करोड़ 78 लाख 30 हजार 880 रुपए है। एडीजी पंकज कुमार दाराद ने बताया कि तीनों लॉकर एक-दो दिनों में खोले जाएंगे। पीसीए और आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज कर कोर्ट से सर्च वारंट लिया गया। केस के अनुसार अनिल ने 1.58 करोड़ की अवैध संपत्ति अर्जित की है।
भूमिहार या भूमिहार ब्राह्मण?
बिहार सरकार ने सवर्ण आयोग से पूछा है कि सरकारी दस्तावेजों में भूमिहार लिखा जाए या भूमिहार ब्राह्मण। सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव रजनीश कुमार ने आयोग को पत्र भेजकर राय मांगी है। पत्र में दो आवेदनों का संदर्भ है। यह आवेदन अखिल भारतीय भगवान परशुराम परिषद के संस्थापक अवधेश मिश्रा और अंजनी कुमार बेनीपुरी ने दिए हैं। दोनों ने जाति आधारित गणना सूची में सुधार की मांग की है।
राजद ने ‘छवि बिगड़ने वाले’ 32 गायको को नोटिस भेजा
जागरण के अनुसार छवि धूमिल करने के कुचक्र को राजद विधानसभा चुनाव में अपनी करारी हार का एक कारण मान रहा। शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर परिणाम की व्याख्या हर दृष्टिकोण से हो रही, जिसमें महागठबंधन की जीत पर विरोधियों द्वारा जताई गई जंगलराज की पुनर्वापसी की आशंका भी है। ऐसे बोल वचन वाले गीतों से भी इस आशंका को बल मिलता है, लिहाजा राजद ने उन 32 गायकों को नोटिस भेजा है, जिन्होंने पार्टी सहित लालू प्रसाद व तेजस्वी यादव आदि के नाम का उल्लेख करते हुए गीत गाए। इनमें भोजपुरी गायक टुनटुन यादव सहित मैथिली-मगही के भी गायक हैं और उनमें से कई बिहार के बाहर के राज्यों से भी हैं। नोटिस में लिखा है कि स्पष्टीकरण नहीं देने वाले कलाकारों के विरुद्ध मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। हालांकि, राजद उन गायकों के नाम अभी सार्वजनिक नहीं कर रहा।
उम्मीद पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने की आखिरी तारीख 5 दिसंबर
भास्कर के अनुसार सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड से जुड़े मस्जिद, दरगाह, मजार, इमामबाड़ा, मदरसा, खानकाह, कर्बला और कब्रिस्तान के दस्तावेज उम्मीद सेंट्रल पोर्टल 2025 पर अपलोड करना अनिवार्य है। इसमें वक्फनामा, खतियान, केबाला, लगान रसीद और सर्वे से जुड़े कागजात शामिल हैं। अंतिम तिथि 5 दिसंबर 2025 है। वक्फ संशोधन अधिनियम के तहत वक्फ के अधीन सभी जमीन और जायदाद को पोर्टल पर दर्ज करना जरूरी है। केंद्र सरकार ने छह माह पहले यह पोर्टल बनाया और सभी राज्यों के सुन्नी-शिया वक्फ बोर्ड को दस्तावेज अपलोड करने का निर्देश दिया था। दस्तावेज अपलोड के लिए तीन स्तर बने हैं। मेकर (मुतवल्ली), चेकर व बोर्ड के सीईओ द्वारा अप्रूवल।
सनातन धर्म के प्रचार प्रसार के लिए नियुक्त होंगे संयोजक
सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद सभी 38 जिलों में मठ-मंदिरों के लिए संयोजक नियुक्त करेगा। नए संयोजकों की कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएंगी। धार्मिक न्यास पर्षद के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन ने बताया कि पर्षद की ओर से प्रदेश में 2,499 मठ-मंदिर पंजीकृत हैं। पंजीकृत मंदिरों और मठों के साथ समन्वय स्थापित कर सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए प्रत्येक जिले में एक-एक संयोजक बनाया जाएगा। वे अपने-अपने क्षेत्रों के सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों के मुख्य पुजारियों व महंतों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे। समन्वयकों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मासिक पूजा की होगी। इसके तहत संयोजक यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके जिले के सभी पंजीकृत मंदिर और मठ हर महीने पूर्णिमा के दिन सत्यनारायण कथा और अमावस्या के दिन भगवती पूजा का आयोजन करें।
चुटिया रखने से नाखुश महिला ने दी तलाक की अर्जी
जागरण के अनुसार एक-दूसरे को अपनी इच्छानुसार ढालने के विवाद में दंपती कोर्ट तक पहुंच जा रहे हैं। भोपाल में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत पति शिखा रखता है। पत्नी इसे पिछड़ापन मानती है और उसे इस पर आपत्ति है। वहीं, पति ने शिखा कटवाने से मना कर दिया तो पत्नी तलाक मांगने कुटुंब न्यायालय (फैमिली कोर्ट) पहुंच गई। वहीं, एक अन्य मामले में साफ्टवेयर इंजीनियर पति ने न्यायालय में तलाक की अर्जी देकर शिकायत की है कि उसकी पत्नी दिन-रात पूजा-पाठ में ही लगी रहती है। कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के दौरान भी दंपती के बीच इन मुद्दों पर टकराव दूर नहीं हो रहा। भोपाल के साकेत नगर निवासी एक दंपति का मामला काउंसलिंग के स्तर पर है। पति बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत है। पत्नी रूठ कर मायके में रहने लगी है। पति का कहना है कि वह जब बेंगलुरु में काम करता था तब भी उसने शिखा नहीं कटवाई। शादी के समय भी पत्नी ने टोका था लेकिन उसने शिखा कटवाने से मना कर दिया था।
कुछ और सुर्खियां:
- प्रसिद्ध लोक गायिका नेहा सिंह राठौड़ की गिरफ्तारी के लिए दो टीमें गठित, भड़काऊ पोस्ट का आरोप
- जस्टिस सूर्यकांत आज चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया की शपथ लेंगे
- बिहार सवर्ण आयोग के अध्यक्ष महाचंद्र प्रसाद सिंह ने कहा, ईडब्ल्यूएस के लिए उम्र में छूट पर होगा विचार
- केएल राहुल को भारत की वनडे क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया
- दरभंगा के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में डिवाइडर से टकराकर गाड़ी पलटी, तीन लोगों की मौत
- डाक विभाग केवल ₹70 में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाएगा
अनछपी: जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने जमीयत के मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में जो बातें कही हैं उन पर घर जरूरी विवाद खड़ा किया जा रहा है और इसके बहाने फिर वही और नफरत फैलाई जा रही है। पहले यह जान लेते हैं कि जिस बयान पर विवाद खड़ा किया गया है वह क्या है। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि जोहरान मनदानी न्यूयॉर्क के मेयर चुने जाते हैं। “एक खान लंदन का मेयर बन सकता है लेकिन वही भारत में मुसलमान किसी यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर भी नहीं बन सकता। अगर कोई बन भी जाए तो उसे जेल भेज दिया जाता है जैसे कि आजम खान। देखिए आज अलफलाह में क्या हो रहा है।” मौलाना मदनी की आलोचना इस पूरे बयान की आखिरी लाइन पर हो रही है। मगर उन्होंने आजम खान का जो मुद्दा उठाया उसे पर कोई जवाब नहीं दे रहा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इसपर लगी हुई है कि मुसलमान को सर नहीं उठाने देना है। उनकी इस बात से बड़ी आबादी इत्तेफाक करेगी। चूंकि अलफलाह का मामला अभी जांच के दायरे में है इसलिए मौलाना इससे बच सकते थे या वह यह कह सकते थे कि इस मामले में वह इंसाफ होने की मांग करते हैं। लेकिन मौलाना के बयान को केवल एक यूनिवर्सिटी के संदर्भ में नहीं देखना जाना चाहिए बल्कि वह भारत की सामाजिक एकता के लिए जो बात कह रहे हैं उस पर ध्यान देना चाहिए। मौलाना ने यह भी कहा कि धर्म के आधार पर लोगों को बांटने से देश कमज़ोर हो रहा है। “जो हो रहा है, उसे देखकर लगता है कि फिरकापरस्त ताकतें इस्लाम और मुसलमानों दोनों को खत्म करने पर तुली हुई हैं। लेकिन शायद उन्हें यह नहीं पता कि इस्लाम का यह चिराग कभी नहीं बुझेगा और जिन्होंने इसे बुझाने की कोशिश की, वे खुद बुझ गए। भारत के सामाजिक ताने-बाने को बचाने और इसके संवैधानिक सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए एकता और न्याय की ज़रूरत है।” अरशद मदनी के बयान को बेहद गैर जिम्मेदाराना मानते हुए भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन ने यह तो स्वीकार किया कि जमीयत उलेमा ने आजादी के आंदोलन में योगदान दिया है। उनकी मजबूरी हम समझ सकते हैं क्योंकि उन्हें भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के साथ चलना है और फिलहाल उन्हें वहां बहुत तवज्जो नहीं मिल रही है। इसी तरह गिरिराज सिंह ने अपने बयान में एपीजे अब्दुल कलाम के साथ जाकिर हुसैन का भी नाम लिया जिन्हें उन्होंने आदर्श बताया। बेहतर होगा कि शाहनवाज हुसैन जमीयत उलेमा के बेहतर योगदान को सरकारी स्तर पर सब जगह प्रसारित करें और गिरिराज सिंह जाकिर हुसैन के बारे में और बेहतर बातें लोगों को बताएं।
449 total views
