छपी-अनछपी: ट्रंप की धमकी चावल पर टैरिफ लगाएंगे, इंडिगो की उड़ानें 10 फीसद घटाई

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब भारत के चावल पर और शुल्क लगाने की धमकी दी है। ट्रंप को बताया गया है कि भारत अमेरिका में चावल की डंपिंग कर रहा है। सरकार ने इंडिगो के विंटर शेड्यूल में 10% की कटौती कर दी है। बिहार में तीन नए विभाग बनाए गए हैं और तीन विभागों का नाम बदला गया है।

और, जानिएगा कि गुजरात में लहसुन प्याज खाना भी तलाक की वजह बन गया।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब भारत के चावल पर और शुल्क लगाने की धमकी दी है। ट्रंप को बताया गया है कि भारत अमेरिका में चावल की डंपिंग कर रहा है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, भारत को अमेरिका के बाजार में चावल की “डंपिंग” नहीं करनी चाहिए। हम इस मामले से निपट लेंगे। टैरिफ से इस समस्या का समाधान आसानी से हो जाएगा। ट्रंप ने भले ही भारतीय चावल पर टैरिफ लगाने का धौंस दिखाई है, लेकिन भारतीय निर्यातकों का कहना है कि इससे भारत के चावल निर्यात पर फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि अमेरिका में भारतीय चावल पर फिलहाल 53 प्रतिशत का शुल्क लग रहा है। अमेरिका में भारतीय चावल पर और शुल्क लगाने से वहां चावल और अधिक महंगा हो जाएगा जिससे अमेरिकी उपभोक्ता प्रभावित होंगे, जबकि भारतीय चावल के लिए कई वैकल्पिक बाजार हैं।

इंडिगो के विंटर शेड्यूल में 10% की कटौती

भास्कर के अनुसार देश की सबसे बड़ी घरेलू विमानन कंपनी इंडिगो के खिलाफ केंद्र सरकार ने एक्शन शुरू कर दिया है। मंगलवार को विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने बताया कि इंडिगो के विंटर शेड्यूल में 10% की कटौती कर दी है। खासकर उन रूट्स पर जहां उड़ानों की मांग और संख्या ज्यादा है। दिन में डीजीसीए ने इंडिगो से 5% कटौती को कहा था। उसने इंडिगो से बुधवार तक नया शेड्यूल मांगा है। कंपनी हर दिन 2200 उड़ानें ऑपरेट करती है। 10% कटौती के बाद करीब 220 उड़ानें ही कम होंगी। कटौती वाले शेड्यूल दूसरी एयरलाइंस को मिलेंगे। वहीं, 10 बड़े हवाई अड्डों पर आईएएस अफसर तैनात किए गए हैं। वहीं, एनडीए सांसदों की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो टूक कहा कि इंडिगो जैसा संकट दोबारा नहीं आने देंगे। सरकार कड़े कदम उठाएगी, चाहे कंपनियां इसे पसंद करें या नहीं। मंगलवार को भी 422 फ्लाइट्स रद्द हुई। 8 दिन में 4950 रद्द हो चुकी हैं।

बिहार में तीन नए विभाग बनाए गए

हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार में तीन नए विभाग बनाए गए हैं। वहीं, तीन विभागों का नाम बदला गया है। खान एवं भूतत्व निदेशालय को दो निदेशालयों में बांटा गया है। साथ ही उद्योग के तकनीक निदेशालय को एमएसएमई निदेशालय कहा जाएगा। राज्य मंत्रिपरिषद की मंगलवार को हुई बैठक में इस पर मुहर लग गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुल 19 एजेंडों को मंजूरी दी गयी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसकी घोषणा की थी। पहले से राज्य में विभागों की संख्या 45 थी। तीन नए विभागों के गठन के बाद इनकी संख्या बढ़कर 48 हो जाएगी। मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और सिविल विमानन विभाग के गठन को मंजूरी मिली है। वहीं, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग का नाम अब डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग होगा। जबकि, श्रम संसाधन विभाग को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग तथा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग का नया नाम कला एवं संस्कृति विभाग किया गया है। उद्योग विभाग के तकनीकी विकास निदेशालय का नाम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निदेशालय किया गया है।

वोट चोरी कर आइडिया ऑफ इंडिया को नष्ट कर रही भाजपा: राहुल

प्रभात खबर के अनुसार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भाजपा वोट चोरी के कृत्य को अंजाम देकर आइडिया ऑफ इंडिया नष्ट कर रही है. उन्होंने लोकसभा में चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान वर्ष 2023 के निर्वाचन कानून का उल्लेख करते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इस कानून में पूर्वव्यापी प्रभाव से संशोधन किया जायेगा और चुनाव आयुक्तों को कठघरे में लिया जायेगा. उनका यह भी कहना था कि वर्ष 2023 के इस कानून को बदलने की जरूरत है, क्योंकि यह निर्वाचन आयुक्तों को यह ताकत देता है कि वे जो चाहें करें. उन्होंने कहा कि इसकी चयन समिति से सीजेआइ को बाहर रखा गया है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत तीन सदस्यीय चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और एक कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि चुनाव से एक माह पहले सभी राजनीतिक दलों को मशीन से पढ़ने योग्य मतदाता सूची उपलब्ध करायी जानी चाहिए, मतदान के समय की सीसीटीवी फुटेज दी जानी चाहिए.

गुजरात में लहसुन प्याज खाना भी तलाक की वजह

जागरण के अनुसार गुजरात के एक दंपती का केवल इसलिए तलाक हो गया, क्योंकि पति को लहसुन और प्याज खाना पसंद था। स्वामीनारायण संप्रदाय से जुडी पत्नी को पति की यह आदत अच्छी नहीं लगती थी। वर्षों तक एक घर में अलग-अलग रसोई चलती रही और अंततः रिश्ते का ही अंत आ गया। गुजरात हाई कोर्ट ने अहमदाबाद की एक पारिवारिक अदालत के तलाक के फैसले को बरकरार रखा, जिससे पति-पत्नी के बीच प्याज और लहसुन के सेवन को लेकर लंबे समय से जारी विवाद का अंत हो गया। न्यायमूर्ति संगीता विशेन और न्यायमूर्ति निशा ठाकोर की खंडपीठ ने तलाक को चुनौती देने वाली महिला की अपील को खारिज कर दिया। पत्नी ने अपनी अपील में कहा कि मामला उसके एक खास संप्रदाय (स्वामीनारायण संप्रदाय) को मानने से जुड़ा है। इस संप्रदाय के अनुयायी प्याज और लहसुन नहीं खाते। अहमदाबाद के इस जोड़े की शादी 2002 में हुई थी। पति की मां पत्नी के लिए प्याज और लहसुन के बिना अलग से खाना बनाती थी, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों के लिए प्याज लहसुन वाला खाना बनाया जाता था। फैसले में कहा गया है कि प्याज-लहसुन का सेवन दोनों पक्षों के बीच विवाद का मुख्य कारण था। हालांकि, हाई कोर्ट में दायर याचिका में पत्नी ने तलाक पर कोई आपत्ति नहीं जताई थी।

कुछ और सुर्खियां:

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिग्गज आईटी कंपनियों के सीईओ से मिले, माइक्रोसॉफ्ट ने 1.58 लाख करोड रुपए का निवेश करने का वादा किया
  • बिहार के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के एससी-एसटी विद्यार्थियों को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति देने के लिए 121 करोड़ रुपए जारी
  • पटना से इंडिगो की 22 उड़ाने रद्द रहीं, आज भी कई उड़ान कैंसिल
  • वैशाली जिले में बस की टक्कर से ऑटो रिक्शा पर सवार चार लोगों की जान गई
  • बिहार, तेलंगाना और उत्तराखंड में पेपर लीक करने का आरोपित संजय कुमार गिरफ्तार
  • मौलाना मजहररुल हक अरब फारसी विश्वविद्यालय का 41.7 करोड़ रुपए का बजट पारित

अनछपी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की एक खास रणनीति यह है कि किसी भी मामले के 100 या 50 साल पूरे होने के नाम पर ऐसी बहस शुरू कराई जाती है जो भावनात्मक होती है लेकिन जिसका आम लोगों के दैनिक जीवन से कोई मतलब नहीं होता। इस रणनीति में यह बात भी शामिल है कि जिस मुद्दे पर विपक्ष बहस करना चाहे उसको किसी न किसी तरह से गलत बात कह कर टाल देना है और अपने एजेंडे वाली बात पर बहस करनी है। ऐसा ही एक मामला आजकल वंदे मातरम के 100 वर्ष पूरे होने के नाम पर संसद में हो रही बहस भी है। गृह मंत्री अमित शाह ने सफाई दी है कि इस चर्चा को चुनाव से ना जोड़ा जाए लेकिन कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने साफ तौर पर कहा कि यह मामला इसलिए गरमाया जा रहा है ताकि भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनाव में इसका लाभ ले सके। यह बात तो सबको मालूम है ही कि वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी का संबंध पश्चिम बंगाल से है और वहां अगले वर्ष चुनाव होने वाला है। यहां तक की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बात को ऐसे पेश किया जो समाज को बांटने वाला है और समाज के उस वर्ग की भावनाओं की अवहेलना करने वाला है जो इस गीत के बोल के शब्द को अपनी धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध मानते हैं। संक्षेप में यह बात की जानी चाहिए कि हमारे नेता जो बोलते हैं उसके पीछे के मकसद को समझना जरूरी है और अगर हम सिर्फ वही बात समझेंगे जो नेता समझाना चाहते हैं तो जनता का कल्याण मुश्किल है।

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