छपी-अनछपी: बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के डायरेक्टर के पास अकूत दौलत, एक्सप्रेसवे पर 13 जिंदा जले
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। भवन निर्माण विभाग के निदेशक, गुणवत्ता अनुश्रवण (उत्तर), दरभंगा गजाधर मंडल के पास अकूत संपत्ति मिली है। मुजफ्फरपुर में तीन बच्चियों को फांसी देने के बाद पिता के भी मौत को गले लगाने की हृदयविदारक घटना के बाद पुलिस मुख्यालय ने राज्य भर में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की जांच कराने का फैसला लिया है। नेशनल हेराल्ड केस में गांधी परिवार को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की छापेमारी में भवन निर्माण विभाग के निदेशक, गुणवत्ता अनुश्रवण (उत्तर), दरभंगा गजाधर मंडल के पास अकूत संपत्ति मिली है। उनके ठिकानों से 3 करोड़ 41 लाख 81 हजार रुपये के 16 जमीनों के दस्तावेज जब्त किए गए हैं। गजाधर मंडल एवं उनकी पत्नी के नाम से 30.80 लाख रुपये के एफडी व शेयर और 8 लाख के सोना-चांदी के जेवरात तथा नकद 1,88,500 रुपये बरामद किए गए हैं। इसके अलावा गजाधर मंडल के द्वारा एलआईसी, स्टार हेल्थ आदि में भी निवेश का पता चला है, जिसका अनुसंधान किया जा रहा है। मंगलवार को एसवीयू ने गजाधर मंडल के पटना एवं भागलपुर स्थित चार ठिकानों पर सुबह-सुबह छापेमारी की।
फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर कार्रवाई का आदेश
हिन्दुस्तान के अनुसार मुजफ्फरपुर में तीन बच्चियों को फांसी देने के बाद पिता के भी मौत को गले लगाने की हृदयविदारक घटना के बाद पुलिस मुख्यालय ने राज्य भर में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की जांच कराने का फैसला लिया है। सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को निर्देश दिया गया है कि वे गैर कानूनी तरीके से चल रहे माइक्रो फाइनेंस कंपनियों को चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई करें। पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने सभी जिलों के एसपी के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। बैठक में उन्होंने पुलिस अधीक्षकों को कहा कि कुकुरमुत्ते की तरह उग आई फर्जी माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करें। इस बीच इस मामले की जांच सीआईडी ने शुरू कर दी है। मंगलवार को डीजीपी विनय कुमार के निर्देश पर सीआईडी की टीम को इस सामूहिक आत्महत्या मामले की जांच के लिए मुजफ्फरपुर भेजा गया।
नेशनल हेराल्ड केस में गांधी परिवार को बड़ी राहत
प्रभात खबर के अनुसार नेशनल हेराल्ड केस में मंगलवार को गांधी परिवार को बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की एक अदालत ने केस से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पांच अन्य के खिलाफ इडी द्वारा दायर चार्जशीट का संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है. कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि इस मामले में दाखिल आरोपपत्र एक निजी व्यक्ति की शिकायत पर की गई जांच पर आधारित है, न कि किसी मूल अपराध से संबंधित प्राथमिकी पर. उन्होंने कहा कि कानून के तहत इस पर संज्ञान लेना स्वीकार्य नहीं है. आदेश के मुख्य हिस्से को पढ़ते हुए न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा पहले ही एफआइआर कर चुकी है इसलिए ऐसे में गुण-दोष के आधार पर इडी के तर्कों पर विचार करना अभी जल्दबाजी होगी. इडी ने कांग्रेस नेताओं सोनिया व राहुल गांधी, दिवंगत पार्टी नेताओं मोतीलाल वोरा एवं ऑस्कर फर्नांडिस के अलावा सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और एक निजी कंपनी ‘यंग इंडियन’ पर आपराधिक साजिश व धनशोधन का आरोप लगाया है.
यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में 13 लोग ज़िंदा जले
जागरण के अनुसार यमुना एक्सप्रेसवे पर मंगलवार सुबह चार बजे घना कोहरा यात्रियों के लिए काल बन गया। मथुरा से नोएडा की साइड में माइल स्टोन 127 के पास एक के बाद एक, 11 वहन आपस में टकरा गए, जिसमें से नौ में आग लग गई। इससे 13 लोग जिंदा जल गए और 100 से अधिक घायल हो गए। मरने वालों में सिर्फ तीन की ही पहचान हो सकी, शेष शव कंकाल बन गए। शवों के अवशेषों को 18 बाडी बैग में पैक किया है। इनकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। दुर्घटना में यह बड़ी गलती रही कि पहली कार से टक्कर के बाद उसकी सवारियां सड़क पर ही गाड़ी चेक करने लगी थीं। कोहरे में दूसरी गाड़ियां उनसे टकराती चली गईं।
भारत और जॉर्डन व्यापार दोगुना करेंगे
हिन्दुस्तान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-जॉर्डन द्विपक्षीय व्यापार को अगले पांच वर्ष में दोगुना करके पांच अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का मंगलवार को प्रस्ताव रखा। साथ ही जॉर्डन की कंपनियों को देश की उच्च आर्थिक वृद्धि का लाभ उठाने व अच्छा मुनाफा कमाने के लिए आमंत्रित किया। मोदी सोमवार को अम्मान पहुंचे थे। जॉर्डन, प्रधानमंत्री की चार दिवसीय तीन देशों की यात्रा का पहला पड़ाव था।
भूमिहार को भूमिहार ब्राह्मण करने के खिलाफ बहुमत
भास्कर की खबर है कि सरकारी दस्तावेजों में भूमिहार जाति के लोगों को भूमिहार ब्राह्मण लिखने या नहीं लिखने पर सवर्ण आयोग (उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग) के भीतर ही विवाद पैदा हो गया है। आयोग के 5 में से 4 सदस्य इसके खिलाफ हैं। इसी कारण 21 नवंबर और 8 दिसंबर को दो बैठकों के होने के बाद भी आयोग कोई फैसला नहीं ले सका। तीसरी बैठक में भी अगर फैसला नहीं हुआ तो गेंद आयोग के पाले से निकलकर राज्य सरकार के हवाले हो जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के संयुक्त सचिव की ओर से बीते 10 अक्टूबर को सवर्ण आयोग को पत्र भेजकर यह मार्गदर्शन मांगा गया कि सरकारी दस्तावेजों में भूमिहार जाति को भूमिहार ब्राह्मण लिखा जाय या नहीं? राज्य सरकार के पत्र के बाद आयोग ने इसकी मांग करने वालों से सबूत जमा करने के लिए कहा। इसके अलावा भूमिहार के बदले भूमिहार ब्राह्मण लिखने का विरोध करने वालों से भी आयोग के पास साक्ष्य जमा करने के लिए कहा गया।
कुछ और सुर्खियां:
- कोहरे की वजह से भागलपुर गरीब रथ 16 घंटे और तेजस राजधानी 13 घंटे लेट पहुंची पटना
- भारतीय रुपया पहली बार डॉलर के मुकाबले 91 के पार
- बीपीएससी ने 70 वीं संयुक्त मुख्य परीक्षा का रिजल्ट जारी किया, 5401 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया
- सीवान जिले के हुसैनगंज थाना क्षेत्र में स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के एटीएम को काटकर 27 लख रुपए की चोरी
- भाजपा के नए राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन ने बिहार में मंत्री पद से इस्तीफा दिया
- आईपीएल नीलामी में कैमरन ग्रीन सबसे महंगे (25 करोड़) खिलाड़ी, बिहार के चार खिलाड़ी 30-30 लाख में बिके
अनछपी: हमारे समाज में जिंदगी के सबसे अहम मुद्दों पर कई बार कितनी कम बात होती है इसका एक उदाहरण मुजफ्फरपुर में एक मजबूर बाप के जरिए खुद को और अपने बच्चों को फांसी लगाने की घटना से मिला है। जो शुरुआती रिपोर्ट आई उससे यह पता चला कि मुजफ्फरपुर के सकरा थाना के नवलपुर मिश्रौलिया गांव के अमरनाथ राम ने आर्थिक तंगी और कर्ज देने वाले सूदखोरों की प्रताड़ना के बाद आत्महत्या करने का फैसला किया जिसमें उन्होंने अपने बच्चों को भी शामिल कर लिया। उनकी पत्नी की पहले मौत हो चुकी है, इसलिए परिवार को हर तरह से संभालने का सारा जिम्मा अमरनाथ पर ही था। सवाल यह है कि जब सरकार इतनी सारी योजनाओं का प्रचार करती है तो उसके रहते कोई परिवार इतना मजबूर कैसे हो गया कि उसे कर्ज नहीं चुकाने की मजबूरी में आत्महत्या जैसा फैसला करना पड़ा। इससे पहले नवादा में भी एक परिवार के कई सदस्यों ने इसी तरह सूदखोरों द्वारा तंग किया जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। अब प्रशासन मुजफ्फरपुर की घटना की सीआईडी जांच करा रहा है और इसमें यह बात भी मालूम की जाएगी कि पीड़ित परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला या नहीं। ऐसा नहीं है कि सरकार की योजनाएं पूरी तरह से नाकाम हैं लेकिन इस बात को भी माना जाना चाहिए कि बिचौलियों की वजह से असली हकदार को अब भी इन योजनाओं का फायदा नहीं मिल पाता। प्रशासन ने अब पूरे बिहार में जो कुकुरमुत्तों की तरह माइक्रो फाइनेंस कंपनियां उगी हुई हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। यह कंपनियां कर्ज पर तीस से साठ फीसद तक ब्याज वसूल रही हैं। सरकार जीविका दीदियों के माध्यम से परिवारों को आर्थिक रूप से संपन्न करने का दावा करती है और एक हद तक वह सही भी है लेकिन इसमें अभी बहुत कमी है। सच्चाई यह है कि बिहार में अभी लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके लिए दो वक्त का खाना, बच्चों की पढ़ाई और एक घर की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल काम है। मगर क्या हमारा समाज उनके लिए चिंतित है?
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