छपी-अनछपी: मोदी-शाह पर जेएनयू में लगे नारे-मुक़दमा, ट्रंप व यूरोप आमने-सामने
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जेएनयू के छात्रों के एक समूह ने प्रतिरोध की रात नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाने पर केस हुआ है। जॉइनिंग के छठे ही दिन बिहार स्टेट स्टाफ सिलेक्शन कमीशन के अध्यक्ष आलोक राज ने इस्तीफा दिया। नेपाल के बीरगंज में टिकटोक वीडियो पर विवाद के बाद मस्जिद में तोड़फोड़ हुई है और वहां तनाव फैला हुआ है।
और, जानिएगा कि रिज़र्वेशन का लाभ लेने पर जनरल कैटेगरी में नहीं मिलेगी नौकरी, सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला।
पहली ख़बर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किये जाने के बाद जेएनयू के छात्रों के एक समूह ने सोमवार रात करीब 10 बजे गुरिल्ला ढाबे के साथ प्रतिरोध की रात नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया था, इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादास्पद नारे लगाये. जेएनयू प्रशासन की शिकायत के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है. जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाये गये सभी नारे वैचारिक थे. मामले में कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा कि यह गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका है. छात्रों में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ गुस्सा है.
कड़ी कार्रवाई की धमकी
जेएनयू ने एक विरोध प्रदर्शन के वीडियो पर गंभीर संज्ञान लिया है. जेएनयू सुरक्षा विभाग ने वसंत कुंज (नॉर्थ) थाना एसएचओ को मुकदमा दर्ज करने के लिए शिकायत पत्र भी दिया है. जेएनयू ने कहा कि इस घटना में शामिल छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी, जिसमें निलंबन, निष्कासन या स्थायी रूप से प्रतिबंधित करना शामिल हो सकता है.
कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष का इस्तीफा
बिहार राज्य कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष आलोक राज ने ज्वाइनिंग के छठे दिन ही इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 1 जनवरी 2026 को ज्वाइन किया था। 6 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 1989 बैच के आईपीएस अफसर आलोक हालांकि, पिछले एक साल से अतिरिक्त प्रभार के रूप में आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे। 18 दिसंबर 2024 को बिहार राज्य पुलिस भवन निर्माण निगम के चेयरमैन-एमडी के अलावा उन्हें आयोग के अध्यक्ष पद का जिम्मा मिला था। आलोक, अगस्त 2024 में तब के डीजीपी आरएस भट्टी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के चलते एक्टिंग डीजीपी बनाए गए। 103 दिन डीजीपी रहे। 1989 बैच का वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते उनको यह पद मिला था।
तरह-तरह की चर्चा
सिर्फ छह दिनों में इतने बड़े पद से इस्तीफा को लेकर तरह-तरह की चर्चा रही। सबसे बड़ी चर्चा यह कि वे मौजूदा सिस्टम में ‘सेट’ नहीं हो सके। इस चर्चा की काट में यह सवाल भी उभरा कि फिर उनके नाम का आदेश कैसे निकला? इस्तीफा को आयोग के कारनामों से भी जोड़ा गया। नौकरी दिलाने वाली यह संस्था बड़ी बदनाम रही है।
ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोपीय देशों का कड़ा विरोध
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ग्रीनलैंड को अमेरिका के अधीन लाने संबंधी टिप्पणियों पर यूरोपीय देशों ने कड़ा विरोध जताया है। फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और ब्रिटेन के राष्ट्राध्यक्षों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि रणनीतिक और खनिज संसाधनों से भरपूर आर्कटिक द्वीप ग्रीनलैंड ‘वहां के लोगों का है’ और उसकी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। संयुक्त बयान पर इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने हस्ताक्षर किए हैं। बयान में इन दिग्गज नेताओं ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ एकजुटता दिखाते हुए ग्रीनलैंड का बचाव किया। ग्रीनलैंड डेनमार्क के राजशाही ढांचे के तहत एक स्वशासित क्षेत्र है।
भागलपुर के सबौर में पारा गिरकर 4.6 डिग्री
बिहार में हाड़ कंपानेवाली ठंड से अभी राहत के आसार नहीं हैं। बिहार मंगलवार को जम्मू से भी ज्यादा ठंडा रहा। जम्मू का न्यूनतम तापमान 8.0 डिग्री था। जबकि, इस सीजन में पहली बार राज्य में न्यूनतम तापमान भागलपुर के सबौर में 4.6 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं, 25 जिलों का न्यूनतम तापमान 8.0 डिग्री से कम रहा। भागलपुर, गया जी, नालंदा, सीवान, समस्तीपुर सहित कई जिलों में तेजी से पारा गिरा है। सभी जिलों में रात का तापमान 10 डिग्री के नीचे रहा। मौसम विभाग के अनुसार आनेवाले दिनों में न्यूनतम पारा और गिरेगा। बिहार में बर्फीली हवा का प्रवाह लगातार जारी है।
नेपाल के बीरगंज में मस्जिद पर हमले के बाद तनाव
भास्कर के अनुसार नेपाल के तराई क्षेत्र के परसा जिले में स्थित बीरगंज शहर में धार्मिक तनाव लगातार गहराता जा रहा है। तनाव की शुरुआत रविवार को हुई जब जनकपुर (धनुषा जिला) के हैदर अंसारी और अमानत अंसारी नाम के दो युवकों ने टिकटॉक पर एक वीडियो पोस्ट किया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वीडियो से धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। वीडियो सामने आते ही इलाके में विरोध शुरू हो गया, जिसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। इस बीच धनुषा जिले के कमला नगरपालिका वार्ड-6 में एक मस्जिद में तोड़फोड़ की घटना सामने आई, जिससे गुस्सा और भड़क गया। मस्जिद को नुकसान पहुंचाए जाने की खबर फैलते ही बीरगंज और आसपास के इलाकों में प्रदर्शन शुरू हो गए। प्रदर्शनकारियों ने आगजनी की, नारेबाजी की। इसके बाद जिला प्रशासन ने बीरगंज में कर्फ्यू लगा दिया। नेपाल में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत-नेपाल सीमा पर भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। 21 घंटे बाद कर्फ्यू हटने पर आवाजाही सामान्य हुई।
आरक्षण लिया तो जनरल सीटों पर नियुक्ति का हक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
हिन्दुस्तान की खबर है कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में आवेदक ने यदि एक बार आरक्षण का लाभ ले लिया है तो वह सामान्य श्रेणी की सीटों पर नियुक्ति पाने का हकदार नहीं है। भले ही उसका कुल अंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक हो। शीर्ष अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और विजय बिश्नोई की पीठ ने भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अनारक्षित कैडर में एक अनुसूचित जाति के उम्मीदवार की नियुक्ति की मांग पर विचार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उक्त आवेदक ने आरंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ उठाया था।
कुछ और सुर्खियां:
- आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर संघ के प्रमुख सरसंघचालक मोहन भागवत गणतंत्र दिवस के अवसर पर मुजफ्फरपुर में झंडा फहराएंगे
- जमशेदपुर के पास झुंड से बिछड़े हाथी ने एक ही परिवार के तीन लोगों समेत चार को कुचल कर मार डाला
- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और खेल प्रशासक सुरेश कलमाड़ी का 81 वर्ष की आयु में पुणे में निधन
- मधुबनी के कांग्रेस कार्यालय में कार्यकर्ता आपस में भिड़े, मारपीट हुई
- उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची से एसाईआर में 18.17 फ़ीसद नाम कटे
अनछपी: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार करने के एक दिन बाद ही कहा कि मुकदमे का ट्रायल शुरू हुए बिना या उसमें उचित प्रगति के बगैर विचाराधीन कैदी को लंबे समय तक जेल में रखना सजा के बराबर है। सुप्रीम कोर्ट के इस तरह के फैसले से यह बात बिल्कुल साफ है कि व्यक्ति की स्वतंत्रता को वह अहमियत नहीं मिल रही है और खुद सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग फैसला दे रहा है। तो क्या इसे केवल किस्मत की बात मानी जाए कि आपका केस किस बेंच के पास जाता है और क्या फैसला होता है या भारत में न्याय प्रणाली में कोई एकरूपता भी है? मंगलवार को जस्टिस संजय कुमार और आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्पीडी ट्रायल किसी अभियुक्त का मौलिक अधिकार है और यह इस वजह से प्रभावित नहीं होता कि कथित अपराध की प्रकृति क्या है। इस बेंच ने कहा की ट्रायल में देरी जमानत देने की एक सही बुनियाद है और 16 महीने से जेल में बंद अरविंद धाम को जमानत दे दी जो एमटेक ग्रुप के चेयरपर्सन हैं। इससे एक दिन पहले शरजील इमाम और उमर खालिद के मामले में दूसरी बेंच ने इसे बिल्कुल अलग राय देते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार किया था। सुप्रीम कोर्ट के ऐसे फ़ैसलों से आम इंसान का विश्वास घटता है और इस मामले में हमारी न्यायिक प्रणाली को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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