छपी-अनछपी: ट्रंप का ईरान में विद्रोह का संदेश, ‘10 मिनट में डिलीवरी’ का धंधा बंद

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में प्रदर्शन और दंगा करने वालों को वहां के संस्थानों पर कब्जा करने का भड़काऊ संदेश दिया है। सरकार ने 10 मिनट में डिलीवरी का दावा वापस लेने का आदेश दिया है क्योंकि समझा जा रहा था कि इससे गिग वर्कर्स बहुत दबाव और तनाव में रहते हैं। बिहार सरकार ने 80 साल और उससे ज़्यादा उम्र वालों के लिए रजिस्ट्री की सुविधा घर पर देने का एलान किया है।

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच ट्रंप ने मंगलवार को ईरानी अधिकारियों संग होने वाली बैठक रद्द कर दी। उन्होंने ईरानी प्रदर्शनकारियों से कहा कि संघर्ष जारी रखो, मदद रास्ते में है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा, ईरानी देशभक्तों, विरोध जारी रखो, अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो, कातिलों और अत्याचारियों के नाम सुरक्षित रखो। उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। प्रदर्शनकारियों की बेवजह हत्याएं बंद होने तक, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। हालांकि अपनी पोस्ट में उन्होंने ये नहीं बताया कि ये मदद किस तरह की होगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले ट्रंप ने मीडिया से कहा था कि उन्होंने ईरान पर की जाने वाली सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया है।

ईरान से व्यापार पर अमेरिका का 25% अतिरिक्त टैरिफ की धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ईरान से किसी भी तरह के व्यापार पर रोक लगाने का फरमान जारी कर दिया। डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि ईरान से व्यापार करने वाला कोई भी देश अमेरिका के साथ अपने व्यापार पर 25 फीसदी टैरिफ देगा। उन्होंने कहा कि यह आदेश अंतिम है और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। ईरान में दो हफ्ते से ज्यादा समय से हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं। ट्रंप का यह कदम सीधे तौर पर ईरान की सरकार पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है, लेकिन इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, चीन, रूस, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश ईरान के बड़े व्यापारिक भागीदार हैं। ऐसे में इन देशों को अब अमेरिका और ईरान के बीच एक को चुनने की मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

‘10 मिनट में डिलीवरी’ पर पाबंदी

जागरण के अनुसार घरेलू सामान सहित अन्य उत्पादों की डोर-टू-डोर डिलीवरी करने वाले डिलीवरी एजेंट्स के हित में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के साथ हुए वृहद विचार-विमर्श के बाद क्विक कामर्स कंपनियों ने इस पर अपनी सहमति दे दी है कि अपने विज्ञापनों से दस मिनट में डिलीवरी जैसे दावे हटा लेंगी, ताकि कंपनी के उस विज्ञापन के दबाव में समयबद्ध डिलीवरी के प्रयास के कारण गिग वर्कर्स की सुरक्षा का कोई जोखिम न रहे। केंद्र सरकार की इस मंशा का अनुपालन करते हुए ग्रासरी डिलीवरी सेवा से जुड़ी कंपनी ब्लिंकिट ने अपने विज्ञान से इस दावे को हटा भी दिया है। पिछले कुछ समय से सरकार के पास लगातार इस आशय की चिंता पहुंच रही थी कि क्विक कामर्स कंपनियां प्रतिस्पर्धा में अपने ब्रांड को आगे रखने के लिए जल्द से जल्द डोर-टू-डोर डिलीवरी का दावा करती हैं।

80+ वाले बुज़ुर्गों को ज़मीन या फ्लैट की रजिस्ट्री की सुविधा घर पर मिलेगी

प्रभात खबर के अनुसार राज्य में 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री करने के लिए घर पर ही निबंधन से जुड़ी सभी सेवाएं मिलेंगी. इसे लेकर मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा चलंत निबंधन इकाई के माध्यम से दस्तावेजों की निश्चित समय-सीमा के अंतर्गत निबंधन की सुविधा दी जायेगी. आवेदक इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. संबंधित विभाग द्वारा जमीन और फ्लैट की रजिस्ट्री की प्रक्रिया सात कार्य दिवस के अंदर सुनिश्चित की जायेगी. जमीन रजिस्ट्री के पहले जमीन के बारे में अपडेट जानकारी खरीदने और बेचने वालों को देने की व्यवस्था भी की जा रही है. इन व्यवस्थाओं को एक अप्रैल 2026 के प्रभाव से लागू करने का निर्देश संबंधित विभाग के अधिकारियों को दिया गया है. यह जानकारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को अपने एक्स हैंडल पर दी है.

संभल हिंसा में पुलिसवालों पर केस का आदेश

हिन्दुस्तान के संभल संस्करण की खबर है कि शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामले में सर्वे के दौरान हुई हिंसा के मामले में मंगलवार को अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अनुज चौधरी, तत्कालीन संभल कोतवाल अनुज तोमर और 15-20 अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने यह आदेश गोली लगने से घायल खग्गू सराय निवासी एक युवक के पिता की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के बाद जारी किया। 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान संभल में भीषण हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में चार युवकों की मौत हुई थी, जबकि कई पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भी घायल हुए थे। इधर संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बयान दिया है कि गोली लगने से घायल युवक के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे और कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।

ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद का दावा

अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद रैंडी फाइन ने सोमवार को ग्रीनलैंड पर कब्जे से जुड़ा विधेयक पेश किया। इसका मकसद इस क्षेत्र को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना है। ‘ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट’ नाम के इस बिल को पेश करने का मकसद इस क्षेत्र पर कब्जा और इसे अमेरिकी राज्य बनाने का कानूनी आधार प्रदान करना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिकी रक्षा के लिए जरूरी है। ग्रीनलैंड की जरूरत है और वे इस दिशा में कदम उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें चाहे बलपूर्वक इसे लेना पड़े या खरीदना पड़े। किसी भी तरह इसे लेकर रहेंगे।

कुछ और सुर्खियां:

  • बिहार विधान मंडल का बजट सत्र 2 फरवरी से 27 फरवरी तक चलेगा
  • मधुबनी जिले में सकरी थाना के पंडोल पावर ग्रिड में अचानक धमाका, इंजीनियर समेत चार लोग झुलसे
  • बिहार के 789 स्कूलों में स्मार्ट क्लास और लैब बनेगी
  • भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय, 20 को एलान
  • आरएसएस के महासचिव होसबाले से मिला चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का दल
  • सुधा डेयरी जल्द लेगा स्ट्रॉबेरी फ्लेवर वाला दही

अनछपी: उत्तर प्रदेश के संभल की एक अदालत ने बड़बोले पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी और दूसरे पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है हालांकि पटना से छपने वाले अक्सर हिंदी अखबारों ने इस खबर को दबा दिया है। यह वही अनुज चौधरी हैं जो मुसलमान के बारे में तरह-तरह के विवादास्पद ध्यान देते रहे हैं। अदालत ने यह आदेश गोली लगने से घायल एक युवक के पिता की ओर से दायर की गई याचिका पर एक साल की सुनवाई के बाद दिया है। ध्यान रहे कि 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान पुलिस ने फायरिंग की थी जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी हालांकि पुलिस वाले दावा करते हैं कि यह मौत उनकी गली से नहीं हुई। इस दावे की पीछे यह बताई जाती है कि पुलिस ने उन हथियारों से फायरिंग की जिसके बारे में माना जाता है कि वह ऐसे हथियार इस्तेमाल नहीं करती है। अब इस आदेश के बाद संभाल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का जो बयान सामने आया है वह बेहद आपत्तिजनक है। एसपी बिश्नोई ने अदालत के आदेश के सम्मान के बारे में कोई बात नहीं की बल्कि यह कहा कि गोली लगने से घायल युवक के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे और कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे। हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार पुलिस को बिल्कुल है लेकिन कम से कम यह बात तो कह सकते थे कि वह अदालत की बात का सम्मान करते हैं। एसपी के बयान में ऐंठन नजर आती है। इससे यह भी समझा जा सकता है कि इस आदेश के बाद चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर पर कितना दबाव पड़ रहा होगा। उन्होंने अपने आदेश में संभल कोतवाली पुलिस को मामला दर्ज कर विवेचना शुरू करने और उसकी जानकारी 7 दिनों के अंदर कोर्ट में देने का निर्देश दिया है। देखना है की अदालत के इस आदेश के मामले में आगे उत्तर प्रदेश शासन और सरकार का क्या रवैया रहता है।

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