छपी-अनछपी: इंडिगो पर 22 करोड़ जुर्माना, ख़ामेनई बोले- ट्रंप के हाथ खून से सने

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। उड़ानें रद्द होने और देरी से संचालित होने के मामलों में इंडिगो पर 22.40 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच जबानी जंग के बाद तनाव फिर बढ़ गया है।

और जानिएगा कि भारत ने चुपचाप अमेरिकी दालों पर 30% टैरिफ लगाया तो वहां के सांसदों ने लगाई गुहार।

पहली ख़बर

डीजीसीए ने बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने और देरी से संचालित होने के मामलों में देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो पर 22.40 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी के तीन अधिकारियों को चेतावनी दी गई है। पिछले साल तीन से पांच दिसंबर के बीच इंडिगो की 2507 उड़ानें रद्द हुई थीं, जबकि 1852 उड़ानें देरी से संचालित की गई थीं। इससे देशभर में तीन लाख से अधिक यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। डीजीसीए ने यह कार्रवाई जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर की है। डीजीसीए ने मंत्रालय के निर्देश पर डीजीसीए ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी।

घुसपैठ के मुद्दे पर मोदी का ममता पर तीखा हमला

भास्कर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मालदा की रैली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी सरकार पर तीखा हमला बोला। कहा, अवैध घुसपैठ बंगाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जो टीएमसी के संरक्षण और ‘सिंडिकेट राज’ के कारण बढ़ी है। इससे राज्य का जनसांख्यिक संतुलन बिगड़ा है और मालदा व मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में बार-बार तनाव और दंगे हुए। कई इलाकों में भाषा और बोली तक बदल रही है। यह सामाजिक ताने-बाने का भी संकट है। उन्होंने कहा, राज्य में भाजपा सरकार बनते ही घुसपैठ और घुसपैठियों के खिलाफ कड़ा एक्शन होगा। प्रधानमंत्री ने धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए शरणार्थियों, खासकर मतुआ समुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। मोदी ने टीएमसी पर गरीबों को डराने, धमकाने और केंद्र की योजनाओं में अड़चन डालने का आरोप लगाया।

खामेनेई व ट्रंप के बीच ज़बानी जंग

भास्कर की खबर है कि ईरान में दो हफ्ते विरोध प्रदर्शनों के बाद दो दिन से छाया सन्नाटा टूटता दिख रहा है। ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच शनिवार को जुबानी जंग के बाद तनाव फिर बढ़ गया। खामेनेई ने पहली बार ये तो माना कि पिछले 28 दिसंबर से जारी प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोग मारे गए। पर, इन मौतों के लिए उन्होंने अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। खामेनई ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हाथ खून से रंगे हैं। ट्रम्प ने भी तुरंत इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ईरान सरकार अब चंद दिनों की मेहमान है। वहां नए नेतृत्व की तलाश करने का समय आ गया है। खामेनेई के आरोपों का जवाब देते हुए ट्रम्प ने कहा कि तेहरान के शासक दमन और हिंसा के सहारे शासन चला रहे हैं।

मेडकिल एंट्रेंस की तैयारी कर रही छात्रा से दरिंदगी मामले की एसआईटी जांच शुरू

पटना से प्रभात खबर की खबर है कि चित्रगुप्त नगर के निजी हॉस्टल में रह रही नीट छात्रा के साथ हुई हैवानियत और मौत के कारणों की जांच करने के लिए एसआइटी ने शनिवार से जांच शुरू कर दी है. एडीजी, आइजी सहित एसआइटी ने एक घंटे तक हॉस्टल की जांच की. अब तक की जांच में यह साफ है कि छात्रा के हॉस्टल से लेकर उसका इलाज करने वाले निजी अस्पताल तक में सुबूतों से छेड़‌छाड़ हुई और उन्हें मिटाने का प्रयास किया गया. एसआइटी के सामने सुबूतों को इकट्ठा करना और उन्हें जोड़ना बड़ी चुनौती होगी. यही कारण है कि शनिवार को देर शाम फारेंसिक की टीम ने भी एक बार फिर हॉस्टल जाकर साक्ष्य जुटाने की कोशिश की.

ट्रंप ने यूरोपीय देशों पर 10 फ़ीसद टैरिफ लगाया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को आठ यूरोपीय देशों पर फरवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की। यह शुल्क ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण का विरोध करने के कारण लगाया गया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड्स और फिनलैंड पर यह टैरिफ लागू होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के साथ पूर्ण खरीद का कोई समझौता नहीं होता है, तो 1 जून से यह शुल्क बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप किस कानूनी अधिकार के तहत यह कदम उठाएंगे और वह यूरोपीय संघ के सदस्य देशों पर अलग-अलग नए टैरिफ कैसे लागू करेंगे। इससे पहले ट्रंप इस तरह की धमकियों के लिए ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ का इस्तेमाल कर चुके हैं।

अमेरिकी दाल पर भारत ने लगाया था 30% टैरिफ, सीनेटरों ने लगाई गुहार

वाशिंगटन से प्रेस ट्रस्ट खबर पर जागरण ने लिखा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद जवाबी कदम उठाते हुए भारत ने अमेरिका से आयात होने वाली दालों और फलियों पर 30 प्रतिशत शुल्क लगा दिया है। यह टैरिफ पिछले वर्ष 30 अक्टूबर से प्रभावी है, हालांकि भारत ने उकसावे से बचने के लिए इसे सार्वजनिक रूप से अधिक प्रचारित नहीं किया। इस कदम से दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार वार्ता के जटिल होने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका के दो प्रभावशाली सांसदों, नार्थ डकोटा के केविन क्रेमर और मोंटाना के स्टीव डेंस ने शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप को पत्र लिखकर किसानों के हित में यह टैरिफ हटाने की अपील की है। उनका कहना है कि भारत के इस निर्णय से अमेरिकी दाल उत्पादकों को भारी प्रतिस्पर्धी नुकसान हो रहा है, विशेषकर उन राज्यों के किसानों को जो मटर और दालों के प्रमुख उत्पादक हैं। सीनेटरों ने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा खपत होनेवाली दालों में मसूर, चना, सूखी फलियां और मटर शामिल हैं।

कुछ और सुर्खियां:

  • झारखंड में मजदूरी के लिए गए अलाउद्दीन शेख की पीट-पीट कर हत्या के बाद पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हिंसा भड़की
  • मधेपुरा में ट्रक से टक्कर के बाद कर में सवार चार युवकों की मौत
  • पूर्वी चंपारण में कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया में विराट रामायण मंदिर में सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना
  • राजद ने 25 जनवरी को कार्यसमिति की विशेष बैठक बुलाई

अनछपी: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी शराबबंदी नीति के समर्थकों के लिए एक बहुत ही सुखद ख़बर आई है कि आईआईटी कानपुर के शोध से पता चला है कि इससे बिहार में पारिवारिक झगड़े काफी कम हुए हैं। ध्यान रहे कि बिहार में 2016 में शराबबंदी लागू की गई थी और इस मामले में नीतीश कुमार को काफी विरोध का भी सामना करना पड़ा है हालांकि आमतौर पर यह माना जाता है कि महिलाओं ने बड़े पैमाने पर इसका समर्थन किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यह बात कहते रहे हैं और अब आईआईटी कानपुर के शोध के अनुसार शराबबंदी के बाद बिहार में लोग शराब की जगह खान-पान पर ज्यादा पैसे खर्च कर रहे हैं। आईआईटी कानपुर के आर्थिक विज्ञान विभाग के विनायक कृष्णात्री के अनुसार इस प्रतिबंध से न सिर्फ घरेलू संसाधन बचे बल्कि पॉजिटिव बदलाव भी आए हैं। अच्छी बात यह है कि अब रिसर्च से भी शराबबंदी के फायदे की पुष्टि हुई है लेकिन इस मामले में कई कमज़ोरियां भी हैं जिन पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। पड़ोसी राज्यों से बिहार में शराब की तस्करी अब भी बड़े पैमाने पर हो रही है और इसमें पुलिस वालों पर भी आरोप लगाता रहा है। इसे रोकना आसान काम नहीं है लेकिन इसपर काबू पाने की कोशिश को और बढ़ाने की जरूरत है। इसी तरह कम पैसे पर बेचने के लिए बनाई जा रही जहरीली शराब से मौत की खबर भी बीच-बीच में आती रहती है। सरकार को शराबबंदी नीति लागू करने में अदालत से भी चुनौती का सामना करना पड़ता है। इन सबके बावजूद इस नीति को आगे बढ़ते रहने की जरूरत है।

 240 total views

Share Now