छ्पी-अनछपी: जिस किताब से ‘डरी सरकार’ वह गायब, पीएम मोदी की स्पीच टली

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पूर्व आर्मी चीफ नरवणे की जिस किताब की बातों को राहुल गांधी संसद में पेश करना चाहते थे वह किताब अचानक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से गायब हो गई है। किताब के विवाद से हुए हंगामा की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना भाषण नहीं दे सके। गाजियाबाद में रहने वाली तीन सगी बहनों के बारे में ख़बर है कि कोरियन गेम की लत की वजह से तीनों ने खुदकुशी कर ली।

और, जानिएगा कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर के मामले में खुद वकील बन सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं।

पहली ख़बर

पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे की किताब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटा दी गई है। राहुल गांधी ने इस किताब की बातों को सामने लाकर कहा था कि सरकार डरी हुई है और इस बात का पता नहीं चल पाया के किताबों को हटाने के पीछे सरकार का आदेश है या कोई और वजह। ऑनलाइन सर्च करने पर एमेजॉन और फ्लिपकार्ट पर इस किताब की तस्वीर तो नजर आती है लेकिन लिंक ओपन करने पर कोई जानकारी नहीं मिलती और उप्स लिखा हुआ आता है। यह खबर अभी किसी अखबार में नजर नहीं आई है लेकिन बहुत से लोगों का मानना है कि इसके पीछे सरकार का हाथ है। ऐसे में बहुत से लोग इस किताब को पढ़ना चाहते हैं और यह जानना चाहते हैं कि यह किताब कहां से मिल सकती है क्योंकि यह भारत से बाहर प्रकाशित की गई है। इसे पेंगुइन रेंडम हाउस ने प्रकाशित किया है लेकिन उसकी वेबसाइट पर भी यह किताब बिकने के लिए उपलब्ध नहीं है।

पीएम मोदी नहीं दे सके अपना भाषण

भास्कर ने लिखा है कि लोकसभा में बुधवार को विपक्ष ने भारी हंगामा किया। चार बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी महिला सांसद इतनी आक्रामक थीं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब से पहले गर्भगृह तक पहुंच नारेबाजी करने लगीं। तब पीएम सदन में मौजूद नहीं थे। हंगामे के चलते राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पीएम मोदी का जवाब टालना पड़ा। पक्ष-विपक्ष की भिडंत की शुरुआत सुबह हुई। पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे की किताब लेकर पहुंचे राहुल गांधी ने संसद परिसर में कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि पीएम में आज लोकसभा आने की हिम्मत होगी। वे आते हैं, तो मैं उन्हें यह किताब दूंगा।’ किताब का मामला लोकसभा में भी गूंजा।

भाजपा सांसद दुबे की अभद्रता

राहुल ने नरवणे की किताब का जिक्र करने की जिद की, तो भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने ‘एडविना एंड नेहरू’ और ‘मित्रोखिन आकाइव’ किताबों का जिक्र कर कहा, ये नेहरू-गांधी परिवार के इतिहास, झूठ, मक्कारी, अय्याशी, भ्रष्टाचार से भरी हुई हैं। हालांकि नियम 349 का हवाला देकर उन्हें रोका गया। इस बीच, पीएम के संसद न आने पर राहुल ने एक्स पर लिखा, ‘पीएम मोदी डरे हुए हैं, सच का सामना नहीं करना चाहते।’

गेम की लत में तीन बहनों की जान गई

प्रभात ख़बर की पहली खबर है कि गाजियाबाद के लोनी इलाके की भारत सिटी सोसाइटी में रहने वाली तीन सगी बहनों की मोबाइल की लत और पारिवारिक तनाव ने उनकी जिंदगी ले ली. पारिवारिक कलह के बीच कोरोना के लॉकडाउन में तीनों बहनों निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) को कोरियन फिल्में और ड्रामा देखने की लत लगी. स्कूल में फेल हुईं तो पिता चेतन कुमार ने आर्थिक तंगी होने पर तीनों बच्चियों का स्कूल भी छुड़ा दिया. इस बीच माता-पिता ने तीनों बच्चियों पर मोबाइल छोड़ने का दबाव बनाया तो मंगलवार की देर रात करीब 2:15 बजे तीनों बहनें नौवीं मंजिल स्थित फ्लैट के कमरे का दरवाजा बंद कर बालकनी से एक-एक कर कूद गयीं. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद चेतन ने पहले बच्चियों के ऑनलाइन ‘टास्क बेस्ड’ कोरियन गेम खेलने की बात कही, पर बच्चियों के मोबाइल की जांच में सामने आया है कि तीनों कोरियन फिल्में और ड्रामा काफी ज्यादा देखती थीं. वे दिन के 15 से 18 घंटों तक मोबाइल पर बिताती थीं. तीनों बच्चियों के कमरे से पुलिस को एक डायरी भी मिली है जिसपर उन्होंने लिखा है- ‘पापा, हमें सच में बहुत अफसोस है, हमें माफ कर देना.’

44 हज़ार शिक्षकों की नियुक्ति होगी

हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार के सरकारी विद्यालयों में चौथे चरण के तहत लगभग 44 हजार शिक्षकों की नियुक्ति होगी। सभी जिलों से कक्षा एक से 12 तक के शिक्षकों की रिक्तियां शिक्षा विभाग को मिल गई है। आरक्षण रोस्टर के हिसाब से रिक्तियां क्लियर कर शिक्षा विभाग ने सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया है। एक सप्ताह में सामान्य प्रशासन विभाग से रिक्तियां बीपीएससी को चली जाएगी। माना जा रहा है कि बीपीएससी से फरवरी अंत या मार्च के प्रारंभ में विद्यालय अध्यापक भर्ती परीक्षा (टीआरई 4) की वैकेंसी आएगी। जानकारी के मुताबिक कक्षा 9 से 12 तक लग्भग 25 हजार पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति होगी। जब

ममता बनर्जी वकील बन पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

जागरण के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में बुधवार का दिन अभूतपूर्व था। पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी सरकार का पक्ष रखा। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने न सिर्फ राज्य में चल रही एसआइआर प्रक्रिया, बल्कि इसकी टाइमिंग और मंशा पर भी सवाल उठाए। मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण का विरोध करते हुए ममता ने कहा कि एसआइआर नाम काटने के लिए किया जा रहा, न कि शामिल करने के लिए। नामों में छोटे-मोटे अंतर पर लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। माइक्रो आब्जर्वर मतदाता सूची से लोगों के नाम काट रहे हैं पूर्ण राम ममता ने कहा कि चुनाव के समय सिर्फ बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। असम को क्यों नहीं? पूर्वोत्तर राज्यों को क्यों नहीं? चुनाव आयोग ने ममता के आरोपों का खंडन किया। राज्य सरकार पर पर्याप्त संख्या में ऑफिसर उपलब्ध नहीं करने का आरोप लगाया। ममता बनर्जी सुबह 10:06 पर ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थीं, हालांकि उनकी याचिका पर सुनवाई करीब 1:45 बजे शुरू हुई।

कुछ और सुर्खियां:

  • मणिपुर में 13 फरवरी 2025 से लागू राष्ट्रपति शासन हटा, भाजपा के खेमचंद सिंह बने मुख्यमंत्री
  • पूर्णिया के अमौर थाने में तैनात 55 साल के हवलदार आलमनाथ भुइयां ने खुद को राइफल की गोली से उड़ाया, झारखंड के चाईबासा के रहने वाले थे
  • दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की संपत्ति 852 बिलियन डॉलर (करीब 71 लाख करोड़ रुपए) हुई
  • राजद के पूर्व विधायक रियाजुल हक राजू जदयू में शामिल हुए
  • पटना के सभी गर्ल्स हॉस्टल का थाने में रजिस्ट्रेशन जरूरी करार दिया गया

अनछपी: गाजियाबाद में फोन और मोबाइल गेम की लत की वजह से जिस तरह तीन बहनों ने कूद कर जान दे दी, वह समाज के लिए बेहद खतरनाक संकेत है और सरकार के लिए भी जागने का वक़्त है। ध्यान देने की बात यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं है लेकिन अगर अब भी सरकार और समाज इस पर काबू पाने के लिए भरपूर कोशिश करे तो कुछ हद तक इस समस्या से निजात मिल सकती है। कम पैसे में इंटरनेट और मोबाइल फोन सेवा सुविधा के साथ-साथ जानलेवा भी साबित हो रही है। ऐसे में मां-बाप की ज़िम्मेदारी पहले से कहीं ज़्यादा हो गई है। यह समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि स्मार्टफ़ोन भी एक चाकू की तरह है जिसका इस्तेमाल सब्जी काटने में भी हो सकता है और किसी का मर्डर करने में भी। जदयू के सांसद संजय झा ने लोकसभा में बच्चों के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने संबंधी जो प्रस्ताव दिया है सरकार को उस पर जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई जा चुकी है और कई देशों में इस पर विचार चल रहा है कि बच्चों को स्मार्टफोन की बुरी लत से दूर रखने के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए। भारत सरकार हालांकि बहुत से खतरनाक गेम्स पर पाबंदी लगा चुकी है और उन्हें प्ले स्टोर से हटाया जा चुका है लेकिन अब भी बहुत सारे ऐसे साधन हैं जिनमें फंसकर बच्चे मुसीबत में पड़ जाते हैं। स्मार्टफोन के इस्तेमाल की एक बड़ी वजह यह भी है कि स्कूलों में भी इसे पढ़ने और संदेश भेजने का माध्यम बना रखा है जिससे मां-बाप भी मजबूर होकर बच्चों को स्मार्टफोन देने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह बात साफ तौर पर समझी जानी चाहिए कि अगर ऑनलाइन सिस्टम जानलेवा साबित हो रहा है तो इस सेवा को सीमित करना जरूरी है।

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