छ्पी-अनछपी: स्कूलों में चलेंगे डिग्री कॉलेज, दरभंगा में दरिंदगी के खिलाफ ज़बर्दस्त प्रदर्शन
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार के जिन 213 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने की बात कही जा रही है उसके लिए व्यवस्था फिलहाल स्कूलों में होगी। दरभंगा में एक बच्ची के साथ हुई दरिंदगी के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ है। इमारत-ए-शरिया में हुई मजलिस-ए-शूरा में मॉब लिंचिंग की घटनाओं के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रभावी कानून की मांग की गई।
और, जानिएगा कि डेनमार्क में अमेरिका के सामान के बायकॉट के लिए कैसे ऐप का इस्तेमाल हो रहा।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्य के 213 प्रखंडों में नए डिग्री कालेज खोलने और इसी साल जुलाई से इनमें स्नातक की पढ़ाई शुरू कराने की घोषणा पर अमल करने हेतु उच्च शिक्षा विभाग युद्धस्तर पर तैयारी में जुट गया है। प्रदेश के डिग्री कालेज विहीन 213 प्रखंडों में खुलने वाले डिग्री कालेजों का अपना भवन एवं परिसर बनने तक संबंधित प्रखंडों के प्लस टू स्कूलों के नये भवनों में स्नातक की पढ़ाई शुरू होगी। यानी, नए डिग्री कालेजों के भवनों के निर्माण होने तक स्नातक की पढ़ाई प्लस-टू स्कूलों में करायी जाएगी। संभवतः कक्षाओं के संचालन की टाइमिंग अलग होगी। विद्यार्थियों को पढ़ाने हेतु प्राध्यापकों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। नए डिग्री कॉलेज की मान्यता विश्वविद्यालय से ली जाएगी।
दरभंगा में दरिंदगी के खिलाफ ज़बर्दस्त प्रदर्शन
दरभंगा में छह साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई। घटना विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के चित्रगुप्त मोहल्ले में शनिवार की रात हुई। पोखरिया पोखर परिसर में अपनी बड़ी बहन व सहेलियों के साथ मासूम बच्ची खेल रही थी। इस दौरान मोहल्ले का युवक विकास कुमार महतो अंधेरा का फायदा उठा कर उसे ले गया। उसके साथ दुष्कर्म किया। बेहोश व खून से लथपथ मासूम को करीब 8 फीट की दीवार से उस पार फेंक दिया। पुलिस व लोगों का ध्यान के भौंकने की आवाज की ओर गया। वहां बच्ची मृत मिली। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। घटना के विरोध में रविवार को गुस्साए लोगों ने आरोपी के ऑटो में आग लगा दी। बाघ मोड़ से दिल्ली मोड़ जाने वाली सड़क को दुर्गा मंदिर के पास जाम कर दिया। आक्रोशित लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान सड़क पर पुलिस पिस्टल लहराती दिखी। पुलिस ने लाठीचार्ज कर माहौल को शांत किया।
इमारत-ए-शरिया की मांग- मॉब लिंचिंग के मुजरिमों को मिले कड़ी सज़ा
हिन्दुस्तान के अनुसार इमारत-ए-शरिया में रविवार को वार्षिक मजलिस-ए-शूरा का आयोजन किया गया। इस में बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल से आने वाले शूरा के सदस्यों समेत ढाई सौ से अधिक विद्वानों ने भाग लिया। बैठक के दौरान इमारत शरिया के सभी विभागों की रिपोर्ट प्रस्तुत की गईं। मजलिस-ए-शूरा ने अमीर-ए-शरीअत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के कार्यों की सराहना की और इमारत शरिया की तरक्की एवं मजबूती के लिए लिए गए फैसलों का समर्थन किया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दो को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत तहफ्फुज-ए-औकाफ और एसआईआर से संबंधित मुहिम को मजबूती से जारी रखने एवं मॉब लिंचिंग की घटनाओं की निंदा के साथ दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रभावी कानूनी और सामाजिक व्यवस्था बनाने की बात कही गई। इस अवसर पर मौलाना फैसल रहमानी ने कहा कि बगैर सामूहिकता के मुसलमानों के मसाइल हल नहीं हो सकते। ह
मलेशिया से 11 सेक्टर्स में व्यापार समझौता
हिन्दुस्तान के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मलेशिया दौरे के दूसरे और आखिरी दिन रविवार को दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति जताई। दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), व्यापार, निवेश, रक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित 11 क्षेत्रों में समझौते हुए। मलेशिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत-मलेशिया संबंध ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित हैं।
आरएसएस चीफ बोले- सहमति से बने यूनिफॉर्म सिविल कोड
मुंबई से जागरण की खबर है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का विचार देश की एकता के लिए अच्छा है। लेकिन, इसे सबकी सहमति से और सबको विश्वास में लेकर ही बनाया जाना चाहिए। कानून का ढांचा ऐसा होना चाहिए, जो लोगों को जोड़ने का काम करे, न कि बांटने का। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार संबंधी एक प्रश्न पर कहा कि वहां के हिंदू समुदाय ने पलायन करने के बजाय एकजुट होकर प्रतिरोध करने का रास्ता चुना है। वहां अभी सवा करोड़ हिंदू हैं। वे यदि एकजुट होकर खड़े हो जाएं तो हम लोग और दुनिया भर में रह रहे हिंदू अपनी मर्यादा में रहकर जितनी उनकी मदद हो सकेगी, वह करेंगे। उन्होंने जाति व्यवस्था की अवधारणा को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि संघ का सर संघचालक कोई ब्राह्मण नहीं बन सकता, कोई क्षत्रीय नहीं बन सकता, कोई अन्य जाति का भी नहीं रख सकता। हां, जो कोई भी बनेगा वह हिंदू ही होगा।
डेनमार्क में अमेरिका के सामान का ऐप से बायकॉट
हिन्दुस्तान के अनुसार पिछले महीने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका-डेनमार्क के बीच कूटनीतिक तनाव अब एक डिजिटल लड़ाई में बदल रहा है। कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार, जब से अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर धमकी दी है, तब से डेनमार्क में ऐसे मोबाइल ऐप की मांग बढ़ गई है, जो उपभोक्ताओं को अमेरिकी उत्पादों की पहचान करने और बहिष्कार में मददगार हैं। जनवरी के अंत में ट्रंप की धमकी के बाद मेड ओ मीटर ऐप में सिर्फ तीन दिनों में 30 हजार नए डाउनलोड्स दर्ज किए गए। 23 जनवरी को इस ऐप पर एक ही दिन में 40 हजार बार उत्पादों को स्कैन किया गया, सामान्य दिनों में यह संख्या 500 होती थी। ऐप एआई का इस्तेमाल कर बताता है कि खाने-पीने के सामान की पैरेंट कंपनी कौन सी है और उसका विकल्प क्या हो सकता है। पिछले वर्ष मार्च में लॉन्च होने के बाद से यह अब तक एक लाख से अधिक बार डाउनलोड हो चुका है।
कुछ और सुर्खियां:
- बिहार के 7 लाख विद्यार्थियों के उत्तर में गलती, लापरवाही के मामले में 24 डीपीओ से जवाब तलब
- पूर्णिया के सांसद कि पीएमसीएच के कैदी वार्ड में हुई जांच, डिस्चार्ज के बाद भेजा गया बेउर जेल
- जहानाबाद की छात्रा से दरिंदगी मामले में इंसाफ के लिए दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन
- महिलाओं को रोज़गार के लिए दो-दो लाख नहीं मिला तो प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी करेगी आंदोलन
- अमेरिका से व्यापार समझौते के विरोध में 12 फरवरी को पूरे देश में किसान संघ करेंगे हड़ताल
अनछपी: बिहार में भ्रष्टाचार, और शिक्षा की बर्बादी दो ऐसे विषय हैं जिसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को व्यापक पैमाने पर दोषी ठहराया जाता है। यह बेवजह नहीं है। अभी भले ही नीतीश कुमार की सेहत और याद्दाश्त पर सवाल खड़े हो रहे हों लेकिन जब ऐसे सवाल नहीं थे तब भी नीतीश कुमार ने ऐसी घोषणाएं की थीं, जिनका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है। उदाहरण के लिए हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज तो खोल दिया गया लेकिन वहां की पढ़ाई और जरूरी सुविधाओं के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। अब ताजा फरमान यह है कि 213 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोला जाएगा और हकीकत यह है कि इसके लिए भी कोई तैयारी नहीं है। जो रिपोर्ट सामने आई है उसमें यह कहा गया है कि इन नए डिग्री कॉलेजों को जुलाई से शुरू कर देना है लेकिन इसके पास ना तो बिल्डिंग है और ना ही पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक। जैसे सदर अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का रूप देखकर नीतीश सरकार ने मेडिकल कॉलेज खोलने का दावा किया, उसी तरह अब यह खबर सामने आई है कि जो प्लस टू के स्कूल हैं, उसी की बिल्डिंग में फिलहाल डिग्री कॉलेज की पढ़ाई होगी और दूसरे कॉलेज से लाकर शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। यानी ना तो बिल्डिंग है ना ही शिक्षक, फिर भी कॉलेज खोलने का दावा। स्कूलों में साइंस की पढ़ाई के लिए जरूरी लैब की व्यवस्था नाकारा है, अब वहां डिग्री कॉलेज खुल जाएंगे तो उसके लैब की व्यवस्था कौन करेगा? इसके बाद पढ़ाई का क्या होगा और वहां से कैसे विद्यार्थी निकालेंगे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
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