छपी-अनछपी: 27 करोड़ डॉलर में अदाणी का केस खत्म, कल बंद रहेंगी दवा दुकानें

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी को 27.5 करोड़ डॉलर देकर अपने खिलाफ केस को बंद करवाने में कामयाबी मिली है। बिहार समेत देशभर के केमिस्ट संगठन मंगलवार की रात 12 से बुधवार की रात 12 बजे तक दवा दुकानें बंद रखेंगे।  

और, आनंद मोहन बोले- जदयू में करोड़ों देने वाले मंत्री बने। 

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार अदाणी एंटरप्राइजेज ने सोमवार को अमेरिकी वित्त विभाग के ‘विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय’ को 27.5 करोड़ डॉलर यानी करीब 2600 करोड़ रुपये का भुगतान कर ईरानी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले का निपटारा कर लिया। यह मामला गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के जरिये ईरान से जुड़े एलपीजी के आयात से संबंधित है। इस तरह अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत मिली है। अमेरिकी न्याय विभाग ने उनके खिलाफ सभी आपराधिक आरोपों को स्थायी रूप से वापस ले लिया है। इसके साथ ही न्यूयॉर्क में चल रहा बहुचर्चित प्रतिभूति एवं धोखाधड़ी मामला पूरी तरह खत्म हो गया है। अमेरिकी अभियोजकों ने कहा कि वे अब इन आरोपों को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। समीक्षा के बाद तय किया गया इन आपराधिक आरोपों पर आगे साधन खर्च करने की जरूरत नहीं है। इसके बाद अदालत ने अदाणी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दाखिल आरोपपत्र को स्थायी रूप से खारिज कर दिया। इसका मतलब है कि यह मामला अब दोबारा नहीं खोला जा सकेगा।

ऑनलाइन बिक्री और नई नीति के विरोध में 24 घंटे के लिए बंद रहेंगी दवा दुकानें

जागरण के अनुसार दवा की आनलाइन बिक्री और नई दवा नीति के विरोध में बिहार समेत देशभर के केमिस्ट संगठन मंगलवार की रात 12 से बुधवार की रात 12 बजे तक दवा दुकानें बंद रखेंगे। इस दौरान थोक और खुदरा दोनों प्रकार की दवा दुकानें बंद रहेंगी। इमरजेंसी के लिए नर्सिंग होम व सरकारी अस्पतालों के पास के कुछ दवा दुकानों को इससे मुक्त रखा गया है। इस अवधि में राज्य के 40 हजार दवा दुकानें बंद रहेंगी। इनमें सात हजार दुकानें पटना में है। देशभर में साढ़े 12 लाख दुकानें बंद रहेंगी। ये बातें संवाददाता सम्मेलन में बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष परसन कुमार सिंह एवं महासचिव प्रभाकर कुमार ने कहीं। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि आनलाइन दवा बिक्री से पारंपरिक दवा कारोबार प्रभावित हो रहा है।

ईरान का नया शांति प्रस्ताव भी अमेरिका ने ठुकराया

हिन्दुस्तान के अनुसार ईरान-अमेरिका में तनाव कम होता नहीं दिख रहा। ईरान ने स्थायी शांति के लिए रविवार रात को नया प्रस्ताव भेजा था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने उसे भी खारिज कर दिया है। हालांकि, इस बारे में खबर लिखे जाने तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। दूसरी ओर, ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को अंजाम भुगतने की चेतावनी दी। एक्सिओस की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि यह प्रस्ताव अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता और किसी समझौते की दिशा में सार्थक प्रगति नहीं दर्शाता है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका कूटनीतिक और सैन्य, दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है। ईरान का नवीनतम जवाबी प्रस्ताव रविवार रात पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से सौंपा गया था।

योगी के बिगड़े बोल- प्यार से माने तो ठीक नहीं तो…

जागरण के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि प्रदेश में सड़क पर नमाज की अनुमति किसी भी कीमत पर नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए, हम रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं। सड़कें चलने के लिए हैं, अव्यवस्था फैलाने के लिए नहीं। मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि लोग प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो सरकार दूसरा तरीका अपनाना भी जानती है। एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था, विकास, पत्रकारिता और सामाजिक अनुशासन जैसे मुद्दों पर बेबाक राय रखी। कहा कि प्रदेश अब दंगे, माफिया और कट्टा-बम की पहचान से निकलकर ब्रह्मोस मिसाइल, डिफेंस कारिडोर, एक्सप्रेसवे और निवेश के नए केंद्र के रूप में उभरा है।  

बंगाल में इमाम, मुअज़्ज़िन और पुरोहितों का भत्ता बंद

बंगाल की नव-निर्वाचित भाजपा सरकार ने कैबिनेट की दूसरी बैठक में धर्म के आधार पर चलाई जा रही सभी वित्तीय सहायता योजनाओं को पूरी तरह बंद कड़ने का फैसला लिया गया है।  पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार द्वारा चुनावी बिसात पर इमामों, मुअज्जिनों और पुरोहितों के लिए शुरू की गई मासिक भत्ता योजना पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। करीब सवा सात लाख करोड़ रुपये के कर्ज के दलदल में फंसे बंगाल के लिए यह कदम आर्थिक रूप से अनिवार्य और राजनीतिक रूप से साहसिक माना जा रहा है। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा राज्य की 43 हजार से अधिक दुर्गापूजा समितियों को दिए जाने वाले 1.10 लाख रुपये के अनुदान और बिजली बिल में 80 प्रतिशत की छूट पर नई सरकार ने फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. 

जदयू में करोड़ों देने वाले मंत्री बने: आनंद मोहन

भास्कर के अनुसार पूर्व सांसद आनंद मोहन ने जदयू नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि पार्टी में पैसे (थैली) देकर मंत्री पद बांटे जा रहे हैं। करोड़ों लेकर टिकट और मंत्री पद दिए गए। दरअसल, आनंद मोहन अपने बेटे और जदयू विधायक चेतन आनंद को मंत्री न बनाए जाने से बेहद नाराज हैं। उन्होंने मंच से कहा कि कुछ स्वार्थी नेताओं ने नीतीश कुमार को राजनीतिक रूप से खत्म कर दिया है। आनंद के मुताबिक, उनके बेटे ने ही सरकार बचाई थी, इसलिए उसे मंत्री बनाना चाहिए। इन गंभीर आरोपों के बाद जदयू ने तीखा पलटवार किया है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि पार्टी के फैसले नेतृत्व का विषय हैं, बाहरी लोगों को इस पर बोलने का कोई हक नहीं है। वहीं, विधान पार्षद संजयसिंह ने कहा कि आनंद मोहन पुत्र मोह में अंधे होकर धृतराष्ट्र बन गए हैं। पार्टी नेताओं ने उन्हें याद दिलाया कि नीतीश कुमार के प्रयासों से ही वे आज जेल से बाहर हैं। ऐसे में उन्हें पार्टी का अहसानमंद होना चाहिए, ना कि उसे कमजोर करना चाहिए।

कुछ और सुर्खियां:

  • महाराष्ट्र के पालघर जिले में कंटेनर और बारातियों से लदे ट्रक के बीच टक्कर, 13 लोगों की मौत
  • 1$=₹96.35- डॉलर के मुकाबले रुपया 54 पैसे टूट कर रिकॉर्ड 96.35 तक पहुंचा
  • वीडी सतीशन ने केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली
  • बिहार में राष्ट्रीय कला विश्वविद्यालय खुलेगा, भिखारी ठाकुर के नाम से संग्रहालय बनाएगा कला संस्कृति विभाग
  • सासाराम जंक्शन के प्लेटफार्म पर खड़ी पटना फास्ट पैसेंजर में अचानक आग लगी, कोई हताहत नहीं, एक बोगी जलकर राख

अनछपी: भारत में गैर कानूनी गतिविधियों के रोकने के नाम पर जायज विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को भी जिस तरह जेल में डाला गया और उन्हें जमानत देने से जिस तरह अदालतों ने इनकार किया, वह भारत में एक बेहद गंभीर समस्या रही है। आमतौर पर कोर्ट का यह मानना रहा है कि बेल नियम है और जेल अपवाद लेकिन गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के नाम पर बनाए गए कानून यूएपीए के तहत गिरफ्तार लोगों के बारे में यह नियम बुरी तरह फ़ेल हुआ है और इसमें सबसे बड़ा हाथ सुप्रीम कोर्ट का ही रहा है। अब उसी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिए एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) में भी जमानत नियम है और जेल अपवाद है। ध्यान देने की बात यह है कि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूएपीए की धारा 43डी (5) के तहत जमानत पर लगी कानूनी पाबंदियां संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 के तहत मिले स्वतंत्रता के अधिकार को समाप्त नहीं कर सकतीं। इन टिप्पणियों के साथ ही कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के हाई प्रोफाइल ‘नार्को टेरर’ के अपराध में आरोपित पांच साल से ज्यादा समय से जेल में बंद सैयद इफ्तिखार अंद्राबी को जमानत दे दी। यह फैसला न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जवल भुयान की पीठ ने दिया। कोर्ट ने दिल्ली दंगों से जुड़े गुलफ़िशां फ़ातिमा मामले में सुप्रीम कोर्ट के ही दो जजों की पीठ के फैसले पर भी सवाल उठाया। मालूम हो कि दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने कई आरोपितों को जमानत दे दी थी लेकिन उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं दी थी। सुप्रीम कोर्ट के ज़मानत न देने के इस तरह के फैसलों से जहां उस पर भरोसा कम हुआ है, वहीं ताजा फैसले ने एक हद तक यह उम्मीद जगाई है कि कभी-कभी सुप्रीम कोर्ट में इंसाफ दिलाने वाला फैसला भी होता है। 

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