बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। ग्रामीण कार्य विभाग के झाझा कार्य प्रमंडल (जमुई) में तैनात एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पास 10 करोड़ की ब्लैक मनी का पता चला है। आंध्र प्रदेश ने तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि की घोषणा की है।
पहली ख़बर
हिन्दुस्तान के अनुसार ग्रामीण कार्य विभाग के झाझा कार्य प्रमंडल (जमुई) में तैनात कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार काला धन के कुबेर निकले हैं। आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने शनिवार को आय से अधिक संपत्ति मामले में उनके पांच ठिकानों पर छापेमारी की। छापे में गोपाल कुमार के ठिकानों से करीब 48 लाख रुपये नकद, 60.47 लाख रुपये मूल्य का 424.08 ग्राम सोने का आभूषण और करीब एक किलो चांदी मिली है। यह छापेमारी पटना में मजिस्ट्रेट कॉलोनी, इंदिरा नगर (कंकड़बाग), राजाबाजार स्थित ससुराल, झाझा में उनके सरकारी कार्यालय और जमुई स्थित किराये के आवास पर हुई। देर शाम तक तलाशी अभियान जारी रहा। भास्कर के अनुसार महज 17-18 साल की नौकरी में इंजीनियर ने आय से 81.5 प्रतिशत अधिक संपत्ति बना ली है। जांच टीम के मुताबिक, इंजीनियर ने अपनी नौकरी के दौरान लगभग 10 करोड़ की चल-अचल संपत्ति अर्जित की है। छापेमारी के दौरान इतना कैश मिला कि अधिकारियों को नोट गिनने वाली मशीन मंगवानी पड़ गई।
आंध्र प्रदेश में तीसरे बच्चे पर 30, चौथे पर 40 हज़ार
जागरण के अनुसार आबादी कम होने के चलते लोकसभा में सीटें घटने की आशंका के बीच आंध्र प्रदेश की सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने शनिवार को तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। यह कदम राज्य में तेजी से घटती प्रजनन दर को रोकने के प्रयासों के तहत उठाया गया है। परिसीमन को लेकर दक्षिण के राज्यों को इस बात की आशंका है कि उत्तर भारत के मुकाबले उनकी आबादी कम होने के चलते लोकसभा में उनकी सीटें कम हो सकती हैं। ऐसे में इस तरह की पहल करने वाला आंध्र प्रदेश दक्षिण का पहला राज्य है। श्रीकाकुलम जिले के नरसन्नापेटा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए नायडू ने कहा कि सरकार ने यह निर्णय लिया है और एक महीने के भीतर इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा, ”मैंने एक नया निर्णय लिया है। हम तीसरे बच्चे के जन्म के तुरंत बाद 30 हजार रुपये और चौथे बच्चे के जन्म पर 40 हजाए रुपये देंगे। क्या यह सही निर्णय नहीं है।” नायडू इससे पहले दूसरे बच्चे के जन्म पर 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा कर चुके हैं।
बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका, ईरान भी सख्त
प्रभात खबर के अनुसार अमेरिका अगले कुछ दिनों में ईरान के खिलाफ सैन्य काक़र्रवाई तेज कर सकता है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पेंटागन ने हमले के कई विकल्प तैयार कर लिये हैं. अंतिम फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के स्तर पर होना है. सूत्रों के अनुसार अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल नेटवर्क और रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की योजना बनायी है. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने संकेत दिये हैं कि कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है. रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पश्चिम एशिया में इस समय 50 हजार से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. इसके अलावा दो एयरक्राफ्ट कैरियर, कई नेवी डेस्ट्रॉयर, लड़ाकू विमान और हजारों मरीन भी अलर्ट पर रखे गये हैं. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक एक विकल्प इस्फहान परमाणु केंद्र तक पहुंचने के लिए स्पेशल फोर्सेज के इस्तेमाल का भी है, हालांकि इसे बेहद जोखिम भरा अभियान माना जा रहा है.
तनाव के बीच ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है. ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही के लिए नया नियंत्रण तंत्र लागू किया जायेगा. उनके मुताबिक केवल सहयोग करने वाले जहाजों को तय समुद्री मार्ग से गुजरने दिया जायेगा.
तीन भाषा की पढ़ाई ज़रूरी, लेकिन तीसरी की बोर्ड परीक्षा नहीं
सीबीएसई ने स्कूलों में नौवीं-10वीं में तीन भाषाओं को अनिवार्य करते हुए कहा है कि छात्र विषय सूची में शामिल किसी भी भाषा को चुन सकते हैं। लेकिन यह सुनिश्चित करना होगा कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं हों। विदेशी भाषा को केवल तीसरी भाषा या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ाया जा सकेगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा (आर-3) के लिए दसवीं में कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों पर परीक्षा का अतिरिक्त दबाव कम करना व भाषा सीखने को अधिक सहज बनाना है। सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे जून तक ओएएसआईएस पोर्टल पर तीसरी भाषा के संबंध में जानकारी दें।
बीस दिनों की हज यात्रा की भी सुविधा मिलेगी
जागरण के अनुसार केंद्र सरकार ने शनिवार को भारतीय हजयात्रियों के लिए इस वर्ष छोटा हज पैकेज शुरू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य सभी आवश्यक रस्मों को पूरा करते हुए हजयात्रा की अवधि को कम करना है। केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जार्ज कुरियन के कार्यालय ने कहा कि हजयात्री लगभग 20 दिनों के कम समय के साथ हज करेंगे, जबकि आम हज का समय 40-45 दिन होता है। इस पैकेज का मक़सद कामकाजी और कम समय रखने वाले लोगों के लिए सुविधा देना है।
NEET पेपर लीक: बॉटनी की एक्सपर्ट गिरफ्तार
प्रभात ख़बर के अनुसार सीबीआई ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे की सीनियर बॉटनी टीचर मनीषा गुरुनाथ मंधारे को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. मंधारे को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा विषय विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया गया था, जिसके कारण उनकी पहुंच बॉटनी और जूलॉजी के गोपनीय प्रश्नपत्रों तक थी. जांच एजेंसी के अनुसार, इस पद का दुरुपयोग करते हुए मंधारे ने लीक किए गये वास्तविक प्रश्नों को चुनिंदा छात्रों को पहले ही उपलब्ध करा दिया था.
कुछ और सुर्खियां:
- पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर आजमगढ़ के पास कंटेनर से कर की टक्कर, सीवान के पांच लोगों की मौत
- दिसंबर 2003 से पहले की भर्ती प्रक्रिया से नौकरी पाए रेल कर्मियों को पुरानी पेंशन मिलेगी
- पटना मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन डिपार्टमेंट के 2022 बैच के एमबीबीएस छात्रों का पहली इंटरनल एग्जाम धांधली की वजह से रद्द
- राजगीर का मलमास मेला आज से हो रहा शुरू 15 जून तक चलेगा
अनछपी: अदालतों से इंसाफ की आवाज़ बुलंद होने की उम्मीद रहती है लेकिन पिछले कई सालों से भारत के हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से ऐसे बयान सामने आते रहे हैं जो हैरतअंगेज स्तर तक इंसाफ की आवाज़ को दबाने वाले माने गए। बेहद अफ़सोस की बात है कि इस कड़ी में अब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआइ) का नाम जुड़ गया है हालांकि उन्होंने इसकी सफाई में कहा है कि उनके बयान को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार को एक बयान जारी कर अपनी ‘परजीवी’ और ‘कॉकरोच की तरह होते हैं कुछ बेरोजगार युवा’ वाली टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण दिया। उनका कहना कहा कि मीडिया के एक वर्ग द्वारा उनकी मौखिक टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया है। शुक्रवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने उन लोगों की आलोचना की थी, जो उनके अनुसार वकालत (बार) जैसे नोबल प्रोफेशन में फर्जी और बोगस डिग्री के सहारे घुस आए हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि ऐसे ही लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य पेशों में भी चुपके से घुस गए हैं और वे समाज के लिए ‘परजीवी’ की तरह हैं। जस्टिस सूर्यकांत के इस बयान को दरअसल उन लोगों की आवाज दबाने की कोशिश समझ गया जो आरटीआई और दूसरे माध्यमों से अदालतों में फैली अराजकता और अनियमितता को सामने लाते रहते हैं। कुछ लोगों ने तो यह भी कहा कि दरअसल जस्टिस सूर्यकांत आरटीआई के इस्तेमाल से सरकार की अनियमिताओं को उजागर करने वालों को भी बदनाम करने वाला बयान दिया है। जब उनके बयान का चौतरफा विरोध हुआ तो उन्होंने सफाई दी कि कॉकरोच और पैरासाइट्स वाला बयान देश के युवाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि फर्जी डिग्री के सहारे विभिन्न पेशों में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ था। मगर यह सफाई इसलिए आई क्योंकि उनके बयान का विरोध इस पैमाने पर हुआ कि उनके लिए यह ज़रूरी हो गया था। इसलिए हर गलत बयान का विरोध ज़रूरी है, चाहे बयान देने वाला चीफ जस्टिस हो क्यों न हो।
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