बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने युवाओं को कॉकरोच बताने वाली टिप्पणी की और उसी नाम से बनी पार्टी ने एक केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने में कामयाबी हासिल कर ली। आइसा के बिहार बंद के आह्वान पर शनिवार को सड़क पर उतरे विपक्षी दलों के छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान सिवान में पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया, फिर आंसू गैस के गोले छोड़े और 10 राउंड हवाई फायरिंग की।
और, जानिएगा कि जमुई के पंक्चर बनाने वाले सरफराज ने कैसे अपनी कमाई से बनवा दी 15 लाख की पुलिया।
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी, नीट पेपर लौक से गुस्सा और सौशल मीडिया पर शुरू हुई व्यंग्यात्मक मुहिम… इन तीनों ने ऐसा आंदोलन खड़ा किया कि पार्टी बनने के 70 दिन के भीतर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। मई में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की ‘कॉकरोच’ संबंधी टिप्पणी वायरल हुई। इसके बाद अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अगर कॉकरोच कहे जा रहे युवा एकजुट हो जाएं तो क्या होगा?’ दिपके ने सीजेपी बनाई और कुछ ही दिनों में उसके इंस्टाग्राम पर 2.1 करोड़ फॉलोअर हो गए। इसी बीच, नीट पेपर लीक को मुद्दा बनाकर सीजेपी ने सड़क पर उतरने का ऐलान किया। ‘कॉकरोच’ शब्द को आंदोलन की पहचान बना लिया। मास्क, पोस्टर और स्लोगन इसी नाम से बने। आंदोलन जंतर-मंतर पहुंचा। देश में अपनी तरह के पहले आंदोलन में 30 सेकेंड की रील्स, मीम, पैरोडी और इंस्टाग्राम लाइव ने करोड़ों युवाओं को जोड़ा। यह जेन-जी आंदोलन बन गया।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, सीजेपी का आंदोलन खत्म
जागरण के अनुसार नीट पेपर लीक से उठे विवाद में आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सरकार ने इस्तीफे के साथ साथ आंदोलनकारियों पर हुए सभी केस वापस करने और नीट के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी मान ली। इसके साथ ही जंतर मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का छात्र आंदोलन भी खत्म हो गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के साथ वार्ता व सरकार की ओर से सभी मांगें माने जाने के बाद सीजेपी के प्रतिनिधि आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर 36 दिन से चल रहा आंदोलन तत्काल खत्म करने का एलान किया और सभी प्रदर्शनकारियों से वापस अपने घर लौटने की अपील की। इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
सीवान-छपरा में फायरिंग, तीन को लगी गोली
जागरण के अनुसार नीट पेपर लीक प्रकरण में आइसा के बिहार बंद के आह्वान पर शनिवार को सड़क पर उतरे विपक्षी दलों के छात्र संगठनों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। सिवान में किए गए पथराव के दौरान पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया, फिर आंसू गैस के गोले छोड़े और 10 राउंड हवाई फायरिंग की। पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस फायरिंग में जख्मी हुए तीन युवक में बुलेट कुमार गोंड़, आकाश और मोहम्मद आरिफ को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एसपी पूरन कुमार झा ने बताया कि भीड़ की ओर से फायरिंग होने पर पुलिस ने आत्मरक्षार्थ फायरिंग की है। राज्यभर में 423 लोग हिरासत में लिए गए। पुलिस ने जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें देर रात बेउर जेल भेज दिया गया। तेज प्रताप पहली बार जेल गए हैं। छपरा में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, तोड़फोड़ की तथा पुलिस वाहन में आग लगा दी। पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले छोड़े और हवाई फायरिंग की। पटना में भीड़ ने पुलिस की दो गाड़ियों को पलट दिया। सीतामढ़ी में बाइक में आग लगा पथराव किया। पुलिस अधीक्षक अमित रंजन समेत 13 घायल हो गए। भाजपा नेता श्यामनंदन प्रसाद की गाड़ी को तोड़ दिया। दरभंगा, पश्चिम चंपारण, शिव्हर, भागलपुर, पूर्णिया, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, लखीसराय, औरंगाबाद, गया, अरवल, जहानाबाद, वैशाली, बेगूसराय व नालंदा में भी बंद समर्थकों ने प्रदर्शन किया। हिंसा में कई पुलिस वाले जख्मी हो गए।
बहरीन और कुवैत का पहली बार ईरान पर हमला
हिन्दुस्तान के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बहरीन और कुवैत ने पहली बार ईरान में सैन्य ठिकानों पर गुप्त हवाई हमले किए। ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने शुक्रवार को यह दावा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया। दोनों देशों को संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान में लक्ष्यों की खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई। पश्चिमी देशों के लड़ाकू विमानों से लैस सीमित वायुसेना रखने वाले बहरीन और कुवैत ने हाल के दिनों में ईरान ईरान की ओर से लगातार हुए हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई की। बहरीन और कुवैत की कार्रवाई इस बात का संकेत है, अमेरिका-ईरान संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में फैलता जा रहा है। ओमान, कतर ने अब तक तटस्थ रुख अपनाया है।
पंक्चर बनाने वाले सरफराज ने अपनी कमाई से बनवा दी 15 लाख की पुलिया
प्रभात खबर के अनुसार जेब में खाने के पैसे नहीं, लेकिन हौसले में 15 लाख की पुलिया बनाने का जज्बा. जम्मू जिले के झाझा प्रखंड के घोरिकवा गांव के सरफराज की कहानी सुनकर हर कोई दंग है. सड़क किनारे पंचर जोड़कर दो जून की रोटी कमाने वाले सरफराज ने अपने गांव में खुद के खर्च से पुलिया बनवा दी है. शनिवार को एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सह विधायक अख्तरुल इमाम ने इस 35 फीट लंबी और 14 फीट चौड़ी पुलिया का उद्घाटन किया. सरफराज बताते हैं- 2019 में तेज बारिश के दिन दादी का इंतकाल हुआ था. जनाजा लेकर नाले तक पहुंचे, तो पानी इतना था कि 4 घंटे तक दादी के शव को किनारे रखना पड़ा. बारिश थमने के बाद किसी तरह नाला पार किया. उसी दिन हमने कसम खायी कि अब गांव के किसी जनाजे को ये तकलीफ नहीं होगी. उसके बाद सरफराज घर-बार छोड़कर महाराष्ट्र के पुणे चला गया. वहां सड़क किनारे बैठकर पंचर बनाता और एक-एक पैसा जोड़ता रहा. छह साल में जो पूंजी जमा हुई, उसी से इस साल उसने गांव लौटकर पुलिया बनानी शुरू कर दी. सरफराज का कहना है कि पुलिया बनवाने के लिए उसने पंचायत से लेकर सांसद तक गुहार लगायी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. जब खुद बनाने लगा तो स्थानीय स्तर पर धमकियां भी मिलीं. लोगों ने कहा कि पागल हो गया है, लेकिन दादी से किया वादा याद था. 12 से 15 लाख की लागत से बनी इस पुलिया के दोनों तरफ 25-25 फीट की दीवार भी है. अब बरसात में भी ग्रामीणों, खासकर जनाजा को नाला पार करने में दिक्कत नहीं होगी.
कुछ और सुर्खियां:
- एनएमसीएच में नालंदा का कैदी कोरोना पॉजिटिव मिला, पटना के सिविल सर्जन ने नालंदा के सिविल सर्जन को जानकारी दी
- वैशाली से महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक का सरगना इंद्रजीत सिंह गिरफ्तार
- सीवान में सोशल मीडिया पर 25 जुलाई शाम 5:30 बजे से लेकर 26 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक प्रतिबंध लगाया गया
- छपरा-बलिया रेलखंड पर ट्रैक पर रखी पानी टंकी से टकराई राजधानी एक्सप्रेस
- मुजफ्फरपुर के साहिबगंज में बाया नदी में नहाने के दौरान चार लड़के डूबे, तीन की मौत
अनछपी: राजेश राम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं लेकिन उन्हें कोई इतना बड़ा नेता नहीं मानता हालांकि उन्होंने छात्रों के आंदोलन के बारे में यह बात बिल्कुल सही कही है कि अभी न्याय अधूरा है। सच पूछा जाए तो यह शायद न्याय मिलने की शुरुआत भर है और, यह आगे कितनी कामयाब होती है इसे रुक कर देखना पड़ेगा। यह आंदोलन केवल कॉकरोच जनता पार्टी का नहीं बल्कि पूरे भारत के छात्रों और युवाओं का है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि आंदोलन समाप्त हो गया है। सच्चाई यह है कि कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन समाप्त हुआ है लेकिन छात्रों के मुद्दे जस के तस बरकरार हैं और इस आंदोलन में छात्र संगठनों ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया है, इसलिए यह अभी जारी रहेगा। बात अगर शिक्षा की की जाए तो केवल नीट पेपर लीक ही मुद्दा नहीं है बल्कि इससे बड़े मुद्दे भी हैं जिनमें सरकार की शिक्षा नीति ही सवालों के घेरे में है। ध्यान रखने की बात है कि धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए जिस राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सरकार ने घोषणा की वह केवल धर्मेंद्र प्रधान की नीति नहीं थी बल्कि मोदी सरकार की नीति है। इस नीति से भारत में शिक्षा व्यवस्था कई दशक पीछे चली गई है और छात्रों और युवाओं को बेहिसाब परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सीबीएसई के स्कूल संबंधी सिलेबस और यूजीसी के विश्वविद्यालय संबंधी नए-नए आदेशों ने दरअसल शिक्षा संस्थानों में आरएसएस की विकृत सोच को लागू करने पर ही पूरा जोर लगाया है। इस सोच का व्यावहारिक पहलू भले ही ऊपरी तौर पर ज्यादा कष्टदायक लगे लेकिन हकीकत यह है कि इस सोच ने विचारधारा के स्तर पर भारत में समुदायों के बीच वह वैमनस्यता और कटुता को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा विश्वविद्यालय से वैज्ञानिक सोच की जड़े उखाड़ फेंकी गई हैं। इसीलिए यह आंदोलन एक प्रदर्शन के खत्म होने से खत्म नहीं हो सकता।
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