बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। छात्रों और किसानों के आंदोलन के दौरान मंगलवार को पटना की सड़कों पर जमकर बवाल हुआ। ईरान से दुश्मनी निकालने में अमेरिका की ताजा घोषणा से भारत ईरान व्यापार संकट में आ गया है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर पहुंचे हैं।
और, बहराइच में जब हाथी बहने लगे तो बैराज बंद कर उन्हें रेस्क्यू किया गया।
पहली ख़बर
प्रभात खबर के अनुसार टीआरइ-4 परीक्षा में बदलाव, 70वीं बीपीएससी परीक्षा रद्द करने और कई प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी मांगों को लेकर छात्रों तथा पाटलिपुत्र टाउनशिप के लिए जमीन नहीं देने की मांग कर रहे किसानों के आंदोलन के दौरान मंगलवार को पटना की सड़कों पर जमकर बवाल हुआ. दिन के करीब 11 बजे गांधी मैदान से शुरू हुए आंदोलन के कारण लगभग पांच घंटे तक डाकबंगला चौराहा और आसपास का इलाका पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव का केंद्र बना रहा. आंदोलनकारियों ने कई जगह बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया. स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन के उपयोग के बाद लाठीचार्ज करना पड़ा. प्रदर्शनकारियों के पथराव में टाउन डीएसपी-2 कामाख्या नारायण सिंह और एक महिला सिपाही घायल हो गयीं. वहीं, लाठीचार्ज में छात्र नेता गौतम आनंद और एक छात्रा घायल हो गये. इस दौरान कई आंदोलनकारी और पुलिसकर्मी बेहोश भी हो गये. जेपी गोलंबर के पास प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ दी. इस दौरान पुलिस ने 60 आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया. हिरासत में लिये गये लोगों को आइआइटी अमहारा थाना में रखा गया था. इस मामले में 60 नामजद और 1600 अज्ञात के खिलाफ कोतवाली थाने में केस दर्ज कर लिया गया है.
बिहार हेल्थ साइंसेज यूनिवर्सिटी के छात्रों का हंगामा
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विवि के छात्रों ने मंगलवार को खराब रिजल्ट पर हंगामा किया। 2024-28 सत्र के प्रथम सेमेस्टर का चार दिन पहले रिजल्ट जारी हुआ था। छात्रों का दावा है कि कई कॉलेजों में 70 से 80% तक विद्यार्थी फेल कर दिए गए हैं। इसके विरोध में बीफार्मा, बीएससी नर्सिंग समेत पैरामेडिकल के विद्यार्थियों ने विवि परिसर में जमकर तोड़फोड़ की। छात्रों के साथ हुई झड़प के दौरान जक्कनपुर थानेदार समेत कई पुलिस कर्मी घायल हो गए। कई छात्रों को भी चोट लगी है। पुलिस ने चार छात्रों को हिरासत में लिया है।
ट्रंप की धमकी से ईरान-भारत व्यापार संकट में
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए वैश्विक अभियान का ऐलान किया है। इसे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नाम दिया गया है। इसके जरिए ईरान के वित्तीय ढांचे, तेल से होने वाली कमाई और वैश्विक संबंधों को निशाना बनाने की व्यापक रणनीति है। माना जा रहा है कि इसका असर भारत-ईरान व्यापार संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है। भारत ईरान के पांच सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में रहा है। हालांकि, दोनों देशों के बीच व्यापार 2018-19 के 17 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर से 90 फीसदी से अधिक गिर चुका है। अब भारत से ईरान को ज्यादातर उन्हीं सामानों का निर्यात होता है, जिन्हें मानवीय आधार पर अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट मिली हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका की ईरान पर प्रस्तावित इन नई पाबंदियों से ईरान को भारत के चावल, चाय, कॉफी, मसाले और दवाओं के निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है। हाल के कुछ वर्षों में इन सामानों का बड़ा हिस्सा दुबई के बंदरगाह के रास्ते ईरान पहुंचता रहा है। अभी प्रमुख रूप से खतरा भारतीय निर्यातकों, बैंकों, शिपिंग और ढुलाई वाली कंपनियों और चाबहार प्रॉजेक्ट पर मंडरा रहा है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका के दौरे पर
जागरण की खबर है कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को अपनी तीन देशों की यात्रा के पहले चरण में अमेरिका के प्रमुख शहरों में से एक न्यूयार्क पहुंचे। उनकी यह यात्रा संघ के शताब्दी वर्ष के वैश्विक संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा है। न्यूयार्क पहुंचने पर भागवत का तिलक लगाकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। शहर में अपने प्रवास के दौरान संघ के सरसंघचालक ‘यूनिवर्सल वननेस’ (सार्वभौमिक एकता) कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और शनिवार को मशहूर मैडिसन स्क्वायर गार्डन में लगभग 5000 लोगों की सभा को संबोधित करेंगे। भागवत की मेजबानी कर रहे ‘अहेड फोरम’ (अमेरिकन हिंदूज फार एंगेजमेंट एंड डायलाग फोरम) ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “इस कार्यक्रम का संदेश शाश्वत और सार्वभौमिक है कि दुनिया एक परिवार है।
जब हाथी बहने लगे तो उन्हें बैराज बंद कर बचाया गया
उत्तर प्रदेश के शहर बहराइच से हिंदुस्तान की खबर में लिखा गया है कि हाथियों में भी मातृत्व और संरक्षण का जज्बा इंसानों से कम नहीं होता है। इसका एक उदाहरण मंगलवार सुबह कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के ट्रांस गेरुआ क्षेत्र में दिखा, जहां हाथियों के एक झुंड ने अपने ‘नन्हे सदस्य’ को बचाने के लिए जान दांव पर लगा दी। दरअसल, गेरुआ क्षेत्र में इन दिनों हाथियों का झुंड घूम रहा है। मंगलवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे डेढ़ साल का बच्चा कौड़ियाला नदी में उतरा और तेज बहाव में फंसकर बैराज की बहने लगा। उसे बचाने की कोशिश में एक-एक कर वयस्क भी नदी में उतर गए और वह भी भाव में फंस गए। देखते ही देखते पूरा दल बहता हुआ चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज की और बहने लगा। ग्रामीणों की सूचना पर डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफिसर ने तत्काल सिंचाई विभाग के इंजीनियर से बात कर बैराज के गेट बंद कराई। इससे नदी की धारा की रफ़्तार घटी और हाथी किनारे तक पहुंच गए।
कुछ और सुर्खियां:
- सुपौल जिले के पिपरा में बजरंगबली मंदिर के पास कीर्तन कर रहे लोगों को कार ने रौंदा, चार की मौत
- भागलपुर में गंगा किनारे का तटबंध और 20 मीटर में कटा, कई और इलाके बाढ़ से गिरे
- सीतामढ़ी पुलिस बेलसंड से चिराग पासवान के विधायक अमित कुमार रानू की गिरफ्तारी के लिए वारंट की अर्जी देगी
- पटना के ज्ञान भवन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यक्रम की वजह से आज गांधी मैदान में ऑटो, ई रिक्शा और बस वगैरा चलने पर पाबंदी
अनछपी: दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी प्राइवेटाइजेशन कोई अचंभा पैदा नहीं करती। शिक्षा और दूसरे क्षेत्रों में निजीकरण के अच्छे- बुरे प्रभाव से हम परिचित हैं लेकिन अब ताजा फैसला यह आया है कि जो मिसाइल टेक्नोलॉजी डीआरडीओ के पास थी और जिसे विकसित करने के लिए भारत सरकार ने करोड़ों रुपए का खर्च किया है, वह टेक्नोलॉजी अब प्राइवेट सेक्टर को दी जाएगी ताकि वह भी उसे मिसाइल बना सकें। यह बात सही है कि अमेरिका जैसे देश में भी मिसाइल बनाने का काम प्राइवेट सेक्टर को दिया गया है लेकिन भारत की जरूरत और अमेरिका की जरूरत में काफी फर्क है। फिलहाल डीआरडीओ की टेक्नोलॉजी के बारे में यह बताया गया है कि यह सिर्फ ट्रेडिशनल मिसाइल बनाने के लिए दी जाएगी और इसमें एटॉमिक हथियारों का कोई रोल नहीं होगा। दरअसल इस फैसले के दो पहलू हैं और दोनों पर गौर करना जरूरी है। पहली बात यह है कि क्या डीआरडीओ देश की जरूरत के हिसाब से मिसाइल बनाने में सक्षम नहीं है या जानबूझकर उससे यह काम वापस लिया जा रहा है और प्राइवेट सेक्टर को देने की योजना बनाई जा रही है? दूसरी बात यह है कि प्राइवेट सेक्टर की कंपनी ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर लाभ कमाने के लिए क्या देश हित का ख्याल रखेगी और क्या वह राजनीतिक शक्तियों के पक्ष में काम करेगी? कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और इस पर गंभीर मंथन की जरूरत है ताकि प्राइवेट सेक्टर के हाथों देश का लोकतंत्र प्रभावित न हो और मिसाइल टेक्नोलॉजी ऐसी जगह पर न जाए जो विश्व शांति के लिए खतरा बनती हो।
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