बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। एक ओर जहां बिहार सरकार ने शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई- 4 का ऐलान किया तो दूसरी और यह पता चला कि राज्य में हिंदी से ज्यादा उर्दू शिक्षकों के पद खाली हैं। झारखंड में 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में माना- सीवान में चलाई गई थीं एक-47 से गोलियां।
और, जानिएगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय चुनाव के मुरीद क्यों हुए।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के चौथे चरण की शिक्षक नियुक्ति परीक्षा (टीआरई-4) में हिंदी से अधिक उर्दू के पद के लिए आवेदन मांगे गए हैं। सभी संवर्गों (कक्षा एक से 12वीं) के कुल आंकड़ों पर नजर डालें, तो उर्दू विषय के मुकाबले हिंदी के शिक्षकों में एक हजार 33 पदों का अंतर है। राज्यभर में उर्दू के कुल 3229 पदों पर बहाली होगी, जबकि हिंदी के लिए 2196 पद तय किए गए हैं। हालांकि, वर्गवार दोनों भाषाओं के बीच कड़ा मुकाबला है। जहां मध्य विद्यालयों (कक्षा छह से आठ) में हिंदी विषय उर्दू पर भारी पड़ा है, वहीं माध्यमिक (कक्षा 9 10) और उच्च माध्यमिक (कक्षा 11-12) स्तर पर उर्दू शिक्षकों की मांग हिंदी से कहीं अधिक है। सबसे अधिक 1601 पद उच्च माध्यमिक विद्यालय के लिए है। वहीं, मध्य विद्यालयों (कक्षा छह से आठ) में 8,563 पदों पर शिक्षकों की बहाली की जाएगी। कक्षा छह से 12वीं तक के सभी विषयों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि अंग्रेजी के शिक्षकों की मांग सबसे अधिक है, जिसके कुल 3,946 पद हैं।
शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 के 32388 पदों के लिए एक से आवेदन
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने मंगलवार को शिक्षक नियुक्ति परीक्षा के चौथे चरण (टीआरई-4) की अधिसूचना जारी कर दी। कक्षा एक से 12वीं तक के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कुल 32 हजार 388 पद चिह्नित किए गए हैं। अभ्यर्थी इसका लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। प्राथमिक, मध्य, पर माध्यमिक व उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक के लिए एक सितंबर से आनलाइन आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। आयोग की वेबसाइट https://bpsc.bihar.gov.in/आवेदन के लिए लिंक 30 सितंबर तक उपलब्ध होगा। टीआरई-4 की अधिसूचना जारी होने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के वेबसाइट पर विजिट किया, जिस कारण काफी देर तक वेबसाइट खुलने में परेशानी हुई।
झारखंड में हुई 22 परीक्षाएं रद्द
हिन्दुस्तान के अनुसार झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर 25 दिनों से चल रहे आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की विशेष बैठक में लिए गए फैसलों के आलोक में मंगलवार देर रात अधिसूचना जारी कर दी गई। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की अधिसूचना के अनुसार जेएसएससी सीजीएल समेत 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया। वहीं, 2014 से अब तक जेपीएससी व जेएसएससी के जरिए हुई 17 परीक्षाओं, परिणामों और नियुक्तियों की जांच सीआईडी करेगी। इसके अतिरिक्त छह परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षतात में उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया है।
सरकार का हलफनामा- सीवान में चलाई गई थीं एक-47 से गोलियां
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर पेपर लीक के मुद्दे पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान सीवान में एके-47 राइफल के इस्तेमाल को स्वीकार किया। सरकार ने अपने हलफनामा में कहा कि भीड़ में फंस जाने के कारण एक सिपाही ने एके-47 से हवा में 4 राउंड फायरिंग की थी। हालांकि, इससे कोई घायल नहीं हुआ। हालांकि बिहार सरकार ने छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर अत्याधिक पुलिस बल के आरोपों से इनकार किया। बिहार से सरकार ने आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस की बर्बरता के आरोपों वाली जनहित याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करते हुए यह हलफनामा दाखिल किया।
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को निजी अस्पताल में भेजने का आदेश
हिन्दुस्तान के अनुसार पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के लिए निजी अस्पताल में भेजने का मंगलवार को आदेश दिया। कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में सामने आई आंखों की बीमारी के बाद एक जैसी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं ने इमरान को अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की थी और तर्क दिया था कि वे सरकारी अस्पतालों में हो रहे इलाज से संतुष्ट नहीं हैं। क्रिकेटर से राजनेता बने खान अगस्त 2023 से जेल में हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारतीय चुनाव के मुरीद क्यों हुए?
जागरण की खबर है कि भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर देश में विपक्षी दल भले ही निशाना साधते रहते हैं, लेकिन उनके काम की तारीफ अब अमेरिका जैसे देश भी कर रहे है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को न सिर्फ भारतीय चुनाव प्रक्रिया की तारीफ की, बल्कि भारत जैसी चुनाव प्रक्रिया को अमेरिका में भी अपनाए जाने की वकालत की। भारत के मतदाता पहचान पत्र का हवाला देते हुए ट्रंप ने कहा कि अब ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पारित करने का समय आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया पर यह पोस्ट ऐसे समय की है, जब अमेरिका में इस वर्ष के अंत में मिडटर्म इलेक्शन होने हैं। ‘सेव (सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी) अमेरिका एक्ट’ का विपक्षी दल एवं संगठन यह कहते हुए विरोध कर रहे हैं कि इससे उन योग्य मतदाताओं के लिए चुनाव में वोट डालना मुश्किल हो सकता है, जिनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं में लाखों लोगों के पास अपनी हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद के नेतृत्व में राजद का लोक भवन मार्च आज 10:00 बजे से जेपी गोलंबर से शुरू होगा
- सीवान, सारण, रोहतास, भोजपुर और नालंदा के एसपी बदले गए
- दिल्ली सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में आम आदमी पार्टी के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार किया
- भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावडे को यूपी की जिम्मेदारी दी गई
अनछपी: पहले मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट- 2026 के पेपर लीक और उसके बाद यूजीसी-नेट में गड़बड़ियां उजागर होने के बाद अब शिक्षा मंत्रालय ने एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 600 विशेषज्ञों को हटाने का फैसला किया है। यह वैसे विशेषज्ञ हैं जिनका काम परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र तैयार करना था। सरकार ने साफ तौर पर इन्हें हटाने की वजह तो नहीं बताई लेकिन ऐसा समझा जाता है कि इन्हें हटाने की दोनों वजहें हैं यानी पेपर लीक और गलत पेपर सेट करने का मामला। अब अगर छात्रों के आंदोलन को याद किया जाए तो उनकी एक मांग भी यही थी कि एनटीए में गड़बड़ी दूर की जाए और तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार ने लंबे समय तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा पर अड़ियल रवैया अपनाए रखा और जब मामला ज्यादा बिगड़ गया तो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को ऐसे पेश किया गया जैसे उन्होंने कोई बहुत बड़ा बलिदान दिया हो। अब अगर इन 600 विशेषज्ञों को हटाया गया है तो इस पर सवाल उठना लाजिमी है कि इनका चयन किस आधार पर हुआ था और सरकार ने इन्हें हटाया किस आधार पर है। यह भी सोचने की बात है कि क्या सिर्फ इन्हें हटा देने से समस्या हल हो जाएगी और क्या यह जरूरी नहीं है कि इनके चयन की प्रक्रिया और जिम्मेदार लोगों की भी जांच की जाए? इसके साथ यह भी देखना जरूरी है कि इन 600 लोगों की जगह पर जो नए लोग चुने जाएंगे उनके चुनने का आधार क्या होगा और शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी क्या यह गारंटी लेने की स्थिति में होंगे कि अब कोई नई बड़ी गड़बड़ी नहीं होगी?
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