छ्पी-अनछपी: चुनाव आयोग के खिलाफ देशभर में रण होगा, ट्रांसपोर्ट अधिकारी के पास अकूत संपत्ति

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। विपक्षी दलों ने 2 अक्टूबर से सेव डेमोक्रेसी नाम से चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी के पास अकूत संपत्ति मिली है जो आय से अधिक माने जा रही है। यूएई से इसराइल जा रही एक फ्लाइट में एक पायलट ने दूसरे पर हमला कर दिया जिसके बाद उसकी सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। 

और, नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे हाल में तो यूपी पुलिस को भंग कर सकती है अदालत।

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार इंडिया गठबंधन ने वोटों की कथित गड़बड़ी के खिलाफ दो अक्तूबर से देशभर में ‘सेव डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र बचाओ) आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में बुधवार को हुई बैठक में 20 दलों के नेता शामिल हुए। तीन घंटे चली बैठक के बाद खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री, मुख्य चुनाव आयुक्त के जरिए वोटों की कथित गड़बड़ी कर चुनाव जीत रहे हैं। उन्होंने सीईसी को ‘कठपुतली’ भी करार दिया। खरगे ने बताया कि दो अक्तूबर से आंदोलन के तहत जिला स्तर से लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन किए जाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा जाएगा और पांच शहरों में संयुक्त रैलियां होंगी। नवंबर में दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली की जाएगी।

नए वोटरों के लिए फॉर्म-6 में बदलाव

चुनाव आयोग ने एसआईआर पूरी कर चुके राज्यों में फॉर्म-6 से एसआईआर से जुडा अतिरिक्त घोषणा पत्र हटा दिया है। यह फैसला 26 सितंबर को आयोग की हुई पूर्ण बैठक में लिया गया। अब इन राज्यों में नए मतदाताओं को केवल पंजीकरण मतदाता नियम, 1960 के तहत निर्धारित मानक फॉर्म-6 ही भरना होगा। पहले उनसे यह बताने को कहा जाता था कि वे, उनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम पूर्व की एसआईआर के दौरान तैयार मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं। जिन राज्यों में एसआईआर जारी है, वहां ईसीआईनेट पोर्टल पर अतिरिक्त घोषणा पत्र मिलेगा।

ट्रांसपोर्ट अधिकारी के पास अकूत संपत्ति

प्रभात ख़बर के अनुसार मोहनिया चेकपोस्ट, कैमूर में तैनात परिवहन विभाग के प्रवर्तन अवर निरीक्षक (एनफोर्समेंट एसआई) अमित कुमार गुप्ता के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है. डीएसपी स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में पटना और आरा स्थित उनके दो ठिकानों पर ली गयी तलाशी के दौरान तीन लाख रुपये कैश और 13 महंगी घड़ियां बरामद हुई हैं. करीब 40 लाख रुपये निवेश का खुलासा हुआ है. 11 भूखंड व फ्लैट के साथ पटना में तीन मंजिला मकान और ज्वेलरी खरीद से जुड़े कागजात भी मिले हैं. इओयू की कार्रवाई देर शाम तक जारी थी. इओयू के अनुसार, अब तक की जांच में अमित कुमार गुप्ता की ज्ञात वैध आय के मुकाबले एक करोड़ 49 लाख 58 हजार 500 रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित किये जाने के साक्ष्य मिले हैं. यह राशि वैध आय से 148.10% अधिक है. मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है. 

फ्लाइट में एक पायलट ने दूसरे पर हमला किया

प्रभात ख़बर के अनुसार दुबई से 174 लोगों को लेकर तेल अवीव जा रहा फ्लाईदुबई का यात्री विमान बुधवार सुबह बड़ी तबाही से बच गया. विमान में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ओमानी को-पायलट ने साथी पायलट पर चाकू से हमला कर दिया. आरोप है कि हमलावर को-पायलट ने विमान को क्रैश कराने की कोशिश की. उसकी कोशिश विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की थी. उस वक्त विमान 34 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था. विमान अचानक 30 सेकंड से भी कम समय में करीब 17 हजार 7 हजार फीट नीचे आ गया, मगर चाकू लगने के बाद भी घायल भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार (गुजरात के मूल निवासी) ने सूझबूझ दिखायी, प्लेन को संभाला और उसे क्रैश होने से बचा लिया. विमान में बतौर यात्री दो ऑफ-ड्यूटी पायलट भी सवार थे. उन्होंने यात्रियों की मदद से हमलावर को कब्जे में लिया. यात्रियों के मुताबिक, इस दौरान चीखने की आवाजें सुनाई दीं. कॉकपिट में खून दिखा. विमान से पहले आपात संकेत भेजे गये. फिर संभावित हाइजैक का संकेत भेजा गया. हाइजैक का संकेत मिलते ही इस्त्राइल ने लड़ाकू विमान भेजे. इसके बाद यात्री विमान का मार्ग बदला गया. एक घंटे बाद विमान ने उत्तर पश्चिमी सऊदी अरब से ताबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग की.

नीतीश के चहेते दीपक उर्फ डीके बने डिजास्टर मैनेजमेंट के डिप्टी चेयरमैन

जागरण के अनुसार मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे दीपक कुमार बुधवार से नई भूमिका में आ गए। सरकार ने उन्हें बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बना दिया है। उदयकांत मिश्रा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 11 सितंबर से यह पद रिक्त था। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1984 बैच के अधिकारी दीपक कुमार तीन साल तक बिहार के मुख्य सचिव रहने के बाद 2021 में नियमित सेवा से मुक्त हुए थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें संविदा के आधार पर अपना प्रधान सचिव नियुक्त किया था। इस नाते उन्हें कैबिनेट मंत्री स्तर की सुविधाएं दी गई थीं। (ध्यान रहे की मूल रूप से शिवहर जिला के रहने वाले दीपक कुमार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अक्सर डीके के नाम से पुकारते थे और कथित डीके टैक्स की बात करते थे।)

23 साल बाद इराक से लौटी अमेरिका सेना

भास्कर के अनुसार अमेरिकी सेना बुधवार को 23 साल बाद इराक से पूरी तरह रवाना हो गई। 2003 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिका ने इराक पर अटैक किया था। सद्दाम पर अमेरिका ने भारी तबाही मचाने वाले हथियार (डब्लूएमडी) रखने के आरोप में यह हमला किया था। उसके बाद 2014 में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में इराक की मदद के लिए मिशन शुरू किया। अब आईएस के कमजोर पड़ने पर मिशन खत्म किया गया है। हालांकि, अब आशंका है कि आईएस के स्लीपर सेल फिर सक्रिय हो सकते हैं। 5 वर्ष पहले अफगानिस्तान से भी रवाना हो चुकेः 30 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान से भी अमेरिका अपना आखिरी सैनिक निकाल चुका है। वहां अमेरिकी सैन्य अभियान 2001 में 9/11 हमलों के बाद अल-कायदा को खत्म करने के लिए शुरू हुआ था। तालिबानी शासन हटाना भी मकसद था। बाद में अमेरिकी सेना ने अफगान बलों को आतंकवाद-रोधी ट्रेनिंग में मदद दी।

…तो यूपी पुलिस को भंग कर सकती है अदालत

हिन्दुस्तान के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आरोपी की पहचान का पता होने के बाद भी अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने पर कहा कि अदालत यूपी पुलिस बल को भंग भी कर सकती है। बुलंदशहर जिले में छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि राज्य में सभी आपराधिक मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने सवालिया लहजे में कहा कि ऐसे हालात में लोग पुलिस पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने यूपी पुलिस के इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए कहा कि वह पूरी उत्तर प्रदेश पुलिस बल को भांग भी कर सकती है।

कुछ और सुर्खियां:

  • झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आरोप तय, अदालत में सुनवाई शुरू
  • सितंबर महीने में सेंसेक्स में 4477 अंकों की गिरावट
  • गोपालगंज, सारण और मुजफ्फरपुर में कई जगह टूटे गंडक के तटबंध
  • 1 से 8 अक्टूबर तक पटना के कई फ्लावर रात में बंद रहेंगे

अनछपी: बिहार में जमीन की खरीद बिक्री में तरह-तरह की गड़बड़ियों के किस्से सुनने को मिलते हैं और अक्सर इस मामले में हिंसा हत्या तक पहुंच जाती है। ऐसा ही एक किस्सा जमुई के सिकंदरा जिले में जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और उनके पति गुड्डू यादव के बारे में सामने आया है। पुलिस गुड्डू यादव को जमीन माफिया बताती है और इकोनामिक ऑफेंस यूनिट ने अब यह इल्जाम लगाया है कि इन दोनों ने कृषि फार्म की 10 एकड़ सरकारी जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री करा ली है। इकोनामिक ऑफिस यूनिट के अनुसार फर्जीवाड़ा करने का यह मामला कितना गंभीर है, यह इस बात से समझा जा सकता है कि इस गोरखधंधे के लिए 100 साल पुराना फर्जी कागज बनाकर जमीन का दाखिल खारिज करा लिया गया और इसमें पुलिस के अनुसार सिकंदरा अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी छोटे लाल यादव का हथियार था। अब छोटेलाल यादव के साथ-साथ इसी मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बात इससे आगे की यह है कि इस खेल में उस समय के सीओ विनोद चौधरी और रेवेन्यू ऑफिसर निभा कुमारी और मुकेश वर्णवाल की भी मिलीभगत बताई गई है। इकोनामिक ऑफेंस यूनिट के अनुसार कृषि विभाग में वर्ष 1959 में अपने फार्म के जमीन को एक्वायर किया था। इल्जाम यह लगाया गया है कि गिरोह के सदस्यों ने अंचल कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर 1924 और 1927 के फर्जी कागजात बना लिए और सरकारी जमीन को खरीद कर उसका दाखिल खारिज भी कर लिया। यह अच्छी बात है कि इकोनामिक ऑफेंस यूनिट ने इतनी जानकारी इकट्ठा की है लेकिन सवाल यह है कि फर्जी कागज बनवाना, उससे जमीन लिखवाना और फिर दाखिल खारिज करवा लेना भी किसी एक दो अधिकारी कर्मचारी की मिलीभगत से संभव नहीं है, बल्कि यह तो पूरे सिस्टम की सड़ान्ध को बताने वाली बात है। यह सड़ान्ध पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में सबसे ज्यादा फैली है और कहना मुश्किल है कि बिहार को इससे कब निजात मिलेगी।

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