बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। तिब्बत बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ से नेपाल में भारी तबाही हुई है और इसकी वजह से बिहार के कई जिलों पर खतरा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रंप के नए आदेश से 20 लाख भारतीयों को नो एंट्री के खतरा का सामना है।
और, जानिएगा कि बिहार के हर तीसरे घर में मिलावटी हल्दी इस्तेमाल की जा रही है।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार गुनगुनी चमकती धूप, खुशनुमा मौसम और बेफिक्र जिंदगी, तभी अचानक एक तेज सैलाब आया और अपने साथ सब कुछ बहाकर ले गया। कई मंजिला इमारतें, पुल और इंसान खिलौनों की तरह देखते-देखते बह गए। यह खौफनाक नजारा चीन-नेपाल सीमा पर देखने को मिला। तिब्बत का सैलाब नेपाल में तबाही मचाते हुए आगे बढ़ा और गांव-गांव, शहर-शहर बर्बादी का मंजर छोड़ता चला गया। सैलाब से कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। इस तबाही ने 2013 में उत्तराखंड की केदारनाथ घाटी में आई जलप्रलय की याद दिला दी है। नेपाल में बाढ़ के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है और दोनों राज्य अलर्ट पर हैं। एनडीआरएफ की 20 टीम्रों को तैनात कर दिया गया है। इस तबाही में अब तक 160 लोगों की मौत हुई है और 133 भारतीयों समेत लगभग 750 लोग लापता है। लापता भारतीयों में अधिकांश कैलाश मानसरोवर तीर्थ यात्री हैं।
ट्रंप के नए वीजा नियम से 20 लाख भारतीय प्रभावित
हिन्दुस्तान के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने दुनियाभर में वीजा आवेदनों पर रोक लगा दी है, जिसका सबसे ज्यादा असर भारतीयों पर पड़ने की आशंका है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने कहा, सभी अमेरिकी दूतावासों में प्रशिक्षण प्रोग्राम शुरू किया गया है। इसके लिए वीजा मिलने के समय में बदलाव किया जाएगा। इस पहल का मकसद कांउसलरों को आवेदकों की जांच बेहतर ढंग से करने और उन लोगों की पहचान करने में मदद करना है, जिनके अमेरिकी सरकारी सुविधाओं पर निर्भर होने की संभावना होना है।
राजस्थान के एक्टिंग चीफ जस्टिस पर पक्षपात का आरोप, हटाने की सिफारिश
भास्कर के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस बारे में सीजेआई सूर्यकांत को 2, 10 और 17 अगस्त को तीन पत्र लिखे हैं। जस्टिस मेहता ने राजस्थान में किसी दूसरे राज्य से ‘तत्काल’ चीफ जस्टिस नियुक्त करने का आग्रह किया है। पत्रों में जस्टिस शर्मा पर ‘कुप्रबंधन’, ‘गलत तौर-तरीके’, ‘भाई-भतीजावाद’ और ‘पक्षपात’ के आरोप लगाए गए हैं। जस्टिस मेहता ने आरोप लगाया है कि दूसरी बेंचों में सूचीबद्ध कुछ केस ‘बिना वाजिब वजह’ जस्टिस शर्मा की बेंच में लाए गए। भास्कर ने लिखा है कि ट्रंप के इस आदेश से हर साल अमेरिका जाने वाले लगभग 20 लाख भारतीयों को नो एंट्री की मुसीबत झेलनी पड़ेगी।
बांग्लादेश चीन से 20 फाइटर जेट खरीदेगा
भास्कर के अनुसार बांग्लादेश अब चीन से सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहेगा। वह चीनी हथियारों का उत्पादन व उन्हें दूसरे देशों तक पहुंचाने वाला साझेदार भी बनने जा रहा है। इसी रणनीति के तहत बांग्लादेश चीन से पांचवी पीढ़ी के 20 जे-10सीई फाइटर जेट खरीदेगा। इसके साथ ही चीन बांग्लादेश में रक्षा उत्पादन की क्षमता भी विकसित करेगा। यहां तैयार हथियार और सैन्य सिस्टम आगे अफ्रीका समेत दूसरे बाजारों में सप्लाई किए जाएंगे। इस पूरी डील को बांग्लादेश के लिए आसान बनाने के लिए भुगतान की शर्तें भी लंबी रखी गई हैं। प्रस्ताव के मुताबिक बांग्लादेश को फाइटर जेट की पूरी रकम 2035-36 तक 10 वित्त वर्षों में चुकाने की मोहलत मिलेगी। चीन की रणनीति यह है कि बांग्लादेश पहले उसके आधुनिक हथियारों का बड़ा खरीदार बने, फिर स्थानीय उत्पादन से उसकी लागत कम हो और वही नेटवर्क तीसरे देशों तक पहुंचे।
न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी ने भागवत के कार्यक्रम का किया विरोध
प्रभात खबर के अनुसार न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा है कि वह मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित कार्यक्रम का समर्थन नहीं करते हैं. इस कार्यक्रम में भागवत को भारतवंशी समुदाय को संबोधित करना है. हालांकि, ममदानी ने कहा कि चूंकि यह एक निजी कार्यक्रम है, इसलिए न्यूयॉर्क सिटी प्रशासन के पास संभवतः इसे रद्द करने का अधिकार भी नहीं है. भागवत आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह से जुड़े वैश्विक संपर्क कार्यक्रम के तहत मंगलवार को अमेरिका पहुंचे. वह इस कार्यक्रम के तहत कनाडा और ब्रिटेन की भी यात्रा करेंगे.
बिहार के हर तीसरे घर में मिलावटी हल्दी
हिन्दुस्तान के अनुसार बिहार के एक तिहाई घरों में प्रयोग की जाने वाली खरी हल्दी सुरक्षित नहीं है। पीला और चमकीला हल्दी देखकर खरीदारी करने वाले उपभोक्ता अनजाने में रसायन से रंगी हुई अस्वास्थ्यकर हल्दी खरीद रहे हैं। जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। हल्दी को पीला और चमकीला बनाने के लिए उसे ‘लेड क्रोमेट’ (सीसा) रसायन से रंगा जा रहा है। बिहार के कई बाजरों में इसे ‘प्यूरी’ के नाम से जाना जाता है। इसकी जानकारी बिहार खाद्य सुरक्षा स्वास्थ्य अभियान 2026 के तहत पटना के किराना दुकानदारों के बीच जागरूकता अभियान के तहत बांटे गए पर्चे में दी गई है। जागरूकता अभियान में बताया गया कि बिहार के घरों से लिए गए हल्दी के नमूनों में से 33 फीसदी घरों के नमूने जांच में फेल कर गए। मतलब, उनमें सीसा की मात्रा, निर्धारित सीमा से काफी ज्यादा निकली।
कुछ और सुर्खियां:
- सितंबर में तीन दिन की हड़ताल के साथ कुल 8 दिन बैंक बंद रहेंगे
- पटना के आर एमआरआई सेंटर में जांच के बाद दो लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि, वैज्ञानिक को भी इन्फेक्शन
- पाकिस्तान के इस्लामाबाद स्थित सरकारी अस्पताल पाकिस्तान इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज में आग लगने से 15 नवजात शिशुओं की जलकर मौत
- महाराष्ट्र में पेपर लीक के चलते ड्रग इंस्पेक्टर की परीक्षा रद्द
- किशनगंज के बहादुरपुर स्थित नेहरू कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉक्टर जमीरुल आलम पूर्णिया विश्वविद्यालय के एग्जामिनेशन कंट्रोलर बनाए गए
- लोकसभा सचिवालय ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को नोटिस भेजा
- सुप्रीम कोर्ट ने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में सुधार के लिए उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह को एडमिनिस्ट्रेटर बनाया
अनछपी: यूं तो बिहार में सरकारी नौकरियों के लिए सीट से कई गुना ज्यादा आवेदन आने की बात किसी को हैरत में नहीं डालती लेकिन क्या ऐसा भी हो सकता है कि बिहार के 10 विश्वविद्यालयों में कुलपति या वीसी बनने के लिए 8000 से ज्यादा आवेदन आए हों? बिहार के विश्वविद्यालयों के चांसलर, जो कि राज्यपाल होते हैं, उनके सचिवालय से मिली जानकारी के अनुसार इन 10 पदों के लिए ब्रिटेन और अमेरिका समेत भारत के 24 राज्यों से 8000 से ज़्यादा आवेदन आए हैं। यह सोचने की बात है कि आखिर बिहार के बदहाल विश्वविद्यालयों में वीसी बनने की इतनी जबरदस्त होड़ क्यों है? फिलहाल मगध विश्वविद्यालय, बोधगया, मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, पटना, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा और तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलपति का पद का खाली है। इसके अलावा सितंबर-अक्टूबर तक छह और विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद खाली हो जाएंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि गवर्नर हाउस से इन आवेदनों पर कैसे विचार किया जाता है क्योंकि एक विश्वविद्यालय के लिए अगर औसतन 800 आवेदन आए हों तो सबको जांचना-परखना आसान नहीं होगा और उसमें काफी समय लग सकता है। जब तक कुलपतियों के नाम और उनकी योग्यता का पता नहीं चलता है तब तक यह बात भी चर्चा में रहेगी कि आखिर किस आधार पर यह नियुक्तियां हो रही हैं और क्या इसमें भी पैसा पैरवी का रोल रहेगा? याद रखने की बात यह है कि कुछ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों पर भ्रष्टाचार के इतने गंभीर आरोप लगे कि न केवल उन्हें पद से हटाया गया बल्कि ऐसे लोगों को जेल भी जाना पड़ा। अब तक यह शिकायत भी आती रही है कि बिहार के विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश के लोगों को ज्यादा कुलपति बनाया जाता है या ऐसे राज्य के उम्मीदवारों को यह मौक़ा मिलता है जहां के राज्यपाल हों। बिहार के लिए भलाई इसी बात में है कि जल से जल्द कुलपतियों की नियुक्ति हो और कोई विवादास्पद फैसला ना हो।
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