बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पटना ज़िले के बाढ़ प्रखंड में शराब पार्टी के बाद एक ही परिवार के चार युवकों की मौत हो गई। नेपाल में बीते तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण गंडक और कोसी नदी में एक बार फिर उफान आ गया है। बिहार में अपार्टमेंट के फ्लैटों की जमीन के दाखिल खारिज की प्रक्रिया करीब सवा साल बाद सितंबर 2026 से फिर शुरू होने की संभावना है।
और, मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत संचालित सिविल सेवा प्रोत्साहन राशि योजना का लाभ अब सभी वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को मिलेगा।
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार पटना ज़िले के बाढ़ प्रखंड के बेढ़ना गांव में शराब पार्टी के बाद एक ही परिवार के चार युवकों की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने दो दर्जन लोगों को हिरासत में लिया है। मृतकों की पहचान एनटीपीसी कर्मी शशि कुमार (32), विकास राम (40), पंकज सिंह (45) और निशू कुमार के रूप में हुई। सावन खत्म होने पर गांव में शराब पार्टी रखी गई थी। एक-दो पैग पीते ही युवकों की हालत बिगड़ने लगी। उन्हें बाढ़ अनुमंडल अस्पताल से एनएमसीएच रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही चारों ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों ने जहरीली शराब से मौत होने का दावा करते हुए इलाके में शराब सप्लाई का आरोप लगाया। बाढ़ एसडीओ ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही वजह स्पष्ट होगी। सूचना के बाद ग्रामीणों ने बख्तियारपुर-मोकामा फोरलेन छह घंटे तक जाम रखा। वे कार्रवाई की मांग कर रहे थे। मौके पर पहुंचे मंत्री विजय सिन्हा और पुलिस अधिकारियों ने स्थिति संभालने की कोशिश की और जाम समाप्त कराया।
नेपाल में नदियां उफनाईं, बिहार के चार जिलों पर खतरा
हिन्दुस्तान के अनुसार नेपाल में बीते तीन दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण गंडक और कोसी नदी में एक बार फिर उफान आ गया है। रविवार की सुबह से दोनों नदियों के जलस्राव में तेजी से बढ़ोतरी हुई। हालांकि देर रात गंडक के जलप्रवाह में थोड़ी कमी आई जबकि कोसी का जलस्राव बढ़ता रहा। सोमवार की दोपहर तक पश्चिमी एवं पूर्वी चंपारण, सारण और गोपालगंज जिलों में गंडक का जलस्तर बढ़ने की आशंका है। उधर, भोटेकोशी नदी के जलस्तर में वृद्धि से नेपाल में दोबारा बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचावकर्मियों को सतर्क रहने की सलाह दी है। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 781 हो गई है, जबकि 2,502 लोग अभी लापता हैं। 20 हजार से ज्यादा बचावकर्मियों ने आपदा के पांचवें दिन रविवार को भी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया।
बिहटा में सोन नदी में रंगदारी मांगने आए अपराधियों से पुलिस मुठभेड़
प्रभात खबर के अनुसार पटना ज़िले के बिहटा थाना क्षेत्र के परेव में रविवार की सुबह सोन नदी में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हो गयी. नाविकों से रंगदारी वसूले जाने की सूचना पर पहुंची पुलिस टीम को देखते ही अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोलियां चलायीं. करीब 10-15 मिनट तक चली मुठभेड़ में दोनों ओर से कुल 62 राउंड फायरिंग हुई. पुलिस की गोली से कुख्यात अपराधी अवनीश कुमार के पैर में गोली लगी, जबकि बिहटा थाना के एसआइ राजू कुमार सिंह की बांह को छूते हुए गोली निकल गयी. दोनों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है. वहीं, बिहटा थानाध्यक्ष अमित कुमार भी घायल त कुमार पल हुए है.
बिहार में सितंबर से फिर होगी फ्लैटों की दाखिल खारिज
बिहार में फ्लैट खरीदारों के लिए राहत की खबर है. अपार्टमेंट के फ्लैटों की जमीन के दाखिल खारिज की प्रक्रिया करीब सवा साल बाद सितंबर 2026 से फिर शुरू होने की संभावना है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. सॉफ्टवेयर निर्माण अब अंतिम चरण में है. विभाग का उद्देश्य फ्लैटों की जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को स्पष्ट, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सही बनाना है. इससे फ्लैट को लेकर विवाद पर विराम लग सकेगा. नयी व्यवस्था लागू होने के बाद फ्लैट खरीदारों को दाखिलं खारिज के लिए अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है.
विविधता में एकता भारत के डीएनए में: मोहन भागवत
जागरण के अनुसार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और इस पर खुशी जताई जानी चाहिए। इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। शनिवार को न्यूयार्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में 6,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा- ‘जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका कहते हैं तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है। विविधता में एकता।’ उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने खूब तालियां बजाईं। अमेरिकन हिंदूज फार एंगेजमेंट एंड डायलाग फोरम द्वारा आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में भागवत ने कहा- ‘भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में है।’
सिविल सेवा प्रोत्साहन राशि योजना का लाभ सभी वर्ग की महिला को मिलेगा
जागरण के अनुसार मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत संचालित सिविल सेवा प्रोत्साहन राशि योजना का लाभ अब सभी वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को मिलेगा। अभी योजना का लाभ निर्धारित आरक्षित वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) और दिव्यांगजन अभ्यर्थियों तक सीमित था। इस कारण सामान्य वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और पिछड़ा वर्ग की वे अभ्यर्थी, जिन्होंने कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की है, प्रोत्साहन. राशि से वंचित रह जाती थीं। इसलिए समाज कल्याण विभाग ने योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत सामान्य एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और पिछड़ा वर्ग की उन अभ्यर्थियों को भी लाभमिलेगा, जो केंद्रीय संघ लोक सेवा आयोग एवं बिहार लोक सेवा आयोग के अलावा अन्य प्रशासनिक, बैंकिंग, रक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं की प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता अर्जित कर रही हैं।
कुछ और सुर्खियां:
- बिहार के सीमाई जिलों में 25 लाख से अधिक की जमीन लेने वालों की होगी जांच
- अरवल जिले के कलर में सोन नदी में दो किशोरों की डूबने से मौत
- पीएचईडी मंत्री संजय कुमार सिंह ने तेज प्रताप यादव को कानूनी नोटिस भेज कर कहा माफी मांगे
- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड भी अपने प्रत्याशी देगा
- भारत को उज्बेकिस्तान से मिलता रहेगा यूरेनियम
अनछपी: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत इन दिनों अमेरिका की यात्रा पर हैं और वहां से ऐसी प्यारी प्यारी बातें कर रहे हैं कि भारत के लोगों को संघ और भागवत दोनों के लिए सम्मान का भाव पैदा हो सकता है। मोहन भागवत ने अपने ताजा बयान में यह दावा किया कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है। यह बात तो भारत की किताबों में बच्चे बचपन से पढ़ते हैं लेकिन सवाल यह है कि आरएसएस इस बात पर अमल कितना करता है? वास्तविकता यह है कि मोहन भागवत अपने बयान में चाहे जो कहें, अमल के मैदान में न केवल संघ का बल्कि संघ के विचारों से प्रभावित सरकार का रवैया बिल्कुल उल्टा होता है। चाहे वंदे मातरम गीत में हिंदू देवी देवताओं की उपासना वाले छंद को राष्ट्रीय गीत के तौर पर शामिल करना का मामला हो या यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर मुसलमान को अपने पारिवारिक कानून से वंचित करना, संघ और संघ के विचारों से चलने वाली सरकार ने कभी भी विविधता में एकता को महत्व नहीं दिया। इसी तरह मोहन भागवत का एक बयान यह भी आया कि जो हिंदू मुसलमान को भारत का नहीं मानते वह दरअसल हिंदू नहीं हैं। इसके बावजूद हम देखते हैं कि संघ और संघ से जुड़े लोग अक्सर भारतीय मुसलमानों को पाकिस्तानी होने का ताना देते रहते हैं और बात-बात पर उन्हें पाकिस्तान जाने की सलाह भी देते हैं। अगर मोहन भागवत अपने दावों में नेकनीयत हैं तो उन्हें इन बातों पर भी ध्यान देना चाहिए और अपनी कही हुई बातों को अमल में लाना चाहिए।
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