बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। तीन साल के भीतर भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर बिहार में सियासत गरमा गई है और जदयू के श्याम रजक ने खुलकर इसका विरोध किया है। दारोगा परीक्षा भर्ती में गया के एक ही सेंटर से 471 उम्मीदवार कामयाब हुए, अब होगी इसकी जांच।
और जानिएगा कि पटना एयरपोर्ट पर चिड़ियों का झुंड देखकर इंडिगो के पायलट ने क्या किया?
पहली ख़बर
भास्कर के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 2029 तक देश के सभी 21 एनडीए शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की बात के बाद, बिहार एनडीए के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए। जदयू ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। पार्टी के वरीय नेता व विधायक श्याम रजक ने तो यहां तक कह दिया कि इसे बिहार में लागू नहीं होने देंगे। इसके बारे में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा जल्द अमित शाह से बात करेंगे। लोजपा (रामविलास) ने सर्वानुमति की शर्त रखी। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बोले-पहले ड्राफ्ट आए। इसमें सभी पक्षों के हित शामिल रहें। रालोमो की भी कमोबेश यही राय रही। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) ने सकारात्मक रुख दिखाया। भाजपा के फायर ब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का कहना था कि इसे तो आजादी के बाद ही लागू कर देना चाहिए था। लेकिन कांग्रेस ने अपने वोट बैंक के चक्कर में तुष्टिकरण की राजनीति की। इसे लागू नहीं किया। देश को गर्त में गिरा दिया। यूसीसी का अभी तक लागू न हो पाना, देश का बहुत बड़ा दुर्भाग्य है। लेकिन जदयू के श्याम रजक ने यूसीसी का खुलकर विरोध किया। हिंदुस्तान के अनुसार श्री रजक ने सोमवार को कहा कि बिहार में यूसीसी लागू होने का सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा-हमने पहले भी कहा है कि यह बिहार में लागू नहीं होगी। आज भी हम अपने पुराने स्टैंड पर कायम हैं। श्याम रजक जदयू दफ्तर में पत्रकारों से बात कर रहे थे। श्याम रजक ने कहा कि बिहार में भले ही भाजपा का मुख्यमंत्री है लेकिन सरकार एनडीए की है। उन्होंने कहा कि जब यह बिल पारित हो रहा था उसे समय हमारे नेता ने इसका विरोध किया था। हमने उसे समय भी कहा था कि इस बिहार में लागू नहीं होने देंगे तो फिर आज इसे कैसे लागू होने देंगे। इधर जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा स्पेशल पर केंद्रीय गृह मंत्री से बात करेंगे।
दारोगा परीक्षा भर्ती में गया के एक ही सेंटर से 471 कामयाब, होगी जांच
बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) की 1799 पदों पर हुई दारोगा बहाली की परीक्षा विवादों में है। क्रमवार अभ्यर्थियों के पास होने, परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट के सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। इस प्रकरण में गयाजी के रामपुर स्थित गया कॉलेज के पास पुलिस ने सॉल्वर गैंग के शातिर को नकल कराते हुए गिरफ्तार किया था। दैनिक भास्कर की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि पूरे बिहार के 59 परीक्षा केंद्रों में से इसी सेंटर से सबसे अधिक 471 कैंडिडेट पास हुए। विवादों में पूर्णिया का राजकीय कन्या उच्च विद्यालय भी है। इस परीक्षा केंद्र से 113 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। परीक्षा के दिन 27 मई को जिन दो केंद्रों पर वॉकी-टॉकी, सॉल्वर सिंडिकेट और प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर वायरल करने की नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई थी, आयोग के रिजल्ट में उन्हीं दोनों केंद्रों से कुल 584 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है।
अधिक रिजल्ट देने वाले शीर्ष 20 केंद्रों की सूची तलब
हिन्दुस्तान के अनुसार दारोगा परीक्षा बहाली में कथित गड़बड़ियों की जांच के क्रम में आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की एसआईटी ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है। ईओयू ने परीक्षार्थियों के अनुपात में सर्वाधिक रिजल्ट देने वाले टॉप 20 परीक्षा केंद्रों की सूची तलब की है। साथ ही ऐसे शीर्ष 20 परीक्षा केंद्रों से संबंधित ब्योरा भी मांगा है जहां के क्रमवार रोल नम्बर के अधिक विद्यार्थी सफल हुए हैं। ईओयू ने बीपीएसएससी को तीन और आठ सितंबर को दो पत्र लिखे हैं। आयोग अब जवाब तैयार कर रहा है। ईओयू एसआईटी ने आयोग से शिकायत वाले परीक्षा केंद्रों के वीडियो फुटेज भी मांगे हैं।
बाढ़ पीड़ित परिवारों को आज मिलेंगे 7-7 हजार रुपए
बिहार सरकार ने राज्य के बाढ़ पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौघरी मंगलवार को बाढ़ पीड़ित हरेक परिवार को सात-सात हजार रुपए उनके बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजेंगे करेंगे। इसके लिए आपदा प्रबंधन विभाग ने सोमवार की देर शाम तक जिलों से आठ लाख 27 हजार 472 परिवारों की पूरी विवरणी मंगा ली है। इन परिवारों को 579.23 करोड़ रुपये अनुग्रह सहायता के तौर दिए जाएंगे।
हूती का सऊदी के वायु सैनिक अड्डे पर हमला
जागरण के अनुसार अरब देशों की ईरान के साथ सोमवार को ओमान में होने वाली बैठक स्थगित हो गई है। इस बैठक में अमेरिका-ईरान युद्ध और हूती लड़ाकों की आक्रामकता पर बात होनी थी। इस बीच यमन के हुती लड़ाकों ने सऊदी अरब के सीमा के नजदीक स्थित हामिस मुशैत वायुसेना अड्डे पर बैलेस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया है। इस हमले में लड़ाकू विमानों के हँगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के गोदामों को निशाना बनाया गया है। हूती के हमले में क्षतिग्रस्त हुई ईस्ट-बेस्ट तेल पाइपलाइन से जल्द आपूर्ति शुरू होने की संभावना नहीं है। सऊदी अरब पर हुए हमलों का असर यह हुआ है कि सोमवार को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आमद चार प्रतिशत तक कम हो गई। इसके चलते अमेरिका और विश्व बाजार के तेल मूल्य में तेज उछाल देखा गया।
पटना एयरपोर्ट पर चिड़ियों का झुंड देखकर इंडिगो के पायलट ने फ्लाइट ने क्या किया?
हिन्दुस्तान के अनुसार पटना एयरपोर्ट के रनवे पर अचानक चिड़ियों का झुंड उतर आने से दिल्ली से पटना आने वाली इंडिगो की फ्लाइट को वाराणसी डायवर्ट कराना पड़ा। यात्रियों से भरी इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6ई 2453 दिल्ली से पटना शाम 4.15 बजे पहुंचने ही वाली थी कि रनवे पर चिड़ियों का झुंड आ गया। पायलट को मिली सूचना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर फ्लाइट को वाराणसी डायवर्ट कर दिया गया। इसी विमान से केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह समेत 176 यात्री पटना आ रहे थे। बाद में एयरपोर्ट के रनवे के आसपास पटाखे छोड़कर चिड़ियों के झुंड को भगाया गया। इसके बाद यह विमान शाम 6:20 बजे वाराणसी से पटना पहुंचा।
कुछ और सुर्खियां:
- सीबीआई ने सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में एफआईआर, उद्धव व आदित्य ठाकरे का भी नाम
- मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर में बन रहे मकान के टॉयलेट की टंकी की शटरिंग खोलने के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से ठेकेदार समेत दो की मौत
- होर्मुज में जहाज पर हुए हमले में वैशाली का युवक लापता
- बिहार में अब हर साल 2 दिन का हिंदी साहित्य समागम आयोजित होगा
- जर्मनी के अलेग्जेंडर ज़्वेरेव ने अपना पहला अमेरिकी ओपन टेनिस खिताब जीता, फाइनल में अमेरिका के बेन शेल्टन को चार सेट में शिकस्त दी
- पटना के बेली रोड पर सरदार पटेल भवन के पास फ्लावर पर सड़क हादसे में दो दोस्तों की मौत
- खगड़िया जिले में बाढ़ के पानी में नहाने के दौरान दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों की मौत
अनछपी: केंद्रीय गृह मंत्री की इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है जिसमें वह “एक और भाषा सीखने के विरोध” को बड़ी भूल बता रहे हैं। दरअसल समझने की बात यह है कि अमित शाह एक और भाषा सीखने के विरोध की बात कह रहे हैं जबकि विरोध भाषा सीखने का बिल्कुल नहीं है बल्कि एक और भाषा सीखने के नाम पर एक विशेष भाषा को थोपने का विरोध हो रहा है। शब्दों की इस बाजीगरी और हेराफेरी को समझना बेहद जरूरी होता है। जैसे आजकल यह कहा जा रहा है कि वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत है और इसे गाना जरूरी है जबकि यह नहीं बताया जा रहा है कि यह वंदे मातरम या राष्ट्रीय गीत वह नहीं है जिसे हमारे संविधान निर्माता ने स्वीकृति दी थी। इस मामले में मीडिया भी पूरी तरह अपनी बेईमानी पर उतर आया है। खैर हमारी चर्चा भाषा को लेकर है। अमित शाह सिर्फ एक बात को सुनिश्चित कर दें कि तीसरी भाषा के रूप में जो छात्र जो भाषा चाहे वही पढ़ेगा तब त्रिभाषा फार्मूले का विरोध बिल्कुल नहीं होगा। इस मामले में समझने की सबसे जरूरी बात यह है कि छात्र तीसरी भाषा के रूप में वह भाषा सीखेंगे जो उनकी पसंद का होगा और जो उन्हें करियर में लाभ देगा। उदाहरण के लिए बिहार में यह फैसला किया जा रहा है कि इंजीनियरिंग कॉलेज में जर्मन और दूसरी विदेशी भाषा भी पढ़ाई जाए। यह एक अच्छा कदम है लेकिन इसकी शुरुआत स्कूल से क्यों नहीं होनी चाहिए? हिंदी भाषी क्षेत्रों में विशेष कर उन छात्रों को परेशानी होती है जो हिंदी भाषी नहीं हैं और तीसरी भाषा के रूप में उनसे जबरन संस्कृत पढ़ाया जा रहा है। उदाहरण के लिए एक तो हिंदी भाषी क्षेत्रों में गैरहिंदी भाषी छात्रों के लिए उर्दू पढ़ने की व्यवस्था या तो नहीं है या बेहद कमजोर है। तो ऐसे छात्र तीसरी भाषा के रूप में अगर संस्कृत के बदले कोई और भाषा पढ़ना चाहते हैं तो उन्हें इसकी सुविधा क्यों नहीं दी जा रही है? दरअसल अमित शाह तीसरी भाषा के रूप में गलतफहमी फैला रहे हैं और विरोध जिस बात का है उसे सही तौर पर पेश नहीं कर रहे हैं।
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