छ्पी-अनछपी: इसराइल के हमलों का एक साल- 42 हज़ार की जान गई, दागी अफसर नहीं बन सकेंगे सीओ
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पश्चिम एशिया में इसराइल के हमलों के एक साल हो गए हैं और इस दौरान 42 हज़ार लोगों की मौत की खबर है। बिहार सरकार ने फैसला किया गया है कि आरोप से मुक्त होने तक दागी ऑफिसर सीओ नहीं बन सकेंगे। रोहतास और कटिहार में नहाने के दौरान डूबने से 10 लोगों की मौत हो गई है। चेन्नई में एयरफोर्स के एयर शो के दौरान बीमार पड़ने से पांच लोगों की मौत हो गई।
भास्कर के अनुसार 7 अक्टूबर 2023 को हमास हमले के बाद पश्चिम एशिया में शुरू हुई जंग को एक साल हो गया है। एक साल में 42 हज़ार लोग मारे गए और डेढ़ करोड़ लोग इसकी मार झेल रहे हैं। एक साल बाद भी डेढ़ सौ इसराइली बंधकों के परिजनों को उनकी रिहाई का इंतजार है। उधर ग़ज़ा पट्टी में पिछले एक साल से इसराइली सेना के हवाई हमले और सैनिक कार्रवाई जारी है। करीब 23 लाख की आबादी वाले ग़ज़ा में अभी तक 41 हज़ार से ज्यादा फलस्तीनी लोगों की मौत हुई है। इनमें से 164765 बच्चे हैं। इसराइल हमास जंग की सबसे बड़ी मार बच्चों को झेलनी पड़ी है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि युद्ध के चलते 18 हज़ार से ज्यादा बच्चे अनाथ हो गए हैं, उनको पालने वाला कोई नहीं बचा है।
हर हफ़्ते 160 इसराइली हमले
एक रिपोर्ट के अनुसार हमास के हमले के बाद इसराइल ने ग़ज़ा पर हर सप्ताह 160 हमले किए। अमेरिका के थिंकटैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार, ग़ज़ा में युद्ध अभी भी जारी है और इसराइल अब लेबनान में हिजबुल्लाह और ईरान के साथ भी संघर्ष कर रहा है। यह चौतरफा संघर्ष समूचे मध्यपूर्व को अपनी चपेट में ले सकता है।
दागी अधिकारी नहीं बन सकेंगे सीओ
प्रभात खबर की सबसे बड़ी खबर के अनुसार बिहार में दागी अफसर को आरोप मुक्त होने तक अंचल कार्यालयों में सीओ का पदभार नहीं मिल सकेगा। राज्य सरकार ने अंचल अधिकारियों की छवि साफ़ सूत्री करने सहित भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में यह कदम उठाया है। साथ ही इस संबंध में हाल ही में कार्रवाई भी की गई है। दरअसल राज्य के करीब 25 अंचल कार्यालय का कामकाज केवल प्रभारी अंचल अधिकारियों के भरोसे चल रहा है। ऐसे में इन सभी अंचलों में अंचल अधिकारियों की नियुक्ति के लिए जिन 25 अधिकारियों का नाम का रखा गया उसमें से 22 अधिकारी पर किसी ने किसी तरह के आरोप थे। साथ ही उन पर विभागीय कार्रवाई भी चल रही थी। ऐसे में इन सभी अधिकारियों की नियुक्ति अंचल अधिकारी के पद पर नहीं की गई।
10 लोगों की डूबने से मौत
हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर के अनुसार रोहतास और कटिहार में रविवार को नहाने के दौरान डूबने से छह बच्चों समेत 10 लोगों की मौत हो गई। रोहतास थाना क्षेत्र के तुंबा गांव के पास सोन नद में दोपहर स्नान करने गए सात बच्चे डूब गए। इनमें छह की मौत हो गई जबकि एक लापता है। सात डूबने वालों में रांची के चार सहोदर भाई-बहन और तीन ममेरे भाई तुंबा के हैं। उधर, कटिहार के कुरसेला थाना क्षेत्र के समेली रेलवे हॉल्ट सरैया ढाला के समीप रविवाद दोपहर ढाई बजे नदी में नहाने के डूबने से चार किशोर मित्रों की मौत हो गई। चारों किशोर समेली प्रखंड के चकला मौलानगर के रहने वाले थे।
चेन्नई के एयर शो में पांच की मौत
चेन्नई के मरीना बीच पर रविवार को वायुसेना ने एयर शो का आयोजन किया। इस शो को देखने के लिए भारी भीड़ जुट गई। मरीना बीच पर लगभग भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। चिलचिलाती धूप और भारी भीड़ के कारण तबीयत बिगड़ने से पांच लोगों की मौत हो गई और 230 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शो के कारण निकटवर्ती लाइटहाउस मेट्रो स्टेशन और वेलाचेरी में चेन्नई एमआरटीएस रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ जुट गई थी।
कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस गठबंधन को समर्थन देगी पीडीपी
प्रभात खबर के अनुसार जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल के बाद नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को खुशी जताई कि नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस मिलकर सरकार बताते दिख रही है। उन्होंने कहा कि पीडीपी भी हमसे जुड़ने के लिए तैयार है, यह बेहद अच्छी बात है। दरअसल एग्जिट पोल के बाद पीडीपी नेता शोएब युसूफ मीर ने कहा था कि भाजपा को सत्ता में बाहर रखने के लिए वह नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के साथ गठबंधन करने को तैयार हैं।
इस्कॉन मंदिर के दो गुटों में मारपीट
भास्कर के अनुसार रविवार की रात पटना का प्रसिद्ध इस्कॉन मंदिर अखाड़ा बन गया। साधुओं के दो गुट ही आपस में भिड़ गए। एक गुट इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष कृष्ण कृपा दास उर्फ कन्हैया सिंह का है और दूसरा उपाध्यक्ष रुक्मणि मोहन दास का है। दोनों के बीच मारपीट हुई। अध्यक्ष गुट ने उपाध्यक्ष गुट के साधुओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। मारपीट करते-करते दोनों गुट सड़क पर आ गए। मंदिर के बाउंसरों ने साधुओं को पीटा। करीब 10 साधु घायल हो गए। कोतवाली थाने की पुलिस मौके पर मौजूद थी।
कुछ और सुर्खियां
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अनछपी: आम लोगों के बीच सरकारी नौकरी का चाहे जितना आकर्षक हो लेकिन कभी-कभी वहां होने वाली परेशानी भी सामने आती रहती है। अभी समस्तीपुर के शाहपुर पटोरी प्रखंड के ब्लॉक पंचायती राज ऑफिसर (बीपीआरओ) कुंदन कुमार की चर्चा सोशल मीडिया पर बहुत है हालांकि मेंस्ट्रीम मीडिया में इसकी कवरेज कम है। कहने को तो यह एक अधिकारी का इस्तीफा है लेकिन दरअसल इससे पता चलता है कि कम से कम बिहार में सरकारी नौकरी में क्या परेशानियां हैं। पहली बात तो यह पता चली कि वह मोहनपुर प्रखंड के भी प्रभार में थे यानी अधिकारियों की कमी की वजह से भी काम करने वाले परेशान हो रहे हैं। इस अधिकारी ने अपने इस्तीफा के लिए जो बातें बताई हैं उस पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। यह बात जानकर हैरत होती है कि बीपीआरओ को कई महीने से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा उन्होंने यह बताया कि गाड़ी भाड़ा का 9 महीने से भुगतान लटका हुआ है। इन्हें प्रखंड कार्यालय सहायक के रूप में एक कर्मी मिला हुआ था जिसे उनकी सहमति के बिना कहीं और प्रतिनियुक्त कर दिया गया। उन्होंने कंप्यूटर सिस्टम खराब होने की बात कही। इस बारे में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने लिखा कि प्रखंड पंचायत राज अधिकारी समेत अन्य सेवाओं के अधिकारी किन विषम परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और किन कारणों से इस्तीफा दे रहे हैं यह उसका छोटा सा नमूना है। अगर बिहार सरकार के कर्मचारियों और अधिकारियों का सर्वेक्षण कराया जाए तो अक्सर कर्मचारी और अधिकारी यह कहते हुए मिलेंगे कि उन पर काम का बोझ अधिक है और उन्हें जरूरी संसाधन नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में जो अधिकारी इस्तीफा देकर जा रहे हैं वह तो अपनी कोई ना कोई व्यवस्था कर लेंगे लेकिन जो व्यवस्था पीछे रह जाती है वह आम लोगों के लिए परेशानी का सबक बनती है। इस व्यवस्था में काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की सुध लेना भी सरकार की जिम्मेदारी है। उनका कामकाज अगर इन परेशानियों से बाधित हो रहा है तो सरकार के अलावा आम आदमी भी परेशान हो रहे हैं। सवाल यह है कि सरकारी अधिकारियों का यह दुखड़ा किसे सुनाया जाए और इसका हल कौन निकालेगा?
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