छपी-अनछपी: इमारत-ए-शरिया में तख्ता पलट की कोशिश, म्यांमार में मरने वाले डेढ़ हजार से अधिक

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। इमारत-ए-शरिया के पटना स्थित मुख्यालय में कल अध्यक्ष और सचिव के पद पर तख्ता पलट करने की कोशिश की गई और पुलिस को बुलाया गया। म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप में मरने वालों की संख्या डेढ़ हजार से अधिक हुई। बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में पास परसेंटेज 82 रहा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि बिहार में उर्दू अनुवादकों की संख्या दुगनी की जाएगी। रक्सौल में नौकरी देने के नाम पर बंधक बनाए गए 400 युवक-युवतियों को मुक्त कराया गया है।

और, जानिएगा कि अमेरिका के ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में हिंदू धर्म आधारित पाठ्यक्रम पर विवाद क्यों है।

इमारत-ए-शरिया में अध्यक्ष और सचिव को हटाने के लिए पहुंचे लोगों से हुए विवाद की खबर सभी अखबारों में है। भास्कर के अनुसार इमारत-ए-शरिया के अमीर-ए-शरीयत और नाजिम के पद पर कब्जा को लेकर दो गुटों में हाथापाई हो गई। एक गुट मौजूद अमीर-ए-शरीयत हजरत अहमद अली फैसल रहमानी और उनके इमारत में मौजूद स्टाफ का तो दूसरा कार्यवाहक नाजिम पद से हटाए गए मौलाना शिबली अल कासमी, पूर्व नाजिम मौलाना अनीसुर रहमान कासमी, पूर्व सांसद अशफाक करीम, रागिब हसन एडवोकेट, मौलाना अबू तालिब रहमानी, डॉक्टर मजीद आलम, मुफ्ती नजर तौहीद और उनके समर्थकों का था। घटना के वक़्त मौलाना वली फैसल रहमानी नहीं थे। उनके भाई फहद रहमानी थोड़ी देर के बाद पहुंचे। मौलाना शिबली अल कासमी की जगह मुफ्ती सईदुर रहमान को कार्यवाहक नाजिम बनाया गया है। सूचना मिलने के बाद एसडीपीओ सदर गौरव कुमार, फुलवारी शरीफ एसडीपीओ सुनील कुमार के अलावा फुलवारी शरीफ और आसपास थाने की पुलिस पहुंच गई। दोनों गुटों को समझा बूझकर अलग किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस की वहां तैनाती कर दी गई है।

दोनों गुटों के क्या कहना है?

मौलाना शिबली अल कासमी का कहना है कि हजरत अहमद अली फैसल रहमानी के पास विदेशी नागरिकता है। इसी वजह से उन्हें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव और सदस्य से कुछ महीने पहले हटा दिया गया था। वह आलिम भी नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि इमारत के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने बहुमत हजरत मोहम्मद अली फैसल रहमानी को पद से हटा दिया। उनकी जगह बोर्ड के पूर्व नाजिम मौलाना अनीसुर रहमान कासमी को अमीर बना दिया और अल कासमी का दावा है कि उन्हें बोर्ड ने नाजिम बना दिया है। इधर मौलाना फैसल रहमानी गुट द्वारा जारी बयान के अनुसार इमारत वक्फ़ संशोधन विधेयक का शुरू से विरोध कर रही है। गर्दनीबाग में 26 मार्च को दिया गया धरना कामयाब रहा। इस वजह से जदयू के नेता बौखलाए हुए हैं। इस वजह से जदयू के नेता देश की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम संस्था पर कब्जे करने आए थे लेकिन स्थानीय लोगों ने विरोध कर दिया। इमारत पर हुए इस हमले में पुलिसकर्मियों और जदयू नेताओं का पूरा समर्थन था।

भूकंप से मरने वालों की संख्या डेढ़ हजार के पार

म्यांमार में शुक्रवार को आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप से मरने वालों की संख्या शनिवार को 1700 से पार हो गई। हालांकि म्यांमार की सैन्य नेतृत्व वाली सरकार ने एक बयान में कहा कि अब तक 1002 लोग मृत पाए गए हैं और 3408 घायल हैं जबकि 139 अन्य लापता हैं। भूकंप के चलते कई इलाकों में इमारतें ढह गईं, सड़कें टूट गईं, पुल ढह गए और एक बांध भी टूट गया। देश के अधिकांश हिस्सों में बिजली, फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद हैं।

मैट्रिक परीक्षा में 82% पास हुए

प्रभात खबर के अनुसार बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने शनिवार को मैट्रिक परीक्षा 2025 का रिजल्ट जारी कर दिया। टॉप 10 में 123 स्टूडेंट्स शामिल हैं जिनमें 63 छात्र बस 60 छात्राएं हैं। पहले स्थान पर तीन विद्यार्थी रहे। इनमें जेपीएन हाई स्कूल, नरहन (समस्तीपुर) की साक्षी कुमारी, भारतीय इंटर कॉलेज, गहिरी (पश्चिम चंपारण) की अंशु कुमारी और हाई स्कूल अगिआंव बाजार, (भोजपुर) के रंजन वर्मा शामिल है तीनों को 489 अंक (97.8%) मिले हैं। रिजल्ट शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉक्टर एम सिद्धार्थ व बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने जारी किया। इस बार कुल 82.11 फ़ीसदी परीक्षार्थी सफल हुए हैं जो पिछले वर्ष की परीक्षा के रिजल्ट से दशमलव 0.80% कम है।

उर्दू अनुवादक ऑन की संख्या दुगनी होगी

हिन्दुस्तान के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि सहायक उर्दू अनुवादकों के पदों को बढ़ाकर दोगुना किया जाएगा। इससे सहायक उर्दू अनुवादकों की अब इनकी संख्या बढ़कर 3,306 हो जाएगी। यह सहायक उर्दू अनुवादकों की वर्ष 2005 से पह पहले की संख्या के सात गुना से भी अधिक हो जाएगी। मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित संवाद में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में 715 सहायक उर्दू अनुवादकों को नियुक्ति पत्र देने के दौरान उन्होंने यह घोषणा की। इस दौरान उपस्थित 50 सहायक उर्दू अनुवादकों को नियुक्ति पत्र दिया गया, शेष को जिलों में नियुक्ति पत्र बांटा गया।

नौकरी के नाम पर बंधक बने 400 लोग मुक्त

डीबीआर नेटवर्किंग मार्केटिंग कंपनी की रक्सौल शाखा में नौकरी के नाम पर बंधक बनाकर मारपीट व प्रताड़ना के शिकार 400 युवक-युवतियों को शनिवार को एसएसबी व पुलिस ने मुक्त कराया है। व्हाट्सएप पर मिली शिकायत के बाद एक निजी संस्थान के सहयोग से एसएसबी और पुलिस ने रक्सौल के अलग-अलग मोहल्लों में संचालित आठ ठिकानों पर छापेमारी की। इन केंद्रों से 400 युवक-युवतियों को मुक्त कराकर कंपनी के पांच अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया। मुक्त कराए गए लोगों में 60 नाबालिग व पांच लड़कियां हैं। नाबालिगों को स्थानीय बाल गृह में रखा गया है। पुलिस टीम पीड़ितों का बयान ले रही है। इसके आधार पर पुलिस मामले की एफआईआर दर्ज करेगी।

ह्यूस्टन में हिंदू धर्म पर आधारित पाठ्यक्रम पर विवादों

जागरण के अनुसार अमेरिका के ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में हिंदू धर्म को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रस्तुत करने और इस पर आधारित पाठ्यक्रम को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। एक भारतीय अमेरिकी छात्र बसंत भट्ट ने आरोप लगाया है कि पाठ्यक्रम में हिंदू धर्म के कई पहलुओं को गलत और नकारात्मक रूप से पेश किया गया। इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि हिंदू धर्म एक आधुनिक सामाजिक संरचना है जो असामाजिक सिद्धांत या विवादित अवधारणा से जुड़ी है। इसमें बताया गया है कि हिंदू राष्ट्रवादी अपने धर्म का इस्तेमाल राजनीतिक उपकरण के रूप में करते हैं। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हिंदू कट्टरपंथी कहा गया और दावा किया गया है कि भारत में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है।

कुछ और सुर्खियां:

  • वक़्फ़ संशोधन बिल मंगलवार को हो सकता है संसद में पेश
  • पूर्व मंत्री इलियास हुसैन समेत 5 को अलकतरा घोटाले में तीन-तीन वर्ष की सजा
  • पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ में एबीवीपी की मैथिली मृणालिनी पहली महिला अध्यक्ष बनीं
  • छत्तीसगढ़ में पुलिस ने मुठभेड़ में 18 नक्सलियों को ढेर करने का दावा किया
  • नेपाल में 100 राजशाही समर्थक गिरफ्तार, काठमांडू से कर्फ्यू हटा
  • पटना से दिल्ली जा रही फ्लाइट में असम के प्रोफेसर की मौत, लखनऊ एयरपोर्ट पर कराई गई थी इमरजेंसी लैंडिंग

अनछपी: रमजान के पाक महीने में आलिमों ने यह बात बताई किअगर कोई झगड़ा करने आए तो उससे कह दो कि मैं रोजे से हूं लेकिन शनिवार को मौलाना बताए जाने वाले लोग ही इमारत-ए-शरिया पहुंच गए और उनके साथ-साथ पुलिस भी पहुंची तो सब लोग हैरान और परेशान रह गए। अक्सर लोगों को इस बात पर बहुत अफसोस हुआ कि रमजान में अब तो दो-तीन दिन ही बाकी थे और अगर उन्हें कोई शिकायत करनी थी तो इसके लिए ईद के बाद का वक्त भी था। लोगों को अफसोस इस बात पर भी हुआ कि इस समय वक़्फ़ संशोधन बिल का मुद्दा बेहद अहम बना हुआ है और इमारत-ए-शरिया भी इस मामले पर आंदोलन कर रही है। जिन लोगों को भी इमारत-ए-शरिया के मौजूदा अमीर-ए-शरीयत से शिकायत है, उन्हें आखिर इतनी हड़बड़ी क्यों थी कि उन्होंने रमजान का ख्याल नहीं रखा? उन्होंने शायद इसका भी ख्याल नहीं रखा कि इस समय वक़्फ़ संशोधन बिल का विरोध सबसे अहम मुद्दा है। जिस तरह वहां पुलिस पहुंची और इस गुट ने अमीर-ए-शरीयत और नाजिम के पद पर अपना दावा किया उसे तख्तापलट की कोशिश बताना गलत नहीं होगा। तख्तापलट की इस कोशिश की सबसे घिनौनी बात यह थी कि इसमें जनता दल यूनाइटेड और उसके एक विवादास्पद नेता का नाम आया। ऐसे में मौजूदा नाजिम ने यह आरोप लगाया कि चूंकि इमारत ने मुख्यमंत्री नीतीश की इफ्तार पार्टी का बायकॉट और वक़्फ़ संशोधन बिल पर उनके स्टैंड का विरोध किया है इसलिए जनता दल यूनाइटेड के लोगों ने ऐसी हरकत की। इस मामले में अभी जनता दल यूनाइटेड का कोई बयान सामने नहीं आया है। जो लोग अमीर-ए-शरीयत फैसल रहमानी का विरोध कर रहे हैं, उनमें से पूर्व नाजिम शिबली अलकासमी तो एक महीने पहले तक उनका गुणगान करते थे। फिर एक महीने में ऐसा क्या हो गया कि उन्हें फैसल रहमानी में हर तरह की बुराई नजर आने लगी? आम आदमी तो यही समझेगा कि चूंकि उन्हें पद से हटाया गया है इसलिए वह खुन्नस निकाल रहे हैं। जिस तरह उन्होंने खुद को नाजिम और मौलाना अनीसुर रहमान कासमी को अमीर-ए-शरीयत घोषित कर दिया है, क्या यह सही इस्लामी तरीका है और इमारत-ए-शरिया में इसी तरह अपनी घोषणा से लोग अधिकारी बनते हैं? दूसरी तरफ फैसल रहमानी के लिए भी यह सोचने का वक़्त है कि आखिर उनका विरोध क्यों हो रहा है? उन्हें इसका भी जवाब देना चाहिए कि उनकी नागरिकता का मामला क्या है और वह समय क्यों नहीं दे पाते। कुल मिलाकर ईद की खुशी से पहले मुसलमानों के लिए यह एक सदमे की बात है।

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