बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को राहुल गांधी के ज़रिए गद्दार कहने पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान से जंग में अमेरिका ने 42 विमान गंवाए हैं। मगध विश्वविद्यालय के वीसी शशि प्रताप शाही को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
पहली ख़बर
जागरण के अनुसार कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली की यात्रा के दूसरे दिन बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को गद्दार कह दिया। भाजपा ने इस पर करारा पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने राहुल गांधी को ‘राहु’ की संज्ञा देते हुए कटाक्ष किया कि वह राजनीति के वातावरण को दूषित कर रहे हैं। यह बयान राहुल गांधी की अराजकतावादी और हताश मानसिकता को दर्शाता है। राहुल ने रायबरेली में आयोजित बहुजन स्वाभिमान सभा में कहा कि जब आप घर जाओगे और आरएसएस के लोग आपके सामने आकर नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की बात करें, तो उनसे साफ कहो कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है, आपकी गृह मंत्री गद्दार है और आपका संगठन गद्दार है। राहुल ने यही बात अमेठी में भी दोहराई। कहा कि इन लोगों ने देश के महापुरुषों और जनता से गद्दारी की है। मैं इसके लिए उन्हें गद्दार ही कहूंगा और इसके लिए माफी नहीं मांगूंगा।
ईरान से जंग में अमेरिका ने गंवाए 41 जहाज़
जागरण के अनुसार ईरान युद्ध को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बोलती बंद कर सकती है, क्योंकि इस जंग में अमेरिका को भारी नुकसान पहुंचने की बात उजागर हुई है। 40 दिन चले आपरेशन फ्यूरी के दौरान अमेरिका ने एफ-15ई, एफ-35ए और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन समेत 42 विमान गंवाए या क्षतिग्रस्त हुए। इस दौरान ट्रंप ने कभी भी युद्ध में अमेरिका के व्यापक नुकसान का जिक्र नहीं किया और यह कहते रहे कि अमेरिका ने युद्ध में अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया है। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की रिपोर्ट में बताया गया है कि गोपनीयता, जारी सैन्य संघर्ष और हमलों की जिम्मेदारी तय करने जैसे कारणों के चलते क्षतिग्रस्त या तबाह हुए विमानों की संख्या में बदलाव हो सकता है। गत 12 मई को संसद की एक उपसमिति को पेंटागन के कार्यवाहक नियंत्रक जूल्स डब्ल्यू हर्स्ट तृतीय ने बताया था कि ईरान में सैन्य अभियानों के लिए विभाग का अनुमानित व्यय बढ़कर 29 अरब डालर हो गया है।
अमेरिकी संसद में ईरान युद्ध के ख़िलाफ़ प्रस्ताव
ईरान युद्ध में डोनाल्ड ट्रंप के अधिकार कम करने वाला एक प्रस्ताव पारित किया गया है। अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन से पारित इस आशय के प्रस्ताव का समर्थन ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने भी किया है। लगातार सात बार की नाकामी के बाद आठवें प्रयास में इस प्रस्ताव पर सीनेट की मुहर लगी है। सीबीएस न्यूज के अनुसार, सीनेट में प्रस्ताव के पक्ष में 50 वोट पड़े, जबकि विरोध में 47 सीनेटरों ने मतदान किया। हैरानी की बात यह है कि चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों का साथ दिया और प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
मगध विश्वविद्यालय के वीसी शशि हटाए गए
हिन्दुस्तान के अनुसार मगध विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. शशि प्रताप शाही को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। बिहार लोकभवन ने इस संबंध में बुधवार को अधिसूचना जारी कर दी है। राज्यपाल सह कुलाधिपति के निर्देश पर राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा की ओर से जारी आदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से सारे दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। मगध विवि के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. दिलीप कुमार केसरी को कुलपति का प्रभार सौंपा गया है। प्रो. केसरी वर्तमान में मगध विश्वविद्यालय के वरिष्ठतम प्रोफेसर हैं। नियमित कुलपति की नियुक्ति होने अथवा अगले आदेश तक वे कुलपति के दायित्वों का निर्वहन करेंगे। अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कुलपति के रूप में कार्य करते हुए प्रो. केसरी बिना कुलाधिपति की पूर्व स्वीकृति के कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे। इस संबंध में पूर्व में जारी राजभवन के निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन का आदेश दिया गया है।
बिहार की 6 यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर नियुक्ति के लिए एप्लीकेशन मांगे गए
बिहार के छह विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। इसके लिए लोक भवन की ओर से विज्ञापन जारी कर योग्य शिक्षाविदों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। राज्यपाल सचिवालय की ओर से पांच विश्वविद्यालयों के लिए एक संयुक्त अधिसूचना जारी की गयी है। आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी (एकेयू) के लिए अलग से आवेदन मांगे गए हैं। राज्यपाल सचिवालय ने छह विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति की प्रक्रिया कार्यकाल समाप्त होने से करीब आठ माह पहले ही शुरू कर दी है। इन विश्वविद्यालयों के वर्तमान कुलपतियों की नियुक्ति संबंधी अधिसूचना 24 जनवरी 2024 को जारी हुई थी। उनका कार्यकाल 24 जनवरी 2027 के बाद समाप्त होगा। जारी अधिसूचना के अनुसार ललित नारायण मिथिला विवि, दरभंगा, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर बिहार विवि, मुजफ्फरपुर व जयप्रकाश विवि, छपरा और आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी, पटना के कुलपति पद के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
भारत व इटली के बीच एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में समझौता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी इतालवी समकक्ष जॉर्जिया मेलोनी के बीच बुधवार को द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों देशों ने संबंधों को ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ तक बढ़ाने के साथ व्यापार, निवेश, एआई, अंतरिक्ष, नई तकनीक, रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया। मेलोनी के साथ वार्ता के बाद एक संयुक्त प्रेस बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमने भारत-इटली संबंधों को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना 2025-2029 दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक व्यावहारिक और भविष्य पर केंद्रित ढांचा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि भारत-इटली संबंधों को एक ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का रूप दिया जा रहा है, जो तय समय-सीमा के भीतर आगे बढ़ेगी।
बिहार में दो दिनों तक और बढ़ेगी गर्मी
प्रभात खबर के अनुसार बिहार में अगले दो दिनों के दौरान और अधिक गर्मी बढ़ने का पूर्वानुमान है. मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक रात-दिन के तापमान में बढ़ोतरी होने से लोगों को और अधिक गर्मी महसूस होगी. दिन में गर्म हवा के साथ अधिकांश जिलों में हीट वेव की भी संभावना है. पटना, गयाजी, जहानाबाद, अरवल, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर सहित अन्य जिलों में दिन का तापमान बढ़ेगा. वहीं, गोपालगंज, भभुआ व रोहतास में हीट वेव और अररिया, किशनगंज व पूर्णिया में मेघगर्जन व हल्की बारिश होने की संभावना है. बक्सर और भोजपुर में अधिक गर्मी रहेगी. बुधवार को कैमूर में 43.4 डिग्री, रोहतास में 43 डिग्री, औरंगाबाद में 41.6 डिग्री एवं छपरा में 40.2 डिग्री अधिकतम तापमान दर्ज हुआ।
कुछ और सुर्खियां:
- रुपए में लगातार नौवें दिन गिरावट जारी रही, $1 के बदले अब मिल रहा ₹ 96.86
- बिहार राज्य विश्वविद्यालय और महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ की अपील पर 33 हज़ार कर्मचारी छुट्टी पर रहे
- गया से बैंकॉक के लिए सीधी उड़ान शुरू होगी, राज्य सरकार हर उड़ान पर इंडिगो को देगी ₹5 लाख की मदद
- ताइवान ट्रैवलॉग के लिए ताइवान की लेखिका यांग शुआंग जी और अनुवादक लिन किंग को बुकर प्राइज, 67000 डॉलर मिलेंगे
- पटना सिटी में पूर्व पत्नी की शादी से नाराज सनकी व्यक्ति ने दो बच्चों समेत पूरे परिवार को डीजल डालकर जलाया, एक बुजुर्ग की मौत
अनछपी: हर साल बकरीद के मौके पर कुर्बानी को लेकर भारत में एक खास वर्ग एतराज जताना शुरू कर देता है और यह साबित करने की कोशिश करता है कि उसे जानवरों खासकर गाय से बहुत प्यार है। अगर हम इसकी धार्मिक मान्यता पर बहस ना करें तब भी कुछ संगठनों ने गाय को गौ माता बताकर जो माहौल बनाया है उसे हिंदू और मुसलमान और कहीं कहीं ईसाइयों के बीच संबंध बिगड़ते रहे हैं। इस वक्त यह मामला पश्चिम बंगाल में काफी चर्चा में है जहां यह बताया जा रहा है कि जो हिंदू मवेशी पालक अपनी गाय बेचना चाह रहे हैं उनसे मुसलमान यह कहकर गए नहीं ले रहे हैं कि यह उनकी माता के समान है तो अगर वह गाय की खरीदारी कुर्बानी के लिए करते हैं तो उन पर खतरा होगा। पश्चिम बंगाल में अभी भारतीय जनता पार्टी की नई नई सरकार बनी है और उसके हिंदुत्व के एजेंडे में गाय भी बहुत संवेदनशील मुद्दा है। भाजपा के लिए मुश्किल यह है कि पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की बड़ी आबादी भाजपा की सोच से सहमत नहीं है और वह गाय बेचने को अपना सालाना व्यापार समझते हैं। ऐसे विक्रेता को यह बात अच्छी तरह मालूम होती है कि गाय या बछड़े का इस्तेमाल किसलिए होगा। दूसरी तरफ गाय बचाने के नाम पर ऐसे असामाजिक तत्व सक्रिय हैं जो गाय बेचने और खरीदने वालों से पैसे ऐंठते हैं और इसमें नाकाम होने पर मारपीट या हत्या तक करते हैं। ऐसे में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की मांग रखी है। जमीयत अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि देश के मुसलमानों को इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी, बल्कि उन्हें खुशी होगी और गोवंशी के नाम पर होने वाली भीड़ की हिंसा और हत्या की घटनाएं रुकेंगी। मदनी ने पूछा है कि जब देश की बहुसंख्यक आबादी गाय को केवल पवित्र ही नहीं मानती बल्कि उसे मां का दर्जा देती है, तब ऐसी क्या राजनीतिक मजबूरी है कि सरकार उसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने से बच रही है। राष्ट्रीय पशु घोषित होने के बाद गाय का मांस बेचना भी घोर अपराध की श्रेणी में आएगा। अभी भी बीफ बेचने की मनाही है लेकिन कहीं-कहीं पर इसमें उम्र की कैद के साथ ढील है। पश्चिम बंगाल की सरकार में एक और समस्या यह है कि वह गाय के अलावा दूसरे जानवरों का मांस बेचने की भी अनुमति नहीं दे रही है। इसके लिए वह पशुओं का बर्थ सर्टिफिकेट मांग रही है। सरकार को यह समझना चाहिए कि वह जो नियम बनाती है उसे लागू करने के पूरी तैयारी नहीं होती और ऐसे में प्रभावित वर्ग पर कानून का डंडा चलाना अमानवीय ही कहलाएगा। उदाहरण के लिए सरकार को यह व्यवस्था करनी है कि वह जानवरों को ज़बह करने के लिए वेटरीनरी डॉक्टर से मुहर लगवाए और सही जगह स्लॉटर हाउस खोले। परंपरागत रूप से लोग जानवरों को खुले में ज़बह करते हैं और वहीं उसका मांस भी बेचते हैं। जब सरकार स्लॉटरहाउस खोलकर नहीं देती है तो मीट व्यापारी क्या करें? अलबत्ता यह जरूर है कि मांस बेचने वाले उसे खुली जगह से ढंकी जगह पर ले जा सकते हैं या उसे ढंक कर बेच सकते हैं। कुल मिलाकर सरकार और मवेशी पालक व मांस विक्रेता दोनों को अपने-अपने रवैया में सुधार करना होगा।
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