छपी-अनछपी: डीएलएड में 30 हज़ार सीट, वक़्फ़ कॉन्फ्रेंस में क्या इशारा कर गए चौधरी साहब

बिहार लोक संवाद डॉट नेट पटना।
पटना से छपे अखबारों की लीड आज अलग-अलग है। हिंदुस्तान अखबार में डीएलएड यानी डिप्लोमा इन एलेमेंटरी एजुकेशन की 30 हज़ार सीटों पर दाखिला संबन्धी खबर लीड बनी है। इसमें बताया गया है कि 306 डीएलएड कॉलेजों में दाखिले के शुरूआत जल्द ही होगी।
मगध यूनिवर्सिटी के पूर्व वाइस चांसलर के खिलाफ गैर जमानती वारंट होने की खबर भी आज के अखबारों में प्रमुखता से छपी है। प्रभात खबर ने इसे अपनी पहली खबर बनाया है।
बिहार के शिक्षा मंत्री ने शनिवार को हुए वक़्फ़ कॉन्फ्रेंस में मुसलमानों को इशारों ही इशारों में क्या कहा, आज की अनछपी में उसी की चर्चा है।
हिंदुस्तान हिंदुस्तान की खबर के अनुसार डीएलएड की 30 हज़ार 700 सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त की शुरूआत में प्रवेश परीक्षा से होगी। इन 306 कॉलेजों को सत्र 2022-24 के लिए संबद्धता दी गई है इनमें 54 सरकारी कॉलेज है और बाकी 252 गैर सरकारी कॉलेज है। इन कॉलेजों की सूची बिहार बोर्ड ने जिलावार अपनी वेबसाइट पर जारी कर दी है।
पहले डीएलएड की पढ़ाई के लिए 250 कॉलेजों में नामांकन होता था। दो साल के कोर्स के लिए इस बार अधिकतम डेढ़ लाख रुपये की फीस तय की गई है।
इस कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा में 450 अंकों के डेढ़ सौ प्रश्न होंगे। सही उत्तर के लिए 3 अंक दिए जाएंगे जबकि हर गलत उत्तर के लिए एक अंक काटा जाएगा।
भास्कर ने अपनी लीड खबर पटना के दीघा में जमीन विवाद को बनाया है। इसकी सुर्खी है- जिस 400 एकड़ जमीन को खाली कराने का आदेश वहां माननीयों ने ही बनायीं सड़कें।

मगध विश्वविद्यालय में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले के मामले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के विशेष न्यायाधीश ने शनिवार को पूर्व कुलपति डॉ राजेंद्र प्रसाद के खिलाफ गिरफ्तारी का गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। प्रभात खबर की लीड के अलावा अन्य अखबारों में भी इसे प्रमुख स्थान दिया गया है। इस मामले में पटना हाईकोर्ट ने पूर्व कुलपति की अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया था। हालांकि उन्होंने इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
महाराष्ट्र के अमरावती में कथित तौर पर नूपुर शर्मा समर्थक की हत्या की जांच एनआईए करेगा। यह सूचना टाइम्स ऑफ इंडिया के सबसे अहम खबर है जबकि हिंदुस्तान ने हेडिंग में साफ तौर पर इसे जांच के बदले निष्कर्ष बता दिया है। इसकी हेडिंग है- अमरावती में भी नूपुर शर्मा समर्थक की हत्या हुई थी। यही खबर जागरण में पहले पन्ने पर लीड बनी है।
शनिवार को दिल्ली से जबलपुर जा रहे स्पाइस जेट के विमान के केबिन में धुआं भरने की खबर भी सभी अखबारों ने प्रमुखता से छापी है। आपको याद होगा कि पटना में कुछ ही दिनों पहले स्पाइसजेट की फ्लाइट में आग लगने के कारण उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। हिंदुस्तान अखबार के अनुसार 5000 फीट की ऊंचाई पर विमान में धुएँ से हड़कंप मच गया था और पिछले 15 दिनों में स्पाइसजेट के साथ होने वाली यह ऐसी पांचवीं घटना है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने भारत के प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण का अमेरिका में दिया गया बयान प्रमुखता से छापा है जिसमें उन्होंने कहा है कि न्यायपालिका सिर्फ संविधान के प्रति जवाबदेह है। रोचक बात यह है कि इसके ठीक बगल में मोहम्मद ज़ुबैर की तस्वीर छपी है जिसकी खबर में यह बताया गया है कि कोर्ट ने ज़ुबैर को षड्यंत्र के आरोप के मामले में ज़मानत देने से इनकार कर दिया है। मोहम्मद ज़ुबैर के फैक्ट- चेकिंग के काम से भाजपा के आईटी सेल के बहुत सारे झूठ उजागर हुए थे। हिंदुस्तान ने इस खबर की सुर्खी लगाई है: ‘ दल चाहते हैं न्यायपालिका उनके मत का समर्थन करे’।
हिंदुस्तान अखबार ने यह खबर प्रमुखता से छापी है कि बिहार में सभी तबके के गरीब भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन दी जाएगी।
इसी अखबार ने फुलवारी शरीफ से यह खबर प्रमुखता से छापी है कि कैसे मुस्लिम परिवार ने एक हिंदू बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया। यह खबर राजा बाजार के समनपुरा की है। इस खबर में बताया गया है कि लगभग 25 साल पहले मोहम्मद अरमान ने उन्हें भटके हुए हालत में देखने के बाद अपनी दुकान पर रख लिया था।
75 वर्ष के हो चुके रामदेव का शुक्रवार को निधन हो गया था। इसके बाद अरमान के परिवार और आसपास के मुस्लिम समुदाय के लोगों ने सहयोग करते हुए रामदेव की अर्थी तैयार की और कंधा देकर श्मशान तक ले गए इसके बाद वहां हिंदू रीति रिवाज से अंतिम संस्कार हुआ। उनके परिवार में कोई नहीं था।
अल्पसंख्यक छात्रों को न्यायिक सेवा की प्रवेश परीक्षा के लिए मुफ्त कोचिंग देने के कार्यक्रम की शुरुआत की खबर भी प्रमुखता से छपी है। यह कोचिंग पटना लॉ कॉलेज द्वारा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की मदद से शुरू की गई है।
अनछपी: शनिवार को पटना स्थित अंजुमन इस्लामिया हॉल में वक़्फ़ संपत्ति की सुरक्षा पर वक़्फ़ कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम के बारे में हिंदी अखबारों में कवरेज नहीं दिखा लेकिन इसमें बतौर मुख्य अतिथि शामिल बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने मुसलमानों से नीतीश कुमार के समर्थन के लिए इशारे किये। उन्होंने संकेत में यह बात कही कि किसी के विरोध के चक्कर में नीतीश कुमार का समर्थन करना नहीं नहीं भूलें। श्री चौधरी यह इशारा कर रहे थे कि मुसलमानों का भाजपा विरोध तो समझ में आने वाली बात है लेकिन इस चक्कर में मैं नीतीश कुमार का समर्थन क्यों नहीं करते। उन्होंने अपनी तकरीर में अधिकतर उर्दू शब्दों का प्रयोग करते हुए मुसलमानों से सीधा संवाद करने की कोशिश की। उन्होंने कुरआन के पहले शब्द ‘इक़रा” जानी पढ़ो को लेकर भी कई बातें की। उन्होंने कहा कि जिस किताब के मानने वालों की पहली तालीम पढ़ना है वही लोग पढ़ाई के मामले में सबसे पिछड़े हुए हैं। यह बेहद अफसोसनाक है।
श्री चौधरी ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा वक्त संपत्ति की सुरक्षा के लिए किये जा रहे प्रयासों को भी बताया। साथ ही मदरसा सुदृढ़ीकरण और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए संचालित कोचिंग संस्थानों को नीतीश सरकार द्वारा दिए गए सहायता की भी चर्चा की।
उन्होंने मदरसों में शिक्षकों की बहाली के नए नियम के तर्क भी दिए और उम्मीद जाहिर की कि इस नई प्रक्रिया से सर्वाधिक योग्य शिक्षक ही मदरसों में पढ़ाने के लिए नियुक्त किए जाएंगे।
श्री चौधरी की बातों पर खूब तालियां बजीं लेकिन उनकी एक बात हैरत में डालने वाली थी। उन्होंने दावा किया कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की किशनगंज शाखा को लेकर जो काम हुआ वह अन्य प्रदेशों में नहीं हुआ। श्री चौधरी को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की दो अन्य शाखाएं, एक पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और दूसरी केरल के मलप्पुरम में काम कर रही है।
महानन्दा नदी किनारे प्रस्तावित किशनगंज सेंटर की हालत यह है कि नीतीश सरकार द्वारा आवंटित 228 एकड़ ज़मीन में से 1 इंच पर भी एएमयू सेंटर का काम शुरू नहीं हुआ है क्योंकि 2013 में इस सेंटर के उद्घाटन के बाद इस जमीन को पर्यावरण के बहाने विवाद का मुद्दा बना दिया गया है। फिलहाल यह सेंटर बिहार सरकार की कुछ इमारतों में कैद होकर रह गया है।
श्री चौधरी चाहे तो इस सेंटर को नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा से जल्द ही कानूनी निजात दिला सकते हैं। आखिरकार यह जमीन बिहार सरकार द्वारा दी गई है और इसके लिए उसके पास भी ठोस दस्तावेज होंगे। इसलिए कि उसी महानंदा नदी के किनारे दूसरे शैक्षणिक संस्थान चल रहे हैं। खुद पटना में गंगा के किनारे पूरा पटना विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बसा हुआ है।

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