छ्पी-अनछपी: अमेरिका ने ईरान पर बम बरसाए, बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन ₹1100

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। जंग और अमन पर अजीबोगरीब बयान देने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार की सुबह यह घोषणा की कि उनके देश ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए हैं। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा है कि ईरान भारत का मित्र देश है, इसलिए वह उसका साथ दे। बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि ₹400 प्रति माह से बढ़कर ₹1100 की गई है।

पहली खबर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर अपने हमले पूरे किए हैं। ये हमले फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान पर हुए हैं। बीबीसी के अनुसार उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “हमने फ़ोर्दो, नतांज़ और इस्फ़हान समेत ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर सफलतापूर्वक हमलों को अंजाम दिया है. सभी विमान अब ईरान के वायु क्षेत्र से बाहर हैं।” ट्रंप ने आगे लिखा कि फ़ोर्दो पर ‘सारे बम’ गिराए गए हैं और सभी विमान सुरक्षित रूप से अमेरिका वापस लौट रहे हैं। साथ ही ट्रंप ने लिखा, “’हमारे महान अमेरिकी योद्धाओं को बधाई। दुनिया में कोई और सेना नहीं है जो ये कर सकती थी। अब शांति का समय है।”

सोनिया ने कहा, ईरान मित्र देश- भारत साथ दे

हिन्दुस्तान के अनुसार कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने शनिवार को कहा, ईरान हमारा मित्र देश है, भारत को उसका साथ देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया, केंद्र ने गाजा की स्थिति और इसराइल-ईरान सैन्य संघर्ष पर चुप्पी साधते हुए भारत के सैद्धांतिक रुख व मूल्यों को त्याग दिया है। सोनिया ने कहा, केंद्र को आवाज बुलंद करनी चाहिए और पश्चिम एशिया में संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए उपलब्ध हर राजनयिक मंच का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने एक अखबार में प्रकाशित लेख में कहा, ईरान भारत का लंबे समय से मित्र रहा है और गहरे सभ्यतागत संबंधों से हमारे साथ जुड़ा हुआ है। ईरान का जम्मू-कश्मीर समेत महत्वपूर्ण मौकों पर दृढ़ समर्थन का इतिहास रहा है। वर्ष 1994 में ईरान ने कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत की आलोचना करने वाले एक प्रस्ताव को रोकने में मदद की थी।

शांति के लिए कोशिश जारी रहेगी

इसराइल- ईरान के बीच शांति की कोशिश के लिए शुरू हुई पहले दौर की वार्ता विफल हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची यूरोप के नेताओं से वार्ता के लिए शुक्रवार को जिनेवा पहुंचे थे। चार घंटे तक चली बैठक का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। जिनेवा में जिस समय ये बैठक चल रही थी ठीक उसी समय में अमेरिकी राष्ट्रपति जंग में अमेरिकी सेना के हस्तक्षेप को लेकर मंथन कर रहे थे। बैठक के बाद यूरोपीय अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि इस मुद्दे पर आगे भी बैठक की उम्मीद है। हालांकि अगली वार्ता कब होगी इसकी कोई तारीख तय नहीं की गई है। ईरान के विदेश मंत्री ने भी कहा कि वह आगे भी वार्ता के लिए तैयार हैं।

सामाजिक सुरक्षा की राशि ₹400 से बढ़कर ₹1100

जागरण के अनुसार बिहार सरकार के स्तर पर संचालित सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत वृद्धजन, दिव्यांगजन व विधवा महिलाओं को मिलने वाली पेंशन राशि ₹700 प्रति माह बढ़ा दी गई है। अभी तक इन योजनाओं के तहत ₹400 की पेंशन राशि प्रति माह मिलती थी जिसे बढ़ाकर ₹1100 कर दिया गया है। अगले महीने यानी जुलाई की 10 तारीख को बढ़ी हुई पेंशन राशि लाभुक लोगों के खाते में भेज दी जाएगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को अपने एक्स सैंडल पर इसके बारे में सूचना दी।

94 लाख परिवारों को एक साथ मिलेंगे ₹200000

जागरण के अनुसार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को महिला संवाद की समीक्षा बैठक में कहा कि जाति आधारित गणना के दौरान राज्य सरकार ने लोगों की आर्थिक स्थिति की भी जानकारी ली थी। इस क्रम में सवर्ण, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित, महादलित एवं मुस्लिम समुदाय के 94 लाख परिवार गरीब पाए गए थे। राज सरकार ने यह निर्णय लिया था कि इन लोगों को रोजगार के लिए दो लाख रुपए प्रति परिवार के हिसाब से दिए जाएं। पहले इस काम को 5 साल में पूरा किया जा रहा था। अब इन सभी परिवारों को एक साथ लाभ पहुंचाने की दिशा में काम करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है। यह भी निर्देश दिया गया है की जरूरत पड़ने पर ₹200000 की सहायता राशि को थोड़ा और बढ़ा दिया जाए।

राहुल का आरोप, समाधान नहीं, नारे गढ़ने में मोदी को महारथ

जागरण के अनुसार रोजगार व आर्थिक मोर्चे पर सरकार की नीतियों पर लगातार सवाल उठाते रहे लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने मेक इन इंडिया के विफल होने का दावा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने नारे गढ़ने की कला में महारत हासिल की है मगर कोई समाधान नहीं दिया है। उनके अनुसार मेक इन इंडिया की पहल के बावजूद भारत का उत्पादन लगातार घटते हुए रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है और चीन से आया दुगना हो गया है।

कुछ और सुर्खियां:

  • 100 करोड़ के जीएसटी घोटाले में पटना समेत 7 ठिकानों पर ईडी के छापे
  • नीतीश सरकार गिराने की साजिश के आरोप में राजद नेता इंजीनियर सुनील को ईओयू का नोटिस
  • पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम की सिफारिश नोबेल शांति पुरस्कार के लिए की
  • डीजीसीए ने एयर इंडिया के तीन बड़े अफसरों को हटाने का दिया आदेश

अनछपी: बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाने का जो फैसला किया गया है उसे देर से उठाया गया एक सही कदम माना जा सकता है लेकिन अभी भी इसमें बेहतरी की काफी गुंजाइश है। आज के जमाने में एक महीने में ₹400 से कोई खास मदद नहीं मिलती और ₹1100 प्रतिमाह की मदद को भी काफी नहीं माना जा सकता। यह बात तो आसानी से समझ में आने वाली है कि नीतीश सरकार ने यह फैसला चुनावी लाभ के लिए किया है। पिछले कुछ महीनों से बिहार में कांग्रेस, राजद और वामपंथी दालों के साथ-साथ जन सुराज के प्रशांत किशोर भी सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाने का वादा कर रहे थे। महागठबंधन की ओर से इस राशि को बढ़ाकर ढाई हजार रुपए प्रतिमाह करने की घोषणा की गई थी जबकि प्रशांत किशोर का कहना है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो यह राशि बढाकर ₹2000 प्रतिमा कर दी जाएगी। यानी यह भी माना जा सकता है कि सरकार का पेंशन राशि बढ़ाने का फैसला दरअसल विपक्ष के प्रस्ताव के दबाव में लिया गया है। इसीलिए राजद नेता तेजस्वी प्रसाद यह कह रहे हैं कि सरकार ने उनकी योजना की नकल की है। ध्यान रहे कि इस तरह की मइयां सम्मान योजना झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार के लिए काफी मददगार रही है। इसके तहत झारखंड सरकार एक खास उम्र वर्ग की महिलाओं को हर महीने ढाई हजार रुपए दे रही है। यह राशि पहले ₹1000 प्रतिमाह थी लेकिन विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड चुनाव के वक़्त इसे बढ़ा कर ₹2000 प्रतिमाह करने का वादा किया था। इसके जवाब में हेमंत सोरेन के झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इस राशि को बढ़ाकर ढाई हजार रुपए करने की घोषणा की। चुनावी विश्लेशकों का मानना है कि इस घोषणा से हेमंत सोरेन को महिलाओं का बड़ा समर्थन मिला और वह सरकार बचाने में कामयाब रहे। सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाने के फैसले से माना जा सकता है कि बिहार की राजनीति से जरूरतमंद लोगों को फायदा पहुंचा है वरना आमतौर पर राजनीति ऐसे कामों के लिए नहीं जानी जाती। सामाजिक सुरक्षा पेंशन के पैसे बढ़ाने के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि इसे हासिल करने की प्रक्रिया को भ्रष्टाचार के रोग से बचाया जाए और जरूरतमंद लोगों को ज्यादा दिक्कत ना हो। फिलहाल इस तरह की पेंशन हासिल करने की प्रक्रिया आम आदमी के लिए आसान नहीं होती। सरकार और विपक्ष को इसे बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए।

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