छ्पी-अनछपी: ईरान में दुनिया के सबसे बड़े गैस फ़ील्ड पर हमला, दो अग्निकांडों में 17 मरे

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। इसरायल ने बुधवार को ईरान में दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड पार्स पर बम बरसाए इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों सऊदी अरब और कतर की रिफाइनरी पर हमले किए। इंदौर और दिल्ली में आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई। मुजफ्फरपुर में पुलिस की फायरिंग में एक किसान की मौत हो गई।

पहली ख़बर

हिन्दुस्तान के अनुसार मध्य-पूर्व में जारी जंग के बीच अब ऊर्जा ठिकाने भी निशाने पर आ गए हैं। इसरायल ने बुधवार को ईरान में दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड पार्स पर बम बरसाए, वहीं इससे बौखलाए ईरान ने सऊदी के रियाद में अरामको के तेल संयंत्र के पास हमला कर दिया। ईरान ने यूएई के अल हसन गैस फ़ील्ड व पेट्रोकेमिकल प्लांट, कतर में रिफाइनरी को निशाना बनाने की धमकी दी। ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी की मौत के बाद इजरायल ने बुधवार को ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब के भी खात्मे का दावा किया। लारीजानी की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इजरायल और मध्यपूर्व में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर 100 से ज्यादा हमले किए। जिस गैस फील्ड पर हमला हुआ वह समुद्र में 3000 मीटर नीचे कुल 97 हजार वर्ग किमी में फैली है। जागरण के अनुसार यह इस युद्ध के दौरान ईरान के खाड़ी में स्थित एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुआ पहला हमला है। इसके जवाब में ईरान ने सऊदी अरब के कई तेल क्षेत्रों वाले पूर्वी प्रांत और कतर की रास लफ्फान रिफाइनरी पर हमले किए। सऊदी अरब की राजधानी रियाद में भी बुधवार रात दो तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि सऊदी अरब ने रियाद की तरफ आ रहीं चार बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट भी कर दिया। कतर ने रास लफ्फान रिफाइनरी पर ईरानी हमले को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रत्यक्ष खतरा करार दिया और कहा कि ईरान के अपने पड़ोसी देशों पर हमले उसके गैर-जिम्मेदाराना दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। इन हमलों के बाद वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मच गया है।

इंदौर में किशनगंज के 8 लोग जलकर मरे

प्रभात खबर के अनुसार मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के बंगाली चौराहे के पास स्थित ब्रजेश्वरी एनेक्स कॉलोनी में बुधवार तड़के एक हृदयविदारक हादसा हो गया. कॉलोनी में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के तीन मंजिला मकान के बाहर इलेक्ट्रिक वाहन (इवी) की चार्जिंग के दौरान हुए जोरदार धमाके ने पूरे घर को आग की लपटों में ले लिया. इस भीषण अग्निकांड में आठ लोगों – मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन, बिहार के किशनगंज के धर्मशाला रोड निवासी विजय सेठिया, उनकी पत्नी सुमन, टीनू, छोटू और दो मासूम बच्चे राशि (12) व तन्मय (6) की मौत हो गयी. वहीं, चार लोगों को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया है.

दिल्ली में शॉर्ट सर्किट से 5 मंजिला इमारत में आग लगी, 9 जिंदा जले

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार सुबह एक पांच मंजिला इमारत में भीषण आग लगने से एक ही परिवार के नौ सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गयी. मृतकों में परिवार की बुजुर्ग महिला लाडो (70), उनके बेटे प्रवेश (33) और कमल (39), कमल की पत्नी आशु (35), लाडो की बेटी हिमांशी (22) और बहू दीपिका (28) शामिल हैं. इस हादसे में तीन मासूम बच्चियों (उम्र 15, 6 और 3 साल) की भी जान चली गयी. हादसा सुबह करीब 6:15 बजे हुआ. इमारत के निचले हिस्सों में कपड़ों और सौंदर्य प्रसाधन का शोरूम था. माना जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट के बाद दुकान में रखे इत्र और अन्य रसायनों के कारण आग तेजी से फैली। 

मुज़फ्फरपुर में पुलिस फायरिंग, किसान की मौत

मुजफ्फरपुर के गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनियां में मंगलवार देर रात रात पॉक्सो एक्ट के आरोपित को गिरफ्तार करने गई पुलिस और ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस टीम को घेरकर उस पर हमला किया। पुलिस ने बचाव में हवाई फायरिंग की। इस दौरान गोली लगने से 55 वर्षीय किसान जगतवीर राय की मौत हो गई। पुलिस टीम को मौके से भागना पड़ा। घटना में थानेदार सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। बुधवार सुबह बड़ी संख्या में आसपास के गांवों से लोग चोरनियां में जुट गए और किसान का शव रखकर हंगामा किया। एसएसपी कांतेश मिश्रा ने गायघाट के थानेदार राजा सिंह को लाइन हाजिर कर घटना की जांच के लिए एसआईटी बनाई है। मजिस्ट्रेट जांच की भी अनुशंसा की गई है। दूसरी ओर, मृत किसान के परिजन और ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने जगतवीर को निकट से गोली मारी। ग्रामीणों के अनुसार रात 12 बजे के बाद थानेदार के नेतृत्व में पुलिस टीम चोरनियां निवासी भिखारी राय को पकड़ने पहुंची थी। भिखारी पर पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज है।

पाकिस्तान की मिसाइल अमेरिका के लिए गंभीर खतरा: तुलसी

अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान के बढ़ते मिसाइल कार्यक्रम को अमेरिका के लिए सीधा खतरा बताया है। साल 2026 के ‘एनुअल थ्रेट असेसमेंट’ (खतरों से संबंधित वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट) प्रस्तुत करने के दौरान गबार्ड ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें जल्द ही ‘इंटरकान्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल’ (आइसीबीएम) का रूप ले सकती हैं, जिससे अमेरिकी भूमि उनकी जद में आ जाएगी। सीनेट की खुफिया समिति के सामने गबार्ड ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अब केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहना चाहता। वह ऐसी मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है जो क्षेत्रीय सीमाओं को पार कर सकती है। गबार्ड ने सीनेट की सुनवाई के दौरान बताया कि ‘आपरेशन एपिक फ्यूरी’ के कारण ईरान की सरकार काफी कमजोर हुई है, लेकिन वह अब भी स्थिर है। उनके अनुसार, ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठन पश्चिम एशिया में अमेरिकी हितों पर हमला करने में सक्षम हैं।

कुछ और सुर्खियां:

  • 49 पैसे गिरकर 92.89 के रिकार्ड निचले स्तर पर पहुंच भारतीय रुपया
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सरकारी आवास पर इफ्तार की दावत दी
  • असम में कांग्रेस को बड़ा झटका, लंबे समय के पार्टी नेता और लोकसभा सदस्य प्रद्युत बोरदोलाई भाजपा में शामिल
  • बिहार में 1 अप्रैल से कुछ सस्ती होगी बिजली
  • पटना सिटी के तख़्त श्री हरिमंदिर जी में 50.83 करोड़ रुपए का बजट पास
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुवैत के युवराज शेख सबाह अल खालिद से बातचीत की
  • राज्यसभा में 59 सांसदों को दी गई विदाई

अनछपी: यह बात हर दिन और साफ होती जा रही है कि ईरान पर अमेरिका और इसरायल के हमले से केवल ईरान का नुकसान नहीं बल्कि पूरी दुनिया इसकी चपेट में आ गई है। अगर इन हमलों को रोकने में दुनिया के बड़े देशों ने अपनी भूमिका नहीं निभाई तो इसके नतीजे और बुरे होंगे। ऐसा लगता है कि ईरान की रणनीति यही है कि दुनिया को इस बात का एहसास हो कि इस युद्ध में उसका तो भारी नुकसान हो ही चुका है लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों को भी इसकी मार झेलनी पड़ेगी। खासकर खादी के अरब देशों को जिन्हें ईरान अमेरिका के हमले के लिए जिम्मेदार मानता है क्योंकि वह अमेरिका को अपना बेस देते हैं। इस बात को इससे भी समझा जा सकता है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा ख़ामेनेई ने शांति के लिए मध्यस्थ देशों के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका और इसरायल मुआवजा देने के लिए तैयार नहीं होंगे तब तक ईरान किसी शांति समझौते पर तैयार नहीं होगा। दूसरी तरफ अमेरिका और इसराइल को इस बात से कोई फर्क पड़ता नहीं दिख रहा है कि उनके हमलों का दुनिया को क्या खामियाजा भुगतना पड़ रहा है और ईरान में किस हद तक तबाही हुई है। उम्मीद है कि दुनिया के कई बड़े देश शांति समझौते की कोशिश कर रहे होंगे लेकिन उन्हें किसी न किसी तरह ईरान को हुए नुकसान की भरपाई की व्यवस्था पर भी बात करनी होगी, तभी इस मसले का हाल सामने आ सकता है। इसमें कोई दो राय नहीं कि अमेरिका और इसरायल की फौजी ताकत के सामने ईरान बहुत कमजोर है लेकिन जिस तरह वह इस युद्ध में टिका है, उस पर आज न कल अमेरिकी लोगों और दुनिया के बाकी देशों की जनता को सोचना पड़ेगा। ऐसे में भारत को भी अपनी इसराइल नीति के बारे में पुनर्विचार करना पड़ सकता है। 

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