छ्पी-अनछपी: बिहार ने फिर मांगा विशेष दर्जा, केंद्र सरकार पर मनमानी सेंसरशिप का मुकदमा

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार ने सोलहवें वित्त आयोग से विशेष राज्य के दर्जे की मांग की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने केंद्र सरकार पर मनमानी सेंसरशिप लगाने का मुकदमा किया है। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद के दो भांजों ने एक दूसरे को गोली मारी, एक की मौत। छत्तीसगढ़ में पुलिस ने मुठभेड़ में 30 नक्सलियों को ढेर करने का दावा किया। दरभंगा में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी पर हमला हुआ है जिसमें चार लोग जख्मी हो गए। अमेरिका ने भारतीय छात्र को हमास के समर्थन के आरोप में गिरफ्तार किया।

और, जानिएगा कि कैसे ऑनलाइन ठगी से होने वाला नुकसान 20 गुना तक बढ़ा।

जागरण की सबसे बड़ी खबर के अनुसार विशेष राज्य के दर्जा के साथ बिहार में 16वें वित्त आयोग से केंद्रीय करों में 50% की हिस्सेदारी मांगी है। इसके साथ ही करों के बंटवारे में बहुआयामी गरीबी सूचकांक को भी एक मानक बनाने का आग्रह किया है। गुरुवार को आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने बताया कि विशेष दर्जा वित्त आयोग के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं। वैसे भी योजना आयोग के दौरान ही ऐसी व्यवस्था का समापन हो चुका है। उल्लेखनीय है कि 15वें वित्त आयोग ने कर हस्तांतरण की सीमा 41% निर्धारित कर रखी है। पनगढ़िया के नेतृत्व में 12 सदस्यीय टीम कर बंटवारे के संदर्भ में बिहार की अपेक्षाओं और सुझाव से अवगत होने के लिए तीन दिवसीय दौरे पर बुधवार रात पटना पहुंची थी। गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और वित्त विभाग का दायित्व संभाल रहे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ इस टीम ने विचार विमर्श किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मौके पर कहा कि उन्हें यकीन है कि वित्त आयोग राज्य सरकार के ज्ञापन में उठाए गए विषयों पर गंभीरता से विचार करेगा।

केंद्र सरकार पर मनमानी सेंटरशिप का मुकदमा

अमेरिकी अरबपति एलन मस्क के स्वामित्व वाले इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ ने भारत सरकार के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके कथित गैर कानूनी कंटेंट विनियमन और मनमानी सेंसरशिप को चुनौती दी। एक्स ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की केंद्र की व्याख्या विशेष रूप से उसके द्वारा धारा 79(3)बी के उपयोग कर लेकर चिंता जताई है। कंपनी ने अधिकारियों पर उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही मनमानी तरीके से सेंसरशिप लगाने के लिए कानून का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया। उसने यह भी आरोप लगाया कि कंटेंट ब्लॉक करने के लिए सरकार एक समानांतर तंत्र बनाने की कोशिश कर रही है।

नित्यानंद राय के दो भांजों मैं एक दूसरे पर गोली चलाई, एक की मौत

भास्कर के अनुसार पानी के लिए दो सगे भाइयों के बीच गोलियां चलीं। एक भाई की जान चली गई। दूसरा गंभीर है। गुरुवार सुबह करीब 7:30 बजे नवगछिया के परबत्ता थाना क्षेत्र से जगतपुर गांव में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय के भांजे के बीच नल से पानी भरकर को लेकर विवाद हुआ। पहले कहासुनी, फिर हाथापाई हुई और अंत में गोलियां चलीं। छोटे भाई विश्वजीत यादव (42) ने पहले बड़े जयजीत यादव (52) पर गोली चलाई। जवाब में जयजीत ने भी गोलियां चलाईं। बीच बचाव करने आई मां मीना देवी को भी गोली लग गई। घटना के बाद परबत्ता थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों को भागलपुर के एक निजी अस्पताल में ले गई जहां कुछ देर बाद ही विश्वजीत ने दम तोड़ दिया। वैसे मामला केवल पानी का नहीं था। असली वजह थी जमीन का बंटवारा।

छत्तीसगढ़ में 30 नक्सली मारे गए

भास्कर के अनुसार छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में गुरुवार को दो अलग-अलग मुठभेड़ में 30 नक्सली मारे गए। इस दौरान जिला रिजर्व्ड गार्ड के जवान राय ओयामी की भी जान चली गई। बस्तर के आईजी सुंदरराज ने बताया कि पहली मुठभेड़ बीजापुर दंतेवाड़ा सीमा पर अंडरी और गमपुर के जंगल में हुई। यहां 26 नक्सली मारे गए। दूसरी मुठभेड़ नारायणपुर और कांकेर की सीमा पर हुई। जिसमें चार नक्सली मारे गए।

दरभंगा में कंस्ट्रक्शन कंपनी पर हमला, चार जख्मी

हिन्दुस्तान के दरभंगा संस्करण के अनुसार दरभंगा के पश्चिमी कोसी तटबंध के टूटानस्थल की मरम्मत करवा रही कंपनी के कैंप पर गुरुवार दोपहर हथियारों से लैस बदमाशों ने हमला कर दिया। हमले में ठेकेदार, दो इंजीनियर और लेखापाल घायल हो गए। सभी को डीएमसीएच रेफर किया गया है। दरभंगा के ग्रामीण एसपी आलोक कुमार ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। ठेकेदार के अनुसार, 20 लाख रुपए बतौर रंगदारी नहीं देने पर बदमाशों ने हमला किया है। गौड़ाबौराम के भुऔल गांव स्थत गया की निर्माण कंपनी के कैंप पर दोपहर बाद पिस्टल व धारदार हथियारों से लैस दो दर्जन बदमाशों ने हमला कर दिया। हमलावर पिस्टल, फरसा व अन्य घातक हथियारों से लैस थे।

ऑनलाइन ठगी से नुकसान 20 गुना बढ़ा

डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ब्लैकमेल सहित साइबर अपराधों में खतरनाक तरीके से हो रही बढ़ोतरी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चितिंत हैं। केंद्रीय गृह मंत्रायल द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले तीन वर्षों में डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन घोटाले और इससे संबंधित साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों से पता चला है कि 2022 से 2024 तक वित्तीय नुकसान बीस गुना से अधिक बढ़ गया। इन तीन वर्षों यानी 2022, 2023 और 2024 में वित्तीय नुकसान क्रमशः 91.14 करोड़ रुपये, 339 करोड़ व 1,935.51 करोड़ हुआ है।

कुछ और सुर्खियां:

  • ग़ज़ा पट्टी पर इसराइली सेना के हवाई हमले सोते हुए बच्चों और महिलाओं समेत 85 की हत्या
  • बिहार के स्वास्थ्य विभाग में 38733 पदों पर स्थाई बहाली होगी
  • मणिपुर के चुरा चांदपुर में हालात तनावपूर्ण, स्कूल और बाजार बंद, कम दिखीं गाड़ियां
  • बीपीएससी ने 22 परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया
  • बीसीसीआई ने किया ऐलान, चैंपियंस ट्रॉफी विजेता भारतीय टीम को ₹58 करोड़ मिलेगा
  • हरिलाल स्वीट्स के पटना के मकान में इनकम टैक्स की छापेमारी में मिली शराब, बेटा गिरफ्तार

अनछपी: बिहार की 14 करोड़ जनता का यह दुर्भाग्य है के उसे नीतीश कुमार के रूप में एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला हुआ है जिसके स्वास्थ्य के बारे में भारी चिंता पाई जाती है। लेकिन पटना के मुख्य अखबारों में इस पर कोई चर्चा नहीं मिलती और नीतीश कुमार से जब ऐसी कोई बड़ी गलती होती है तो उस खबर को भी दबा दिया जाता है। ताजा उदाहरण कल यानी 20 मार्च का है जब एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान बज रहा था और नीतीश कुमार अजीबोगरीब हरकत कर रहे थे। इस बारे में सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि नीतीश कुमार राष्ट्रगान के प्रति वह सम्मान नहीं जता पा रहे हैं जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है। यह भी देखा जा सकता है कि वह एक अधिकारी को बार-बार छू रहे हैं और फिर हाथ जोड़ रहे हैं। क्या कोई स्वस्थ व्यक्ति ऐसा कर सकता है? ऐसा नहीं है कि नीतीश कुमार हर समय इसी तरह का व्यवहार करते हैं लेकिन बीच-बीच में उनकी ऐसी कमजोरी को देखकर कई लोग उनके लिए अफसोस जता रहे हैं। क्या यह बात भी अफसोस कि नहीं है कि ऐसे मुख्यमंत्री के सहारे बिहार को चलाया जा रहा है? ऐसे में यह सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए कि अखबारों ने इस खबर को ब्लैक आउट क्यों किया। एक अखबार ने इसकी थोड़ी जानकारी दी भी तो आरजेडी के हवाले से जिसने मुख्यमंत्री पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया है। ऐसा लगता है कि नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द जो शक्तिशाली लोग हैं वह भी नहीं चाहते कि अखबारों में इस तरह की खबरें आएं जिससे लोगों के दिल में नीतीश कुमार के स्वास्थ्य के बारे में सवाल पैदा हो। अफसोस की बात है कि अखबार अपनी जिम्मेदारी को नहीं निभा रहे। अखबारों पर किस तरह की सेंसरशिप है, इस बात का पता आज की एक दूसरी खबर से भी लगता है जिसमें दरभंगा के एक कंस्ट्रक्शन कंपनी पर हमले की बात आई है और उसकी वजह यह है कि उसने 20 लाख की रंगदारी देने से मना कर दिया। यह खबर पटना के संस्करण में या तो बिल्कुल नहीं छपी है या इस तरह छपी है कि किसी की नजर उस पर ना पड़े। बहरहाल असल बात यह है कि बिहार को एक स्वस्थ मुख्यमंत्री मिलना चाहिए और अगर नीतीश कुमार का स्वास्थ्य वाकई सही नहीं है तो उनका सही से इलाज कराया जाना चाहिए।

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