छपी-अनछपी: ईरान के हमले में बिहार के इंजीनियर की मौत, होर्मुज पर क़ब्ज़े की जंग तेज़

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। होर्मुज में ईरान के हमले के दौरान गोपालगंज के एक युवक की मौत हो गई। होर्मुज जलमार्ग पर वर्चस्व की जंग में अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए तो ईरान ने भी जवाबी हमले किए। अतिक्रमण हटाने के लिए रिश्वत मांगने वाले सीओ को गिरफ्तार किया गया।

और, जानिएगा कि हिंदी में 200 सिपाही फेल हो गए और उनका प्रमोशन रुक गया।

पहली ख़बर

जागरण के अनुसार पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनातनी की दूसरे देश बड़ी कीमत चुकाने लगे हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट में दो व्यापारिक जहाजों पर ईरानी हमले में गोपालगंज निवासी मर्चेंट नेवीं इंजीनियर सोनू कुमार गुप्ता की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य भारतीय घायल हो गए हैं। घायलों में दो की हालत गंभीर है। घटना के बाद भारत ने नई दिल्ली स्थित ईरान के उप-राजदूत (डीसीएम) को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया। ईरान का दावा है कि दोनों जहाज ओमान कारिडोर के अनधिकृत जलमार्ग से होर्मुज पार करने का प्रयास कर रहे थे और चेतावनी देने के बावजूद नहीं लौटे। वहीं, जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान ईरान ने भी हमले किए। कच्चे तेल पर ताबड़तोड़ जवाबी कार्रवाई की। की कीमत नौ प्रतिशत उछलकर 86 डालर प्रति बैरल के पार चली गई।

शादी का सपना अधूरा रह गया

गोपालगंज के थावे गांव के विदेशी टोला की उस गली में मंगलवार को सन्नाटा पसरा था, जहां कुछ दिन पहले तक बेटे की शादी की चर्चा होती थी। मां रिश्ते देख रही थीं, पिता बेटे के भविष्य के सपने बुन रहे थे और घर में खुशियों की आहट महसूस की जा रही थी। लेकिन मंगलवार की भोर में आए एक फोन ने पूरे परिवार की दुनिया ही उजाड़ दी। दुबई की एक शिपिंग कंपनी में इंजीनियर के रूप में कार्यरत थावे के सोनू गुप्ता उर्फ रोहन की होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जहाज पर हुए हमले में घायलं होने के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। यह खबर मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम छा गया। सोनू पिछले कई वर्षों से दुबई स्थित अल-ब हिया (एडनौक) कंपनी में शिप इंजीनियर के रूप में कार्यरत था। जनवरी के अंतिम सप्ताह में वह छह माह की छुट्टी पर घर आया था। आठ जून को वह फिर ड्यूटी पर लौट गया। घर से निकलते समय उसने जल्द लौटने और शादी की बात आगे बढ़ाने का भरोसा दिया था। किसी ने नहीं सोचा था कि यह उसकी आखिरी विदाई होगी।

होर्मुज पर क़ब्ज़े की जंग तेज़

हिन्दुस्तान के अनुसार सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलमार्ग पर वर्चस्व की जंग अब भीषण सैन्य टकराव में बदल गई है। अमेरिका ने मंगलवार तड़के ईरान के मिसाइल ठिकानों और परमाणु संयंत्र वाले बुशेहर शहर पर भीषण हवाई हमले किए। जवाब में ईरान ने बहरीन-जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। इससे पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में फिर व्यापक युद्ध का खतरा गहरा गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, हमलों में ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों तथा समुद्री सैन्य दक्षिणी बंदरगाह शहर बुशेहर को निशाना बनाया गया। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन और जॉर्डन पर मिसाइल हमले किए। वहीं, तेल टैंकरों पर हुए हमले की जिम्मेदारी ईरान की आईआरजीसी ने ली।

टोल लेने पर ट्रंप का यू टर्न

जागरण के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज में जहाजों को सुरक्षा प्रदान करने की एवज में खाड़ी देशों से 20 प्रतिशत शुल्क वसूलने की बात से पीछे हट गए हैं। उन्होंने कहा कि खाड़ी देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करके ये भरपाई करेंगे। संयुक्त राष्ट्र और भारत समेत कई देशों ने इस योजना का विरोध किया था, जबकि ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने ट्रंप के इस फैसले का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि वह अमेरिका को डकैती के लिए तैयार कर रहे हैं।

अतिक्रमण हटाने के लिए रिश्वत मांगने वाला सीओ गिरफ्तार

सीतामढ़ी के बाजपट्टी से हिन्दुस्तान की खबर है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने में बाजपट्टी के सीओ प्रभात कुमार को निगरानी ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। विशेष निगरानी कोर्ट मुजफ्फरपुर से जारी गैरजमानती वारंट के आधार पर यह कार्रवाई की गई। पटना से आई टीम ने प्रखंड दफ्तर परिसर स्थित सरकारी आवास से उन्हें पकड़ा। ऑडियो जांच में रिश्वत मांगने के आरोप की पुष्टि होने पर यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तार सीओ मूल रूप से मुंगेर जिले के जलालपुर थाना क्षेत्र के छोटी दौलतपुर के रहने वाले हैं।

उत्तर बिहार की नदियां उफनाईं

हिन्दुस्तान के अनुसार मानसून की सक्रियता से बिहार के साथ ही नेपाल में हो रही बारिश के कारण राज्य की कई नदियां उफना रही हैं। कोसी, गंडक, कमला सहित कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मंगलवार को इस साल का सबसे अधिक पानी इन नदियों में रिकॉर्ड किया गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार कोसी के बराहक्षेत्र में एक लाख 26 हजार क्यूसेक से अधिक पानी रिकार्ड किया गया जो इस साल का सर्वाधिक है। पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर के चकदहवा, झंडुआ टोला और बिन टोली के निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। योगापट्टी के दियारा क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों का संपर्क टूट गया है।

हिंदी में 200 सिपाही फेल हो गए और उनका प्रमोशन रुक गया

जागरण के अनुसार बिहार पुलिस में करीब 200 सिपाहियों की प्रोन्नति कमजोर हिंदी के कारण अटक गई है। इन सिपाहियों को हवलदार और सहायक अवर निरीक्षक (एएसआइ) में प्रोन्नति दी जानी थी मगर यह हिंदी परीक्षा में फेल हो गए। इनमें से अधिसंख्य हिंदी टिप्पण प्रारूपण परीक्षा भी पास नहीं कर सके। के। हिंदी टिप्पण एवं प्रारूपण अनिवार्य विभागीय परीक्षा है। इसमें पुलिसकर्मियों को सरकारी कामकाज, पत्राचार और फाइलों पर टिप्पणी लिखना होता है। इसमें अशुद्धि पाए जाने पर सिपाहियों का प्रमोशन रोका गया है।

कुछ और सुर्खियां:

  • फ्रांस को 2-0 से हराकर स्पेन 16 साल बाद फुटबॉल विश्व कप के फाइनल में
  • बिहार के 211 नए डिग्री कॉलेज में आज से पढ़ाई की शुरुआत
  • चारा घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद की जमानत रद्द करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
  • बिहार में 16 टेक्सटाइल कंपनियों के साथ 1400 करोड़ रुपए के इन्वेस्टमेंट का समझौता
  • अररिया और किशनगंज में अत्यधिक बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी, कटिहार, मधुबनी, पूर्णिया और सुपौल में भी भारी बारिश का पूर्वानुमान

अनछपी: मध्य प्रदेश के धार की कमाल मौला मस्जिद में नमाज पर लगाई गई रोक को हटाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार एक बेहद निराशाजनक और चिंताजनक मामला लगता है। इस सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट का यह कहना कि मध्य प्रदेश की सरकार मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए अलग से खुली जगह दे, मामले को टालने का एक रवैया हो सकता है, इसे हल करने का नहीं। सुप्रीम कोर्ट के पास मामला यह नहीं गया है कि स्थानीय लोगों को नमाज के लिए अलग जगह मिले बल्कि मामला यह है कि वह एक मस्जिद में, जिसका नाम कमाल मौला मस्जिद है, नमाज पढ़ते आए थे, वहां उन्हें इससे हाई कोर्ट के आदेश की वजह से वंचित कर दिया गया है। हाई कोर्ट का आदेश भी इस वजह से आया कि सरकार की मदद से वहां ऐसी परिस्थितियों पैदा की गईं कि उस मस्जिद को विवादास्पद बना दिया जाए। ऐसे में लोगों को बाबरी मस्जिद की याद जरूर आएगी क्योंकि बाबरी मस्जिद को असंवैधानिक तरीके से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए ध्वस्त किया गया था और बाद में मस्जिद की जगह मंदिर बनाने का फैसला आया और मुसलमानों को सांत्वना के रूप में मस्जिद के लिए जमीन देने का फैसला सुनाया गया जो कि किसी भी लिहाज से इंसाफ की बात नहीं थी। इसके बाद यह समझा जा रहा था कि धर्मस्थलों के बारे में जो कानून बनाया गया है उसके तहत बाकी मस्जिदों को सुरक्षा मिलेगी। उस कानून में यह प्रावधान है कि बाबरी मस्जिद को छोड़कर सभी धर्मस्थलों की स्थिति वही मानी जाएगी जो 15 अगस्त 1947 को थी। लेकिन इस कानून के रहते हुए भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी बातों की इजाजत दी जिससे मस्जिदों पर क़ब्ज़े की कोशिश कामयाब हो रही है, और अब इस कानून का कोई मतलब नहीं रह गया है। अब कोई भी किसी भी मस्जिद को कभी भी मंदिर बता कर उसे विवादास्पद बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह रवैया बेहद निराशाजनक और इंसाफ के खिलाफ है।

 103 total views

Share Now

Leave a Reply