बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र उपचुनाव के लिए नामांकन के साथ दिए गए हलफनामे के मुताबिक प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी लगभग 200 करोड़ रुपए की मालिक हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक पोतों से 20 फीसदी शुल्क वसूलेगा। दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिया गया है।
और, काशी, मथुरा और संभल पर सुप्रीम कोर्ट की पहल नामंज़ूर।
पहली ख़बर
प्रभात खबर के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर और उनकी पत्नी के पास 198 करोड़ की चल-अचल संपत्ति है. प्रशांत किशोर ने पहली बार उपचुनाव में नामांकन के दौरान दिये गये शपथपत्र में इसकी जानकारी दी है. प्रशांत किशोर से अधिक संपत्ति उनकी पत्नी डॉ जाहन्वी दास के पास है. पत्नी डॉक्टर हैं. प्रशांत किशोर के हाथ में 65 हजार, जबकि पत्नी के पास एक लाख 95 हजार
ट्रंप होर्मुज पर करने वालों से लेंगे 20% टैरिफ
हिन्दुस्तान के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार कहा कि अमेरिका होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक पोतों से 20 फीसदी शुल्क वसूलेगा। साथ ही ईरानी पोतों को अब होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं होगी। सोशल मीडिया पर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलमार्ग में ईरान के खिलाफ नाकेबंदी फिर से लागू करेगा। इसका उद्देश्य केवल ईरान के पोतों और उसके ग्राहकों को होर्मुज में प्रवेश या बाहर निकलने से रोकना है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अब से होर्मुज संरक्षक कहा जाएगा। पोतों से लिया जाने वाला 20% टोल इस संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए होगा।
आईबी अधिकारी की हत्या में ताहिर हुसैन समेत पांच को दोषी करार दिया गया
हिन्दुस्तान के अनुसार उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 में हुए दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की बर्बर हत्या के मामले में सोमवार को कड़कड़डूमा कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच को दोषी करार दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई कर रही थी। पांच आरोपियों को दोषी करार देने के साथ ही छह आरोपियों को बरी कर दिया। दोषी ठहराए गए आरोपियों में ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस शामिल हैं। वहीं, हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, समीर खान, फिरोज, गुलफाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी और मुंतजिम उर्फ मूसा को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया। अदालत दोषी ठहराए गए आरोपियों की सदा पर अलग से सुनवाई करेगी।
गौवध प्रतिबंध के आदेश पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राज्य में किसी भी गाय या बछड़े का वध न हो। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के 27 मई के आदेश को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत मामले की सुनवाई के लिए सहमत हो गई और प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राज्य अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राज्य में कहीं भी, न तो बकरीद की पूर्व संध्या (28 मई) पर और ना ही किसी अन्य दिन किसी गाय या बछड़े का वध किया जाए।
पश्चिम बंगाल में बिना मुकदमा एक साल तक कैद का क़ानून
जागरण के अनुसार बंगाल की भाजपा सरकार ने संगठित अपराध, सिंडिकेट, तस्करी और हिंसक प्रदर्शनों पर कड़ा प्रहार करने के मकसद से दो बेहद सख्त कानून ‘गुंडा दमन’ और ‘लोक व्यवस्था अनुरक्षण’ संशोधन प्रदेश में लागू कर दिए हैं। इन्हें देश के सबसे सख्त आंतरिक सुरक्षा कानूनों में एक माना जा रहा है। इन नए कानून के तहत अब प्रशासन को बिना किसी मुकदमे के संदिग्धों को साल भर तक सलाखों के पीछे रखने और दंगा व तोड़फोड़ करने वालों की संपत्ति कुर्क कर नीलामी करने के असीमित अधिकार मिल गए हैं। दावा किया जा रहा है कि इस कानून को तैयार करने में महाराष्ट्र के एमपीडीए एक्ट, उत्तर प्रदेश के गुंडा नियंत्रण अधिनियम और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून से प्रेरणा ली गई है लेकिन इसमें कई नए और अधिक कठोर प्रावधान जोड़े गए हैं।
भाजपा ने उमर अब्दुल्ला को 100 करोड़ की मानहानि का नोटिस भेजा
जागरण की ख़बर है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से भाजपा पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को 20 से 30 करोड़ रुपये का प्रलोभन देकर खरीदने की कोशिश करने के आरोपों से उपजा राजनीतिक विवाद अब अदालत पहुंच गया है। भाजपा ने सोमवार को उमर के आरोपों को झूठा करार दिया और 100 करोड़ रुपये के मानहानि दावे की चेतावनी देते हुए कानूनी नोटिस भेजा है। जवाब में उमर ने नोटिस को अपने लिए “लव लेटर’ बताया। साथ ही एलान किया कि नेशनल कान्फ्रेंस भी भाजपा नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी।
काशी, मथुरा और संभल पर सुप्रीम कोर्ट की पहल नामंज़ूर
जागरण के अनुसार देश के तीन सबसे बड़े धर्मस्थल दिवादों ज्ञानवापी मस्जिद-श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, शाही मस्जिद ईदगाह-मथुरा कृष्ण जन्मस्थान और संभल जामा मस्जिद- हरिहर मंदिर विवाद को आपसी सुलह समझौते के जरिये निपटाने की उम्मीद शुरू में ही समाप्त होती दिख रही है। मंदिर-मस्जिद दोनों पक्षों ने इन विवादों को मध्यस्थता के जरिये विशेष लोक अदालत में निपटाने की सुप्रीम कोर्ट की पहल अस्वीकार कर दी है। दोनों पक्षों का कहना है कि विवाद विधिवत सुनवाई से अदालत के जरिये निपटाए जाने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट मेगा लोक अदालत समाधान समारोह 2026 आयोजित कर रहा है। इसके तहत 21, 22 और 23 अगस्त को शीर्ष अदालत में विशेष लोक अदालत आयोजित होगी। इसमें आपसी सुलह समझौते से केस निपटाए जाएंगे।
कुछ और सुर्खियां:
- इस्लामपुर-फतुहा रेल खंड पर हिलसा स्टेशन के पास मालगाड़ी पटरी से उतरी, 5 घंटे ट्रेनें रुकी रहीं
- पीएमसीएच में वार्ड अटेंडेंट वेतन के लिए हड़ताल पर रहे, मरीज परेशान
- सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच की स्टेटस रिपोर्ट मांगी
- गोलीबारी के मामले में खान एकेडमी के मालिक फैसल खान समेत 4 को जमानत, उनके दो बॉडीगार्ड्स भी रिहा होंगे
अनछपी: भारत में नागरिकता के सबूत पर जो बहस जारी है और जिस तरह असम में बड़े पैमाने पर वैध कागजात रहने के बावजूद लोगों को नागरिकता से वंचित किया गया है और भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा इसकी लगातार कोशिश जारी है उसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। इस फैसले से फौरी तौर पर वैसे कुछ लोगों को राहत मिल सकती है जिन्हें वहां के फॉरेन ट्रिब्यूनल और हाई कोर्ट ने भारतीय नागरिक मानने से इनकार कर दिया था। लेकिन इस फैसले की एक व्यापक बात यह है कि कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष, कानूनी और तर्कसंगत होनी चाहिए। ध्यान रहे कि गौहाटी हाई कोर्ट ने कुछ लोगों को विदेशी घोषित करने वाले फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के आदेशों को बरकरार रखा था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह तो कहा कि राज्य के पास यह सुनिश्चित करने का अधिकार है कि जो लोग भारतीय नागरिकता के कानूनी रूप से हकदार नहीं हैं, वे गलत दावों, प्रक्रिया के दुरुपयोग या देरी का फायदा उठाकर नागरिकता हासिल न कर सकें, लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और कानून के अनुरूप होनी चाहिए। सवाल यह है कि कानून के अनुरूप एक निष्पक्ष प्रक्रिया कब सामने आएगी?
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