छ्पी-अनछपी: चिराग का सवाल- और कितने मर्डर? बिहार के बाद पूरे देश में वोटर वेरीफिकेशन की तैयारी
बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में एनडीए की अपनी राजनीति गरमा रही है और लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने सवाल उठाया है कि अब और कितनी हत्याओं की भेंट चढ़ेंगे बिहारी। बिहार के बाद पूरे देश में मतदाता सूची पुनरीक्षण कराया जाएगा। महागठबंधन ने गांव-गांव जाकर मतदाता सत्यापन की हकीकत बताने का फैसला किया है। अहमदाबाद में हुए प्लेन क्रैश की शुरुआती जांच रिपोर्ट जारी कर दी गई है।
और जानिएगा कि 20 दिनों के शॉर्ट हज का प्रोग्राम क्या है और उसमें रियायत दी गयी है या नहीं।
पहली खबर
भास्कर के अनुसार बिहार में अपराध की बढ़ती घटनाओं को लेकर एनडीए में शामिल लोजपा (रामविलास) ने सरकार पर फिर हमला किया है। पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोशल मीडिया पर कहा कि बिहार अब और कितनी हत्याओं की भेंट चढ़ेगा। बिहार में पुलिस की जिम्मेदारी क्या है समझ से परे है। दूसरी तरफ उन्होंने एक अन्य पोस्ट में एक अखबार में छपे साक्षात्कार को साझा किया है। इसमें उन्होंने अपेक्षा की है कि राज्य की अगली सरकार में उनकी पार्टी का कोई कार्यकर्ता उपमुख्यमंत्री बने। चिराग और उनके दो सांसदों के नीतीश सरकार विरोधी रुख पर जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्य सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी ने सीधा प्रश्न किया, चिराग स्पष्ट करें, उन्हें गठबंधन के साथ रहना है, या अलग चुनाव लड़ना है। नालंदा में दो युवकों की हत्या के बाद चिराग ने कानून व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया था। ऐसी ही टिप्पणी लोकसभा सांसद राजेश वर्मा ने पटना के कारोबारी गोपाल खेमका की हत्या पर की थी। एक और लोजपा सांसद अरुण भारती ने कहा कि गठबंधन धर्म के नाम पर हम धृतराष्ट्र बनकर नहीं रह सकते हैं।
चिराग के विरोध में एक बार फिर जीतन राम मांझी
जागरण के अनुसार बिहार की विधि व्यवस्था के सवाल उठाने वाले लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इशारों ने जवाब दिया है। मांझी ने एक्स पर पोस्ट किया, “अपराध करवाएं राजद वाले और तोहमत लगे सरकार पर। वाह रे गठबंधन धर्म! “हमारे यहां एक कहावत है- गुड़ खाते हैं गुड़म्मा से परहेज! यह कैसा इंसाफ है। जो लोग भी सरकार के ऊपर अपराध को लेकर तोहमत लगा रहे हैं क्या वह गठबंधन धर्म का पालन कर रहे हैं।”
पूरे देश में मतदाता सूची पुनरीक्षण
हिन्दुस्तान की खबर है कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर भले ही कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों की ओर से अभी भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रुख को देखने के बाद चुनाव आयोग अब इस मुहिम को देशभर में छेड़ने की तैयारी में है। वह जल्दी इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर सकता है। फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं उनमें अगले दो सालों में इसे चरणबद्ध तरीके से सभी राज्यों में लेकर वह जाएगा। इसकी शुरुआत अगले महीने से बंगाल तमिलनाडु असम और केरल सहित पांच राज्यों से हो सकती है। इन सभी राज्यों में अगले साल विधानसभा के चुनाव भी हैं।
गांव-गांव जाकर मतदाता सत्यापन की हकीकत बताने का फैसला
बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के मसले पर इंडिया गठबंधन ने और उग्र रूख अख्तियार करने का निर्णय लिया है। गठबंधन के सभी घटक दलों के नेता गांव-गांव और बूथ स्तर पर जाकर लोगों को मतदाता सूची पुनरीक्षण की वास्तविकता से अवगत कराएंगे। साथ ही महागठबंधन कुछ और नए लोकलुभावन वादे घोषणा पत्र में शामिल कर सकता है। शनिवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव की अध्यक्षता में हुई महागठबंधन की समन्वय समिति सह उपसमितियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। नेता प्रतिपक्ष के सरकारी आवास एक पोलो रोड में दिन के 11 बजे से लेकर शाम के पांच बजे तक चली इस बैठक में महागठबंधन के नेताओं ने एक स्वर से कहा कि चुनाव आयोग का वह दावा गलत है, जिसमें 74 फीसदी फॉर्म जमा करने की बात कही जा रही है। महागठबंधन नेताओं का कहना था कि एनडीए सरकार डर गई है।
ईंधन स्विच बंद होने से हुआ था अहमदाबाद में प्लेन क्रैश
अहमदाबाद में एयर इंडिया का विमान ईंधन स्विच बंद होने के कारण हादसे का शिकार हुआ था। दुर्घटना के एक माह बाद शनिवार को विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने प्रारंभिक रिपोर्ट में यह बात कही है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि हादसा तकनीकी खराबी से हुआ या मानवीय भूल से। ऐसे में हादसे पर रहस्य बरकरार है। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग से पता चला है कि हादसे से पहले एक पायलट ने दूसरे से पूछा था कि उसने फ्यूल कटऑफ क्यों किया? इस पर दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि मैंने ऐसा नहीं किया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि कौन सी आवाज किस पायलट की है। एएआईबी ने बोइंग विमानों के ऑपरेटर पर कार्रवाई की सिफारिश नहीं की है।
20 दिनों के शॉर्ट हज का प्रोग्राम
भास्कर की विशेष खबर में बताया गया है कि केंद्रीय हज कमेटी ने अगले साल हज पर जाने वाले लोगों को शॉर्ट हज करने का ऑप्शन दिया है। ऐसा पहली बार हुआ है। शॉर्ट हज में 20 दिन का समय मिलेगा पर हज के खर्चे में कोई रियायत नहीं दी गई है। हज आमतौर पर 40 से 50 दिनों का होता है पर वैसे लोग जो सरकारी नौकरी में है या जिन्हें वक्त की कमी है, उनके लिए यह नया विकल्प दिया गया है। एक साल में 10000 लोग ही 20 दिन के लिए हज पर जा सकते हैं। अगर 10000 से ज्यादा लोग शॉर्ट हज के लिए आवेदन देंगे तो फिर लॉटरी से चयन किया जाएगा। शॉर्ट हज पर जाने वाले लोगों के लिए मदीना में जियारत करने का मौका केवल तीन दिन का ही मिलेगा।
कुछ और सुर्खियां:
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अनछपी: कम से कम तीन प्रमुख अखबारों ने कल बिहार में 100 यूनिट मुफ्त बिजली देने की तैयारी की बात बताई थी लेकिन कल ही वित्त विभाग की ओर से जारी एक प्रेस रिलीज में बताया गया कि ऐसी कोई योजना नहीं है। इस खंडन को बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में साझा किया है जो वित्त विभाग की ओर से प्रेस विज्ञप्ति के नाम पर जारी किया गया है हालांकि इसमें ना तो कोई तारीख है और ना ही किसी का कोई हस्ताक्षर है। अखबारों ने यह भी बताया था कि ऊर्जा विभाग के प्रस्ताव पर वित्त विभाग ने सहमति दे दी है लेकिन इस खंडन में कहा गया है कि ऐसा कोई निर्णय वित्त विभाग द्वारा नहीं लिया गया है। इस प्रेस विज्ञप्ति में खंडन प्रकाशित करने का अनुरोध किया गया है लेकिन ऐसा लगता है कि किसी अखबार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। समाचार आने के बाद खंडन आने का क्या मतलब है? कुछ लोगों का कहना है कि यह जानकारी मीडिया में जारी तो कर दी गई लेकिन शायद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसकी जानकारी नहीं थी। लेकिन क्या यह संभव है कि मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना इतना बड़ा फैसला लिया जाए और क्या यह संभव है कि उनकी सहमति के बिना इसे मीडिया में जारी किया जाए? बिजली मुफ्त करने की जो खबर आई थी उसमें किसी अधिकारी का नाम नहीं था लेकिन अगर तीन-तीन अखबार इसे जारी करते हैं तो इसका मतलब है कि इसका कोई कॉमन सोर्स होगा। याद रखने की बात यह है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुफ्त बिजली देने के सख्त खिलाफ रहे हैं और इस मामले में उनका भाषण कल वायरल हो रहा था। लोग पूछ रहे थे कि आखिर नीतीश कुमार जब इसका विरोध करते थे तो अब मुफ्त बिजली देने की तैयारी क्यों चल रही है? कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि कुछ दिनों के बाद ही सही लेकिन मुफ्त बिजली देने की आधिकारिक घोषणा होगी और तब नीतीश कुमार इसे जनता के हित में लिया गया फैसला बताएंगे। इस खबर और इसके खंडन से यही पता चलता है की या तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बाईपास किया जा रहा है या उनकी सेहत इतनी अच्छी नहीं है कि वह अपनी सहमति को भी याद रख पाएं।
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