छ्पी-अनछपी: वोटर लिस्ट में तेजस्वी के नाम का बखेड़ा, राहुल बोले-चुनाव में धांधली हुई

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसाआईआर) के बाद चुनाव आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में राजद नेता तेजस्वी यादव के नाम को लेकर बखेड़ा हुआ है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर आरोप लगाया कि चुनाव में धांधली हुई है। भारत ने कहा है कि रूस से तेल खरीदारी बंद नहीं होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि रूस अगर परमाणु शक्ति की बात करता है तो हम भी तैयार हैं।

पहली खबर

प्रभात खबर के अनुसार शनिवार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पहले वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने और फिर ईपिक नंबर बदले जाने को लेकर राजनीति गर्म रही। तेजस्वी ने कहा, “मेरा ईपिक नंबर क्यों बदल गया। आयोग बार-बार अपनी ही गाइडलाइन और नियम को तोड़ रहा है।” दोपहर करीब 1:00 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तेजस्वी यादव ने कहा कि उनका नाम मतदाता सूची से कट गया है। “जब मेरा नाम मतदाता सूची में नहीं है तो मैं कैसे चुनाव लड़ूंगा।” तेजस्वी ने ईपिक नंबर आयोग के मोबाइल अप्लीकेशंस पर डाला तो रिकॉर्ड नॉट फाउंड लिखा। कहा कि आयोग की वेबसाइट काम नहीं कर रही है। वहीं, बाद में जब पटना जिला प्रशासन और चुनाव आयोग ने नेता प्रतिपक्ष का नाम मतदाता सूची में होने का ब्योरा जारी किया तो तेजस्वी ने कहा कि मेरा ईपिक नंबर क्यों बदला गया?  वर्तमान में उनका बूथ संख्या 204 क्रम 416 पर अंकित है पूर्व में उनका नाम दिशा 171 क्रम 481 पर दर्ज था। जिला प्रशासन द्वारा बूथ बदले जाने की जानकारी देने के बाद रजत प्रवक्ता चितरंजन गगन ने बयान जारी कर कहा कि आनन फानन में तेजस्वी यादव का ईपिक नंबर RAB 2916120 से बदलकर RABO 456228 कर दिया गया। उनका कहना था कि आयोग के अनुसार मतदाता क्रम व बूथ संख्या में अंतर हो सकता है लेकिन ईपिक नंबर में बदलाव नहीं हो सकता।

चुनाव आयोग ने कहा, जांच करेंगे

चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि राजद नेता तेजस्वी यादव के दूसरे मतदाता पहचान पत्र के पीछे की वास्तविकता जानने के लिए जांच जारी है। शनिवार को तेजस्वी ने दावा किया था कि उनका नाम मसौदा मतदाता सूची में नहीं है। इसके लिए यादव ने जिस मतदाता पहचान पत्र संख्या का इस्तेमाल किया था, उसका रिकॉर्ड नहीं था। आयोग के सूत्रों ने कहा कि राजद नेता ने मतदाता पहचान पत्र संख्या 2014 वाली मतदाता सूची का इस्तेमाल किया। 2020 में हलफनामे पर नामांकन पत्र भरने के लिए मतदाता पहचान पत्र संखाय RAB0456228 का इस्तेमाल किया गया था। यह मतदाता पहचान पत्र संख्या 2015 की मतदाता सूची में भी उनके पास थी। इस पत्र संख्या के साथ उनका नाम मसौदा मतदाता सूची में मौजूद है। दूसरा मतदाता पहचान पत्र संख्या RAB2916120 का रिकॉर्ड नहीं पाया गया है। इस बात की बहुत संभावना है कि दूसरा कार्ड आधिकारिक माध्यम से नहीं बनाया गया था। इसकी जांच की जा रही है कि क्या यह एक जाली दस्तावेज है।

लोकसभा चुनाव-2024 में धांधली हुई: राहुल

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को एक बार फिर लोकसभा चुनाव-2024 में धांधली की बात दोहराई। उन्होंने इसके सबूत होने का दावा करते हुए कहा कि भारत में चुनाव प्रणाली की पहले ही मौत हो चुकी है। नेता प्रतिपक्ष के बयान पर पलटवार करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे धांधली के सबूत मांगे। ‘संवैधानिक चुनौतियां- परिप्रेक्ष्य और रास्ते’ विषय पर कांग्रेस के विधि विभाग के सम्मेलन को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्हें संदेह है कि 2024 के आम चुनावों में 80 से 100 लोकसभा सीटों पर धांधली हुई। राहुल ने कहा कि मुझे गुजरात चुनाव में भी शक था। कांग्रेस को राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात में लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिलना मेरे लिए आश्चर्य की बात थी। लोकसभा चुनाव में हम जीत गए और फिर चार महीने बाद महाराष्ट्र में हम न सिर्फ चुनाव हारे बल्कि पूरी तरह से खत्म हो गए। मजबूत पार्टियां अचानक गायब हो गईं। उन्होंने कहा कि एक लोकसभा क्षेत्र में साढ़े छह लाख मतदाताओं में से करीब डेढ़ लाख फर्जी वोटर थे। राहुल 5 अगस्त को बेंगलुरु में कर्नाटक के इस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में विसंगतियों का विवरण सार्वजनिक करेंगे।

रूस से तेल खरीदारी बंद नहीं होगी:

जागरण के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जुर्माने की धमकियों के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। भारत सरकार के सूत्रों ने बताया कि यह दीर्घकालिक तेल अनुबंध है। रातों रात खरीदारी बंद करना इतना आसान नहीं है। ट्रंप ने पिछले महीने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में संकेत दिया था कि रूसी हथियार और तेल खरीदने के लिए भारत को अतिरिक्त पेनल्टी का सामना करना पड़ेगा। लेकिन अमेरिका के साथ जारी टैरिफ वॉर के बीच रूस से तेल खरीद जारी रखने को भारत सरकार का करारा जवाब माना जा रहा है। भारत रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।

ट्रूस अगर परमाणु शक्ति की बात करता है तो हम तैयार हैं: ट्रंप

प्रभात खबर के अनुसार अमेरिका और रूस के बीच पहले से चल रहा तनाव अब और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यूक्रेन रूस का युद्ध रोकते-रोकते ट्रंप अब खुद रूस के प्रति सख्त हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक सनसनीखेज बयान देते हुए कहा कि रूस अगर परमाणु शक्ति की बात करता है तो अमेरिका भी पूरी तरह से तैयार है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब शुक्रवार को अमेरिका ने दो परमाणु पनडुब्बियों को रूस के पास तैनात कर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह कदम उन्होंने अपने देश की सुरक्षा के लिए उठाया है क्योंकि परमाणु शक्ति से जुड़े मामलों में हमेशा सतर्क रहना जरूरी होता है।

कुछ और सुर्खियां:

  • जनता दल (सेक्युलर) के निलंबित नेता और पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को दुष्कर्म के मामले में उम्र कैद की सजा
  • एम्स, पटना में दूसरे दिन भी डॉक्टरों की हड़ताल रही
  • चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) का मानदेय सालाना ₹6000 से बढ़कर ₹12000 किया
  • पटना सहित बिहार के 18 जिलों में 48 घंटे के दौरान भारी बारिश

अनछपी: बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद छपने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में जिन 7.28 करोड़ लोगों का नाम दिया गया है उनके बारे में पक्के तौर पर यह नहीं कहा जा सकता कि उनमें से कितने लोगों का नाम फाइनल वोटर लिस्ट में होगा। या इसे इस तरह समझिए कि उनमें से कितने लोगों का नाम फाइनल वोटर लिस्ट में नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि चुनाव आयोग ने एक ट्रैकर जारी किया है जिसमें ईपिक नंबर डालने पर यह संदेश मिलता है कि आपका फॉर्म जमा हो गया है और कुछ लोगों को यह संदेश मिल रहा है कि आप अपना दस्तावेज जमा करने के लिए बीएलओ से संपर्क करें। कायदे से तो बीएलओ के लिए यह निर्देश होना चाहिए कि वह मतदाता से संपर्क करे। अब हर वोटर तो अपना नाम ट्रैकर पर देखेगा नहीं। ऐसे में तो बहुत से लोगों का नाम दस्तावेज न होने के बहाने फाइनल वोटर लिस्ट से कट सकता है और इसके बारे में अपील करने का मौका भी नहीं मिलेगा। क्या यह चुनाव आयोग के लिए बेहतर नहीं होता कि वह जिस वोटर से भी दस्तावेज चाहता है उसके पास संदेश भेजे? इसके अलावा राज्य स्तर पर भी चुनाव आयोग को यह बताना चाहिए कि कितने लोगों को अब भी दस्तावेज देने की जरूरत है। ऐसे में राजनीतिक दलों की भी यह जिम्मेदारी है कि वह चुनाव आयोग से इस तरह के आंकड़ों की मांग करें। चुनाव आयोग का नारा रहता है कि ‘एक भी मतदाता छूटे नहीं’ तो चुनाव आयोग अगर मतदाताओं को इसके बारे में सचेत करता है कि उनके दस्तावेज मिला है या नहीं मिला है तो वह अपने नारे को ही सफल करेगा। इसके लिए जरूरी है कि वह हर मतदाता से संपर्क करने की व्यवस्था करे और यह सुनिश्चित करे कि अगर किसी के पास दस्तावेज है तो वह उसे जमा करे और इसलिए किसी का नाम न कट पाए कि उसे दस्तावेज जमा करने की खबर ही नहीं मिली। इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए यह बेहद जरूरी है और अगर चुनाव आयोग ऐसा नहीं करता तो उसकी नीयत पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है।

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