छ्पी-अनछपी: ढाई करोड़ कैश वाले डीईओ, एक्साइज थाने में हुई शराब पार्टी-थानाध्यक्ष गिरफ्तार

बिहार लोक संवाद डॉट नेट, पटना। पश्चिम चंपारण के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) के ठिकानों से ढाई करोड़ रुपए कैश जब्त किए गए हैं। सारण जिले के एक एक्साइज थाने में शराब पार्टी आयोजित की गई जिसके बाद थानाध्यक्ष को गिरफ्तार किया गया। अमेरिका में रह रहे 7 लाख भारतीय आप्रवासी सुरक्षित राज्यों में पलायन कर रहे हैं। बीपीएससी ने 70वीं संयुक्त परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। मूडीज ने कहा है कि भारतीय रुपया दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे कमजोर करंसी है।

आज के अखबारों की यह अहम खबरें हैं।

हिन्दुस्तान की सबसे बड़ी खबर के अनुसार विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने पश्चिम चंपारण के डीईओ (जिला शिक्षा पदाधिकारी) रजनीकांत प्रवीण के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में गुरुवार को ताबड़तोड़ कार्रवाई की। उनके बेतिया, समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी स्थित ठिकानों पर छापेमारी के दौरान 2.50 करोड़ से अधिक नकद, लाखों के जेवरात तथा बड़ी संख्या में जमीन-जायदाद के साथ ही विभिन्न वित्तीय संस्थानों में निवेश से संबंधित कागजात बरामद हुए हैं। तलाशी में डीईओ अकूत संपत्ति के मालिक निकले हैं। रजनीकांत बिहार शिक्षा सेवा के पदाधिकारी हैं। उन्होंने 2005 में सेवा में योगदान किया था। 20 वर्ष की सेवा में इन्होंने वास्तविक आय से 74.30% अधिक की अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित कर ली है। एसवीयू ने इन पर 1 करोड़ 87 लाख 23 हजार रुपये का डीए केस दर्ज किया है।

थाने में शराब पार्टी, थानाध्यक्ष गिरफ्तार

जागरण के अनुसार शराबबंदी का अनुपालन करने के लिए बनाए गए सारण के मशरक उत्पाद (एक्साइज) थाने में ही शराब पार्टी चल रही थी। जिनके कंधों पर शराब बंदी को कड़ाई से लागू करने की जवाबदेही थे वह उत्पाद पदाधिकारी बुधवार की देर रात शराब के नशे में झूम रहे थे। दुस्साहस इतना कि थाने को ही बार बना डाला, शराब के साथ नर्तकियों का भी इंतजाम था। डीजे की तेज आवाज पर ठुमके लग रहे थे और जाम छलकाए जा रहे थे। शिकायत मिलने के बाद एसडीपीओ ने उत्पाद थाने में छापेमारी की और शराब पीकर झूम रहे उत्पाद इंस्पेक्टर सुनील कुमार, दारोगा कुंदन कुमार और सिपाही संतोष कुमार को गिरफ्तार कर लिया। मशरक थानाध्यक्ष अजय कुमार के बयान पर उत्पाद इंस्पेक्टर समेत छह उत्पाद कर्मियों के विरुद्ध प्राथमिक की दर्ज की गई है। इन सभी को निलंबित कर दिया गया है।

7 लाख भारतीय अमेरिका में परेशान

भास्कर के अनुसार अमेरिका में ट्रंप राज से लगभग 7 लाख अवैध भारतीय आप्रवासी दहशत में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अवैध आप्रवासियों की धर पकड़ और डीपोर्ट करने का ऐलान कर चुके हैं। 5 नवंबर को ट्रंप की जीत के बाद से अवैध आप्रवासी भारतीयों ने सुरक्षित राज्यों में पलायन शुरू कर दिया था। इमीग्रेशन एक्टिविस्ट और एनजीओ के अनुसार ट्रंप के शपथ ग्रहण तक लगभग 6 लाख अवैध भारतीय आप्रवासी इलिनॉइ, बोस्टन, कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क जैसे दो दर्जन राज्यों में जा बसे हैं। अवैध आप्रवासी इन राज्यों को सेफ कहते हैं क्योंकि यह बाइडन-कमला की डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा शासित हैं।

बीपीएससी पीटी का रिजल्ट जारी

प्रभात खबर के अनुसार बीपीएससी ने गुरुवार को एकीकृत 70वीं संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा (पीटी) का रिजल्ट जारी कर दिया। एक दर्जन से अधिक राजपत्रित पदों सहित 2035 रिक्तियों पर नियुक्ति के लिए 21581 उम्मीदवार पास हुए हैं। इनमें सामान्य श्रेणी के 9017, अनुसूचित जाति श्रेणी के 3295, अनुसूचित जनजाति श्रेणी के 211, पिछड़ा वर्ग श्रेणी के 2793 और अत्यंत पिछड़ा वर्ग श्रेणी के 3515 सफल हुए हैं। साथ ही पिछड़ा वर्ग महिला श्रेणी के 601, दिव्यांग श्रेणी के 561, आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के 2149 और स्वतंत्रता सेनानी कोटा के 280 उम्मीदवार सफल हुए हैं।

भारतीय रुपया दक्षिण पूर्व एशिया में सबसे कमजोर

जागरण के अनुसार मूडीज रेटिंग्स ने गुरुवार को कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय मुद्रा लगभग 5% और पिछले 5 वर्षों में 20% गिरकर दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गई है। हाल ही में रुपया 86.70 रुपए प्रति डॉलर के निचले स्तर तक आ गया था।

पारा मेडिकल छात्रों का बुरा हाल, क्लास हो रही न परीक्षा

हिन्दुस्तान के अनुसार पीएमसीएच के पारा मेडिकल के विद्यार्थियों (सत्र 2023-25) का सत्र समाप्त होने में कुछ माह बचे हैं, पर अब तक न तो उनका निबंधन हुआ है और न ही पहले वर्ष की परीक्षा हुई है। वह हर रोज मेडिकल कॉलेज आते हैं। छात्रों की शिकायत है कि कभी क्लास नहीं होती है। छात्र रोज कभी लैब में तो कभी पोस्टमार्टम हाउस में जाकर कुछ काम करते हैं। दो साल से वजीफा (स्टाइपेंड) भी नहीं मिला है। सरकार ने पारा मेडिकल विद्यार्थियों के लिए 1500 रुपये मासिक वजीफा तय कर रखा है।

कुछ और सुर्खियां

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 फरवरी को भागलपुर आने की संभावना
  • पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग 20 वर्ष बाद अपनी पत्नी आरती अहलावत से हो सकते हैं जुदा
  • 100 करोड़ के रेलवे क्लेम घोटाला मामले में तीन वकील गिरफ्तार, जेल भेजे गए
  • पटना में आठवीं क्लास तक की स्कूल की बंदी फिर बढ़ाई गई, अब 27 को खुलेंगे
  • मोकामा गोलीबारी मामले में पूर्व विधायक अनंत सिंह बनाये गये मुख्य अभियुक्त
  • अमेरिका के लॉस एंजेलिस के उत्तर के जंगल में आग लगी, 10131 एकड़ में फैली
  • मारुति सुजुकी की गाड़ियां 1 फरवरी से 32500 तक होगी महंगी

अनछपी: कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका जाकर लोगों से नारा लगवाया था, अबकी बार ट्रंप सरकार। तब ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति नहीं चुने जा सके थे लेकिन 2025 में ट्रंप का दूसरा कार्यकाल शुरू हो चुका है और इससे बड़ी संख्या में भारतीय लोग भी परेशान हो रहे हैं। खबरों के अनुसार लगभग सात लाख भारतीय आप्रवासी आजकल वहां से निकाले जाने के डर से इधर से उधर मारे फिर रहे हैं। दूसरे देशों के आप्रवासियों की तरह भारतीय आप्रवासी के बच्चों को स्कूल भेजना खतरनाक हो गया है क्योंकि लोगों को डर है कि ट्रंप प्रशासन उन्हें गिरफ्तार न करवा ले। ट्रंप प्रशासन ने घोषणा कर रखी है कि सभी अवैध आप्रवासियों को वापस भेजा जाएगा और नागरिकता संबंधी कानून में भी यह बदलाव लाया है कि अवैध आप्रवासियों के बच्चों को इस आधार पर अमेरिका की नागरिकता अब नहीं मिलेगी कि वह वहां पैदा हुए हैं। इसके लिए कट ऑफ डेट 20 फरवरी रखी गई है और अमेरिका में इससे पहले बच्चे को जन्म देने की होड़ मच गई है। अस्पताल वालों का कहना है कि उन्हें लगातार ऐसी महिलाओं का फोन आ रहा है जो समय से पहले डिलीवरी कराना चाह रही हैं। यानी जिनकी डिलीवरी की तारीख 20 फरवरी के बाद है लेकिन कट ऑफ डेट को पूरा करने की लिए वह पहले डिलीवरी कराना चाहती हैं। इनमें बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जो 9 महीने की जगह 7 महीने में ही डिलीवरी कराना चाह रही हैं। असल में स्थाई निवास की चाहत रखने वाले लोगों को बच्चे पैदा होने से आसानी होती है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह चाहते हैं कि भारत विश्व गुरु बने दूसरी ओर भारतीय नागरिकों का अमेरिका में यह हाल है। यह सही है कि केवल भारतीय नागरिक नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों से आए हुए आप्रवासी अमेरिका में यही तरकीब अपना रहे हैं लेकिन विश्व गुरु बनने की चाहत रखने वाले भारत के लिए यह ज्यादा असहज स्थिति है। राहत की बात यह है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि बिना दस्तावेज अमेरिका में रह रहे भारतीयों की वापसी के लिए देश तैयार है। लेकिन सवाल यह है कि अमेरिका की नागरिकता की चाहत रखने वाले भारतीय क्या इतनी आसानी से वापस आना चाहेंगे?

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